मनोवैज्ञानिक विकार क्या है?
उदासी, चिंता या ग़ुस्सा महसूस करना सामान्य है। मनोवैज्ञानिक (मानसिक) विकार ऐसा ढर्रा है जो:
- उस व्यक्ति और उसकी संस्कृति के लिए तेज़ और असामान्य हो,
- लंबे समय तक रहे, सिर्फ़ एक बुरा दिन नहीं,
- व्यक्ति को तकलीफ़ दे, और
- दुष्क्रियात्मक हो: स्कूल, काम, नींद या दोस्ती में रुकावट डाले।
विकार आम हैं और इनका इलाज होता है। मन के लिए डॉक्टर के पास जाना उतना ही समझदारी है जितना शरीर के लिए। लेबल सावधानी से इस्तेमाल करने चाहिए ताकि कलंक (stigma, अनुचित नकारात्मक धारणा) न बने।
नैदानिक अवसाद का निदान
नैदानिक अवसाद (clinical depression, जिसे प्रमुख या एकध्रुवी अवसाद भी कहते हैं) का निदान प्रशिक्षित विशेषज्ञ वर्गीकरण पुस्तिका से करते हैं: ICD-11 (विश्व स्वास्थ्य संगठन) या DSM-5 (अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन)।
- मुख्य लक्षण: लगातार उदास मन और/या रोज़ की गतिविधियों में रुचि या आनंद ख़त्म होना।
- दूसरे लक्षण: थकान या कम ऊर्जा, बहुत ज़्यादा या बहुत कम नींद, भूख या वज़न में बदलाव, बेकार या दोषी महसूस करना, ध्यान न लगना, निराशा, मृत्यु के विचार।
- समय: ज़्यादातर दिन, लगभग रोज़, कम से कम 2 सप्ताह।
- गंभीरता: हल्का, मध्यम या गंभीर, लक्षणों की संख्या, तीव्रता और जीवन पर असर के अनुसार।
डॉक्टर दूसरे कारण भी जाँचते हैं, जैसे कोई शारीरिक बीमारी या हाल में किसी अपने के खोने का शोक।
जैविक और मनोवैज्ञानिक व्याख्याएँ
जैविक व्याख्या
- तंत्रिकासंचारी (neurotransmitters): तंत्रिका कोशिकाएँ सिनैप्स नाम के छोटे गैप के पार रसायनों से संदेश भेजती हैं। सेरोटोनिन का कम स्तर उदास मन, ख़राब नींद और भूख बदलने से जुड़ा है।
- जीन: अवसाद परिवारों में चलता है। समरूप जुड़वाँ में एक को हो, तो दूसरे को असमरूप जुड़वाँ से ज़्यादा बार होता है। जीन जोखिम बढ़ाते हैं, पक्का नहीं करते।
मूल्यांकन: सेरोटोनिन बढ़ाने वाली SSRI दवाएँ बहुत लोगों की मदद करती हैं, जो इस सिद्धांत का समर्थन है। पर सबकी मदद नहीं होती, और कम सेरोटोनिन अवसाद का कारण ही नहीं, परिणाम भी हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक व्याख्या
- बेक का नकारात्मक त्रिक: स्वयं ("मैं बेकार हूँ"), दुनिया ("किसी को परवाह नहीं") और भविष्य ("कभी ठीक नहीं होगा") के बारे में नकारात्मक सोच।
- ग़लत सोच: जैसे अति-सामान्यीकरण ("एक ख़राब अंक मतलब मैं हर चीज़ में फ़ेल") और अच्छी बातें अनदेखी करना।
- किसी अपने को खोना या बुलीइंग जैसी तनाव वाली घटनाएँ ये विचार जगा सकती हैं।
मूल्यांकन: यह बताता है कि CBT क्यों काम करती है और उम्मीद देता है कि सोच बदल सकती है। पर यह कहना कठिन है कि नकारात्मक सोच अवसाद लाती है या अवसाद नकारात्मक सोच। ज़्यादातर विशेषज्ञ दोनों व्याख्याएँ मिलाकर देखते हैं।
उपचार: दवा और CBT
दवा उपचार: अवसादरोधी
सबसे आम हैं SSRI (चयनात्मक सेरोटोनिन पुनर्ग्रहण अवरोधक)। सामान्यतः सेरोटोनिन जल्दी ही भेजने वाली कोशिका में वापस खिंच जाता है (पुनर्ग्रहण)। SSRI इसे रोकते हैं, इसलिए सिनैप्स में ज़्यादा सेरोटोनिन रहता है।
- ख़ूबियाँ: लेना आसान; मध्यम से गंभीर अवसाद में बहुत लोगों की मदद।
- सीमाएँ: असर में 2 से 6 सप्ताह; जी मिचलाना या नींद की दिक़्क़त जैसे साइड इफ़ेक्ट; दवा बंद करने पर अवसाद लौट सकता है। डॉक्टर ही लिखें और निगरानी करें।
संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT)
प्रशिक्षित चिकित्सक व्यक्ति की मदद करता है:
- अपने-आप आने वाले नकारात्मक विचार पहचानना (अक्सर विचार-डायरी से)।
- उन्हें परखना: "सबूत क्या है? दोस्त को मैं क्या कहता?"
