📘 CodingMarble Learn

पुष्पी पादपों की आकारिकी

आकारिकी का मतलब है पौधे का बाहरी रूप। फूल वाले पौधे के दो भाग हैं: मिट्टी के नीचे मूल तंत्र (जड़ें) और ऊपर प्ररोह तंत्र (तना, पत्ती, फूल, फल)। हर भाग का एक सामान्य रूप होता है और खास काम के लिए बदला हुआ रूप (रूपांतरण) भी। फूल को पुष्प सूत्र से लिखते हैं; सोलेनेसी (आलू, बैंगन, टमाटर) हमारा उदाहरण कुल है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मिट्टी के नीचे देखो। बाईं ओर मूसला जड़: एक मोटी मुख्य जड़ और उससे निकलती छोटी जड़ें। दाईं ओर झकड़ा जड़: बहुत सारी पतली, एक जैसी जड़ें।
  2. अब तना। जहाँ पत्ती लगती है वह गाँठ (पर्वसंधि) है; दो गाँठों के बीच का भाग पोरी (पर्व) है। देखो पत्तियाँ कैसे लगती हैं: एकांतर, फिर सम्मुख, फिर चक्करदार।
  3. फूल अक्सर गुच्छे में लगते हैं, इसे पुष्पक्रम कहते हैं। फूलों को खिलते गिनो। असीमाक्ष में सबसे पुराना फूल नीचे; ससीमाक्ष में सबसे पुराना ऊपर।
  4. अब एक फूल चक्र-दर-चक्र बनाते हैं: हरे बाह्यदल, बैंगनी दल, पीले पुंकेसर और बीच में स्त्रीकेसर। साथ-साथ पुष्प सूत्र बनता देखो।
  5. निषेचन के बाद अंडाशय फल बनता है और बीजांड बीज। आम की परतें एक-एक करके खोलो, फिर सेम का बीज खोलकर उसके 2 बीजपत्र देखो।
  6. खुद खेलो: कोई भी भाग चुनो (जड़, तना, पुष्पक्रम, फूल, फल, द्विबीजपत्री बीज, एकबीजपत्री बीज) और घुमाकर देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मूसला और झकड़ा जड़ जल्दी कैसे पहचानें?

देखो कि कोई एक जड़ बाकी से मोटी है या नहीं। अगर है, तो मूसला। अगर सब पतली और लगभग बराबर हैं और तने के आधार से निकली हैं, तो झकड़ा।

गाँठ (पर्वसंधि) असल में क्या है?

तने पर वह जगह जहाँ पत्ती (और कली) जुड़ी होती है। दो गाँठों के बीच का खाली भाग पोरी है। जड़ में गाँठ नहीं होती।

ससीमाक्ष में सबसे पुराना फूल ऊपर क्यों?

ससीमाक्ष में मुख्य अक्ष का सिरा ख़ुद पहला फूल बन जाता है, इसलिए आगे नहीं बढ़ पाता। नए फूल नीचे की शाखाओं से आते हैं, इसलिए नए फूल नीचे होते हैं।

K(5) में (5) का मतलब क्या है?

5 = बाह्यदलों की संख्या; कोष्ठक = वे आपस में जुड़े हैं (संयुक्त बाह्यदली)। कोष्ठक न हो तो अलग-अलग।

क्या फल और बीज एक ही हैं?

नहीं। फल पका अंडाशय है (पूरा डिब्बा)। बीज उसके अंदर पके बीजांड हैं। आम फल है; गुठली के अंदर की गिरी उसका बीज है।

नारियल को आम की तरह अष्ठिल फल क्यों कहते हैं?

