Romania Clasa a IX-a Logic
अध्याय: 5
1. Logic and argumentation: introduction
Language, logic and argument
- तर्कशास्त्र: अच्छा तर्क कैसे काम करता है – तर्कशास्त्र (logic) सही सोच का अध्ययन है। तर्क में आधार-वाक्य (कारण) और निष्कर्ष होते हैं; इनके बीच का क़दम अनुमान है। निगमनात्मक तर्क में आधार-वाक्य सच हों तो निष्कर्ष सच होगा ही; ऐसा तर्क वैध है, और अगर आधार-वाक्य सचमुच सच हों तो ठोस (sound)। एक प्रति-उदाहरण किसी ढाँचे को अवैध साबित कर देता है। आगमनात्मक तर्क देखे गए मामलों से सामान्य या संभावित निष्कर्ष तक जाते हैं; वे मज़बूत या कमज़ोर होते हैं, पक्के नहीं। निरुपाधिक प्रतिज्ञप्तियाँ (A, E, I, O) और सरल विधेय तर्क (∀, ∃) तर्क को सटीक लिखने और दोष पकड़ने में मदद करते हैं।
2. Formal deductive logic: propositional logic
Propositional logic
- प्रतिज्ञप्ति तर्कशास्त्र: वाक्यों से वैध तर्क तक – प्रतिज्ञप्ति तर्कशास्त्र ऐसे वाक्यों का अध्ययन है जो सत्य या असत्य हों, और उन्हें जोड़ने वाले शब्दों का: नहीं (¬), और (∧), या (∨), यदि…तो (→), यदि और केवल यदि (↔)। सत्यता सारणी सत्य-मानों के सभी संभव मेल लिखती है। तर्क वैध है जब कोई पंक्ति सभी आधार-वाक्यों को सत्य और निष्कर्ष को असत्य न बनाए। मोडस पोनेन्स और मोडस टोलेन्स जैसे वैध रूप प्राकृतिक निगमन के नियम बनते हैं।
3. Advanced formal logic: predicate logic and its applications
Monadic predicate logic · Terms · Categorical propositions · Deductive inferences with categorical propositions
- तर्कशास्त्र: अच्छा तर्क कैसे काम करता है – तर्कशास्त्र (logic) सही सोच का अध्ययन है। तर्क में आधार-वाक्य (कारण) और निष्कर्ष होते हैं; इनके बीच का क़दम अनुमान है। निगमनात्मक तर्क में आधार-वाक्य सच हों तो निष्कर्ष सच होगा ही; ऐसा तर्क वैध है, और अगर आधार-वाक्य सचमुच सच हों तो ठोस (sound)। एक प्रति-उदाहरण किसी ढाँचे को अवैध साबित कर देता है। आगमनात्मक तर्क देखे गए मामलों से सामान्य या संभावित निष्कर्ष तक जाते हैं; वे मज़बूत या कमज़ोर होते हैं, पक्के नहीं। निरुपाधिक प्रतिज्ञप्तियाँ (A, E, I, O) और सरल विधेय तर्क (∀, ∃) तर्क को सटीक लिखने और दोष पकड़ने में मदद करते हैं।
- तार्किक विवेचन (Logical Reasoning) – तार्किक विवेचन यानी तथ्यों (आधार-वाक्यों) से किसी निष्कर्ष तक ऐसे पहुँचना जिसे जाँचा जा सके। कथन या तो सत्य होता है या असत्य। कथनों को नहीं, और, या, यदि…तो और यदि और केवल यदि से जोड़ते हैं, और सत्यता सारणी बताती है कि परिणाम कब सत्य है। निगमन (deduction) में अगर आधार सत्य हों और रूप वैध हो तो निष्कर्ष सत्य होना ही चाहिए (मोडस पोनेंस, मोडस टोलेंस, न्यायवाक्य)। 'सभी', 'कोई नहीं', 'कुछ' वाले न्यायवाक्य वेन आरेख से जाँचे जाते हैं। आगमन (induction) और सादृश्य उदाहरणों से सामान्य बात तक जाते हैं: निष्कर्ष केवल संभावित होता है। प्रत्यक्ष उपपत्ति ज्ञात बातों से कदम-दर-कदम चलती है; अप्रत्यक्ष उपपत्ति उल्टा मानकर विरोधाभास तक पहुँचती है। तर्कदोष लुभावने पर गलत तर्क हैं।
4. Inductive logic: non-deductive reasoning
Induction and analogy
- तार्किक विवेचन (Logical Reasoning) – तार्किक विवेचन यानी तथ्यों (आधार-वाक्यों) से किसी निष्कर्ष तक ऐसे पहुँचना जिसे जाँचा जा सके। कथन या तो सत्य होता है या असत्य। कथनों को नहीं, और, या, यदि…तो और यदि और केवल यदि से जोड़ते हैं, और सत्यता सारणी बताती है कि परिणाम कब सत्य है। निगमन (deduction) में अगर आधार सत्य हों और रूप वैध हो तो निष्कर्ष सत्य होना ही चाहिए (मोडस पोनेंस, मोडस टोलेंस, न्यायवाक्य)। 'सभी', 'कोई नहीं', 'कुछ' वाले न्यायवाक्य वेन आरेख से जाँचे जाते हैं। आगमन (induction) और सादृश्य उदाहरणों से सामान्य बात तक जाते हैं: निष्कर्ष केवल संभावित होता है। प्रत्यक्ष उपपत्ति ज्ञात बातों से कदम-दर-कदम चलती है; अप्रत्यक्ष उपपत्ति उल्टा मानकर विरोधाभास तक पहुँचती है। तर्कदोष लुभावने पर गलत तर्क हैं।
5. Applied logic: argumentation and critical thinking
Evaluating arguments and fallacies · Arguments, counter-arguments, persuasion
- तर्कदोष: अच्छे दिखने वाले तर्क कैसे ग़लत होते हैं – तर्कदोष (fallacy) तर्क करने की ऐसी ग़लती है जो तर्क को कमज़ोर या अवैध बना देती है, भले वह सही लगे। औपचारिक तर्कदोष निगमनात्मक तर्क के रूप (ढाँचे) की ग़लती है, जैसे परिणाम की पुष्टि। अनौपचारिक तर्कदोष विषय, भाषा या प्रासंगिकता की ग़लती है, जैसे व्यक्तिगत आक्षेप, पुतला तर्क, झूठा द्विविकल्प, फिसलन भरी ढलान, भीड़ का तर्क, झूठा प्रमाण, जल्दबाज़ सामान्यीकरण, 'बाद में इसलिए कारण' और चक्रीय तर्क। इन्हें पहचानना निष्पक्ष चर्चा में मदद करता है।