तर्क, आधार-वाक्य और अनुमान
तर्कशास्त्र सही सोच का अध्ययन है। तर्क (argument) कथनों का ऐसा समूह है जिसमें कुछ कथन (आधार-वाक्य/premises) किसी दूसरे कथन (निष्कर्ष) के कारण के रूप में दिए जाते हैं। आधार-वाक्यों से निष्कर्ष तक का मानसिक क़दम अनुमान (inference) है।
संकेत-शब्द मदद करते हैं: क्योंकि, चूँकि आधार-वाक्य बताते हैं; इसलिए, अतः, फलतः निष्कर्ष बताते हैं। कथन (प्रतिज्ञप्ति) वह वाक्य है जो सच या झूठ हो; प्रश्न और आदेश कथन नहीं।
भाषा और स्पष्टता
नाम चीज़ों को बताते हैं; वाक्य दावे करते हैं। कई ग़लतियाँ अस्पष्ट भाषा से आती हैं: द्वि-अर्थकता (एक शब्द के दो अर्थ, जैसे 'कल' — बीता या आने वाला), अस्पष्टता ('लंबा', 'अमीर' बिना सीमा के) और भावना-भरे शब्द। पहले साफ़ शब्द, फिर अच्छा तर्क।
निगमनात्मक और आगमनात्मक तर्क
निगमनात्मक (deductive) तर्क निश्चितता चाहता है: आधार-वाक्य सच हों तो निष्कर्ष झूठा हो ही नहीं सकता। उदाहरण: सभी धातुएँ बिजली की चालक हैं; ताँबा धातु है; अतः ताँबा बिजली का चालक है।
आगमनात्मक (inductive) तर्क संभावना देता है: आधार-वाक्य निष्कर्ष को संभावित बनाते हैं, पक्का नहीं। उदाहरण: मैंने जितने कौए देखे सब काले थे; इसलिए शायद सभी कौए काले हैं।
निगमन अक्सर सामान्य से विशेष और आगमन विशेष से सामान्य की ओर जाता है, पर असली कसौटी है: क्या निष्कर्ष अनिवार्य रूप से (निगमन) या सिर्फ़ संभावित रूप से (आगमन) निकलता है?
वैधता, ठोसपन और प्रति-उदाहरण
निगमनात्मक तर्क वैध (valid) है अगर उसका ढाँचा पक्का करे कि सच्चे आधार-वाक्य सच्चा निष्कर्ष देंगे। वैधता ढाँचे की बात है, आधार-वाक्य असल में सच हैं या नहीं, इसकी नहीं।
तर्क ठोस (sound) है अगर वह वैध हो और सब आधार-वाक्य सच हों। सिर्फ़ ठोस तर्क अपना निष्कर्ष साबित करता है।
आम ढाँचे
- मोडस पोनेन्स (वैध): यदि P तो Q। P। अतः Q।
- मोडस टोलेन्स (वैध): यदि P तो Q। Q नहीं। अतः P नहीं।
- परिणाम की पुष्टि (अवैध): यदि P तो Q। Q। अतः P।
- पूर्ववर्ती का निषेध (अवैध): यदि P तो Q। P नहीं। अतः Q नहीं।
किसी ढाँचे का प्रति-उदाहरण उसी ढाँचे का ऐसा तर्क है जिसके आधार-वाक्य सच और निष्कर्ष झूठ हो। एक मिल जाए तो ढाँचा अवैध साबित।
आगमनात्मक तर्क के प्रकार और मज़बूती
आगमनात्मक तर्क मज़बूत या कमज़ोर होते हैं। मज़बूत तर्क के आधार-वाक्य भी सच हों तो वह विश्वसनीय (cogent) है।
- सामान्यीकरण: नमूने से पूरे समूह तक। बड़ा, यादृच्छिक, विविध नमूना हो तो मज़बूत। बहुत कम मामलों से (जल्दबाज़ी) या पक्षपाती नमूने से कमज़ोर।
- सांख्यिकीय न्यायवाक्य: 90% A, B हैं; x एक A है; अतः x शायद B है। मज़बूती प्रतिशत और x के सामान्य होने पर निर्भर।
- सादृश्य (analogy): दो चीज़ें कई बातों में मिलती हैं, तो शायद एक और बात में भी।
- कारण-संबंधी तर्क: बार-बार दिखते पैटर्न से कारण तक, जैसे विज्ञान के प्रयोग।
नया प्रमाण आगमनात्मक निष्कर्ष को कमज़ोर कर सकता है; सच्चे आधार-वाक्यों वाले वैध निगमन को नहीं।
