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रूप-विज्ञान: शब्द-भेद और शब्दों के रूप

रूप-विज्ञान (morphology) बताता है कि शब्द कैसे बनते हैं और कैसे रूप बदलते हैं। हर शब्द किसी शब्द-भेद का होता है: संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम, संख्यावाचक, क्रिया या क्रिया-विशेषण। संज्ञा लिंग, वचन और कारक से बदलती है; विशेषण अवस्था से; क्रिया काल, पक्ष, वृत्ति और वाच्य से; क्रिया-विशेषण अवस्था से।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. वाक्य शब्दों की कतार है, और हर शब्द का अपना काम है: विशेषण, संज्ञा, क्रिया, क्रिया-विशेषण।
  2. संज्ञा वचन के हिसाब से बदलती है। एक कुत्ता से कई कुत्ते। शब्द का अंत बदल गया।
  3. विशेषण अवस्था के हिसाब से बदलता है: लंबा, ज़्यादा लंबा, सबसे लंबा। हर बार मीनार ऊँची होती है।
  4. क्रिया समय के हिसाब से बदलती है। बाईं ओर बीता समय (दौड़ा), बीच में अभी (दौड़ता है), दाईं ओर आगे (दौड़ेगा)।
  5. क्रिया-विशेषण बताता है कि काम कैसे हुआ: धीरे यानी छोटा निशान, तेज़ यानी लंबा निशान।
  6. अब खेलो: शब्द का भेद चुनो और स्लाइडर चलाओ। रूप और आकार साथ-साथ बदलते देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

शब्द का भेद कैसे पहचानें?

देखो कि वाक्य में शब्द क्या काम कर रहा है। एक ही शब्द एक वाक्य में संज्ञा और दूसरे में क्रिया हो सकता है।

संज्ञा का रूप अनेक होने पर क्यों बदलता है?

वचन एक व्याकरणिक कोटि है। अंत बदलने से सुनने वाले को बिना गिनती बोले पता चल जाता है कि कितने हैं।

क्या सभी विशेषणों की अवस्थाएँ होती हैं?

नहीं। लंबा, नरम जैसे गुणवाचक विशेषणों की होती हैं। "लकड़ी का" या "सालाना" जैसे विशेषणों की अवस्थाएँ नहीं होतीं।

काल और पक्ष में क्या फ़र्क है?

काल बताता है कि काम कब हुआ (बीता, अभी, आगे)। पक्ष बताता है कि काम को कैसे देखा गया: पूरा हो गया या अभी चल रहा है।

क्या क्रिया-विशेषण विशेषण की तरह बदलते हैं?

रीतिवाचक क्रिया-विशेषण की अवस्थाएँ होती हैं (तेज़, ज़्यादा तेज़, सबसे तेज़), पर क्रिया-विशेषण लिंग-वचन से नहीं बदलते।

क्या मैं यह अपनी भाषा के शब्दों पर आज़मा सकता हूँ?

हाँ। अपनी भाषा के शब्द लेकर देखो: संज्ञा आम तौर पर वचन से, क्रिया समय से और विशेषण अवस्था या मेल से बदलते हैं।

रूप-विज्ञान क्या है?

रूप-विज्ञान (morphology) शब्दों की बनावट पढ़ता है: वे किन छोटे हिस्सों से बने हैं और कैसे बदलते हैं।

शब्द का सबसे छोटा अर्थवाला हिस्सा रूपिम (morpheme) कहलाता है। "अन्याय" में दो रूपिम हैं: अ- (नहीं) और न्याय।

शब्द दो तरह से बदलते हैं।

व्याकरणिक कोटि विकल्पों का समूह है जिनमें से शब्द को चुनना पड़ता है, जैसे वचन (एक या अनेक) और काल (भूत, वर्तमान, भविष्यत्)।

शब्द-भेद: सार्थक शब्द और संबंध-सूचक शब्द

शब्दों को उनके अर्थ और काम के आधार पर शब्द-भेदों में बाँटते हैं।

विकारी शब्द (जिनके रूप बदलते हैं) मुख्य अर्थ ढोते हैं:

अविकारी शब्द (जिनके रूप नहीं बदलते): क्रिया-विशेषण (जल्दी, अब, यहाँ), संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

शब्द-भेद वाक्य में काम से तय होता है। सोना "सोना महँगा है" में संज्ञा है, "मुझे सोना है" में क्रिया।

संज्ञा: भेद, लिंग, वचन और कारक

भेद। जातिवाचक संज्ञा पूरी जाति का नाम है (शहर); व्यक्तिवाचक एक का नाम (दिल्ली, किरण); भाववाचक भाव का नाम (आज़ादी); समूहवाचक समूह का नाम (टीम)।

वचन। एकवचन = एक; बहुवचन = एक से ज़्यादा। हिंदी में रूप बदलता है: लड़का → लड़के, लड़की → लड़कियाँ, किताब → किताबें। कुछ शब्द सिर्फ़ बहुवचन में चलते हैं: प्राण, दर्शन।

