प्राणि विज्ञान क्या है?
Zoology यानी प्राणि विज्ञान शब्द दो यूनानी शब्दों से बना है: zoon (जंतु) और logos (अध्ययन)। यह जीव विज्ञान (biology) का वह भाग है जो जंतुओं का अध्ययन करता है।
प्राणि विज्ञानी सीधे सवाल पूछता है। यह कैसा दिखता है? कहाँ रहता है? क्या खाता है? कैसे चलता, साँस लेता और बच्चे देता है? दूसरे जानवरों से इसका क्या रिश्ता है?
जंतु सिर्फ़ बड़े ही नहीं होते। भृंग, घोंघा और केंचुआ भी जंतु हैं। ऊपर के 3D में छहों जानवर अलग हैं, पर कुछ बातें एक जैसी हैं: ये पौधों की तरह अपना भोजन नहीं बना सकते और दूसरे जीवों को खाते हैं।
इसकी कई शाखाएँ हैं। जैसे: कीटविज्ञान (entomology, कीट), पक्षीविज्ञान (ornithology, पक्षी), मत्स्यविज्ञान (ichthyology, मछलियाँ), पारिस्थितिकी (ecology, जंतु और उनका परिवेश) और शरीर रचना (anatomy)।
प्राणि विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास
- शुरुआती मनुष्य को शिकार, खेती और सुरक्षा के लिए जानवरों को जानना पड़ता था। वे जानते थे कि कौन-सा ख़तरनाक है और कौन दूध या ऊन देता है।
- लगभग 350 ई.पू., अरस्तू (यूनान) ने कई जानवरों को ध्यान से देखा और कुछ के अंदर भी देखा। उन्होंने जानवरों के समूह बनाए, इसलिए उन्हें अक्सर प्राणि विज्ञान का जनक कहते हैं।
- 1600 के दशक: सूक्ष्मदर्शी। ल्यूवेनहॉक जैसे लोगों ने पहली बार तालाब के पानी में छोटे जीव देखे। जानवरों की एक नई दुनिया खुल गई।
- 1735: लिनियस (स्वीडन) ने जानवरों को नाम देने और समूह में रखने की व्यवस्था शुरू की, ताकि हर देश के वैज्ञानिक एक ही नाम से एक ही जानवर समझें।
- 1859: डार्विन ने बताया कि जानवर कई पीढ़ियों में धीरे-धीरे बदलते हैं (प्राकृतिक चयन से विकास)।
- 1953 के बाद: DNA। DNA की संरचना पता चलने पर वैज्ञानिक जानवरों की जीन से तुलना करने लगे। आज कैमरा ट्रैप, उपग्रह और कंप्यूटर भी उपयोग होते हैं।
यह भारत की भी कहानी है: भारतीय प्राणि सर्वेक्षण (Zoological Survey of India, स्थापना 1916) देश के जानवरों का रिकॉर्ड रखता है, और सलीम अली के पक्षी सर्वेक्षण प्रसिद्ध हैं।
विधियाँ: जानवरों का अध्ययन कैसे होता है
- अवलोकन (observe)। जानवर को उसके घर में देखो (क्षेत्र अध्ययन) या प्रयोगशाला में। पहले आँखों से, फिर दूरबीन, आवर्धक लेंस, सूक्ष्मदर्शी और कैमरा ट्रैप से।
- नापना और लिखना। आकार, भार, संख्या, समय और जगह लिखो। कॉपी या सारणी में रिकॉर्ड रखो। अच्छा रिकॉर्ड दूसरों को जाँच करने देता है।
- तुलना और समूह। देखो क्या एक जैसा है और क्या अलग। इसी से रीढ़ वाले और बिना रीढ़ वाले जैसे समूह बनते हैं।
- प्रयोग। एक चीज़ बदलो और नतीजा देखो। जैसे: घोंघा गीली ज़मीन पर तेज़ चलता है या सूखी पर?