दोनों एक अंडप से बनते हैं, एक बीज वाले हैं और अंतः फलभित्ति सख़्त है। फ़र्क़ बस मध्य फलभित्ति का है: आम में गूदा, नारियल में रेशे।

आकारिकी क्या है? फूल वाले पौधे के भाग

आकारिकी का मतलब है किसी जीव के बाहरी रूप और भागों का अध्ययन। फूल वाले पौधे (आवृतबीजी) के दो बड़े भाग होते हैं।

कई भाग किसी खास काम के लिए अपना रूप बदल लेते हैं। इसे रूपांतरण कहते हैं।

जड़

मूल तंत्र के प्रकार

जड़ के सिरे के क्षेत्र

नीचे से ऊपर: मूल गोप (नाज़ुक सिरे की टोपी), विभज्योतकी क्षेत्र (कोशिकाएँ तेज़ी से बँटती हैं), दीर्घीकरण क्षेत्र (कोशिकाएँ लंबी होती हैं), परिपक्वन क्षेत्र (यहाँ मूल रोम बनते हैं जो पानी सोखते हैं)।

जड़ के रूपांतरण

तना

तना भ्रूण के प्रांकुर से बनता है। इसमें गाँठें (जहाँ पत्ती लगती है) और पोरियाँ होती हैं। इस पर कलियाँ होती हैं: सिरे पर (शीर्षस्थ) या पत्ती और तने के कोण में (कक्षस्थ)। तना पत्तियों-फूलों को रोशनी की ओर उठाता है और पानी, खनिज, भोजन पहुँचाता है।

तने के रूपांतरण

पत्ती

पत्ती गाँठ पर निकलती है और उसके कक्ष में कली होती है। इसके 3 भाग: पर्णाधार (कभी-कभी छोटे अनुपर्ण; दलहनों में फूला हुआ पर्णवृंत तल्प), पर्णवृंत (डंठल) और पर्णफलक (हरा चपटा भाग जिसमें शिराएँ हैं)।

शिराविन्यास

सरल और संयुक्त पत्ती

सरल पत्ती का फलक एक होता है। संयुक्त पत्ती में फलक मध्यशिरा तक कटकर कई पत्रक बनाता है। पिच्छाकार संयुक्त: पत्रक एक अक्ष (रैकिस) पर, जैसे नीम। हस्ताकार संयुक्त: पत्रक डंठल के सिरे पर एक बिंदु से, जैसे सेमल। कली पूरी पत्ती के कक्ष में होती है, पत्रक के कक्ष में नहीं।

पर्णविन्यास

पत्ती के रूपांतरण

प्रतान (मटर), शूल (कैक्टस), मांसल भोजन भरी पत्तियाँ (प्याज़, लहसुन), पर्णाभवृंत — डंठल चपटा-हरा होकर पत्ती का काम करता है (ऑस्ट्रेलियाई अकेशिया), और कीट पकड़ने वाले घड़े (घटपर्णी, वीनस फ़्लाई ट्रैप)।

पुष्पक्रम

पुष्प अक्ष पर फूलों के लगने के ढंग को पुष्पक्रम कहते हैं।

पुष्प (फूल)

फूल प्रजनन के लिए बना प्ररोह है। डंठल (पुष्पवृंत) का ऊपरी फूला भाग पुष्पासन है। चार चक्र: बाह्यदलपुंज (बाह्यदल), दलपुंज (दल/पंखुड़ी), पुमंग (पुंकेसर, नर भाग), जायांग (अंडप, मादा भाग)। बाह्यदल और दल एक जैसे दिखें तो परिदलपुंज (लिली)।

सममिति और लिंग

त्रिज्यासममित (⊕): केंद्र से किसी भी रेखा पर दो बराबर हिस्से (सरसों, मिर्च)। एकव्याससममित (%): केवल एक रेखा पर (मटर, गुलमोहर)। द्विलिंगी (⚥) फूल में पुंकेसर और अंडप दोनों; एकलिंगी में एक।

अंडाशय की स्थिति

पुष्पदल विन्यास (कली में दलों का ढंग)

कोरस्पर्शी: किनारे केवल छूते हैं (आक)। व्यावर्तित: हर दल अगले को एक दिशा में ढकता है (गुड़हल, कपास)। कोरछादी: बिना तय दिशा के ढकना (अमलतास/कैसिया, गुलमोहर)। ध्वजिक: एक बड़ा ध्वज, 2 पंख, 2 जुड़े नौतल (मटर, सेम)।

