कारण: धर्मयुद्ध क्यों शुरू हुए?
- बाइज़ेंटाइन की पुकार: मंज़िकर्ट (1071) में सल्जूक तुर्कों ने बाइज़ेंटाइन सेना हराई और अनातोलिया का बड़ा भाग लिया. सम्राट एलेक्सियोस प्रथम ने पश्चिम से सैनिक माँगे.
- पोप के लक्ष्य: क्लेरमोंट (1095) में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम की सशस्त्र तीर्थयात्रा का आह्वान किया. वह ईसाइयों को रोम के नीचे एक करना और यूरोप में सामंतों की आपसी लड़ाई रोकना भी चाहते थे.
- धार्मिक कारण: पापों की माफ़ी (इंडल्जेंस) का वादा. यरूशलम ईसाइयों, यहूदियों और मुसलमानों तीनों के लिए पवित्र था.
- दूसरे कारण: छोटे सामंत-पुत्रों को ज़मीन, धन और रोमांच; इतालवी नगरों को व्यापार.
पहले जनसाधारण का धर्मयुद्ध (1096) गया और नष्ट हो गया. फिर सामंतों की सेनाओं ने निकिया और अंतिओक लिए और 1099 में यरूशलम पर कब्ज़ा किया, जिसमें बहुत लोग मारे गए.
क्रूसेडर राज्य (आउटरेमर) और दूसरा धर्मयुद्ध
चार क्रूसेडर राज्य बने: एडेसा की काउंटी, अंतिओक की रियासत, त्रिपोली की काउंटी और यरूशलम का राज्य. यूरोप वाले इन्हें आउटरेमर ("समुद्र पार") कहते थे.
यहाँ यूरोपीय कम थे, इसलिए उन्होंने मज़बूत किले बनाए और सैनिक-संघों पर भरोसा किया: नाइट्स टेम्पलर और नाइट्स हॉस्पिटलर, जो भिक्षु भी थे और सैनिक भी. वेनिस और जेनोआ जैसे बंदरगाह जहाज़ और व्यापार देते.
1144 में ज़ंगी (मोसुल और अलेप्पो के शासक) ने एडेसा जीत लिया. फ़्रांस और जर्मनी के राजाओं के नेतृत्व में दूसरा धर्मयुद्ध (1147–49) दमिश्क पर बुरी तरह विफल रहा.
मुस्लिम प्रति-धर्मयुद्ध और सलादीन
शुरू में मुस्लिम जगत आपस में बँटा था. एकता क़दम-दर-क़दम बढ़ी:
- ज़ंगी (एडेसा, 1144) ने क्रूसेडरों के ख़िलाफ़ जिहाद का विचार आगे बढ़ाया.
- उसके बेटे नूरुद्दीन ने सीरिया को एक किया और दमिश्क लिया (1154).
- सलादीन (सलाहुद्दीन) ने मिस्र (1169) और फिर सीरिया पर अधिकार किया, जिससे यरूशलम राज्य चारों ओर से घिर गया.
1187 में सलादीन ने हत्तीन में क्रूसेडर सेना को हराया और फिर यरूशलम लिया. उसने बहुत से निवासियों को फिरौती देकर जाने दिया, जिससे यूरोप में भी उसका सम्मान हुआ.
तीसरा और चौथा धर्मयुद्ध, और अंत
तीसरा धर्मयुद्ध (1189–92): इंग्लैंड के रिचर्ड प्रथम, फ़्रांस के फ़िलिप द्वितीय और फ़्रेडरिक बारबरोसा (जो रास्ते में डूब गया). रिचर्ड ने अक्का (1191) लिया और अर्सूफ़ जीता, पर यरूशलम पर हमला नहीं किया. जाफ़ा संधि (1192) से यरूशलम सलादीन के पास रहा, पर ईसाई तीर्थयात्री जा सकते थे.
