महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्या है?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार महिलाओं के विरुद्ध हिंसा लिंग के आधार पर किया गया ऐसा हर काम है जिससे महिला को शारीरिक, यौन या मानसिक नुक़सान या पीड़ा होती है या हो सकती है, इसमें धमकी, ज़बरदस्ती और आज़ादी छीनना भी शामिल है, चाहे घर में हो या बाहर।
चार रूप
- शारीरिक: मारना, धक्का देना, जलाना, कोई भी शारीरिक चोट।
- यौन: बिना स्वतंत्र सहमति का कोई भी यौन काम, और यौन उत्पीड़न।
- भावनात्मक या मौखिक: अपमान, ताने, धमकी, दोस्तों से अलग करना, हर बात पर नियंत्रण।
- आर्थिक: उसकी तनख़्वाह ले लेना, ज़रूरी चीज़ों के लिए पैसे न देना, काम करने से रोकना, संपत्ति छीनना।
कहाँ होती है
घर में (घरेलू हिंसा), काम की जगह पर (यौन उत्पीड़न), सार्वजनिक जगहों पर और ऑनलाइन (पीछा करना, निजी तस्वीरें फैलाना)। दहेज की माँग, बाल विवाह और तथाकथित 'इज़्ज़त' के नाम पर अपराध भी हिंसा के रूप हैं।
कारण
पुरुष और महिला के बीच असमान ताक़त, यह ग़लत सोच कि पुरुष को महिला पर नियंत्रण रखना चाहिए, शराब, ग़रीबी और तनाव, और शर्म या डर से चुप रहना।
घरेलू हिंसा
घरेलू हिंसा वह दुर्व्यवहार है जो उस व्यक्ति द्वारा होता है जिसके साथ महिला घर या पारिवारिक रिश्ते में रहती है: पति, लिव-इन साथी, ससुराल वाले, पिता या भाई।
दुर्व्यवहार का चक्र
- तनाव बढ़ना: ग़ुस्सा, दोष देना, छोटे झगड़े।
- घटना: हिंसा या गंभीर धमकी।
- मनाना: माफ़ी, तोहफ़े, फिर न करने का वादा।
- शांति: सब ठीक लगता है, उसे लगता है अब ख़त्म हो गया।
फिर तनाव शुरू हो जाता है। यह चक्र समझने से पता चलता है कि सिर्फ़ माफ़ी से दुर्व्यवहार नहीं रुकता।
महिलाएँ अक्सर क्यों नहीं निकल पातीं
डर, अपना पैसा न होना, बच्चे, परिवार का दबाव, शर्म, या क़ानून की जानकारी न होना। इसलिए सहायता सेवाएँ और अपनी कमाई ज़रूरी हैं।
असर
चोट, अवसाद, चिंता, डर में बड़े होते बच्चे, और नौकरी व आमदनी का नुक़सान।
अंतरराष्ट्रीय ढाँचा
- मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948): हर व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता, सुरक्षा और समानता का अधिकार।
- CEDAW (1979): महिलाओं के विरुद्ध हर प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर अभिसमय, जिसे महिलाओं के अधिकारों का अंतरराष्ट्रीय विधेयक कहते हैं। जुड़ने वाले देश क़ानून और व्यवहार से भेदभाव हटाते हैं और संयुक्त राष्ट्र समिति को रिपोर्ट देते हैं। भारत ने 1993 में इसकी पुष्टि की। समिति की सामान्य सिफ़ारिश 19 (1992) और 35 (2017) कहती हैं कि लिंग आधारित हिंसा भेदभाव है।
- महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन घोषणा (DEVAW, 1993): महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की परिभाषा देने वाला पहला वैश्विक दस्तावेज़।
- वियना सम्मेलन (1993): कहा कि महिलाओं के अधिकार मानव अधिकार हैं।
- बीजिंग घोषणा और कार्य मंच (1995): महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को कार्रवाई के 12 क्षेत्रों में रखा।
- सतत विकास लक्ष्य 5 (2015): लक्ष्य 5.2 सभी महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध हिंसा ख़त्म करना; 5.3 बाल विवाह ख़त्म करना।
- क्षेत्रीय संधियाँ: बेलेम दो पारा अभिसमय (अमेरिका महाद्वीप, 1994), मापुतो प्रोटोकॉल (अफ़्रीका, 2003) और इस्तांबुल अभिसमय (यूरोप, 2011)।
हर साल 25 नवंबर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस है।
महिलाओं के विरुद्ध हिंसा रोकने वाले भारतीय क़ानून
संविधान
अनुच्छेद 14 और 15 समानता देते हैं और महिलाओं के लिए विशेष क़ानून की अनुमति देते हैं; अनुच्छेद 21 जीवन और गरिमा की रक्षा करता है; अनुच्छेद 51A(e) नागरिकों से महिलाओं का अपमान करने वाली प्रथाएँ छोड़ने को कहता है।
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDVA)
- शारीरिक, यौन, मौखिक और भावनात्मक, और आर्थिक दुर्व्यवहार को शामिल करता है।
- साझा घर में रहने वाली पत्नी, लिव-इन साथी, माँ, बहन और बेटी की रक्षा करता है।
- संरक्षण अधिकारी महिला को घरेलू घटना रिपोर्ट भरने में मदद करता है।
- मजिस्ट्रेट दे सकता है: संरक्षण आदेश (हिंसा रोको), निवास आदेश (साझा घर में रहने का हक़), आर्थिक राहत, अभिरक्षा (कस्टडी) आदेश और मुआवज़ा। यह दीवानी (सिविल) क़ानून है: मुख्य उद्देश्य राहत है, जेल नहीं।
