डाइईन क्या हैं?
डाइईन (ऐल्कैडाइईन) ऐसे हाइड्रोकार्बन हैं जिनमें दो C=C द्विबंध होते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n−2 है। जैसे C4H6 ब्यूटाडाइईन है और C5H8 पेंटाडाइईन या आइसोप्रीन। नाम के अंत में -डाइईन लगता है और स्थान की संख्या लिखते हैं: ब्यूटा-1,3-डाइईन।
तीन प्रकार: संचित, संयुग्मित, विलगित
- संचित (cumulated): C=C=C। दोनों द्विबंध एक कार्बन साझा करते हैं (प्रोपाडाइईन)।
- संयुग्मित (conjugated): C=C–C=C। द्विबंधों के बीच एक एकल बंध है (ब्यूटा-1,3-डाइईन)। यह सबसे ज़रूरी प्रकार है।
- विलगित (isolated): C=C–C–C=C। उनके बीच दो या ज़्यादा एकल बंध हैं (पेंटा-1,4-डाइईन)। यह दो अलग ऐल्कीन की तरह व्यवहार करता है।
संयुग्मित डाइईन ख़ास क्यों हैं
संयुग्मित डाइईन में चारों कार्बन एक तल में होते हैं और हर एक पर p कक्षक होता है। पाई इलेक्ट्रॉन दो जगह अटके नहीं रहते; वे C1 से C4 तक पूरे हिस्से में फैल जाते हैं (विस्थानीकरण)। इससे अणु विलगित द्विबंध वाले डाइईन से ज़्यादा स्थिर होता है। बीच का C–C बंध साधारण एकल बंध से छोटा होता है क्योंकि उसमें थोड़ा द्विबंध का गुण आ जाता है।
ब्यूटाडाइईन का औद्योगिक निर्माण: ब्यूटेन या ब्यूटीन को उत्प्रेरक के साथ गरम करके हाइड्रोजन निकालते हैं। एक पुराना तरीक़ा (लेबेदेव) है: एथेनॉल की भाप को लगभग 400 °C पर ZnO/Al2O3 उत्प्रेरक पर गुज़ारना।
1,2- और 1,4-योग
HBr के साथ पहले H+ किसी सिरे के कार्बन (C1) पर जुड़ता है। फिर धनावेश C2 और C4 के बीच बँट जाता है (ऐलिलिक धनायन), इसलिए Br− किसी भी जगह जुड़ सकता है:
- 1,2-योग: CH2=CH–CH=CH2 + HBr → CH3–CHBr–CH=CH2 (3-ब्रोमोब्यूट-1-ईन)। बचा द्विबंध C3=C4 पर रहता है।
- 1,4-योग: → CH3–CH=CH–CH2Br (1-ब्रोमोब्यूट-2-ईन)। द्विबंध बीच में (C2=C3) खिसक जाता है।
कम ताप पर 1,2-उत्पाद तेज़ी से बनता है और ज़्यादा मिलता है। ज़्यादा ताप पर ज़्यादा स्थिर 1,4-उत्पाद ज़्यादा मिलता है। अभिकर्मक ज़्यादा हो तो दोनों द्विबंध अभिक्रिया करते हैं (जैसे एक डाइईन के साथ 2 मोल Br2)।
रबर
डाइईन बहुलकन कर सकते हैं: हज़ारों इकाइयाँ सिरे से सिरा जुड़ती हैं। आइसोप्रीन (2-मेथिलब्यूटा-1,3-डाइईन) से प्राकृतिक रबर बनता है और ब्यूटाडाइईन से पॉलीब्यूटाडाइईन (कृत्रिम रबर)। हर इकाई 1,4-जोड़ से जुड़ती है और श्रृंखला में एक द्विबंध बना रहता है, जिससे श्रृंखला मुड़ और खिंच सकती है। कच्चा रबर नरम और चिपचिपा होता है, इसलिए इसे थोड़े गंधक के साथ गरम करते हैं (वल्कनीकरण)। गंधक के पुल श्रृंखलाओं को जोड़ते हैं, जिससे रबर मज़बूत और लचीला बनता है और खिंचने के बाद अपने आकार में लौट आता है।
खुद करके देखो
3D में 1,2 और 1,4 बटन दबाओ और हर उत्पाद में Br और द्विबंध की जगह बताओ। फिर रबर की श्रृंखला लंबी करो और इकाइयाँ गिनो। घर पर रबर बैंड खींचो: लंबी श्रृंखलाएँ सीधी होती हैं। छोड़ो तो फिर मुड़ जाती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऐल्कैडाइईन: CnH2n−2
- संयुग्मित: C=C–C=C; विलगित: द्विबंधों के बीच कम से कम एक CH2; संचित: C=C=C
- 1,2-योग: C1 पर H, C2 पर Br; 1,4-योग: C1 पर H, C4 पर Br, द्विबंध C2=C3 पर
- आइसोप्रीन: CH2=C(CH3)–CH=CH2 → प्राकृतिक रबर (1,4-पॉलीआइसोप्रीन)
हल किए गए उदाहरण
1. 6 कार्बन वाले डाइईन का आणविक सूत्र लिखो।
CnH2n−2 में n = 6 रखने पर C6H10।
2. वर्गीकरण करो: (a) CH2=C=CH2 (b) CH2=CH–CH=CH2 (c) CH2=CH–CH2–CH=CH2।
(a) संचित, (b) संयुग्मित, (c) विलगित। द्विबंधों के बीच देखो: (a) में कोई कार्बन नहीं, (b) में एक साधारण एकल बंध, (c) में बीच में एक CH2 है।
3. ब्यूटा-1,3-डाइईन के HBr के साथ 1,2- और 1,4-उत्पाद लिखो।
1,2: CH3–CHBr–CH=CH2 (3-ब्रोमोब्यूट-1-ईन)। 1,4: CH3–CH=CH–CH2Br (1-ब्रोमोब्यूट-2-ईन)।
4. 0.5 मोल ब्यूटा-1,3-डाइईन को पूरा संतृप्त करने में कितने मोल Br2 लगेंगे?
हर C=C एक Br2 लेता है, इसलिए एक डाइईन 2 Br2 लेता है। 0.5 मोल के लिए 1.0 मोल Br2।
5. 5.4 ग्राम C4H6 (M = 54 g/mol) के साथ 1:1 योग में कितना HBr (M = 81 g/mol) जुड़ेगा?
C4H6 के मोल = 5.4/54 = 0.1। HBr = 0.1 × 81 = 8.1 ग्राम।
आम गलतियाँ
- हर डाइईन को संयुग्मित मान लेना। पहले द्विबंधों के बीच एकल बंध गिनो।
- 1,4-उत्पाद में द्विबंध C3=C4 पर ही छोड़ देना। 1,4-योग में द्विबंध C2=C3 पर खिसक जाता है।
- सूत्र CnH2n−2 भूलकर CnH2n लिखना (वह ऐल्कीन का है)।
- यह सोचना कि वल्कनीकरण रबर को तोड़ता है। यह गंधक के पुल जोड़कर उसे मज़बूत बनाता है।