आवोगाद्रो का नियम क्या कहता है
1811 में इटली के वैज्ञानिक आमेदेओ आवोगाद्रो ने एक बड़ी बात कही। दो गैसें लो, जिनका ताप एक जैसा और दाब एक जैसा हो। अगर उनका आयतन बराबर है, तो उनमें अणुओं की संख्या भी बराबर होगी।
गैस कौन-सी है, इससे फ़र्क नहीं पड़ता। छोटे H₂ अणु और बड़े CO₂ अणु एक जैसे गिने जाते हैं। क्यों? गैस में अणु एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं। बीच की खाली जगह अणुओं से कहीं बड़ी है। इसलिए अणु का आकार लगभग मायने नहीं रखता; सिर्फ़ गिनती मायने रखती है।
छोटे में: V ∝ n (T और P स्थिर)। V = आयतन, n = मोलों की संख्या। इसलिए V₁ ÷ n₁ = V₂ ÷ n₂।
ऐसा क्यों होता है
दाब अणुओं के दीवार से टकराने से बनता है। एक ही ताप पर हर गैस के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा बराबर होती है। तो हर अणु औसतन बराबर धक्का देता है। बराबर धक्का, बराबर दाब, बराबर आयतन → बराबर अणु।
मोलर आयतन: STP पर 22.4 L
हर गैस के 1 मोल में अणु बराबर होते हैं (6.02 × 10²³, आवोगाद्रो स्थिरांक)। इसलिए एक ही T और P पर हर गैस का 1 मोल बराबर आयतन लेता है। इसे मोलर आयतन, Vm कहते हैं।
- STP (0 °C = 273 K और 101.3 kPa = 1 atm) पर: Vm = 22.4 L/mol।
- कमरे के ताप (लगभग 25 °C, 1 atm) पर: Vm ≈ 24.5 L/mol (कई किताबें 24 L लेती हैं)।
- IUPAC अब STP को 0 °C और 100 kPa मानता है, तब Vm = 22.7 L/mol। प्रश्न में जो मान दिया हो, वही लो।
तीन ज़रूरी कड़ियाँ
- n = V ÷ Vm (आयतन से मोल)
- N = n × NA (अणुओं की संख्या)
- m = n × M (मोल से द्रव्यमान)
इनसे लीटर, मोल, ग्राम और अणु, सबके बीच आसानी से आ-जा सकते हो।
गैसों का सापेक्ष घनत्व
बराबर आयतन में अणु बराबर हैं, पर हर अणु का भार अलग है। इसलिए 22.4 L H₂ = 2 g, O₂ = 32 g, CO₂ = 44 g।
गैस 1 का गैस 2 के सापेक्ष सापेक्ष घनत्व बताता है कि बराबर आयतन (और वही T, P) पर गैस 1 कितने गुना भारी है:
D = M₁ ÷ M₂ (कोई मात्रक नहीं)।
- हाइड्रोजन के सापेक्ष: D(H₂) = M ÷ 2, यानी M = 2 × D(H₂)।
- हवा के सापेक्ष: D(हवा) = M ÷ 29 (हवा का औसत मोलर द्रव्यमान लगभग 29 g/mol)। D < 1 हो तो गैस हवा में ऊपर जाती है (हीलियम, मीथेन); D > 1 हो तो नीचे बैठती है (CO₂)।
घनत्व से भी मोलर द्रव्यमान निकलता है: M = ρ × Vm। जैसे STP पर 1.25 g/L घनत्व वाली गैस का M = 1.25 × 22.4 = 28 g/mol (N₂ या CO)।
गैस अभिक्रियाओं में आयतन
आवोगाद्रो से पहले गे-लुसाक ने देखा कि गैसें सरल पूर्ण संख्याओं के आयतन अनुपात में जुड़ती हैं। आवोगाद्रो का नियम इसका कारण बताता है: बराबर आयतन = बराबर अणु, इसलिए आयतन अनुपात = मोल अनुपात = गुणांकों का अनुपात।
2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(g): 2 आयतन + 1 आयतन → 2 आयतन।
N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g): 1 L + 3 L → 2 L।