लिंग। हिंदी में हर संज्ञा या तो पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग, और क्रिया तथा विशेषण उसी के अनुसार बदलते हैं: अच्छा लड़का जाता है, अच्छी लड़की जाती है। कुछ शब्द दोनों के लिए चलते हैं (उभयलिंगी): शिक्षक, डॉक्टर, विद्यार्थी। पेशे के नामों में आजकल एक ही रूप चुनने की ओर झुकाव है, पर शिक्षक/शिक्षिका जैसे जोड़े भी चलते हैं।

कारक। कारक बताता है कि संज्ञा वाक्य में क्या काम कर रही है: कर्ता (करने वाला), कर्म (जिस पर काम हुआ), संबंध (मालिक), संबोधन (जिसे पुकारा गया)। हिंदी में कारक चिह्न अलग से आते हैं (ने, को, से, का, में) और संज्ञा का रूप भी बदलता है: लड़का → लड़के ने, लड़कों को; ओ लड़के! (संबोधन)। कुछ भाषाओं में अंत ही बदलते हैं, और संज्ञाओं के अंत बदलने के ढर्रे को शब्द-रूप या वर्ग (declension) कहते हैं।

अविकारी संज्ञाएँ: कई उधार लिए शब्द ज्यों-के-त्यों रहते हैं, जैसे अंग्रेज़ी से आए कुछ नाम।

विशेषण, सर्वनाम और संख्यावाचक

विशेषण के भेद। गुणवाचक (अच्छा, लंबा) गुण बताता है और उसकी अवस्थाएँ होती हैं। संख्यावाचक (दो, कुछ) गिनती बताता है। सार्वनामिक (यह, मेरा) संकेत या स्वामी बताता है।

अवस्थाएँ (तुलना की श्रेणियाँ)।

हिंदी में से, ज़्यादा, अधिक, सबसे लगाकर अवस्था बताते हैं। संस्कृत शब्द में -तर, -तम भी चलता है: सुंदर, सुंदरतर, सुंदरतम।

मेल (agreement)। आकारांत विशेषण संज्ञा के लिंग और वचन के अनुसार बदलता है: बड़ा लड़का, बड़े लड़के, बड़ी लड़की। जो विशेषण आ पर नहीं खत्म होते (सुंदर, लाल) वे नहीं बदलते।

विशेषण का संज्ञा बन जाना। कभी विशेषण संज्ञा का काम करता है: गरीबों की मदद करो, बीमारों की सेवा।

सर्वनाम के भेद: पुरुषवाचक (मैं, तुम, वह), निजवाचक (अपना), निश्चयवाचक (यह, वह), अनिश्चयवाचक (कोई, कुछ), प्रश्नवाचक (कौन, क्या), संबंधवाचक (जो)।

संख्यावाचक। गणनावाचक (एक, दो) और क्रमवाचक (पहला, दूसरा)। संख्या संज्ञा के रूप पर असर डालती है: एक किताब, दो किताबें। कुछ भाषाओं (रूसी, यूक्रेनी) में 2 से 4 के बाद और 5 से बाद की संज्ञा का रूप अलग होता है।

क्रिया: काल, पक्ष, वृत्ति और वाच्य

क्रिया में कई व्याकरणिक कोटियाँ एक साथ होती हैं।

काल काम का समय बताता है: भूतकाल (दौड़ा), वर्तमान (दौड़ता है), भविष्यत् (दौड़ेगा)।

पक्ष (aspect) बताता है कि काम को किस रूप में देखा गया। पूर्ण पक्ष में काम खत्म है: मैंने लिख लिया है। अपूर्ण या चलता हुआ पक्ष: मैं लिख रहा हूँ, मैं रोज़ लिखता हूँ। रूसी और यूक्रेनी में पूर्ण और अपूर्ण के लिए अलग क्रियाएँ होती हैं।

वृत्ति (mood) बोलने वाले का भाव दिखाती है: निश्चयार्थ (तथ्य: वह आता है), आज्ञार्थ (आदेश: आओ!), संभावनार्थ / संकेतार्थ (इच्छा या शर्त: वह आता तो...)।

वाच्य। कर्तृवाच्य में कर्ता काम करता है (रवि ने गेंद मारी)। कर्मवाच्य में कर्म प्रमुख है (रवि द्वारा गेंद मारी गई)। भाववाच्य में भाव प्रमुख है (मुझसे चला नहीं जाता)।

पुरुष और वचन। क्रिया कर्ता के साथ मेल खाती है: मैं दौड़ता हूँ, वह दौड़ती है।

अपूर्ण (अकर्तृक) रूप। जो क्रिया-रूप पुरुष नहीं दिखाते: क्रियार्थक संज्ञा (दौड़ना), कृदंत / कृदंत विशेषण (दौड़ता हुआ घोड़ा, टूटा गिलास) और पूर्वकालिक कृदंत (घर पहुँचकर वह गिर पड़ा)। पहला संज्ञा-जैसा, दूसरा विशेषण-जैसा, तीसरा क्रिया-विशेषण-जैसा काम करता है।

