National Year 13 Sociology
अध्याय: 6
1. 4.3.2 Theory and methods
4.3.2 Sociological theory · 4.3.2 Sociology as science and values · 4.3.2 Sociology and social policy
- पाश्चात्य समाजशास्त्री: मार्क्स, दुर्खाइम और वेबर – समाजशास्त्र यूरोप में तीन बड़े बदलावों से जन्मा: ज्ञानोदय (तर्क पर भरोसा), फ्रांसीसी क्रांति (स्वतंत्रता, समानता) और औद्योगिक क्रांति (कारख़ाने, शहर, मज़दूरी)। कार्ल मार्क्स ने कहा कि उत्पादन का ढंग समाज को आकार देता है और इतिहास वर्गों के संघर्ष से आगे बढ़ता है, जैसे पूँजीपति और मज़दूर। एमिल दुर्खाइम ने कहा कि समाज एकता से जुड़ा रहता है: सरल समाजों में यांत्रिक (लोग एक जैसे) और आधुनिक समाजों में सावयवी (लोग अलग काम करते और एक-दूसरे पर निर्भर)। मैक्स वेबर ने कहा कि समाजशास्त्र को लोगों के कामों का अर्थ समझना चाहिए (व्याख्यात्मक समाजशास्त्र), आदर्श प्रारूप को मापने का औज़ार बनाया, और नौकरशाही को नियमों पर चलने वाला आधुनिक संगठन बताया।
- समाजशास्त्रीय सिद्धांत: प्रतिमान, विज्ञान, मूल्य और सामाजिक नीति – प्रतिमान (paradigm) समाज को देखने के विचारों का समूह है। सहमति सिद्धांत (प्रकार्यवाद) समाज को साझा मूल्यों से जुड़ी स्थिर व्यवस्था मानता है; संघर्ष सिद्धांत (मार्क्सवाद, नारीवाद) असमान ताक़त वाले समूह देखते हैं; अंतःक्रियावाद रोज़ की क्रियाओं के अर्थ पढ़ता है। प्रत्यक्षवादी प्राकृतिक विज्ञान की तरह आँकड़े लेते हैं; व्याख्यावादी गुणात्मक तरीकों से अर्थ खोजते हैं। समाजशास्त्री बहस करते हैं कि यह विज्ञान है या नहीं और क्या यह मूल्य-मुक्त हो सकता है; शोध सामाजिक नीति को आकार दे सकता है।
2. 4.3.1 Crime and deviance
4.3.1 Crime, order and control · 4.3.1 Social distribution of crime · 4.3.1 Globalisation, media and new crimes · 4.3.1 Control and punishment
- विचलन और सामाजिक नियंत्रण – विचलन वह व्यवहार है जो समूह द्वारा अपेक्षित मानदंड तोड़ता है। सामाजिक मानदंड रिवाज़ से आते हैं; क़ानूनी मानदंड क़ानून हैं, जिन्हें तोड़ना अपराध या अपचार (delinquency) है। विचलन सापेक्ष है: समूह और समय के साथ बदलता है। समाज अनौपचारिक और औपचारिक नियंत्रण से, सकारात्मक व नकारात्मक प्रतिबंधों के ज़रिए व्यवस्था बनाए रखता है। सिद्धांत विचलन को तनाव, समूह से सीखने, कमज़ोर सामाजिक बंधनों और ठप्पे से समझाते हैं, जिससे कलंक और विचलित करियर बन सकता है। सरकारी अपराध आँकड़ों में बहुत-सा अपराध छिपा रह जाता है।
3. 4.2.5 Topic option 2 (choose one): Beliefs in society
4.2.5 Beliefs in society
- समाज में विश्वास: धर्म, विज्ञान और विचारधारा – समाजशास्त्री विश्वासों को समाज के हिस्से के रूप में पढ़ते हैं। वे धर्म, विज्ञान और विचारधारा की विश्वास तंत्र के रूप में तुलना करते हैं; पूछते हैं कि धर्म समाज को स्थिर रखता है (कार्यात्मकतावादी, मार्क्सवादी, नारीवादी) या बदलाव लाता है (वेबर, मुक्ति धर्मशास्त्र); धार्मिक संगठनों को चर्च, डिनॉमिनेशन, पंथ, कल्ट और नया युग में बाँटते हैं; देखते हैं कि लिंग, आयु, जातीयता और वर्ग विश्वास पर कैसे असर डालते हैं; और धर्मनिरपेक्षीकरण, आध्यात्मिक क्रांति और वैश्वीकरण पर बहस करते हैं।
4. 4.2.6 Topic option 2 (choose one): Global development
4.2.6 Global development
- वैश्विक विकास: कुछ देश ज़्यादा अमीर क्यों हैं – वैश्विक विकास पूछता है कि कुछ समाज अमीर और कुछ ग़रीब क्यों हैं, और यह कैसे बदल सकता है। समाजशास्त्री विकास को मापते हैं (प्रति व्यक्ति GNI, HDI), असमानता को सिद्धांतों से समझाते हैं (आधुनिकीकरण, निर्भरता, विश्व व्यवस्था, नवउदारवाद, जन-केंद्रित विकास), और वैश्वीकरण व उसके खिलाड़ियों को पढ़ते हैं: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (TNC), NGO और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ। वे सहायता, व्यापार और क़र्ज़, शहरीकरण, पर्यावरण, युद्ध और संघर्ष, और शिक्षा, स्वास्थ्य व लैंगिक समानता की भूमिका भी देखते हैं।
5. 4.2.7 Topic option 2 (choose one): The media
4.2.7 The media
- जनसंचार माध्यम (मास मीडिया) – जनसंचार माध्यम वे साधन हैं जो एक भेजने वाले से एक ही संदेश बहुत बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाते हैं: प्रिंट (अख़बार, पत्रिका), प्रसारण (रेडियो, टीवी, फ़िल्म) और डिजिटल (वेबसाइट, सोशल मीडिया, म्यूज़िक वीडियो, वीडियो गेम)। ये सूचना, शिक्षा, मनोरंजन देते हैं और मनाते हैं। मालिक, संपादक और एल्गोरिद्म गेटकीपर बनकर चुनते हैं कि हम कौन-सी ख़बर देखें। नया मीडिया डिजिटल और दो-तरफ़ा है, लोग जवाब दे सकते और ख़ुद बना सकते हैं। समाजशास्त्री बहस करते हैं कि मीडिया का असर कितना गहरा है।
6. 4.2.8 Topic option 2 (choose one): Stratification and differentiation
4.2.8 Stratification and differentiation
- सामाजिक विषमता और बहिष्कार के स्वरूप – सामाजिक विषमता का मतलब है कि कुछ समूहों को पैसा, सम्मान और पहचान ज़्यादा मिलती है, और कुछ को कम। यह योग्यता से नहीं, जन्म वाले समूह से तय होता है। सामाजिक बहिष्कार का मतलब है लोगों को समाज के पूरे जीवन से बाहर रखना। इस पाठ में जाति और अस्पृश्यता, जनजाति और आदिवासी संघर्ष, अन्य पिछड़ा वर्ग, स्त्रियों की समानता की लड़ाई और दिव्यांगों के अधिकार आसान शब्दों में समझेंगे।