रूप-विज्ञान क्या है?
रूप-विज्ञान (morphology) शब्दों की बनावट पढ़ता है: वे किन छोटे हिस्सों से बने हैं और कैसे बदलते हैं।
शब्द का सबसे छोटा अर्थवाला हिस्सा रूपिम (morpheme) कहलाता है। "अन्याय" में दो रूपिम हैं: अ- (नहीं) और न्याय।
शब्द दो तरह से बदलते हैं।
- रूपांतरण (inflection): रूप बदलता है पर शब्द-भेद वही रहता है: लड़का → लड़के, जाता → जाएगा। इससे वचन या काल जैसी व्याकरणिक कोटि दिखती है।
- शब्द-निर्माण (derivation): नया शब्द बनता है: सुंदर → सुंदरता, पढ़ना → पढ़ाई। अक्सर शब्द-भेद बदल जाता है।
व्याकरणिक कोटि विकल्पों का समूह है जिनमें से शब्द को चुनना पड़ता है, जैसे वचन (एक या अनेक) और काल (भूत, वर्तमान, भविष्यत्)।
शब्द-भेद: सार्थक शब्द और संबंध-सूचक शब्द
शब्दों को उनके अर्थ और काम के आधार पर शब्द-भेदों में बाँटते हैं।
विकारी शब्द (जिनके रूप बदलते हैं) मुख्य अर्थ ढोते हैं:
- संज्ञा व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव का नाम है: लड़की, नदी, साहस।
- विशेषण संज्ञा का गुण बताता है: बड़ा, लाल, दयालु।
- सर्वनाम संज्ञा की जगह आता है: वह, हम, यह, कौन।
- संख्यावाचक शब्द गिनती या क्रम बताते हैं: तीन, तीसरा।
- क्रिया काम या होना बताती है: दौड़ना, सोचना, होना।
अविकारी शब्द (जिनके रूप नहीं बदलते): क्रिया-विशेषण (जल्दी, अब, यहाँ), संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।
शब्द-भेद वाक्य में काम से तय होता है। सोना "सोना महँगा है" में संज्ञा है, "मुझे सोना है" में क्रिया।
संज्ञा: भेद, लिंग, वचन और कारक
भेद। जातिवाचक संज्ञा पूरी जाति का नाम है (शहर); व्यक्तिवाचक एक का नाम (दिल्ली, किरण); भाववाचक भाव का नाम (आज़ादी); समूहवाचक समूह का नाम (टीम)।
वचन। एकवचन = एक; बहुवचन = एक से ज़्यादा। हिंदी में रूप बदलता है: लड़का → लड़के, लड़की → लड़कियाँ, किताब → किताबें। कुछ शब्द सिर्फ़ बहुवचन में चलते हैं: प्राण, दर्शन।
लिंग। हिंदी में हर संज्ञा या तो पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग, और क्रिया तथा विशेषण उसी के अनुसार बदलते हैं: अच्छा लड़का जाता है, अच्छी लड़की जाती है। कुछ शब्द दोनों के लिए चलते हैं (उभयलिंगी): शिक्षक, डॉक्टर, विद्यार्थी। पेशे के नामों में आजकल एक ही रूप चुनने की ओर झुकाव है, पर शिक्षक/शिक्षिका जैसे जोड़े भी चलते हैं।
कारक। कारक बताता है कि संज्ञा वाक्य में क्या काम कर रही है: कर्ता (करने वाला), कर्म (जिस पर काम हुआ), संबंध (मालिक), संबोधन (जिसे पुकारा गया)। हिंदी में कारक चिह्न अलग से आते हैं (ने, को, से, का, में) और संज्ञा का रूप भी बदलता है: लड़का → लड़के ने, लड़कों को; ओ लड़के! (संबोधन)। कुछ भाषाओं में अंत ही बदलते हैं, और संज्ञाओं के अंत बदलने के ढर्रे को शब्द-रूप या वर्ग (declension) कहते हैं।
अविकारी संज्ञाएँ: कई उधार लिए शब्द ज्यों-के-त्यों रहते हैं, जैसे अंग्रेज़ी से आए कुछ नाम।
विशेषण, सर्वनाम और संख्यावाचक
विशेषण के भेद। गुणवाचक (अच्छा, लंबा) गुण बताता है और उसकी अवस्थाएँ होती हैं। संख्यावाचक (दो, कुछ) गिनती बताता है। सार्वनामिक (यह, मेरा) संकेत या स्वामी बताता है।
अवस्थाएँ (तुलना की श्रेणियाँ)।
- मूलावस्था: लंबा
