Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II Mathematics
अध्याय: 4
1. Systems of equations
Linear systems
- दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म – a₁x + b₁y = c₁ और a₂x + b₂y = c₂ जैसे दो समीकरण दो सीधी रेखाएँ बनाते हैं। जो (x, y) दोनों को सही करे, वह इन रेखाओं का मिलने का बिंदु है। रेखाएँ काटें तो एक हल, समांतर हों तो कोई हल नहीं, और एक-दूसरे पर पड़ी हों तो अनंत हल। हल ग्राफ से, प्रतिस्थापन से या विलोपन से निकालते हैं।
2. Functions
Concept of a function · Linear function · Quadratic function · Transformations and other functions
- संबंध एवं फलन: कार्तीय गुणन, प्रांत, परिसर और ग्राफ़ – क्रमित युग्म (a, b) में पहला और दूसरा स्थान तय है, इसलिए (1, 2) ≠ (2, 1)। कार्तीय गुणन A × B उन सब युग्मों (a, b) का समुच्चय है जिनमें a ∈ A, b ∈ B; n(A × B) = n(A) × n(B)। A × B का कोई भी उपसमुच्चय A से B में संबंध है। पहले अवयवों का समुच्चय प्रांत, दूसरे अवयवों का परिसर, और पूरा B सहप्रांत है। फलन ऐसा संबंध है जिसमें A के हर अवयव का ठीक एक प्रतिबिंब हो। हम अचर, तत्समक, बहुपद, परिमेय, मापांक, चिह्न, घातांकी, लघुगणकीय और महत्तम पूर्णांक फलन और उनके ग्राफ़ पढ़ते हैं, और फलनों को जोड़ना, घटाना, गुणा और भाग करना सीखते हैं।
- रैखिक फलन (Linear Functions) – रैखिक फलन में x के हर 1 बढ़ने पर y में हमेशा एक बराबर मात्रा जुड़ती है। इसका नियम y = mx + c है (कहीं f(x) = mx + b भी लिखते हैं)। m ढाल है: ऊपर ÷ आगे, यानी x में 1 बढ़ने पर y का बदलाव। c, y-अंतःखंड है: x = 0 पर y का मान। इसका ग्राफ़ हमेशा सीधी रेखा होता है।
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
- फलनों का रूपांतरण – रूपांतरण (transformation) मूल फलन y = f(x) के ग्राफ़ को बदलता है, पर उसका बुनियादी आकार नहीं। फलन के बाहर जोड़ने से ग्राफ़ ऊपर-नीचे जाता है: f(x) + k यानी k ऊपर। कोष्ठक के अंदर का बदलाव क्षैतिज और उलटा होता है: f(x − h) यानी h दाएँ। बाहर गुणा, a·f(x), ऊर्ध्वाधर खिंचाव है (a < 0 हो तो x-अक्ष में पलटता है)। अंदर गुणा, f(bx), क्षैतिज रूप से 1/b गुना दबाता है (b < 0 हो तो y-अक्ष में पलटता है)। सब मिलाकर: y = a·f(b(x − h)) + k, और मूल का बिंदु (0, 0) पहुँचता है (h, k) पर।
3. Sequences
Sequences in general · Arithmetic and geometric sequences
- अनुक्रम और श्रेढ़ियाँ – अनुक्रम संख्याओं की ऐसी सूची है जिसका क्रम तय है। इसका नियम दो तरह से लिखते हैं: पुनरावर्ती (पिछले पद से अगला पद) या स्पष्ट (n-वें पद का सीधा सूत्र)। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार वही संख्या जुड़ती है। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार उसी संख्या से गुणा होता है। फ्रैक्टल और हनोई की मीनार में भी यही नियम छिपे हैं।
- अनुक्रम तथा श्रेणी: AP, GP, समांतर और गुणोत्तर माध्य – अनुक्रम एक निश्चित क्रम में लिखी संख्याओं की सूची है: a₁, a₂, a₃, … पदों को जोड़ने पर श्रेणी बनती है। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर बार एक ही संख्या d जुड़ती है; aₙ = a + (n − 1)d और Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। a और b का समांतर माध्य (a + b)/2 है; उनके बीच n समांतर माध्य डालने के लिए d = (b − a)/(n + 1)। गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर बार एक ही संख्या r से गुणा होता है; aₙ = arⁿ⁻¹ और r ≠ 1 पर Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)। यदि |r| < 1 हो तो पद छोटे होते जाते हैं और अनंत योग S∞ = a/(1 − r)। दो धनात्मक संख्याओं का गुणोत्तर माध्य √(ab) है, और n गुणोत्तर माध्य के लिए r = (b/a)^(1/(n+1))। धनात्मक a, b के लिए A ≥ G, बराबरी केवल a = b पर।
4. Trigonometry
Trigonometric ratios and triangles
- त्रिकोणमितीय अनुपात (sin, cos, tan) – समकोण त्रिभुज में एक न्यून कोण θ चुनो। θ के सामने वाली भुजा लंब (सम्मुख), θ को छूने वाली छोटी भुजा आधार (आसन्न), और सबसे लंबी भुजा कर्ण। sin θ = लंब/कर्ण, cos θ = आधार/कर्ण, tan θ = लंब/आधार। cosec, sec, cot इनके उल्टे हैं। ये अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर हैं, त्रिभुज के आकार पर नहीं। 0°, 30°, 45°, 60°, 90° की टेबल याद करो।