अन्य मुख्य क़ानून
- दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961: दहेज देना, लेना या माँगना अपराध है।
- आपराधिक क़ानून: पति या रिश्तेदारों की क्रूरता, दहेज मृत्यु, पीछा करना, ताक-झाँक, एसिड हमला, हमला और बलात्कार अपराध हैं। ये भारतीय दंड संहिता में थे (जैसे क्रूरता पर धारा 498A) और अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 में हैं। 2012 के दिल्ली मामले के बाद आपराधिक क़ानून (संशोधन) अधिनियम 2013 ने इन्हें और व्यापक बनाया।
- कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH): 10 या ज़्यादा कर्मचारियों वाली हर जगह पर शिकायत सुनने के लिए आंतरिक समिति ज़रूरी। यह सर्वोच्च न्यायालय के विशाखा दिशानिर्देशों (1997) पर बना।
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और पॉक्सो अधिनियम, 2012 लड़कियों की रक्षा करते हैं।
- महिलाओं का अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 और आईटी अधिनियम अपमानजनक तस्वीरों और ऑनलाइन दुर्व्यवहार पर लागू होते हैं।
संस्थाएँ
राष्ट्रीय महिला आयोग (1992), राज्य महिला आयोग, वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन नंबर 112।
रोकथाम: क्या काम करता है
- शुरू होने से पहले रोको: स्कूलों में सम्मान, सहमति और समानता सिखाओ; उन मज़ाक़ों और फ़िल्मों पर सवाल उठाओ जो हिंसा को सामान्य दिखाते हैं।
- आर्थिक ताक़त: महिलाओं की पढ़ाई, नौकरी और संपत्ति के अधिकार से हिंसा से निकलना आसान होता है।
- मज़बूत सेवाएँ: हेल्पलाइन, आश्रय, प्रशिक्षित पुलिस, जल्दी फ़ैसले वाली अदालतें, मुफ़्त क़ानूनी सहायता।
- आस-पास के लोग: दोस्त, पड़ोसी और शिक्षक ध्यान दे सकते हैं, पूछ सकते हैं और सुरक्षित तरीक़े से हेल्पलाइन तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं।
करके देखो: मदद कार्ड
स्कूल के नोटिस बोर्ड के लिए एक छोटा कार्ड बनाओ: तीन हेल्पलाइन (112 आपातकाल, 181 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्डलाइन), सबसे पास के वन स्टॉप सेंटर का पता, और एक वाक्य जो दोस्त कह सके: "मुझे तुम पर भरोसा है। तुम अकेली नहीं हो। चलो साथ में मदद माँगते हैं।" फिर 3D में स्थिति चुनकर देखो कि हर मामले में कौन-सा क़ानून लागू होता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रूप: शारीरिक · यौन · भावनात्मक/मौखिक · आर्थिक
- दुर्व्यवहार का चक्र: तनाव → घटना → मनाना → शांति → तनाव
- वैश्विक: UDHR 1948 · CEDAW 1979 · DEVAW 1993 · बीजिंग 1995 · SDG 5.2 (2015)
- भारत: दहेज प्रतिषेध 1961 · PWDVA 2005 · POSH 2013 · आपराधिक क़ानून संशोधन 2013 · BNS 2023
- PWDVA राहत: संरक्षण · निवास · आर्थिक · अभिरक्षा · मुआवज़ा आदेश
- मदद की कड़ी: हेल्पलाइन (181 / 112) → संरक्षण अधिकारी या पुलिस → अदालत → आश्रय/परामर्श
हल किए गए उदाहरण
1. पति हर महीने पत्नी की पूरी तनख़्वाह ले लेता है और दवा भी नहीं ख़रीदने देता। क्या यह घरेलू हिंसा है?
हाँ। यह आर्थिक दुर्व्यवहार है, जो PWDVA 2005 के चार रूपों में से एक है। वह संरक्षण अधिकारी से मदद और मजिस्ट्रेट से आर्थिक राहत माँग सकती है।
2. शादी के बाद ससुराल वाले लड़की के माता-पिता से कार माँगते हैं और मना करने पर रोज़ उसका अपमान करते हैं। कौन-से क़ानून लागू होंगे?
दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 (दहेज माँगना अपराध), पति या रिश्तेदारों की क्रूरता वाला आपराधिक क़ानून, और भावनात्मक दुर्व्यवहार के लिए PWDVA से संरक्षण या निवास आदेश।
3. एक मैनेजर अपनी जूनियर सहकर्मी को उसके रूप पर अनचाहे संदेश भेजता रहता है। वह शिकायत कहाँ करे?
POSH अधिनियम 2013 के तहत दफ़्तर की आंतरिक समिति में। अगर दफ़्तर में 10 से कम कर्मचारी हैं तो ज़िले की स्थानीय समिति में।
आम गलतियाँ
- सोचना कि घरेलू हिंसा मतलब सिर्फ़ मारपीट। अपमान, धमकी और पैसा छीनना भी दुर्व्यवहार है।
- सोचना कि PWDVA का मुख्य काम लोगों को जेल भेजना है। यह ज़्यादातर दीवानी राहत देता है: सुरक्षा, घर, पैसा, अभिरक्षा।
- सोचना कि CEDAW भारतीय क़ानून है। यह संयुक्त राष्ट्र की संधि है; भारत ने 1993 में इसे माना और उसके अनुसार क़ानून बनाने का वादा किया।
- पीड़िता को दोष देना ("वह छोड़कर क्यों नहीं गई?")। डर, पैसा और परिवार का दबाव कई महिलाओं को फँसा कर रखता है।