दीवार पर गेंद और इलेक्ट्रॉन
जिस गेंद की ऊर्जा पहाड़ी की ऊँचाई के लिए कम हो, वह उसे पार नहीं कर सकती। यह रोज़मर्रा की (चिरसम्मत) भौतिकी का नियम है।
इलेक्ट्रॉन जैसा छोटा कण अलग है। क्वांटम भौतिकी में वह तरंग की तरह बर्ताव करता है। तरंग दीवार से टकराने पर तेज़ किनारे पर खत्म नहीं होती। इससे उत्तर बदल जाता है।
दीवार के अंदर क्या होता है
दीवार के अंदर कण-तरंग धीरे-धीरे छोटी होती जाती है (क्षीण होती है)। वह एकदम शून्य नहीं होती। दीवार पतली हो तो दीवार खत्म होने पर कुछ तरंग बची रहती है। वह तरंग दूसरी ओर आगे बढ़ती है, छोटी पर असली।
तरंग के आकार का वर्ग कण मिलने की संभावना बताता है। इसलिए कण के दीवार के पार मिलने की छोटी संभावना होती है। यही क्वांटम सुरंगन है। कण सुरंग नहीं खोदता और अतिरिक्त ऊर्जा भी नहीं पाता। यह तरंग होने का असर है।
संभावना दीवार पर कैसे निर्भर है
पार होने की संभावना T लगभग T ≈ e−2κL होती है। यहाँ L दीवार की चौड़ाई है और κ दीवार ऊँची या कण भारी होने पर बढ़ता है।
- मोटी दीवार: T बहुत तेज़ी से घटता है।
- ऊँची दीवार: T घटता है।
- भारी कण: T घटता है। इसीलिए क्रिकेट की गेंद को दीवार के आर-पार जाते कभी नहीं देखते: उसकी संभावना लगभग शून्य है।
सुरंगन कहाँ काम आता है
- स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप (STM): बहुत नुकीली धातु की नोक सतह से बहुत छोटी दूरी पर रखी जाती है। थोड़ा वोल्टेज इलेक्ट्रॉनों को अंतर के पार सुरंगन कराता है। अंतर परमाणु के एक अंश जितना बदले तो धारा बहुत बदलती है। नोक धारा को स्थिर रखने के लिए ऊपर-नीचे होती है, और यह चाल का नक्शा परमाणु दिखाता है।
- सूर्य: नाभिक अपने दूर धकेलने वाले बल को सुरंगन से पार करते हैं, इसलिए सूर्य के तापमान पर संलयन होता है।
- अल्फ़ा क्षय: अल्फ़ा कण नाभिक से सुरंगन करके बाहर निकलता है।
- फ़्लैश मेमोरी और टनल डायोड: इलेक्ट्रॉन पतली परतों के पार सुरंगन करते हैं।
खुद करके देखो
3D में ऊँचाई 4 रखो और चौड़ाई 0.5 से 3 तक बढ़ाओ। चौड़ाई 0.5, 1.5 और 3 पर 100 में से कितने इलेक्ट्रॉन पार हुए, लिखो। पहले अनुमान लगाओ: चौड़ाई दोगुनी करने पर संख्या आधी होगी या उससे बहुत कम?
घर पर: एक पतला काग़ज़ और एक मोटी किताब टॉर्च के सामने रखो। देखो कौन रोशनी रोकता है। पतली चीज़ों से रोशनी थोड़ी रिसती है, कुछ-कुछ तरंग की तरह।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पार होने की संभावना: T ≈ e^(−2κL)
- κ = √(2m(U − E)) / ħ (m = द्रव्यमान, U = दीवार की ऊँचाई, E = कण की ऊर्जा)
- मोटी या ऊँची दीवार, या भारी कण → T छोटा
- कण मिलने की संभावना ∝ (तरंग का आकार)²
हल किए गए उदाहरण
1. एक गेंद में पहाड़ी चढ़ने की ऊर्जा नहीं है। वह कहाँ पहुँचेगी?
वह वापस आएगी। गेंद भारी होने के कारण सुरंगन नहीं करती, उसकी संभावना लगभग शून्य है।
2. इलेक्ट्रॉन के लिए κL = 1 है। सुरंगन की संभावना का अनुमान लगाओ।
T ≈ e^(−2) ≈ 0.135, यानी लगभग 13.5%।
3. दीवार की चौड़ाई दोगुनी की गई, इसलिए κL 1 से 2 हो गया। नई संभावना का अनुमान लगाओ।
T ≈ e^(−4) ≈ 0.018, लगभग 1.8%। संभावना लगभग 7 गुना घट गई।
4. T = 9% है। 100 इलेक्ट्रॉनों में कितने पार होने की उम्मीद है?
लगभग 9। कौन-से, यह संयोग है।
5. माइक्रोस्कोप में अंतर के हर अतिरिक्त 0.1 nm पर धारा दसवें हिस्से की रह जाती है। अंतर 0.3 nm बढ़ा। धारा कितने गुना घटी?
10 × 10 × 10 = 1000। धारा हज़ारवें हिस्से की रह गई।
6. इलेक्ट्रॉन सुरंगन कर सकता है पर आदमी दीवार के आर-पार क्यों नहीं जा सकता?
आदमी इलेक्ट्रॉन के मुकाबले बहुत बड़ा और भारी है। इसलिए κ बहुत बड़ा है और T लगभग ठीक-ठीक शून्य।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कण सुरंग खोदता है। कुछ खोदा नहीं जाता; तरंग बस रिसकर पार जाती है।
- यह सोचना कि कण ऊपर चढ़ने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा पाता है। उसकी ऊर्जा वही रहती है।
- यह सोचना कि सारे कण बराबर सुरंगन करते हैं। हल्के, छोटे कण और पतली दीवारें सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं।
- यह सोचना कि इलेक्ट्रॉन बड़े और छोटे हिस्से में बँट जाता है। हर इलेक्ट्रॉन एक ही जगह मिलता है; बस संभावना छोटी होती है।