प्रतिनिधित्व के सिद्धांत: हॉल
- प्रतिनिधित्व गढ़ा जाता है: मीडिया असलियत का आईना नहीं; वह संकेतों (चित्र, शब्द, आवाज़) से उसे चुनता, फ़्रेम करता और काटता-छाँटता है।
- अर्थ तय नहीं: यह साझा कोड पर निर्भर है, और दर्शक अलग अर्थ निकाल सकते हैं।
- रूढ़ छवियाँ किसी समूह को कुछ सरल गुणों तक सीमित करके उन्हें स्वाभाविक दिखाती हैं। हॉल कहते हैं कि यह सत्ता से जुड़ा है: अक्सर कम ताक़त वाले समूहों को 'दूसरा' बताया जाता है।
इस्तेमाल: उत्पाद का कोई संकेत दिखाओ, उसका अर्थ बताओ, और पूछो कि यह किसके नज़रिए की सेवा करता है।
पहचान और लिंग: गॉन्टलेट, वैन ज़ूनेन, हुक्स और बटलर
- डेविड गॉन्टलेट: मीडिया कई आदर्श देता है; लोग विचार 'चुनकर जोड़ते' हैं और अपनी पहचान बनाते हैं। आज का मीडिया पहले से ज़्यादा विविध पहचानें दिखाता है।
- लिस्बेट वैन ज़ूनेन: लिंग एक सामाजिक रचना है जिसका अर्थ संस्कृति और समय के साथ बदलता है; मीडिया अक्सर महिला शरीर को पुरुष दर्शक के लिए तमाशे की तरह दिखाता है।
- बेल हुक्स: नारीवाद को देखना होगा कि नस्ल, वर्ग और लिंग कैसे गुँथे हैं (अंतर्विभागीयता); कुछ मीडिया श्वेत-प्रधान, पूँजीवादी, पितृसत्तात्मक व्यवस्था को मज़बूत करता है, पर उसका विरोध भी कर सकता है।
- जूडिथ बटलर: लिंग प्रदर्शनात्मक है: यह बार-बार के कार्यों (पहनावा, बोली, हाव-भाव) से बनता है, कोई तय भीतरी सच नहीं। मीडिया इन प्रदर्शनों को दोहरा या तोड़ सकता है।
जातीयता और उत्तर-औपनिवेशिक सिद्धांत: गिलरॉय
- औपनिवेशिक साम्राज्यों ने 'सभ्यतागत पदानुक्रम' बनाए जो लोगों को श्रेष्ठ या हीन आँकते थे; ये विचार आज भी जातीय समूहों के चित्रण को आकार देते हैं (कौन नायक, कौन ख़तरा, किसकी कहानी)।
- गिलरॉय का ब्लैक अटलांटिक विचार: अश्वेत पहचानें मिली-जुली हैं और देशों के पार यात्रा करती हैं; संस्कृति किसी एक राष्ट्र से बँधी नहीं।
- इस्तेमाल: पूछो कि उत्पाद पुराने दर्जे दोहराता है या जटिल, बराबर किरदार दिखाता है।
मीडिया उद्योग: करन-सीटन, लिविंगस्टोन-लंट, हेसमंडहाल्
- करन और सीटन: मीडिया पर मुनाफ़े से चलने वाली कुछ बड़ी कंपनियों का नियंत्रण है; यह केंद्रीकरण विविधता, रचनात्मकता और गुणवत्ता घटाता है। विविध मालिकाना और सार्वजनिक धन ज़्यादा विविध मीडिया दे सकते हैं।
- लिविंगस्टोन और लंट: नियामकों के सामने नागरिकों की सुरक्षा (जैसे बच्चे, निष्पक्षता) और उपभोक्ताओं की सेवा (पसंद, प्रतियोगिता) के बीच खिंचाव है। वैश्विक डिजिटल मीडिया राष्ट्रीय नियमन को कठिन बनाता है।
- डेविड हेसमंडहाल्: सांस्कृतिक उद्योग जोखिम भरे हैं, इसलिए कंपनियाँ फ़ॉर्मैटिंग (सितारे, शैलियाँ, सीरीज़), श्रृंखला के कई हिस्सों की मालिकी (ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज एकीकरण) और छोटी कंपनियाँ ख़रीदकर जोखिम घटाती हैं। इंटरनेट पर भी कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा है।
दर्शक सिद्धांत: बंडुरा, गर्बनर, हॉल, जेनकिंस और शर्की
- अल्बर्ट बंडुरा (सामाजिक अधिगम): लोग देखे गए व्यवहार को सीख और दोहरा सकते हैं, ख़ासकर अगर उस पर इनाम मिले।
