विकास और वैश्विक असमानता
विकास यानी लोगों की ज़िंदगी में अच्छा बदलाव: ज़्यादा आय, बेहतर स्वास्थ्य, ज़्यादा शिक्षा और ज़्यादा आज़ादी।
इसे कैसे मापते हैं
- प्रति व्यक्ति GNI: राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या। आसान है, पर देश के अंदर की असमानता छिपा देता है।
- मानव विकास सूचकांक (HDI): स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा), शिक्षा (स्कूली वर्ष) और आय को जोड़ता है। यह 0 से 1 के बीच होता है।
- दूसरे माप: ग़रीबी में रहने वालों की संख्या, गिनी गुणांक (असमानता), लैंगिक असमानता सूचकांक और बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक।
'विकासशील', 'कम आर्थिक रूप से विकसित' और 'ग्लोबल साउथ' जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं; ये सब सरलीकरण हैं।
विकास के सिद्धांत
- आधुनिकीकरण सिद्धांत: पारंपरिक मूल्य ग़रीब देशों को पीछे रखते हैं। पश्चिमी तरह के निवेश, शिक्षा और उद्योग से वे रोस्टो के पाँच चरणों से गुज़रेंगे: पारंपरिक समाज → उड़ान की तैयारी → उड़ान (take-off) → परिपक्वता की ओर → ज़्यादा उपभोग। आलोचना: नृजातिकेंद्रित, औपनिवेशिक इतिहास को नज़रअंदाज़ करता है।
- निर्भरता सिद्धांत (फ़्रैंक): अमीर केंद्र देश उपनिवेशवाद, अनुचित व्यापार और क़र्ज़ से ग़रीब परिधि देशों का शोषण करते हैं, जिससे अल्पविकास होता है।
- विश्व व्यवस्था सिद्धांत (वॉलरस्टीन): एक वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था, जिसमें केंद्र, अर्ध-परिधि और परिधि; देश इनके बीच ऊपर-नीचे हो सकते हैं।
- नवउदारवाद: मुक्त बाज़ार, निजीकरण और कम सरकारी नियंत्रण से विकास। IMF/विश्व बैंक के संरचनात्मक समायोजन से जुड़ा।
- जन-केंद्रित / उत्तर-विकास: बाहर की योजनाओं से ज़्यादा स्थानीय, नीचे से ऊपर परियोजनाएँ और स्थानीय ज्ञान अहम हैं।
वैश्वीकरण, TNC, NGO और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ
वैश्वीकरण यानी व्यापार, पैसा, मीडिया, यात्रा और विचारों से दुनिया का बढ़ता जुड़ाव।
- बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (TNC) कई देशों में काम करती हैं। पक्ष: नौकरी, निवेश, कौशल, कर। विपक्ष: कम मज़दूरी, बुरी कार्य स्थितियाँ, मुनाफ़ा बाहर भेजना, प्रदूषण, सरकारों पर दबदबा।
- ग़ैर-सरकारी संगठन (NGO) सरकार से अलग चलने वाली संस्थाएँ हैं। पक्ष: स्थानीय, लचीले, सबसे ग़रीब तक पहुँचते हैं। विपक्ष: छोटा पैमाना, दानदाताओं पर निर्भर, जवाबदेही कम हो सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ: विश्व बैंक (परियोजनाओं के लिए क़र्ज़), IMF (संकट में शर्तों के साथ क़र्ज़), UN (सतत विकास लक्ष्य), WTO (व्यापार के नियम)।
सहायता, व्यापार, क़र्ज़ और शहरीकरण
सहायता
प्रकार: द्विपक्षीय (एक देश से दूसरे को), बहुपक्षीय (संस्थाओं के ज़रिए), बंधी हुई सहायता (दाता देश का सामान ख़रीदने पर ही ख़र्च), आपात सहायता और क़र्ज़। आधुनिकीकरण और नवउदारवादी विचारक बहस करते हैं कि सहायता मदद करती है या निर्भरता बनाती है; मार्क्सवादी इसे ताक़त का औज़ार मानते हैं।
व्यापार और क़र्ज़