पुमंग और जायांग

दल से जुड़े पुंकेसर = दललग्न (बैंगन); परिदल से जुड़े = परिदललग्न (लिली)। एक गुच्छा = एकसंघी (गुड़हल), दो = द्विसंघी (मटर), कई = बहुसंघी (नींबू)। अंडप अलग = वियुक्तांडपी (कमल, गुलाब); जुड़े = युक्तांडपी (सरसों, टमाटर)।

बीजांडन्यास

सीमांत: एक किनारे पर (मटर)। स्तंभीय: कई कोष्ठ वाले अंडाशय में बीच के अक्ष पर (गुड़हल, टमाटर, नींबू)। भित्तीय: भीतरी दीवार पर; झूठी दीवार से दो कोष्ठ (सरसों, आर्जिमोन)। मुक्त स्तंभीय: बीच के अक्ष पर, दीवारें नहीं (डाइऐन्थस, प्रिमरोज़)। आधारी: आधार पर एक बीजांड (सूरजमुखी, गेंदा)।

फल और बीज

फल निषेचन के बाद पका हुआ अंडाशय है। बिना निषेचन बना फल अनिषेकफलित (बीजरहित) कहलाता है। फल की दीवार फलभित्ति है; गूदेदार फल में तीन परतें: बाह्य फलभित्ति (छिलका), मध्य फलभित्ति और अंतः फलभित्ति। आम और नारियल अष्ठिल फल (ड्रूप) हैं: एक अंडप वाले ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय से, एक बीज वाले। आम में मध्य फलभित्ति रसीला गूदा है और अंतः फलभित्ति सख़्त गुठली; नारियल में मध्य फलभित्ति रेशेदार।

द्विबीजपत्री बीज (चना, सेम, मटर)

बाहर बीजावरण की दो परतें: बाहरी बीजचोल (टेस्टा) और भीतरी टेगमेन। नाभिका (हाइलम) वह निशान है जहाँ बीज फल से जुड़ा था; उसके ऊपर छोटा छेद बीजांडद्वार। अंदर भ्रूण: भ्रूणीय अक्ष, दो बीजपत्र (भोजन भरे), मूलांकुर (भावी जड़) और प्रांकुर (भावी प्ररोह)। अलग भोजन ऊतक (भ्रूणपोष) वाले बीज भ्रूणपोषी (अरंडी); बाकी अभ्रूणपोषी (सेम, चना, मटर)।

एकबीजपत्री बीज (मक्का)

आमतौर पर भ्रूणपोषी (ऑर्किड अपवाद)। बीजावरण फलभित्ति से जुड़ा होता है। बड़ा भ्रूणपोष भोजन रखता है, उस पर प्रोटीन वाली एल्यूरोन परत। भ्रूण छोटा, एक ढाल जैसा बीजपत्र स्कुटेलम; प्रांकुर पर प्रांकुरचोल और मूलांकुर पर मूलांकुरचोल।

फूल वाले पौधे का वर्णन: पुष्प सूत्र और पुष्प आरेख

वनस्पति वैज्ञानिक फूल को छोटे रूप में पुष्प सूत्र से लिखते हैं। संकेत: Br सहपत्री, K बाह्यदलपुंज, C दलपुंज, P परिदलपुंज, A पुमंग, G जायांग। कोष्ठक में संख्या = भाग आपस में जुड़े। G के ऊपर रेखा = अधोवर्ती अंडाशय; G के नीचे रेखा = ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय। दो चक्रों को जोड़ती वक्र रेखा = वे आपस में जुड़े हैं (जैसे दललग्न पुंकेसर)। पुष्प आरेख फूल का ऊपर से दृश्य है जो भागों की संख्या, क्रम और मातृ अक्ष (ऊपर एक बिंदु) से संबंध दिखाता है।

सोलेनेसी कुल (आलू कुल)

उष्ण, उपोष्ण और शीतोष्ण क्षेत्रों में फैला बड़ा कुल। इसे आलू कुल भी कहते हैं।

पुष्प सूत्र: ⊕ ⚥ K(5) C(5) A5 G(2) — G के नीचे रेखा (ऊर्ध्ववर्ती) और C–A जुड़े (दललग्न)।