- उत्तरावस्था: इससे लंबा, ज़्यादा लंबा
- उत्तमावस्था: सबसे लंबा
हिंदी में से, ज़्यादा, अधिक, सबसे लगाकर अवस्था बताते हैं। संस्कृत शब्द में -तर, -तम भी चलता है: सुंदर, सुंदरतर, सुंदरतम।
मेल (agreement)। आकारांत विशेषण संज्ञा के लिंग और वचन के अनुसार बदलता है: बड़ा लड़का, बड़े लड़के, बड़ी लड़की। जो विशेषण आ पर नहीं खत्म होते (सुंदर, लाल) वे नहीं बदलते।
विशेषण का संज्ञा बन जाना। कभी विशेषण संज्ञा का काम करता है: गरीबों की मदद करो, बीमारों की सेवा।
सर्वनाम के भेद: पुरुषवाचक (मैं, तुम, वह), निजवाचक (अपना), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), प्रश्नवाचक (कौन, क्या), संबंधवाचक (जो)।
संख्यावाचक। गणनावाचक (एक, दो) और क्रमवाचक (पहला, दूसरा)। संख्या संज्ञा के रूप पर असर डालती है: एक किताब, दो किताबें। कुछ भाषाओं (रूसी, यूक्रेनी) में 2 से 4 के बाद और 5 से बाद की संज्ञा का रूप अलग होता है।
क्रिया: काल, पक्ष, वृत्ति और वाच्य
क्रिया में कई व्याकरणिक कोटियाँ एक साथ होती हैं।
काल काम का समय बताता है: भूतकाल (दौड़ा), वर्तमान (दौड़ता है), भविष्यत् (दौड़ेगा)।
पक्ष (aspect) बताता है कि काम को किस रूप में देखा गया। पूर्ण पक्ष में काम खत्म है: मैंने लिख लिया है। अपूर्ण या चलता हुआ पक्ष: मैं लिख रहा हूँ, मैं रोज़ लिखता हूँ। रूसी और यूक्रेनी में पूर्ण और अपूर्ण के लिए अलग क्रियाएँ होती हैं।
वृत्ति (mood) बोलने वाले का भाव दिखाती है: निश्चयार्थ (तथ्य: वह आता है), आज्ञार्थ (आदेश: आओ!), संभावनार्थ / संकेतार्थ (इच्छा या शर्त: वह आता तो...)।
वाच्य। कर्तृवाच्य में कर्ता काम करता है (रवि ने गेंद मारी)। कर्मवाच्य में कर्म प्रमुख है (रवि द्वारा गेंद मारी गई)। भाववाच्य में भाव प्रमुख है (मुझसे चला नहीं जाता)।
पुरुष और वचन। क्रिया कर्ता के साथ मेल खाती है: मैं दौड़ता हूँ, वह दौड़ती है।
अपूर्ण (अकर्तृक) रूप। जो क्रिया-रूप पुरुष नहीं दिखाते: क्रियार्थक संज्ञा (दौड़ना), कृदंत / कृदंत विशेषण (दौड़ता हुआ घोड़ा, टूटा गिलास) और पूर्वकालिक कृदंत (घर पहुँचकर वह गिर पड़ा)। पहला संज्ञा-जैसा, दूसरा विशेषण-जैसा, तीसरा क्रिया-विशेषण-जैसा काम करता है।
अनियमित रूप: कुछ क्रियाएँ सामान्य नियम नहीं मानतीं, जैसे जाना → गया।
क्रिया-विशेषण
क्रिया-विशेषण क्रिया, विशेषण या दूसरे क्रिया-विशेषण के बारे में और बताता है। इसमें लिंग-वचन से कोई बदलाव नहीं होता।
अर्थ के अनुसार भेद:
- रीतिवाचक (कैसे): धीरे, अच्छी तरह
- कालवाचक (कब): अब, कल
- स्थानवाचक (कहाँ): यहाँ, दूर
- परिमाणवाचक (कितना): बहुत, थोड़ा
- आवृत्तिवाचक (कितनी बार): हमेशा, कभी-कभी
अवस्थाएँ। रीतिवाचक क्रिया-विशेषण में भी अवस्था होती है: तेज़, ज़्यादा तेज़, सबसे तेज़; ध्यान से, ज़्यादा ध्यान से, सबसे ध्यान से।
ध्यान दो: तेज़ विशेषण भी है (तेज़ गाड़ी) और क्रिया-विशेषण भी (वह तेज़ दौड़ा)। काम से पहचानो।
करके देखो: शब्दों को खुद छाँटो
- अपने दिन के बारे में 8 से 10 शब्दों का एक वाक्य लिखो।
- संज्ञा, क्रिया, विशेषण और क्रिया-विशेषण को अलग-अलग रंग से रेखांकित करो।
- वाक्य को दूसरे समय का बनाओ (कल या आने वाला कल)। कौन-से शब्द बदले? सिर्फ़ क्रिया या और भी?
