दो सुनहरे नियम और आभासी भू
जब आउटपुट का कुछ भाग इनवर्टिंग इनपुट पर लौटाया जाता है (ऋणात्मक फीडबैक), तो ऑप-एम्प दो नियम मानता है:
- V₊ या V₋ में कोई धारा नहीं जाती।
- आउटपुट तब तक बदलता है जब तक V₊ = V₋।
अगर V₊ को 0 V पर जोड़ें तो V₋ भी 0 V पर रहता है, जबकि वह भू से जुड़ा नहीं है। इसे आभासी भू (virtual earth) कहते हैं।
इनवर्टिंग एम्पलीफायर विन्यास
Vin, Rin से होकर V₋ पर जाता है। Rf, V₋ को आउटपुट से जोड़ता है। V₊ = 0 V।
V₋ आभासी भू है, इसलिए Rin में धारा = Vin/Rin। ऑप-एम्प में धारा नहीं जाती, तो वही धारा Rf से बहती है: −Vout/Rf। बराबर रखने पर:
G = Vout/Vin = −Rf/Rin
ऋण चिह्न का अर्थ: आउटपुट उल्टा (180° कलांतर)। पूरे परिपथ का इनपुट प्रतिरोध बस Rin है।
नॉन-इनवर्टिंग एम्पलीफायर विन्यास
Vin सीधे V₊ पर। Rf और Rin आउटपुट से भू तक विभव विभाजक बनाते हैं, जिसका बीच वाला बिंदु V₋ है।
V₋ = Vout × Rin/(Rin + Rf) और V₋ = V₊ = Vin, इसलिए
G = 1 + Rf/Rin
आउटपुट सीधा (समान कला में)। लाभ हमेशा कम से कम 1। इनपुट प्रतिरोध बहुत ऊँचा। Rf = 0 हो तो G = 1: वोल्टेज फॉलोअर (बफ़र)।
समिंग एम्पलीफायर विन्यास
कई इनपुट V1, V2, V3 अपने प्रतिरोध R1, R2, R3 से आभासी भू पर जाते हैं। उनकी धाराएँ जुड़कर Rf से बहती हैं:
Vout = −Rf (V1/R1 + V2/R2 + V3/R3)
सब प्रतिरोध Rf के बराबर हों तो Vout = −(V1 + V2 + V3)। उपयोग: ऑडियो मिक्सर और डिजिटल-से-एनालॉग कनवर्टर (DAC), जहाँ R, 2R, 4R, 8R से 8:4:2:1 का बाइनरी भार मिलता है।
असली ऑपरेशनल एम्पलीफायर
- संतृप्ति: आउटपुट सप्लाई वोल्टेज से आगे नहीं जा सकता (असल में ±Vs से 1–2 V कम)। G × Vin बहुत बड़ा हो तो तरंग कट जाती है।
- सीमित खुला-लूप लाभ: लगभग 10⁵, और आवृत्ति बढ़ने पर घटता है।
- लाभ-बैंडविड्थ गुणनफल: लाभ × बैंडविड्थ ≈ स्थिर। GBP = 1 MHz वाला ऑप-एम्प 100 लाभ पर केवल 10 kHz बैंडविड्थ देगा।
- सीमित स्ल्यू दर: आउटपुट प्रति माइक्रोसेकंड सीमित वोल्ट ही बदल सकता है।
- छोटी इनपुट धाराएँ और ऑफ़सेट वोल्टेज।
खुद करके देखो: तुम ऑप-एम्प बनो
एक स्केल को बीच में पेंसिल पर रखो (सी-सॉ)। पेंसिल से 3 cm दूर वाले सिरे को 1 cm नीचे दबाओ: 9 cm दूर वाला सिरा 3 cm ऊपर जाता है। इनवर्टिंग एम्प की तरह: उल्टा और Rf/Rin = 9/3 = 3 गुना। फिर 3D में Rin = 10, Rf = 30 रखकर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- इनवर्टिंग: G = −Rf / Rin
- नॉन-इनवर्टिंग: G = 1 + Rf / Rin
- समिंग: Vout = −Rf (V1/R1 + V2/R2 + …)
- लाभ × बैंडविड्थ ≈ स्थिर (GBP)
हल किए गए उदाहरण
1. इनवर्टिंग: Rin = 10 kΩ, Rf = 50 kΩ, Vin = 0.2 V। G और Vout?
G = −5; Vout = −1.0 V।
2. नॉन-इनवर्टिंग: Rin = 2 kΩ, Rf = 18 kΩ, Vin = 0.3 V। Vout?
G = 1 + 9 = 10; Vout = 3.0 V।
3. Rin = 4.7 kΩ के साथ लाभ −20 का इनवर्टिंग एम्प बनाओ।
Rf = 20 × 4.7 = 94 kΩ।
4. समिंग: Rf = 10 kΩ, R1 = 10 kΩ, R2 = 5 kΩ, V1 = 0.5 V, V2 = 0.2 V। Vout?
−10(0.05 + 0.04) = −0.9 V।
5. लाभ −15, सप्लाई ±12 V, इनपुट शिखर 1.0 V। आउटपुट कैसा होगा?
−15 V शिखर चाहिए, पर ±12 V से आगे नहीं जा सकता। चोटियाँ कट जाती हैं: संतृप्ति।
6. GBP = 1.0 MHz, नॉन-इनवर्टिंग Rf = 99 kΩ, Rin = 1 kΩ। बैंडविड्थ?
G = 100; बैंडविड्थ = 1 MHz/100 = 10 kHz।
7. 3-बिट DAC: Rf = 1 kΩ, इनपुट 1 kΩ (MSB), 2 kΩ, 4 kΩ (LSB), हर बिट 0 V या 4 V। इनपुट 101 पर Vout?
−(4/1 + 0 + 4/4) = −5 V। 5 = बाइनरी 101।
आम गलतियाँ
- इनवर्टिंग और समिंग में ऋण चिह्न भूलना।
- नॉन-इनवर्टिंग लाभ को Rf/Rin लिखना; सही है 1 + Rf/Rin।
- सप्लाई से बड़ा आउटपुट लिख देना; असली ऑप-एम्प संतृप्त होता है।
- सोचना कि आभासी भू तार से 0 V से जुड़ा है। यह फीडबैक से 0 V पर रहता है।