परमाणु और रोशनी: लेज़र और LED
परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कुछ ख़ास मानों की ही हो सकती है, जिन्हें ऊर्जा स्तर कहते हैं। जब वह ऊँचे स्तर से नीचे स्तर पर गिरता है तो परमाणु रोशनी का एक पैकेट देता है, जिसे फ़ोटॉन कहते हैं। उसकी ऊर्जा E = hf है, जहाँ f रोशनी की आवृत्ति और h प्लांक स्थिरांक है।
LED बल्ब, बारकोड स्कैनर के लेज़र और ऑप्टिकल फ़ाइबर इंटरनेट सब इसी विचार पर चलते हैं। लेज़र में परमाणु मिलकर फ़ोटॉन देते हैं, इसलिए रोशनी एक रंग की और पतली सीधी किरण में चलती है।
चिप: छोटे स्विच
सिलिकॉन जैसा अर्धचालक थोड़ा बिजली चलाता है, और हम उसकी चालकता चालू-बंद कर सकते हैं। इस तरह बना छोटा स्विच ट्रांज़िस्टर है। एक चिप में अरबों होते हैं। आज सबसे छोटे हिस्से कुछ नैनोमीटर चौड़े हैं (नैनोमीटर मीटर का अरबवाँ भाग है)।
हर स्विच की चौड़ाई आधी करो तो उतनी ही जगह में चार गुना स्विच आते हैं। इसीलिए फ़ोन ज़्यादा ताक़तवर होते जाते हैं। इतने छोटे आकार समझने के लिए क्वांटम भौतिकी चाहिए, क्योंकि इलेक्ट्रॉन तरंग जैसा बर्ताव करने लगते हैं।
क्वांटम कंप्यूटर
साधारण बिट या तो 0 होता है या 1। क्यूबिट एक ही समय में 0 और 1 का मिश्रण हो सकता है। एक गेंद पर तीर सोचो। ऊपर यानी 0, नीचे यानी 1, और झुका तीर मिश्रण। क्यूबिट को पढ़ने पर 0 या 1 मिलता है, जिसकी संभावना झुकाव से तय होती है: P(1) = sin²(θ/2)।
कई क्यूबिट मिलकर बहुत-सी संभावनाओं पर साथ काम कर सकते हैं। क्वांटम कंप्यूटर हर चीज़ में तेज़ नहीं होते, पर नई दवाएँ और पदार्थ डिज़ाइन करने जैसी समस्याओं में मदद कर सकते हैं। ये अभी प्रयोग के दौर में हैं और बहुत ठंडी, शांत मशीनें माँगते हैं।
अतिचालक
अतिचालक ऐसा पदार्थ है जिसका एक ख़ास तापमान (क्रांतिक तापमान) से नीचे विद्युत प्रतिरोध ठीक शून्य हो जाता है। उसमें धारा बहुत देर तक बिना हानि के चक्कर लगा सकती है। अतिचालक चुंबक को धकेलता भी है, इसलिए चुंबक उसके ऊपर तैर सकता है।
कुछ सिरेमिक पदार्थ लगभग 92 K (−181 °C) पर अतिचालक बनते हैं, जो सस्ते द्रव नाइट्रोजन (77 K) से मिल जाता है। अतिचालक चुंबक MRI मशीनों और कण त्वरकों में लगते हैं। बड़ा लक्ष्य है कमरे के तापमान पर काम करने वाला अतिचालक, जिससे बहुत बिजली बचेगी।
संलयन ऊर्जा
नाभिकीय संलयन में दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के दो रूप) जुड़कर भारी नाभिक (हीलियम) बनाते हैं और ऊर्जा निकलती है। सूरज एक विशाल संलयन मशीन है। दोनों नाभिक धनावेशित होने से एक-दूसरे को धकेलते हैं, इसलिए उन्हें पास लाने के लिए बहुत गर्मी चाहिए, पृथ्वी के रिएक्टर में लगभग 10 करोड़ °C, और गरम गैस को थामने के लिए तरीक़ा चाहिए, जैसे तेज़ चुंबकीय क्षेत्र।
संलयन से कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बनती और ईंधन भरपूर है। कई देश फ़्रांस में बने बड़े प्रयोगात्मक रिएक्टर ITER में साथ काम करते हैं। संलयन से डाली गई ऊर्जा से ज़्यादा ऊर्जा लगातार और सस्ते में निकालना अभी चुनौती है।
अंतरिक्ष की लहरें और अगले सवाल
जब ब्लैक होल जैसे दो बहुत भारी पिंड एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं तो अंतरिक्ष में लहरें उठती हैं, जिन्हें गुरुत्वीय तरंगें कहते हैं। इन्हें पहली बार 2015 में LIGO संसूचकों ने पकड़ा, और अब हम ब्रह्मांड की उन घटनाओं को "सुन" सकते हैं जो रोशनी नहीं देतीं। और खुले सवाल हैं: डार्क मैटर क्या है, ब्रह्मांड कैसे शुरू हुआ।
करके देखो: 3D में हर स्टेशन पर जाओ और उसका स्लाइडर चलाओ। चलाने से पहले अनुमान लगाओ कि क्या होगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फ़ोटॉन की ऊर्जा: E = h f
- फ़ोटॉन की तरंगदैर्घ्य: λ (nm) ≈ 1240 ÷ E (eV)
- N × N जाल में चिप के स्विच: N²; आकार आधा करने पर 4 गुना
- क्यूबिट में 1 आने की संभावना: P(1) = sin²(θ/2)
- अतिचालक: क्रांतिक तापमान से नीचे R = 0
हल किए गए उदाहरण
1. एक चिप में वर्ग में 10 लाख स्विच हैं। हर स्विच की चौड़ाई आधी हो जाए तो उतनी ही जगह में कितने आएँगे?
चौड़ाई आधी होने से हर किनारे पर 2 गुना, इसलिए क्षेत्रफल में 2 × 2 = 4 गुना। 4 × 10 लाख = 40 लाख स्विच।
2. क्यूबिट का तीर "0" दिशा से θ = 90° झुका है। 1 पढ़ने की संभावना क्या है?
P(1) = sin²(θ/2) = sin²(45°) = (0.707)² = 0.5। यानी संभावना 50%, 1 और 0 बराबर संभव।
3. इलेक्ट्रॉन गिरकर 2.0 eV ऊर्जा का फ़ोटॉन देता है। तरंगदैर्घ्य और रंग बताओ।
λ ≈ 1240 ÷ 2.0 = 620 nm। यह नारंगी-लाल रोशनी है।
आम गलतियाँ
- यह मान लेना कि क्यूबिट "0 और 1 दोनों" है तो उत्तर भी दोनों होगा। पढ़ने पर हमेशा एक ही नतीजा, 0 या 1, मिलता है।
- संलयन और विखंडन को एक समझना। विखंडन में भारी नाभिक टूटता है; संलयन में हल्के नाभिक जुड़ते हैं।
- सोचना कि अतिचालक किसी भी तापमान पर चलता है। वह सिर्फ़ क्रांतिक तापमान से नीचे चलता है।
- सोचना कि चिप ज़्यादा बिजली से तेज़ होती है। ज़्यादातर वह छोटे और ज़्यादा स्विच से तेज़ होती है।