कई ग़रीब देश सस्ते प्राथमिक उत्पाद बेचते हैं और महँगा तैयार सामान ख़रीदते हैं। उचित व्यापार (fair trade) उत्पादकों को ज़्यादा पैसा देने की कोशिश है। क़र्ज़ की किस्तें मिली सहायता से ज़्यादा हो सकती हैं, तो पैसा बाहर बहता है।
शहरीकरण
लोग काम के लिए गाँव से शहर आते हैं। शहर नौकरी और सुविधाएँ देते हैं, पर तेज़ बढ़त से अनौपचारिक बस्तियाँ, भीड़ और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बढ़ती है।
पर्यावरण और संघर्ष
- पर्यावरण: औद्योगिक विकास से प्रदूषण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन हो सकता है, जिसकी सबसे ज़्यादा मार ग़रीबों पर पड़ती है। सतत विकास यानी आज की ज़रूरतें पूरी करना, आने वाली पीढ़ियों को नुक़सान पहुँचाए बिना।
- युद्ध और संघर्ष: युद्ध स्कूल, अस्पताल और व्यापार नष्ट करते हैं, लोगों को शरणार्थी बनाते हैं और सालों का विकास पलट देते हैं। कारण: संसाधनों की होड़, कमज़ोर राज्य और असमानता। दोबारा बनाने के लिए शांति, सुरक्षा और भरोसा चाहिए।
विकास में शिक्षा, स्वास्थ्य और लिंग
- शिक्षा कौशल (मानव पूँजी) बनाती है और लोगों को समाज में हिस्सेदार बनाती है। रुकावटें: ख़र्च, बाल मज़दूरी, दूरी, कमज़ोर गुणवत्ता।
- स्वास्थ्य: स्वस्थ लोग काम कर सकते हैं और पढ़ सकते हैं। समस्याएँ: संक्रामक रोग, ख़राब स्वच्छता, क्लिनिक की कमी। जीवन प्रत्याशा मुख्य माप है।
- लिंग: महिलाएँ बहुत सारा बिना वेतन का काम करती हैं और अक्सर उनके पास कम ज़मीन, कम वेतन और कम ताक़त होती है। लड़कियों की शिक्षा से बाल मृत्यु घटती है, शादी देर से होती है, परिवार छोटे होते हैं और आय बढ़ती है। सूक्ष्म-वित्त और आरक्षण महिलाओं को सशक्त बनाने के तरीक़े हैं।
ये तीनों जुड़े हैं: एक सुधरे तो बाक़ी भी अक्सर सुधरते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. एक देश की जीवन प्रत्याशा 72 वर्ष है। स्वास्थ्य सूचकांक निकालो।
स्वास्थ्य सूचकांक = (72 − 20) ÷ (85 − 20) = 52 ÷ 65 = 0.80।
2. वयस्कों की औसत पढ़ाई 9 साल है; बच्चों से 12 साल की उम्मीद है। शिक्षा सूचकांक निकालो।
औसत भाग = 9 ÷ 15 = 0.600। अपेक्षित भाग = 12 ÷ 18 = 0.667। शिक्षा सूचकांक = (0.600 + 0.667) ÷ 2 = 0.633।
3. स्वास्थ्य सूचकांक 0.80, शिक्षा सूचकांक 0.633 और आय सूचकांक 0.696 (आय $10 000) हो तो HDI निकालो।
गुणा: 0.80 × 0.633 × 0.696 = 0.352। घनमूल: ∛0.352 ≈ 0.706। HDI ≈ 0.71, यानी 'उच्च' मानव विकास।
4. एक देश को $2 अरब सहायता मिलती है, पर वह $3 अरब क़र्ज़ की किस्त चुकाता है और TNC $1 अरब मुनाफ़ा बाहर भेजती हैं। कुल प्रवाह कितना है, और निर्भरता सिद्धांत क्या कहेगा?
कुल प्रवाह = 2 − 3 − 1 = −$2 अरब: पैसा देश से बाहर जा रहा है। निर्भरता सिद्धांत कहेगा कि यह दिखाता है कि केंद्र परिधि से धन खींचकर उसे अल्पविकसित रखता है।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ GNI से विकास आँकना। यह स्वास्थ्य, शिक्षा और असमानता को नज़रअंदाज़ करता है।
- सोचना कि हर सहायता तोहफ़ा है। बहुत-सी सहायता क़र्ज़ या बंधी हुई होती है, जिसे दाता का सामान ख़रीदने पर ख़र्च करना पड़ता है।
- कहना कि TNC सिर्फ़ अच्छी या सिर्फ़ बुरी हैं। समाजशास्त्री नौकरी और निवेश को कम मज़दूरी, प्रदूषण और ताक़त के साथ तौलते हैं।
- HDI के लिए साधारण औसत लेना। इसमें गुणोत्तर माध्य (गुणनफल का घनमूल) लगता है।