- जॉर्ज गर्बनर (संवर्धन): लंबे समय तक बहुत देखने से धारणाएँ धीरे-धीरे बनती हैं, जैसे ज़्यादा देखने वाले दुनिया को असल से ज़्यादा हिंसक मानें ('मीन वर्ल्ड सिंड्रोम')।
- स्टुअर्ट हॉल (ग्रहण): निर्माता अर्थ डालते (एनकोड) हैं; दर्शक उसे पसंदीदा (मान लेना), समझौता (कुछ मानना) या विरोधी (नकारना) तरीके से पढ़ते (डीकोड) हैं, अपनी पृष्ठभूमि के हिसाब से।
- हेनरी जेनकिंस (प्रशंसक): प्रशंसक सक्रिय 'टेक्स्टुअल पोचर' हैं: वे फ़ैन फ़िक्शन, एडिट और समुदाय बनाते हैं (भागीदारी संस्कृति)।
- क्ले शर्की ('दर्शक का अंत'): इंटरनेट हर किसी को बनाने और बाँटने देता है, इसलिए दर्शक और निर्माता की रेखा धुँधली हो जाती है।
करके देखो: एक विज्ञापन लो। पसंदीदा, समझौता और विरोधी पढ़त, हर एक की एक पंक्ति लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिनिधित्व: मीडिया चुनाव और संकेतों से लोगों, जगहों और विचारों को कैसे दोबारा-प्रस्तुत करता है
- रूढ़ छवि (स्टीरियोटाइप): किसी समूह की सरल, अक्सर नकारात्मक छवि जिसे स्वाभाविक दिखाया जाए
- अंतर्विभागीयता: नस्ल, वर्ग, लिंग और दूसरी पहचानें एक-दूसरे से जुड़ती और असर डालती हैं
- लिंग प्रदर्शनात्मकता: लिंग बार-बार के कार्यों से बनता है
- मालिकाने का केंद्रीकरण: कुछ कंपनियों के पास ज़्यादातर मीडिया
- ऊर्ध्वाधर/क्षैतिज एकीकरण: निर्माण के अलग चरणों की मालिकी / एक ही चरण की कई कंपनियों की मालिकी
- संवर्धन: लंबे समय तक बहुत देखने से धारणाएँ बनना
- पसंदीदा, समझौता, विरोधी पढ़त: संदेश पढ़ने के तीन तरीके
हल किए गए उदाहरण
1. एक ग्लैमरस जोड़े वाले परफ़्यूम विज्ञापन पर हॉल का ग्रहण सिद्धांत लागू करो।
पसंदीदा पढ़त: दर्शक मान लेता है कि परफ़्यूम आकर्षक बनाता है और उसे चाहता है। समझौता पढ़त: दर्शक ग्लैमर का आनंद लेता है पर जानता है कि परफ़्यूम ज़िंदगी नहीं बदल सकता। विरोधी पढ़त: दर्शक विज्ञापन को सुंदरता और प्रेम का अवास्तविक, संकीर्ण विचार बेचने वाला मानकर नकारता है।
2. अपराध धारावाहिक पर गर्बनर और एक आलोचना से चर्चा करो।
चरण 1: अपराध धारावाहिक हर हफ़्ते कई हत्याएँ दिखाते हैं। चरण 2: गर्बनर कहेंगे कि ज़्यादा देखने वाले अपराध को ज़्यादा आँक सकते हैं और ज़्यादा डर सकते हैं। चरण 3: आलोचना: सिद्धांत दर्शकों को निष्क्रिय मानता है, और टीवी के असर को दूसरे कारणों (जैसे लोग कहाँ रहते हैं) से अलग करना कठिन है।
3. हेसमंडहाल् कैसे समझाएँगे कि फ़िल्म स्टूडियो चौथा सीक्वल क्यों बनाता है?
फ़िल्म बनाना जोखिम भरा है; ज़्यादातर घाटे में जाती हैं। सीक्वल एक जाना-पहचाना ब्रांड, सितारे और शैली (फ़ॉर्मैटिंग) लाता है जिसके दर्शक पहले से हैं, इससे जोखिम घटता है। जो स्टूडियो स्ट्रीमिंग और सामान का भी मालिक है (एकीकरण), वह कई जगह से कमाता है।
आम गलतियाँ
- सिद्धांतकार का नाम लेना पर विचार को किसी ख़ास उत्पाद पर लागू न करना।
- प्रभाव सिद्धांतों को साबित तथ्य मानना। बताओ कि इन पर बहस है और एक आलोचना दो।
- हॉल के दो विचारों को मिलाना: प्रतिनिधित्व (मीडिया अर्थ कैसे गढ़ता है) और ग्रहण (दर्शक कैसे पढ़ते हैं)।
- यह सोचना कि बटलर लिंग को नकली कहती हैं। वे कहती हैं कि यह बार-बार के कार्यों से बनता है, इसीलिए स्वाभाविक लगता है।