अनियमित रूप: कुछ क्रियाएँ सामान्य नियम नहीं मानतीं, जैसे जाना → गया।

क्रिया-विशेषण

क्रिया-विशेषण क्रिया, विशेषण या दूसरे क्रिया-विशेषण के बारे में और बताता है। इसमें लिंग-वचन से कोई बदलाव नहीं होता।

अर्थ के अनुसार भेद:

अवस्थाएँ। रीतिवाचक क्रिया-विशेषण में भी अवस्था होती है: तेज़, ज़्यादा तेज़, सबसे तेज़; ध्यान से, ज़्यादा ध्यान से, सबसे ध्यान से।

ध्यान दो: तेज़ विशेषण भी है (तेज़ गाड़ी) और क्रिया-विशेषण भी (वह तेज़ दौड़ा)। काम से पहचानो।

करके देखो: शब्दों को खुद छाँटो

  1. अपने दिन के बारे में 8 से 10 शब्दों का एक वाक्य लिखो।
  2. संज्ञा, क्रिया, विशेषण और क्रिया-विशेषण को अलग-अलग रंग से रेखांकित करो।
  3. वाक्य को दूसरे समय का बनाओ (कल या आने वाला कल)। कौन-से शब्द बदले? सिर्फ़ क्रिया या और भी?
  4. एक संज्ञा को बहुवचन बनाओ। और क्या बदलना पड़ा?
  5. यही अपनी किसी दूसरी भाषा में करके देखो और पहचानो कि उसमें कौन-सी कोटियाँ हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. इस वाक्य के हर शब्द का भेद बताओ: "बहादुर लड़की जल्दी चढ़ी।"

बहादुर = विशेषण, लड़की = संज्ञा, जल्दी = क्रिया-विशेषण, चढ़ी = क्रिया (भूतकाल, स्त्रीलिंग)।

2. इन विशेषणों की तीनों अवस्थाएँ लिखो: अच्छा, सुंदर।

अच्छा, इससे अच्छा (बेहतर), सबसे अच्छा (सर्वोत्तम)। सुंदर, ज़्यादा सुंदर (सुंदरतर), सबसे सुंदर (सुंदरतम)।

3. काल और वाच्य पहचानो: "चिट्ठियाँ कल डाली गईं।"

काल: भूतकाल (डाली गईं)। वाच्य: कर्मवाच्य, क्योंकि चिट्ठियाँ (कर्म) प्रमुख हैं। कर्तृवाच्य रूप: "किसी ने कल चिट्ठियाँ डालीं।"

4. "सोना" हर वाक्य में कौन-सा शब्द-भेद है? (क) सोना महँगा है। (ख) मुझे जल्दी सोना है। (ग) सोना पीला होता है।

(क) संज्ञा (धातु), (ख) क्रिया (नींद), (ग) संज्ञा। वाक्य शब्द-भेद तय करता है।

5. इन क्रिया-विशेषणों को अर्थ के अनुसार बाँटो: यहाँ, कभी-कभी, बहुत, धीरे, कल।

यहाँ = स्थानवाचक; कभी-कभी = आवृत्तिवाचक; बहुत = परिमाणवाचक; धीरे = रीतिवाचक; कल = कालवाचक।

6. "मुस्कुराकर मीरा ने दरवाज़ा खोला।" यहाँ "मुस्कुराकर" क्या है और क्या करता है?

यह पूर्वकालिक कृदंत है (क्रिया का वह रूप जो क्रिया-विशेषण जैसा काम करता है)। यह बताता है कि मीरा ने दरवाज़ा कैसे खोला। इसमें पुरुष या काल अलग से नहीं दिखता।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन-सा शब्द-भेद बताता है कि काम कैसे हुआ?
2. "लंबा" की उत्तमावस्था है:
3. "चिट्ठी रवि द्वारा लिखी गई" किस वाच्य में है?
4. इनमें रूपांतरण का उदाहरण कौन-सा है?
5. "दौड़ता हुआ घोड़ा" में "दौड़ता हुआ" है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूप-विज्ञान और वाक्य-विन्यास में क्या अंतर है?

रूप-विज्ञान अकेले शब्द की बनावट और रूप के बारे में है। वाक्य-विन्यास यह देखता है कि शब्द मिलकर वाक्यांश और वाक्य कैसे बनाते हैं।

रूपांतरण और शब्द-निर्माण में क्या अंतर है?

रूपांतरण में शब्द का रूप कोटि दिखाने के लिए बदलता है (लड़के, जाएगा) और शब्द-भेद वही रहता है। शब्द-निर्माण में नया शब्द बनता है (सुंदरता) और अक्सर शब्द-भेद बदल जाता है।

कुछ भाषाओं में शब्दों के अंत ज़्यादा क्यों बदलते हैं?

हर भाषा व्याकरण अलग तरीके से दिखाती है। हिंदी, रूसी और जर्मन संज्ञा और विशेषण पर लिंग और कारक चिह्नित करती हैं; अंग्रेज़ी ज़्यादातर शब्द-क्रम और छोटे शब्दों से काम चलाती है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

यूक्रेन10 класMorphology
यूक्रेन10 класMorphological norm: noun
यूक्रेन11 класMorphological norm: other parts of speech

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