- नमूने गिनना। पूरे देश के सारे पक्षी गिनना संभव नहीं, इसलिए छोटे हिस्सों में गिनकर पूरे का अनुमान लगाते हैं।
- दया रखो। अच्छा प्राणि विज्ञानी जानवरों को चोट नहीं पहुँचाता और उनके घर को वैसा ही छोड़ता है।
प्राणि विज्ञान का महत्व
- भोजन: दूध, अंडे, मछली और शहद जानवरों से मिलते हैं। प्राणि विज्ञान किसानों को पशु स्वस्थ रखने में मदद करता है।
- स्वास्थ्य: मच्छरों का अध्ययन करके हमने जाना कि मलेरिया कैसे फैलता है। प्रतिविष (antivenom) और कई टीके भी जानवरों के अध्ययन से आए।
- खेती: मधुमक्खियाँ फसलों में परागण करती हैं, केंचुए मिट्टी को ढीला और उपजाऊ बनाते हैं, पक्षी कीड़े खाते हैं।
- प्रकृति का संतुलन: खाद्य शृंखला में हर जानवर का काम है। मेंढक गायब हो जाएँ तो मच्छर बढ़ सकते हैं।
- जानवरों को बचाना: बाघ या गिद्ध को बचाने के लिए पहले यह जानना होगा कि वह कैसे रहता है और उसे क्या चाहिए।
- खुद को समझना: मनुष्य भी जंतु है, रीढ़ वाला स्तनधारी। हमारे शरीर के बारे में कई बातें दूसरे जानवरों के अध्ययन से आई हैं।
- करियर: पशु चिकित्सक, वन अधिकारी, शोधकर्ता, शिक्षक, मत्स्य विशेषज्ञ, चिड़ियाघर वैज्ञानिक।
करके देखो: 15 मिनट प्राणि विज्ञानी बनो
एक जगह चुनो: पेड़, खिड़की की पट्टी या पानी का गड्ढा। 10 मिनट चुपचाप बैठो। जो भी जानवर दिखे, उसका नाम, कितने और क्या कर रहे थे, लिख लो। फिर दो कॉलम की सारणी बनाओ: रीढ़ वाले और बिना रीढ़ वाले, और हर जानवर को सही कॉलम में रखो। पहले अनुमान लगाओ: किस कॉलम में ज़्यादा होंगे? फिर अपनी सारणी से जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Zoology = जंतुओं का अध्ययन (zoon = जंतु, logos = अध्ययन)
- विधि: अवलोकन → नापना और लिखना → तुलना और समूह → प्रयोग
- दो बड़े समूह: रीढ़ वाले (कशेरुकी) और बिना रीढ़ वाले (अकशेरुकी)
- नमूना विधि: कुल अनुमान = प्रति भाग औसत × भागों की संख्या
- पड़ाव: अरस्तू (लगभग 350 ई.पू.) → लिनियस (1735) → डार्विन (1859) → DNA (1953)
हल किए गए उदाहरण
1. इन जानवरों को रीढ़ वाले और बिना रीढ़ वाले में बाँटो: मछली, भृंग, गाय, घोंघा, पक्षी, केंचुआ।
रीढ़ वाले: मछली, गाय, पक्षी। बिना रीढ़ वाले: भृंग, घोंघा, केंचुआ। पहचान: पीठ पर हाथ फेरकर देखो। मछली, गाय और पक्षी में हड्डी की रीढ़ होती है। बाकी तीन में नरम शरीर या बाहरी कठोर खोल होता है, पर रीढ़ नहीं।
2. प्राणि विज्ञानी हर काम के लिए कौन-सा उपकरण लेगा: (क) दूर पेड़ पर पक्षी गिनना, (ख) तालाब के पानी में छोटे जीव देखना, (ग) जंगल में रात को कौन-से जानवर आते हैं यह जानना?
(क) दूरबीन। (ख) सूक्ष्मदर्शी। (ग) कैमरा ट्रैप, जो जानवर के पास से गुज़रने पर फ़ोटो खींचता है। तीनों वह दिखाते हैं जो सिर्फ़ आँखों से नहीं दिखता।
3. जब 'कोयल' जैसे स्थानीय नाम हैं तो हर जानवर के लिए एक मानक वैज्ञानिक नाम क्यों चाहिए?
स्थानीय नाम भाषा और जगह के साथ बदलते हैं। एक जानवर के कई नाम हो सकते हैं और एक नाम कई जानवरों का हो सकता है। मानक वैज्ञानिक नाम (जिसकी शुरुआत लिनियस ने की) से हर देश के वैज्ञानिक ठीक-ठीक समझ जाते हैं कि कौन-सा जानवर है।
4. एक छात्र बगीचे के 5 बराबर भागों में तितलियाँ गिनता है: 4, 6, 3, 7, 5। पूरे पार्क में ऐसे 40 भाग हैं। पार्क में तितलियों का अनुमान लगाओ।
प्रति भाग औसत = (4 + 6 + 3 + 7 + 5) ÷ 5 = 25 ÷ 5 = 5। पार्क का अनुमान = 5 × 40 = 200 तितलियाँ। यह सिर्फ़ अनुमान है, पर अच्छा नमूना अच्छा अंदाज़ा देता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि प्राणि विज्ञान सिर्फ़ बड़े जंगली जानवरों का है। कीट, कृमि और तालाब के छोटे जीव भी जंतु हैं।
- प्राणि विज्ञान (जंतु), वनस्पति विज्ञान (पौधे) और जीव विज्ञान (सब जीव) को मिला देना। प्राणि विज्ञान जीव विज्ञान की एक शाखा है।
- यह मानना कि एक बार देखना काफ़ी है। अच्छे अवलोकन में कई बार देखना और लिखना शामिल है।
- भूल जाना कि मनुष्य भी जंतु (स्तनधारी) है। हम रीढ़ वाले समूह में आते हैं।