युद्ध के कारण और घटनाक्रम
1600 के दशक की शुरुआत में मध्य यूरोप का ज़्यादातर हिस्सा पवित्र रोमन साम्राज्य (Holy Roman Empire) में था। यह एक मज़बूत देश नहीं था। यह सैकड़ों छोटे राज्यों, स्वतंत्र नगरों और चर्च की भूमियों का ढीला समूह था। मुखिया सम्राट था, जो हैब्सबर्ग (Habsburg) परिवार का था।
युद्ध क्यों शुरू हुआ?
- आस्था। सुधार आंदोलन (Reformation) के बाद कुछ शासक कैथोलिक थे, कुछ प्रोटेस्टेंट। 1555 के पुराने समझौते ने शांति दी, पर झगड़े बचे रहे और उसमें कैल्विनवादी शामिल नहीं थे।
- ताक़त। हैब्सबर्ग सम्राट ज़्यादा मज़बूत शासन चाहता था। राजकुमार स्वतंत्र रहना चाहते थे।
- बाहरी प्रतिद्वंद्वी। फ़्रांस, स्वीडन और डेनमार्क, सबके अपने कारण थे: हैब्सबर्गों को कमज़ोर करना, ज़मीन और व्यापार पाना।
चिंगारी (1618)। प्राग में बोहीमिया के प्रोटेस्टेंट कुलीन इसलिए नाराज़ थे कि नया हैब्सबर्ग राजा उनके अधिकार घटाएगा। उन्होंने दो शाही अधिकारियों को क़िले की खिड़की से बाहर फेंक दिया। दोनों बच गए, पर इसी से बोहीमिया का विद्रोह शुरू हुआ।
चार चरण
- बोहीमियाई चरण (1618–25)। सम्राट और सहयोगियों ने व्हाइट माउंटेन (1620) जीता।
- डेनिश चरण (1625–29)। डेनमार्क के राजा क्रिश्चियन ने प्रोटेस्टेंटों की मदद की और हार गए।
- स्वीडिश चरण (1630–35)। स्वीडन के राजा गुस्तावस एडोल्फस ने बड़ी लड़ाइयाँ जीतीं, पर 1632 में मारे गए।
- फ़्रांसीसी-स्वीडिश चरण (1635–48)। कैथोलिक फ़्रांस ने कैथोलिक हैब्सबर्गों से युद्ध किया। अब साफ़ था कि लड़ाई ताक़त की भी है, सिर्फ़ आस्था की नहीं।
नुकसान
सेनाओं को अक्सर कम वेतन मिलता था, इसलिए वे गाँवों से खाना ले लेती थीं। सैनिकों के पीछे भूख और प्लेग जैसी बीमारियाँ आईं। जर्मनी के सबसे प्रभावित हिस्सों में लगभग हर तीसरा आदमी मरा। कई नगरों का व्यापार ठप हुआ और खेत सालों खाली पड़े रहे।
युद्ध में यूक्रेनी कोसैक
युद्ध नीपर नदी से बहुत दूर था, फिर भी यूक्रेनी भूमि इससे अछूती नहीं रही। कोसैक कुशल लड़ाके थे और कई शासक उन्हें चाहते थे।
- 1621 में पेत्रो सहायदाचनी के नेतृत्व में कोसैकों ने खोतिन में पोलिश-लिथुआनियाई सेना की उस्मानियों के विरुद्ध मदद की। इससे पूर्व का एक दुश्मन उलझा रहा।
- 1620 और 1630 के दशकों में कोसैक टुकड़ियाँ कई सेनाओं में भाड़े के सैनिक बनकर रहीं।
- 1645–46 में कई हज़ार कोसैकों की टुकड़ी फ़्रांसीसी सेना से जुड़ी और उत्तरी सागर के बंदरगाह डनकर्क (Dunkirk) को जीतने में मदद की।
इससे दो बातें दिखती हैं। पहली, दूर का युद्ध पूर्वी यूरोप के लोगों को भी खींच लाया। दूसरी, यूरोप में कोसैकों को क़ीमती सैनिक माना गया, जिससे घर में भी उनकी शोहरत बढ़ी। पुराने स्रोतों में आँकड़े अलग-अलग हैं, इसलिए इतिहासकार "कई हज़ार" जैसे सावधान शब्द इस्तेमाल करते हैं।
वेस्टफ़ालिया की संधि और वेस्टफ़ालियाई व्यवस्था
1648 तक सब थक चुके और ग़रीब हो चुके थे। बातचीत जर्मनी के दो नगरों मुंस्टर और ओस्नाब्रुक में हुई, और इन संधियों को मिलाकर वेस्टफ़ालिया की संधि (Peace of Westphalia) कहते हैं।
क्या तय हुआ
- जर्मन राज्यों के शासक अपने राज्य का धर्म ख़ुद तय कर सकते थे, और अब कैल्विनवादी भी शामिल थे।
