कानूनों का वर्गीकरण क्यों?
एक देश में हज़ारों कानून होते हैं। वर्गीकरण का मतलब है चीज़ों को किसी साझा गुण के आधार पर समूहों में रखना। कानून का समूह पता हो, तो पता चलता है कि केस कौन करेगा, कौन-सी अदालत सुनेगी और नतीजा क्या हो सकता है।
कोई एक तय सूची नहीं है। सबसे काम के चार आधार हैं: विषय, स्वभाव, उद्देश्य और क्षेत्र (अधिकार-क्षेत्र)। करके देखो: 3D में आधार बदलो और देखो वही डिब्बा अलग खाने में जाता है।
विषय से: सार्वजनिक विधि और निजी विधि
सार्वजनिक विधि (Public law) राज्य से जुड़ी है: राज्य कैसे बना है और लोगों से कैसे व्यवहार करता है। उदाहरण: संवैधानिक विधि, प्रशासनिक विधि, आपराधिक विधि, कर (टैक्स) विधि।
निजी विधि (Private law) आम लोगों और कंपनियों के आपसी रिश्तों से जुड़ी है। उदाहरण: अनुबंध विधि, संपत्ति विधि, पारिवारिक विधि, अपकृत्य विधि (टॉर्ट, जैसे लापरवाही से नुकसान)।
आसान जाँच: क्या सरकार, सरकार के रूप में, एक पक्ष है? हाँ = सार्वजनिक। नहीं = निजी।
स्वभाव से: मूल विधि और प्रक्रिया विधि
मूल (सारभूत) विधि असली अधिकार, कर्तव्य और गलत काम तय करती है। यह बताती है, "क्या करना ठीक है? अपराध क्या है? मालिक कौन है?" जैसे चोरी को दंडनीय बताने वाला कानून।
प्रक्रिया विधि अदालत में अधिकार लागू करने के कदम बताती है: केस कैसे दायर करें, सबूत कैसे दें, अपील कैसे करें, समय सीमा क्या है। जैसे सिविल प्रक्रिया संहिता, दंड प्रक्रिया की संहिता, साक्ष्य का कानून।
खेल की तरह सोचो: मूल विधि खेल के नियम है; प्रक्रिया विधि बताती है कि रेफ़री मैच कैसे चलाएगा।
उद्देश्य से: सिविल विधि और आपराधिक विधि
| सिविल विधि | आपराधिक विधि | |
|---|---|---|
| केस कौन शुरू करता है? | पीड़ित व्यक्ति (वादी) | राज्य (अभियोजन) |
| उद्देश्य | राहत: हर्जाना, कोई काम करने या रोकने का आदेश | सज़ा: जुर्माना, जेल; समाज की रक्षा |
| कितना सबूत | ज़्यादा संभावना (संभावनाओं का संतुलन) | उचित संदेह से परे |
| उदाहरण | अनुबंध तोड़ना, ज़मीन का झगड़ा, तलाक | चोरी, मारपीट, हत्या, धोखाधड़ी |
एक ही काम से दोनों केस हो सकते हैं: शराब पीकर गाड़ी चलाने वाला किसी को घायल करे, तो राज्य उस पर आपराधिक केस करेगा और घायल व्यक्ति हर्जाने का सिविल केस भी कर सकता है।
क्षेत्र और अधिकार-क्षेत्र से
अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction) का मतलब है वह इलाका या विषय जिस पर किसी कानून या अदालत की ताकत चलती है।
- अंतरराष्ट्रीय विधि: देशों के बीच के नियम, ज़्यादातर संधियों और रिवाज़ से। जैसे समुद्र, जलवायु या मानव अधिकार की संधियाँ।
- राष्ट्रीय (देशीय) विधि: देश की संसद बनाती है, पूरे देश में लागू।
- राज्य विधि: संघीय देशों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी) में राज्य अपने विषयों पर कानून बनाते हैं, जैसे भारत में पुलिस या खेती।
- स्थानीय विधि: शहर और गाँव के उपनियम, जैसे पार्किंग, कचरा या भवन के नियम।
कानूनों को स्रोत से भी बाँटते हैं: लिखित (संसद के बनाए, संहिताबद्ध कानून) और अलिखित (रिवाज़, अदालतों के फ़ैसलों से बना कानून); या सामान्य कानून (सबके लिए) और विशेष या व्यक्तिगत कानून (किसी समूह के लिए, जैसे भारत में अलग-अलग धर्मों के विवाह के व्यक्तिगत कानून)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सार्वजनिक विधि: राज्य एक पक्ष (संवैधानिक, प्रशासनिक, आपराधिक, कर)
- निजी विधि: व्यक्तियों के बीच (अनुबंध, संपत्ति, परिवार, अपकृत्य)
- मूल विधि: अधिकार, कर्तव्य, गलत काम
- प्रक्रिया विधि: अधिकार लागू करने के कदम (प्रक्रिया संहिताएँ, साक्ष्य)
- सिविल विधि: पीड़ित को राहत; आपराधिक विधि: राज्य द्वारा सज़ा
- क्षेत्र: अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य, स्थानीय
हल किए गए उदाहरण
1. चोरी को अपराध बनाने वाले कानून को चारों आधारों पर बाँटो।
विषय: सार्वजनिक (राज्य केस चलाता है)। स्वभाव: मूल (गलत काम तय करता है)। उद्देश्य: आपराधिक (सज़ा)। क्षेत्र: राष्ट्रीय (पूरे देश में)।
2. रवि ने ऑनलाइन लैपटॉप खरीदा, पर वह कभी नहीं आया। वह पैसे वापस पाने अदालत जाता है। कौन-से कानून लगेंगे?
अनुबंध और उपभोक्ता कानून उसे अधिकार देते हैं (निजी, मूल, सिविल)। सिविल प्रक्रिया संहिता बताती है कि केस कैसे दायर करें और चलाएँ (प्रक्रिया)।
3. एक शहर नियम बनाता है कि दुकानें रात 10 बजे तक तेज़ संगीत बंद करें। इसे बाँटो।
क्षेत्र से यह स्थानीय विधि (उपनियम) है। विषय से सार्वजनिक, क्योंकि नगर सरकार लोगों पर नियम लगा रही है। यह मूल विधि है, क्योंकि यह एक कर्तव्य तय करता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कानून एक ही समूह में आता है। हर आधार पर एक ही कानून अलग समूह में जाता है।
- प्रक्रिया और सिविल को एक समझना। प्रक्रिया कदमों के बारे में है; सिविल उद्देश्य (राहत) के बारे में। सिविल प्रक्रिया भी होती है और आपराधिक प्रक्रिया भी।
- यह सोचना कि आपराधिक केस पीड़ित शुरू करता है। आपराधिक मामले में राज्य अभियोजक होता है; पीड़ित गवाह होता है।
- संसद के बनाए हर कानून को सार्वजनिक विधि कहना। संसद अनुबंध और परिवार जैसे निजी कानून भी बनाती है।