उपभोक्ता और उत्पादक अधिशेष
उपभोक्ता अधिशेष (CS) = देने की इच्छा − सच में दी गई कीमत। चित्र में यह माँग वक्र के नीचे और कीमत के ऊपर का क्षेत्र है।
उत्पादक अधिशेष (PS) = मिली कीमत − न्यूनतम स्वीकार्य कीमत (सीमांत लागत)। यह पूर्ति वक्र के ऊपर और कीमत के नीचे का क्षेत्र है।
सीधी रेखाओं में दोनों त्रिभुज हैं: क्षेत्रफल = ½ × आधार × ऊँचाई।
उदाहरण: माँग P = 100 − Q, पूर्ति P = 20 + Q। संतुलन: 100 − Q = 20 + Q, तो Q = 40, P = 60।
CS = ½ × 40 × (100 − 60) = 800। PS = ½ × 40 × (60 − 20) = 800। कुल अधिशेष = 1600।
अधिशेष किससे बदलता है?
- कीमत घटे तो CS बढ़ता और PS घटता है।
- कर, सब्सिडी, कीमत नियंत्रण या एकाधिकार क्षेत्र बदलते हैं और अक्सर कल्याण हानि (deadweight loss) बनाते हैं: वह अधिशेष जो किसी को नहीं मिलता, क्योंकि फ़ायदेमंद सौदे होते ही नहीं।
आवंटन कुशलता और उत्पादक कुशलता
आवंटन कुशलता (allocative efficiency)
संसाधन उन चीज़ों पर लगें जिन्हें लोग सबसे ज़्यादा महत्त्व देते हैं, सही मात्रा में। शर्त: P = MC: आख़िरी इकाई का ख़रीदार के लिए मूल्य (कीमत) उसकी बनाने की लागत (सीमांत लागत) के बराबर। कुल अधिशेष अधिकतम।
- P > MC हो तो बहुत कम बनता है (एकाधिकार अक्सर ऐसा करता है)।
- P < MC हो तो ज़रूरत से ज़्यादा बनता है।
उत्पादक कुशलता (productive efficiency)
उत्पादन न्यूनतम संभव औसत लागत पर: AC वक्र का तल, जहाँ MC = AC। कोई संसाधन बर्बाद नहीं। उत्पादन संभावना वक्र पर का हर बिंदु उत्पादक रूप से कुशल है।
पूर्ण प्रतियोगिता दीर्घकाल में दोनों पाती है; एकाधिकार आम तौर पर कोई नहीं।
स्थैतिक और गतिशील कुशलता
स्थैतिक कुशलता (static efficiency): एक समय-बिंदु पर, आज की तकनीक के साथ कुशलता। इसमें आवंटन और उत्पादक कुशलता आती हैं।
गतिशील कुशलता (dynamic efficiency): समय के साथ कुशलता। फ़र्में अनुसंधान और विकास, नई मशीनों और प्रशिक्षण में निवेश करती हैं। इससे पूरा लागत वक्र नीचे आता है और नए, बेहतर उत्पाद आते हैं।
- असामान्य लाभ अनुसंधान का ख़र्च उठा सकता है, इसलिए बड़ी फ़र्में या एकाधिकार स्थैतिक रूप से कुशल न होकर भी गतिशील रूप से कुशल हो सकते हैं (शुम्पीटर का मत)।
- पर बिना प्रतिद्वंद्वी की फ़र्म सुस्त और फ़िज़ूलख़र्च हो सकती है (X-अकुशलता), इसलिए प्रतियोगिता भी नवाचार बढ़ाती है।
अन्य शब्द: X-कुशलता (फ़र्म के अंदर कोई ढिलाई नहीं) और तकनीकी कुशलता (दिए साधनों से अधिकतम उत्पादन)।
करके देखें
आख़िरी 3D चरण में कीमत ₹30 से ₹90 तक खिसकाइए। ₹45, ₹60 और ₹75 पर CS, PS और लाल कल्याण हानि लिखिए। कुल अधिशेष कहाँ सबसे बड़ा है? घर पर: इस महीने ख़रीदी तीन चीज़ें लिखिए और यह भी कि आप कितना ज़्यादा दे देते। वही आपका उपभोक्ता अधिशेष है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपभोक्ता अधिशेष = देने की इच्छा − दी गई कीमत; सीधी माँग में CS = ½ × Q × (P_max − P)
- उत्पादक अधिशेष = मिली कीमत − न्यूनतम स्वीकार्य कीमत; सीधी पूर्ति में PS = ½ × Q × (P − P_min)
- कुल (सामाजिक) अधिशेष = CS + PS
- आवंटन कुशलता: P = MC
- उत्पादक कुशलता: न्यूनतम AC पर उत्पादन (जहाँ MC = AC)
- कल्याण हानि (त्रिभुज) = ½ × (मात्रा में कमी) × (उस मात्रा पर माँग और पूर्ति कीमत का अंतर)
हल किए गए उदाहरण
1. रिया ₹350 की किताब के लिए ₹500 तक देने को तैयार थी। उसका उपभोक्ता अधिशेष?
500 − 350 = ₹150।
2. माँग P = 100 − Q, पूर्ति P = 20 + Q। संतुलन, CS और PS निकालिए।
100 − Q = 20 + Q → Q = 40, P = 60। CS = ½ × 40 × 40 = 800। PS = ½ × 40 × 40 = 800।
3. उसी बाज़ार में एकाधिकारी उत्पादन 25 इकाई रखकर ₹75 लेता है। कल्याण हानि?
Q = 25 पर माँग कीमत 75, पूर्ति कीमत (MC) 45। DWL = ½ × (40 − 25) × (75 − 45) = ½ × 15 × 30 = 225।
4. औसत लागत 40 इकाई पर ₹30, 30 इकाई पर ₹34 और 50 इकाई पर ₹34 है। उत्पादक कुशलता कहाँ है?
40 इकाई पर, जहाँ औसत लागत सबसे कम (₹30) है।
5. एक फ़र्म ₹50 पर बेचती है जहाँ सीमांत लागत ₹35 है। क्या यह आवंटन रूप से कुशल है? क्या बदलना चाहिए?
नहीं, P > MC, यानी आख़िरी इकाई का मूल्य उसकी लागत से ज़्यादा: बहुत कम बन रहा है। उत्पादन तब तक बढ़े जब तक P = MC न हो।
6. पेटेंट वाली दवा कंपनी ऊँची कीमत लेती है, पर आय का 20% अनुसंधान पर लगाती है जिससे दस साल में इलाज की लागत आधी हो जाती है। उसकी कुशलता पर टिप्पणी कीजिए।
आज स्थैतिक रूप से अकुशल (P > MC, कम उत्पादन, कल्याण हानि), पर समय के साथ गतिशील रूप से कुशल (अनुसंधान से लागत घटती है, नई दवाएँ आती हैं)। पेटेंट अल्पकाल की हानि के बदले दीर्घकाल का लाभ देता है।
आम गलतियाँ
- उपभोक्ता अधिशेष को कीमत रेखा के नीचे रखना। CS कीमत के ऊपर और माँग वक्र के नीचे है।
- कहना कि आवंटन कुशलता P = AC पर है। यह P = MC पर है; P = AC सामान्य लाभ है।
- उत्पादक कुशलता को सबसे ज़्यादा उत्पादन समझना। इसका अर्थ प्रति इकाई सबसे कम लागत है।
- सोचना कि स्थैतिक और गतिशील कुशलता हमेशा साथ चलती हैं। एकाधिकार स्थैतिक रूप से अकुशल पर गतिशील रूप से कुशल हो सकता है।