- एक संज्ञा को बहुवचन बनाओ। और क्या बदलना पड़ा?
- यही अपनी किसी दूसरी भाषा में करके देखो और पहचानो कि उसमें कौन-सी कोटियाँ हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: रूपिम = शब्द का सबसे छोटा अर्थवाला हिस्सा (अ + न्याय)
- मुख्य शब्द: रूपांतरण = एक ही शब्द-भेद के अंदर रूप बदलना; शब्द-निर्माण = नया शब्द बनना
- शब्द-भेद: संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम, संख्यावाचक, क्रिया (विकारी); क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक (अविकारी)
- संज्ञा की कोटियाँ: भेद, लिंग, वचन, कारक
- विशेषण और क्रिया-विशेषण: मूलावस्था → उत्तरावस्था → उत्तमावस्था (लंबा, ज़्यादा लंबा, सबसे लंबा)
- क्रिया की कोटियाँ: पुरुष, वचन, काल, पक्ष, वृत्ति, वाच्य
- नियम: शब्द-भेद वाक्य में काम से तय होता है, अकेले शब्द से नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. इस वाक्य के हर शब्द का भेद बताओ: "बहादुर लड़की जल्दी चढ़ी।"
बहादुर = विशेषण, लड़की = संज्ञा, जल्दी = क्रिया-विशेषण, चढ़ी = क्रिया (भूतकाल, स्त्रीलिंग)।
2. इन विशेषणों की तीनों अवस्थाएँ लिखो: अच्छा, सुंदर।
अच्छा, इससे अच्छा (बेहतर), सबसे अच्छा (सर्वोत्तम)। सुंदर, ज़्यादा सुंदर (सुंदरतर), सबसे सुंदर (सुंदरतम)।
3. काल और वाच्य पहचानो: "चिट्ठियाँ कल डाली गईं।"
काल: भूतकाल (डाली गईं)। वाच्य: कर्मवाच्य, क्योंकि चिट्ठियाँ (कर्म) प्रमुख हैं। कर्तृवाच्य रूप: "किसी ने कल चिट्ठियाँ डालीं।"
4. "सोना" हर वाक्य में कौन-सा शब्द-भेद है? (क) सोना महँगा है। (ख) मुझे जल्दी सोना है। (ग) सोना पीला होता है।
(क) संज्ञा (धातु), (ख) क्रिया (नींद), (ग) संज्ञा। वाक्य शब्द-भेद तय करता है।
5. इन क्रिया-विशेषणों को अर्थ के अनुसार बाँटो: यहाँ, कभी-कभी, बहुत, धीरे, कल।
यहाँ = स्थानवाचक; कभी-कभी = आवृत्तिवाचक; बहुत = परिमाणवाचक; धीरे = रीतिवाचक; कल = कालवाचक।
6. "मुस्कुराकर मीरा ने दरवाज़ा खोला।" यहाँ "मुस्कुराकर" क्या है और क्या करता है?
यह पूर्वकालिक कृदंत है (क्रिया का वह रूप जो क्रिया-विशेषण जैसा काम करता है)। यह बताता है कि मीरा ने दरवाज़ा कैसे खोला। इसमें पुरुष या काल अलग से नहीं दिखता।
आम गलतियाँ
- अकेले शब्द को देखकर शब्द-भेद तय करना। हमेशा वाक्य में उसका काम देखो।
- "ज़्यादा" और "-तर" दोनों साथ लगाना ("ज़्यादा सुंदरतर")। एक ही तरीका चुनो।
- रूपांतरण और शब्द-निर्माण को मिलाना। पढ़ाई, पढ़ना से बना नया शब्द है; पढ़ेगा उसी क्रिया का रूप है।
- मेल भूल जाना। विशेषण और क्रिया को संज्ञा के लिंग-वचन के अनुसार बदलना होता है।
- कृदंत को मुख्य क्रिया मान लेना। "टूटा गिलास" में टूटा विशेषण जैसा शब्द है।