ध्यान रहे: यह सिर्फ़ गैसों पर, एक ही T और P पर लागू है। द्रव और ठोस पर नहीं।
करके देखो
एक छोटी बोतल में एक चम्मच खाने का सोडा डालो, सिरका डालो और जल्दी से मुँह पर गुब्बारा चढ़ा दो। CO₂ बनती है और गुब्बारा फूलता है। अब दो चम्मच सोडा और ज़्यादा सिरका लो: ज़्यादा मोल CO₂, बड़ा गुब्बारा। 3D के चरण 6 में मोल बदलकर आयतन देखो।
सीमाएँ और परीक्षा में क्या आता है
आवोगाद्रो का नियम पूरी तरह सिर्फ़ आदर्श गैस पर सही है। वास्तविक गैसें कम दाब और ऊँचे ताप पर इसे अच्छी तरह मानती हैं। बहुत ऊँचे दाब या बहुत कम ताप पर अणुओं का अपना आकार और आपसी खिंचाव असर डालते हैं, तो थोड़ी गड़बड़ आती है।
परीक्षा में आम प्रश्न: नियम लिखो; द्रव्यमान से STP पर आयतन; आयतन से मोल या अणु; सापेक्ष घनत्व से मोलर द्रव्यमान; अभिक्रिया में गैसों के आयतन। हमेशा मात्रक (L, mol, g) लिखो और सही Vm लो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- V ∝ n (T और P स्थिर)
- V₁ ÷ n₁ = V₂ ÷ n₂
- n = V ÷ Vm; STP पर Vm = 22.4 L/mol
- N = n × Nₐ; Nₐ = 6.02 × 10²³ mol⁻¹
- m = n × M
- सापेक्ष घनत्व D = M₁ ÷ M₂
- M = 2 × D(H₂); M = 29 × D(हवा)
- M = ρ × Vm
हल किए गए उदाहरण
1. एक गुब्बारे में 2 mol गैस है और आयतन 48 L है। उसी T और P पर 3 mol का आयतन कितना होगा?
V₁/n₁ = V₂/n₂ → 48 ÷ 2 = V₂ ÷ 3 → V₂ = 24 × 3 = 72 L।
2. STP पर 0.5 mol ऑक्सीजन कितना आयतन लेगी?
V = n × Vm = 0.5 × 22.4 = 11.2 L।
3. STP पर 5.6 L CO₂ में कितने मोल और कितने अणु हैं?
n = 5.6 ÷ 22.4 = 0.25 mol। N = 0.25 × 6.02 × 10²³ = 1.505 × 10²³ अणु।
4. 8 g मीथेन (CH₄) का STP पर आयतन निकालो।
M(CH₄) = 12 + 4 = 16 g/mol। n = 8 ÷ 16 = 0.5 mol। V = 0.5 × 22.4 = 11.2 L।
5. एक गैस का हाइड्रोजन के सापेक्ष घनत्व 22 है। मोलर द्रव्यमान निकालो और बताओ कि यह हवा से भारी है या नहीं।
M = 2 × 22 = 44 g/mol। D(हवा) = 44 ÷ 29 ≈ 1.52 > 1, इसलिए यह हवा से भारी है (शायद CO₂)।
6. 10 L मीथेन को पूरा जलाने के लिए कितनी ऑक्सीजन चाहिए और कितनी CO₂ बनेगी? (CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O; एक ही T, P)
आयतन अनुपात CH₄ : O₂ : CO₂ = 1 : 2 : 1। O₂ = 2 × 10 = 20 L। CO₂ = 10 L।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि बड़े अणु वाली गैस ज़्यादा जगह लेगी। गैस में अणुओं के बीच बहुत खाली जगह है, इसलिए बराबर आयतन में बराबर अणु होते हैं, आकार चाहे जो हो।
- कमरे के ताप पर भी 22.4 L/mol लगाना। 22.4 L सिर्फ़ 0 °C और 1 atm के लिए है; 25 °C पर लगभग 24.5 L लो (या जो दिया हो)।
- द्रव या ठोस (जैसे द्रव पानी) पर आयतन अनुपात लगाना। आवोगाद्रो का नियम सिर्फ़ गैसों पर लागू है।
- बराबर आयतन को बराबर द्रव्यमान समझना। बराबर आयतन में अणु बराबर होते हैं, द्रव्यमान नहीं।