Poland Liceum ogólnokształcące, klasa II Philosophy (extended level)
अध्याय: 2
1. Logical culture
Names, sentences and flaws of expression · Definitions · Direct and indirect justification · Errors in reasoning and fair discussion
- तर्कशास्त्र: अच्छा तर्क कैसे काम करता है – तर्कशास्त्र (logic) सही सोच का अध्ययन है। तर्क में आधार-वाक्य (कारण) और निष्कर्ष होते हैं; इनके बीच का क़दम अनुमान है। निगमनात्मक तर्क में आधार-वाक्य सच हों तो निष्कर्ष सच होगा ही; ऐसा तर्क वैध है, और अगर आधार-वाक्य सचमुच सच हों तो ठोस (sound)। एक प्रति-उदाहरण किसी ढाँचे को अवैध साबित कर देता है। आगमनात्मक तर्क देखे गए मामलों से सामान्य या संभावित निष्कर्ष तक जाते हैं; वे मज़बूत या कमज़ोर होते हैं, पक्के नहीं। निरुपाधिक प्रतिज्ञप्तियाँ (A, E, I, O) और सरल विधेय तर्क (∀, ∃) तर्क को सटीक लिखने और दोष पकड़ने में मदद करते हैं।
- तार्किक विवेचन (Logical Reasoning) – तार्किक विवेचन यानी तथ्यों (आधार-वाक्यों) से किसी निष्कर्ष तक ऐसे पहुँचना जिसे जाँचा जा सके। कथन या तो सत्य होता है या असत्य। कथनों को नहीं, और, या, यदि…तो और यदि और केवल यदि से जोड़ते हैं, और सत्यता सारणी बताती है कि परिणाम कब सत्य है। निगमन (deduction) में अगर आधार सत्य हों और रूप वैध हो तो निष्कर्ष सत्य होना ही चाहिए (मोडस पोनेंस, मोडस टोलेंस, न्यायवाक्य)। 'सभी', 'कोई नहीं', 'कुछ' वाले न्यायवाक्य वेन आरेख से जाँचे जाते हैं। आगमन (induction) और सादृश्य उदाहरणों से सामान्य बात तक जाते हैं: निष्कर्ष केवल संभावित होता है। प्रत्यक्ष उपपत्ति ज्ञात बातों से कदम-दर-कदम चलती है; अप्रत्यक्ष उपपत्ति उल्टा मानकर विरोधाभास तक पहुँचती है। तर्कदोष लुभावने पर गलत तर्क हैं।
- तर्कदोष: अच्छे दिखने वाले तर्क कैसे ग़लत होते हैं – तर्कदोष (fallacy) तर्क करने की ऐसी ग़लती है जो तर्क को कमज़ोर या अवैध बना देती है, भले वह सही लगे। औपचारिक तर्कदोष निगमनात्मक तर्क के रूप (ढाँचे) की ग़लती है, जैसे परिणाम की पुष्टि। अनौपचारिक तर्कदोष विषय, भाषा या प्रासंगिकता की ग़लती है, जैसे व्यक्तिगत आक्षेप, पुतला तर्क, झूठा द्विविकल्प, फिसलन भरी ढलान, भीड़ का तर्क, झूठा प्रमाण, जल्दबाज़ सामान्यीकरण, 'बाद में इसलिए कारण' और चक्रीय तर्क। इन्हें पहचानना निष्पक्ष चर्चा में मदद करता है।
2. History of philosophy: antiquity and Middle Ages
Ancient philosophy · Thomas Aquinas
- प्राचीन दर्शन: पहले सवालों से स्टोइकवाद तक – दर्शन (फ़िलॉसफ़ी) का अर्थ है 'ज्ञान से प्रेम'। लगभग 600 ई.पू. में यूनानी विचारकों ने प्रकृति को मिथक की बजाय तर्क (लोगोस) से समझाना शुरू किया। सुकरात-पूर्व दार्शनिकों ने मूल तत्व (आर्खे) खोजा: पानी, हवा, आग, न बदलने वाला सत् या परमाणु। फिर सोफ़िस्ट और सुकरात इंसानी जीवन की ओर मुड़े; सुकरात को सवाल पूछने के लिए मृत्युदंड मिला (प्लेटो की 'अपोलॉजी' में)। प्लेटो ने रूपों का सिद्धांत दिया; अरस्तू ने अवलोकन से तर्कशास्त्र और विज्ञान बनाया। बाद में स्टोइक, एपिक्यूरियन, सिनिक और सिसरो-सेनेका जैसे रोमनों ने पूछा कि अच्छा, शांत जीवन कैसे जिएँ।
- मध्यकालीन दर्शन: ऑगस्टीन से ओकम तक आस्था और तर्क – मध्यकालीन दर्शन लगभग 400 से 1450 ई. तक का है। इसका बड़ा प्रश्न था कि आस्था (धर्म जो सिखाता है) और तर्क (जो हम सोचकर जान सकते हैं) आपस में कैसे मेल खाते हैं। ऑगस्टीन ने सिखाया कि सत्य भीतर मिलता है, ईश्वर के प्रकाश से, और आस्था समझ खोजती है। बोएथियस ने यूनानी तर्कशास्त्र आगे पहुँचाया। इब्न सीना, इब्न रुश्द और मैमोनिडीज़ जैसे इस्लामी और यहूदी विचारकों ने अरस्तू को गहराई से पढ़ा, और उनका काम लैटिन अनुवादों से यूरोप पहुँचा। नए विश्वविद्यालयों में स्कॉलैस्टिसिज़्म ने सावधान प्रश्न-उत्तर पद्धति अपनाई। एंसेल्म ने सबसे महान संभव सत्ता के विचार से ईश्वर के लिए तर्क दिया। थॉमस एक्विनास ने अरस्तू को ईसाई आस्था से जोड़ा: तर्क और आस्था एक घर की दो मंज़िलें हैं, और तर्क दिखा सकता है कि पहला कारण है (पाँच मार्ग)। 1300 के दशक में विलियम ऑफ़ ओकम ने सरल व्याख्या पर ज़ोर दिया (ओकम का उस्तरा), और आस्था व तर्क अलग होने लगे, जिससे पुनर्जागरण और आधुनिक विज्ञान का रास्ता खुला।