आर्थिक महत्व

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक फूल में 5 जुड़े बाह्यदल, 5 जुड़े दल, दलों से चिपके 5 अलग पुंकेसर और ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय में 2 जुड़े अंडप हैं। फूल त्रिज्यासममित और द्विलिंगी है। पुष्प सूत्र लिखो।

चरण 1: सममिति-लिंग → ⊕ ⚥। चरण 2: 5 जुड़े बाह्यदल → K(5)। चरण 3: 5 जुड़े दल → C(5)। चरण 4: 5 अलग पुंकेसर → A5, C से वक्र रेखा से जुड़ा (दललग्न)। चरण 5: 2 जुड़े अंडप, ऊर्ध्ववर्ती → G(2) नीचे रेखा। उत्तर: ⊕ ⚥ K(5) C(5) A5 G(2) — सोलेनेसी का फूल।

2. यह सूत्र पढ़ो: % ⚥ K(5) C1+2+(2) A(9)+1 G1। सममिति, दलों की संख्या और पुंकेसर का समूह बताओ।

% = एकव्याससममित। C1+2+(2) = 1 ध्वज + 2 पंख + 2 जुड़े नौतल = 5 दल (ध्वजिक)। A(9)+1 = 9 जुड़े + 1 अलग = द्विसंघी। G1 = एक अंडप। यह मटर कुल का पैटर्न है।

3. किसी अक्ष पर नीचे से गिनने पर फूल 1 (नीचे) खिला है और फूल 5 (ऊपर) छोटी कली है। कौन सा पुष्पक्रम है और क्यों?

सबसे पुराना फूल नीचे और सबसे नया ऊपर है, यानी अग्राभिसारी क्रम। अक्ष बढ़ता रहता है। यह असीमाक्ष है।

4. आलू को तना और शकरकंद को जड़ क्यों कहते हैं?

आलू में 'आँखें' होती हैं जो कलियों वाली गाँठें हैं; गाँठ और कली केवल तने में होती हैं, इसलिए यह तना कंद है। शकरकंद में गाँठ-कली नहीं होती; यह भोजन भरी अपस्थानिक जड़ है।

5. टमाटर को आड़ा काटने पर दो कोष्ठ दिखते हैं और बीज बीच के मोटे स्तंभ से जुड़े हैं। बीजांडन्यास और फल का प्रकार बताओ।

बीजांड कोष्ठ वाले अंडाशय में बीच के अक्ष पर हैं, इसलिए स्तंभीय बीजांडन्यास। गूदेदार बहुबीजी फल बेरी है। दोनों सोलेनेसी के लक्षण हैं।

6. चने और मक्का के बीज में 4 अंतर लिखो।

(1) बीजपत्र: चना 2, मक्का 1 (स्कुटेलम)। (2) भ्रूणपोष: चना अभ्रूणपोषी, मक्का में बड़ा भ्रूणपोष। (3) बीजावरण: चने में अलग, मक्का में फलभित्ति से जुड़ा। (4) आवरण: मक्का में प्रांकुरचोल और मूलांकुरचोल; चने में नहीं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. अवस्तंभ जड़ें किसमें पाई जाती हैं?
2. असीमाक्ष पुष्पक्रम में फूल किस क्रम में होते हैं?
3. दलों से जुड़े पुंकेसर कहलाते हैं:
4. सोलेनेसी में बीजांडन्यास होता है:
5. मक्का का ढाल जैसा बीजपत्र है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुष्पी पादपों की आकारिकी आसान शब्दों में क्या है?

फूल वाले पौधे के बाहरी रूप का अध्ययन: जड़, तना, पत्ती, फूल, फल और बीज, और ये भाग खास काम के लिए कैसे बदलते हैं।

सोलेनेसी का पुष्प सूत्र क्या है?

⊕ ⚥ K(5) C(5) A5 G(2): त्रिज्यासममित, द्विलिंगी, 5 जुड़े बाह्यदल, 5 जुड़े दल, 5 दललग्न पुंकेसर, ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय में 2 जुड़े अंडप।

सोलेनेसी के कौन से उदाहरण याद रखें?

आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्च (भोजन, मसाला), बेलाडोना और अश्वगंधा (दवा), तंबाकू और पिटूनिया।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11पादप एवं प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी जीव विज्ञान पाठ