निरुपाधिक प्रतिज्ञप्तियाँ और विधेय तर्क
पद (term) किसी वर्ग का नाम है, जैसे 'मनुष्य' या 'नश्वर चीज़ें'। निरुपाधिक प्रतिज्ञप्ति उद्देश्य पद S और विधेय पद P को जोड़ती है:
- A: सभी S, P हैं। — ∀x (Sx → Px)
- E: कोई S, P नहीं है। — ∀x (Sx → ¬Px)
- I: कुछ S, P हैं। — ∃x (Sx ∧ Px)
- O: कुछ S, P नहीं हैं। — ∃x (Sx ∧ ¬Px)
∀ = 'सभी के लिए', ∃ = 'कम से कम एक है', → 'यदि…तो', ∧ 'और', ¬ 'नहीं'। यह एक-स्थानीय (monadic) विधेय तर्क है। A और O एक-दूसरे के विरोधी हैं, E और I भी। घेरों के चित्र (3D जैसे) से न्यायवाक्य जाँचते हैं: देखिए कि निष्कर्ष अनिवार्य है या नहीं।
करके देखें: तर्क जासूस
आख़िरी 3D चरण में चारों ढाँचे जाँचिए। हर अवैध ढाँचे का अपना प्रति-उदाहरण बनाइए जिसमें आधार-वाक्य सच और निष्कर्ष झूठ हो। घर पर: कोई विज्ञापन या सोशल मीडिया पोस्ट ढूँढिए जो तर्क देती हो। उसके आधार-वाक्य और निष्कर्ष लिखिए। वह निगमन है या आगमन? वैध है या मज़बूत?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तर्क = आधार-वाक्य + निष्कर्ष
- वैध: सच्चे आधार-वाक्यों से झूठा निष्कर्ष संभव नहीं
- ठोस = वैध + सब आधार-वाक्य सच
- मोडस पोनेन्स: P → Q, P ⊢ Q; मोडस टोलेन्स: P → Q, ¬Q ⊢ ¬P
- A: ∀x(Sx→Px) E: ∀x(Sx→¬Px) I: ∃x(Sx∧Px) O: ∃x(Sx∧¬Px)
- मज़बूत आगमन + सच्चे आधार-वाक्य = विश्वसनीय (cogent)
हल किए गए उदाहरण
1. क्या यह वैध है? ठोस है? 'सभी मछलियाँ पानी में रहती हैं। डॉल्फ़िन पानी में रहती है। अतः डॉल्फ़िन मछली है।'
चरण 1: ढाँचा: सभी F, W हैं; d, W है; अतः d, F है। चरण 2: उसी ढाँचे का प्रति-उदाहरण: सभी बिल्लियाँ जानवर हैं; कुत्ता जानवर है; अतः कुत्ता बिल्ली है। आधार सच, निष्कर्ष झूठ। चरण 3: ढाँचा अवैध, और अवैध तर्क ठोस नहीं हो सकता।
2. 'बैटरी ख़त्म हो तो फ़ोन चालू नहीं होगा। फ़ोन चालू होता है। अतः बैटरी ख़त्म नहीं।' ढाँचे का नाम बताइए और जाँचिए।
P = बैटरी ख़त्म, Q = फ़ोन चालू नहीं होगा। आधार: P → Q और Q नहीं। निष्कर्ष: P नहीं। यह मोडस टोलेन्स है, जो वैध है। दोनों आधार सच हों तो ठोस भी।
3. 'इस स्कूल के 92% छात्र गणित में पास होते हैं। मीरा यहीं पढ़ती है। अतः मीरा शायद पास होगी।' यह किस तरह का तर्क है और इसे क्या कमज़ोर कर सकता है?
यह सांख्यिकीय न्यायवाक्य (आगमन) है। 92% ऊँचा है, इसलिए काफ़ी मज़बूत। अगर पता चले कि मीरा सामान्य नहीं, जैसे आधा साल अनुपस्थित रही, या 92% का आँकड़ा छोटे या पुराने नमूने से आया, तो यह कमज़ोर होगा।
आम गलतियाँ
- वैध को सच समझ लेना। कोई आधार-वाक्य झूठा हो तो वैध तर्क का निष्कर्ष भी झूठा हो सकता है।
- आगमनात्मक तर्क को 'वैध' या 'अवैध' कहना। वह मज़बूत या कमज़ोर होता है।
- परिणाम की पुष्टि: 'बारिश हो तो सड़क गीली; सड़क गीली है; अतः बारिश हुई।' दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
- बहुत कम मामलों से सामान्यीकरण (जल्दबाज़ी), जैसे एक बार जाकर पूरे शहर के बारे में राय बनाना।