- जर्मन राजकुमारों को अपनी संधियाँ करने का अधिकार मिला, इसलिए सम्राट की शक्ति घटी।
- फ़्रांस और स्वीडन को ज़मीन मिली। नीदरलैंड्स और स्विट्ज़रलैंड को स्वतंत्र माना गया।
वेस्टफ़ालियाई व्यवस्था
समय के साथ इन संधियों को राज्यों के आपसी व्यवहार के नए विचारों का प्रतीक माना जाने लगा:
- संप्रभुता (sovereignty): हर राज्य अपनी भूमि के अंदर अंतिम अधिकारी है।
- बराबरी: क़ानून में सब राज्य बराबर हैं, बड़े हों या छोटे।
- हस्तक्षेप न करना: शासक एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दख़ल न दें।
- कूटनीति (diplomacy): झगड़े बातचीत और संधियों से सुलझें, बड़ी शांति-बैठकों के साथ। यही आधुनिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव है।
इन विचारों का हमेशा पालन नहीं हुआ, और इतिहासकार कहते हैं कि यह व्यवस्था धीरे-धीरे बनी, 1648 में एक दिन में नहीं। पर इस युद्ध ने यूरोप को दिखा दिया कि आस्था और ताक़त के संघर्ष कितने महँगे पड़ते हैं।
खुद करके देखें: युद्ध की कड़ी बनाइए
करके देखिए। 6 छोटे कार्ड काटिए और हर एक पर एक घटना लिखिए: प्राग की खिड़की, व्हाइट माउंटेन, डेनमार्क जुड़ा, स्वीडन जुड़ा, फ़्रांस जुड़ा, वेस्टफ़ालिया की संधि। उन्हें मिला दीजिए।
- कार्डों को समय के क्रम में रखिए। साल: 1618, 1620, 1625, 1630, 1635, 1648।
- पहले तीन कार्डों को "आस्था" के रंग में और बाद वालों को "ताक़त" के रंग में रंगिए। रंग कहाँ बदलता है?
- सालों की गिनती कीजिए: 1648 − 1618 = 30।
3D में पहले अनुमान लगाइए: किस साल बड़ा आकार सबसे ज़्यादा बढ़ेगा? फिर स्लाइडर चलाकर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीस वर्षीय युद्ध: 1618 से 1648 (1648 − 1618 = 30 वर्ष)
- चिंगारी: प्राग की खिड़की, 1618; व्हाइट माउंटेन 1620
- चरण: बोहीमियाई, डेनिश, स्वीडिश, फ़्रांसीसी-स्वीडिश
- वेस्टफ़ालिया की संधि: 1648 (मुंस्टर और ओस्नाब्रुक)
- वेस्टफ़ालियाई व्यवस्था: संप्रभुता + बराबरी + हस्तक्षेप न करना + कूटनीति
हल किए गए उदाहरण
1. अगर तीस वर्षीय युद्ध 1618 से 1648 तक चला, तो वह कितने साल चला?
1648 − 1618 = 30 वर्ष। युद्ध का नाम ही उत्तर बता देता है।
2. 1635 में फ़्रांस का शामिल होना युद्ध समझने के लिए क्यों ज़रूरी है?
फ़्रांस कैथोलिक था, फिर भी उसने कैथोलिक हैब्सबर्गों से युद्ध किया। इसलिए 1635 के बाद यह सिर्फ़ आस्था का युद्ध नहीं रह सकता था। यह यूरोप में ताक़त की लड़ाई भी थी।
3. वेस्टफ़ालियाई व्यवस्था के दो विचार बताइए और आज की दुनिया से एक-एक उदाहरण दीजिए।
संप्रभुता: देश अपने क़ानून ख़ुद बनाता है, जैसे अपने यातायात नियम। बराबरी: संयुक्त राष्ट्र महासभा में हर देश को एक सीट मिलती है, बड़ा हो या छोटा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि युद्ध सिर्फ़ धर्म का था। ताक़त, ज़मीन और व्यापार का भी बड़ा हाथ था, ख़ासकर 1635 के बाद।
- पवित्र रोमन साम्राज्य को एक मज़बूत देश कहना। वह कई राज्यों का ढीला समूह था।
- मान लेना कि वेस्टफ़ालिया की संधियों ने एक दिन में आधुनिक देश बना दिए। ये विचार धीरे-धीरे बढ़े।
- वेस्टफ़ालिया की संधि (1648, तीस वर्षीय युद्ध का अंत) को बाद की दूसरी शांति-संधियों से मिला देना।