चौथा धर्मयुद्ध (1202–04): सेना वेनिस को जहाज़ों का पैसा नहीं दे पाई, ज़ारा पर हमला किया, फिर बाइज़ेंटाइन सत्ता-संघर्ष में उलझ गई. 1204 में उसने ईसाई नगर कॉन्स्टेंटिनोपल लूटा, जिससे कैथोलिक और ऑर्थोडॉक्स चर्च की दूरी और बढ़ी.
बाद के धर्मयुद्ध कुछ ख़ास न कर सके, और 1291 में अक्का गिर गया.
प्रभाव
- बहुत मौतें और धर्मों के बीच लंबी कड़वाहट; यूरोप में यहूदी समुदायों पर हमले.
- बाइज़ेंटाइन कमज़ोर हुआ, जिससे 1453 में उसका पतन आसान हुआ.
- व्यापार, बैंकिंग और संपर्क बढ़े: इतालवी नगर अमीर हुए; यूरोप ने अरबी विज्ञान और किताबों से सीखा.
- बहुत से सामंत मरे या ज़मीन बेची, इसलिए राजा मज़बूत हुए.
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 1071 मंज़िकर्ट → 1095 क्लेरमोंट → 1099 यरूशलम पर कब्ज़ा
- क्रूसेडर राज्य: एडेसा, अंतिओक, त्रिपोली, यरूशलम (आउटरेमर)
- 1144 एडेसा का पतन → दूसरा धर्मयुद्ध 1147–49 विफल
- ज़ंगी → नूरुद्दीन → सलादीन → 1187 हत्तीन, यरूशलम वापस
- तीसरा 1189–92 (अक्का, जाफ़ा संधि) · चौथा 1202–04 (कॉन्स्टेंटिनोपल) · 1291 अक्का का पतन
हल किए गए उदाहरण
1. मंज़िकर्ट से पहले धर्मयुद्ध तक कारण-परिणाम की कड़ी बनाओ.
मंज़िकर्ट में सल्जूक जीते (1071) → बाइज़ेंटाइन ने अनातोलिया खोया → एलेक्सियोस ने पोप से सैनिक माँगे → क्लेरमोंट में अर्बन द्वितीय का आह्वान (1095) → सेनाएँ चलीं (1096) → यरूशलम पर कब्ज़ा (1099).
2. क्रूसेडर राज्य किलों और सैनिक-संघों पर क्यों टिके थे?
वहाँ कम यूरोपीय बसे थे, इसलिए सेना छोटी थी. किलों से थोड़े सैनिक भी ज़मीन बचा सकते थे, और टेम्पलर-हॉस्पिटलर स्थायी, प्रशिक्षित सेना देते थे.
3. पहले दौर में यरूशलम राज्य ने नगर कितने साल रखा?
1099 से 1187 तक: 1187 − 1099 = 88 साल.
4. सलादीन की सफलता में मुस्लिम एकता क्यों ज़रूरी थी?
जब मिस्र और सीरिया के अलग शासक थे, क्रूसेडर उन्हें आपस में लड़ा सकते थे. सलादीन ने दोनों पर राज किया तो राज्य घिर गया और वह बड़ी सेना जुटा सका, जो हत्तीन में जीती.
5. चौथे धर्मयुद्ध को "भटका हुआ धर्मयुद्ध" क्यों कहते हैं?
वह पवित्र भूमि तक पहुँचा ही नहीं. वेनिस के कर्ज़ और बाइज़ेंटाइन राजनीति ने उसे 1204 में ईसाई नगर कॉन्स्टेंटिनोपल लूटने पर ला दिया.
आम गलतियाँ
- सोचना कि एक ही धर्मयुद्ध हुआ. लगभग 200 साल में कई मुख्य अभियान हुए.
- कहना कि क्रूसेडरों के पास यरूशलम 1291 तक रहा. वह 1187 में गया; 1291 अक्का का पतन है.
- मानना कि चौथा धर्मयुद्ध मुसलमानों से लड़ा. उसने ईसाई कॉन्स्टेंटिनोपल लूटा.
- सिर्फ़ धार्मिक कारण बताना. राजनीतिक, आर्थिक और निजी कारण भी अहम थे.