तर्कदोष क्या है?
तर्क किसी दावे (निष्कर्ष) के समर्थन में कारण (आधार-वाक्य) देता है। तर्कदोष तर्क करने की ग़लती है: आधार सच में निष्कर्ष को सहारा नहीं देते, भले तर्क अच्छा सुनाई दे।
तर्कदोष और झूठा तथ्य एक नहीं हैं। "चाँद पनीर का बना है" बस असत्य है। तर्कदोष कारणों और निष्कर्ष के बीच ख़राब कड़ी है। दोषपूर्ण तर्क का निष्कर्ष संयोग से सही भी हो सकता है।
तर्क परखने के लिए पूछिए: (1) क्या आधार सत्य हैं? (2) क्या वे निष्कर्ष को सहारा देते हैं? (3) क्या कोई ज़रूरी बात छूटी है?
औपचारिक और अनौपचारिक तर्कदोष
औपचारिक तर्कदोष निगमनात्मक तर्क के तार्किक रूप की ग़लती है। कथनों की जगह अक्षर रखकर इन्हें पहचान सकते हैं; विषय मायने नहीं रखता।
- परिणाम की पुष्टि: यदि p तो q; q; इसलिए p। ("बारिश हो तो सड़क गीली। सड़क गीली है, इसलिए बारिश हुई।" टैंकर ने भी गीली की हो सकती है।)
- पूर्ववर्ती का निषेध: यदि p तो q; p नहीं; इसलिए q नहीं।
- अव्याप्त मध्यपद: सभी बिल्लियाँ जानवर हैं; सभी कुत्ते जानवर हैं; इसलिए सभी कुत्ते बिल्लियाँ हैं।
अनौपचारिक तर्कदोष का रूप ठीक दिखता है पर कही गई बात के कारण वह विफल होता है: असंबद्ध बातें, अस्पष्ट शब्द, कमज़ोर सबूत या छिपी मान्यताएँ। रोज़ के ज़्यादातर तर्कदोष अनौपचारिक होते हैं।
प्रासंगिकता के तर्कदोष: ग़लत निशाने पर हमला
- व्यक्तिगत आक्षेप (ad hominem): कारणों के बजाय वक्ता के चरित्र, रूप या पृष्ठभूमि पर हमला। "उसका रीसाइक्लिंग वाला विचार छोड़ो, वह तो 14 साल का है।"
- पुतला तर्क (straw man): सामने वाले के दावे को कमज़ोर बनाकर फिर उसे हराना। "कम होमवर्क चाहिए? मतलब स्कूल ही नहीं चाहिए!"
- भटकाव (red herring): ध्यान हटाने के लिए विषय बदलना।
- भीड़ का तर्क (bandwagon): "सब मानते हैं, इसलिए सच है।"
- झूठा प्रमाण: ऐसे मशहूर व्यक्ति का हवाला जो उस विषय का विशेषज्ञ नहीं।
- भावना/डर की अपील: कारणों की जगह भावनाएँ।
निष्पक्ष चर्चा में आप दूसरे के विचार के सबसे मज़बूत रूप का उत्तर देते हैं (पुतले का उलटा) और विचारों को परखते हैं, व्यक्तियों को नहीं।
कमज़ोर सबूत और छिपी मान्यताओं के तर्कदोष
- झूठा द्विविकल्प: जब और विकल्प हों तब भी केवल दो दिखाना।
- फिसलन भरी ढलान: एक छोटे कदम से विनाश की कड़ी का दावा, हर कड़ी के सबूत के बिना।
- जल्दबाज़ सामान्यीकरण: बहुत कम उदाहरणों से बड़ा नियम।
- बाद में, इसलिए कारण (post hoc): B, A के बाद हुआ तो A ने B किया, ऐसा मान लेना।
- चक्रीय तर्क: निष्कर्ष पहले से आधार में छिपा हो।
- अर्थ-भ्रम (equivocation): एक शब्द के दो अर्थों का प्रयोग।
सही लगने वाला तर्क कैसे पकड़ें: उसे आधार और निष्कर्ष में लिखिए, कड़ी का नाम बताइए, और प्रति-उदाहरण या छूटे विकल्प पूछिए।
करके देखिए: तर्कदोष की खोज
घर पर पाँच विज्ञापन या सोशल-मीडिया पोस्ट इकट्ठा कीजिए। हर एक का निष्कर्ष, दिया गया कारण और उसमें कौन-सा तर्कदोष है (यदि है) लिखिए। फिर किसी एक को सच्चे सबूत के साथ निष्पक्ष तर्क के रूप में दोबारा लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तर्कदोष = आधार और निष्कर्ष के बीच की कड़ी में ग़लती
- औपचारिक तर्कदोष = ग़लत रूप (जैसे परिणाम की पुष्टि: p → q, q ∴ p)
- अनौपचारिक तर्कदोष = ग़लत विषय: प्रासंगिकता, सबूत, भाषा या मान्यताएँ
- व्यक्तिगत आक्षेप: तर्क नहीं, व्यक्ति पर हमला
- पुतला तर्क: दावे के बिगड़े, कमज़ोर रूप पर हमला
- झूठा द्विविकल्प: केवल दो विकल्प; फिसलन भरी ढलान: बिना सबूत परिणामों की कड़ी
हल किए गए उदाहरण
1. तर्कदोष बताइए: "पड़ोसी के बेटे ने बरसों सिगरेट पी और 90 साल जिया, तो सिगरेट हानिरहित है।"
जल्दबाज़ सामान्यीकरण: एक उदाहरण बड़े अध्ययनों को नहीं पलट सकता।
2. तर्कदोष बताइए: "जलवायु पर उसकी राय मत मानो; वह ख़ुद हवाई जहाज़ से सम्मेलन जाती है।"
व्यक्तिगत आक्षेप: उसका व्यवहार उसके सबूत को ग़लत नहीं बनाता।
3. तर्कदोष बताइए: "कुत्ता है तो चार पैर होंगे। मेरी बिल्ली के चार पैर हैं, तो वह कुत्ता है।"
परिणाम की पुष्टि, एक औपचारिक तर्कदोष।
4. तर्कदोष बताइए: "या तो जंगल काटो या शहर भूखा मरे।"
झूठा द्विविकल्प: और विकल्प हैं (दूसरी ज़मीन, बेहतर खेती, दूसरे काम)।
आम गलतियाँ
- जो तर्क पसंद न हो उसे तर्कदोष कह देना। असहमति से तर्क ग़लत नहीं होता।
- सोचना कि तर्कदोष है तो निष्कर्ष ज़रूर ग़लत है (इसे भी एक तर्कदोष माना जाता है)।
- जब विशेषज्ञता सच में प्रासंगिक हो, तब उसकी उचित आलोचना को व्यक्तिगत आक्षेप समझना।
- सबूतों वाली सच्ची कारण-शृंखला को फिसलन भरी ढलान समझना।