- उनकी जगह संतुलित विचार रखना।
- काम करना: छोटी मज़ेदार या उपयोगी गतिविधियाँ तय करना (व्यवहारिक सक्रियता)।
- ख़ूबियाँ: कोई शारीरिक साइड इफ़ेक्ट नहीं; कौशल साथ रहते हैं, इसलिए दोबारा होने का ख़तरा कम।
- सीमाएँ: समय, मेहनत और प्रशिक्षित चिकित्सक चाहिए; बहुत कम ऊर्जा होने पर कठिन।
मध्यम से गंभीर अवसाद में दवा और CBT साथ में अक्सर सबसे अच्छा काम करते हैं।
करके देखिए
फ़्री प्ले में एक-एक करके नकारात्मक विचारों को संतुलित बनाइए और मूड बार देखिए। फिर ख़ुद के लिए छोटी विचार-जाँच कीजिए: एक चिंता लिखिए, उसके पक्ष में सबूत, विरोध में सबूत, और एक ज़्यादा उचित विचार। अगर उदासी हफ़्तों रहे, तो किसी भरोसेमंद बड़े या डॉक्टर से बात कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विकार = तेज़ + लंबा + तकलीफ़देह + दुष्क्रियात्मक
- अवसाद का निदान (ICD-11/DSM-5): उदास मन या रुचि ख़त्म + दूसरे लक्षण, ≥ 2 सप्ताह
- जैविक: सिनैप्स पर कम सेरोटोनिन · जीन (जुड़वाँ अध्ययन)
- मनोवैज्ञानिक: बेक का नकारात्मक त्रिक (स्वयं, दुनिया, भविष्य) · ग़लत सोच
- उपचार: SSRI पुनर्ग्रहण रोकते → ज़्यादा सेरोटोनिन · CBT: पहचानो → परखो → बदलो → करो
हल किए गए उदाहरण
1. ख़राब टेस्ट के बाद अर्जुन तीन दिन से उदास है, पर अब भी फ़ुटबॉल का मज़ा लेता है। क्या यह नैदानिक अवसाद है?
नहीं। उदासी सिर्फ़ 3 दिन (2 सप्ताह से कम) रही है, और उसकी रुचि ख़त्म नहीं हुई। यह सामान्य उदासी है।
2. समझाइए कि SSRI सिनैप्स पर क्या बदलता है।
सामान्यतः सिनैप्स में छोड़ा गया सेरोटोनिन जल्दी भेजने वाली कोशिका में वापस खिंच जाता है। SSRI यह पुनर्ग्रहण रोकता है, इसलिए गैप में ज़्यादा सेरोटोनिन संदेश आगे पहुँचाने के लिए रहता है।
3. एक लड़की सोचती है: 'एक टेस्ट में फ़ेल हुई, तो मैं बेवक़ूफ़ हूँ और मुझे कभी नौकरी नहीं मिलेगी।' बेक के त्रिक के हिस्से पहचानिए और CBT वाला संतुलित विचार दीजिए।
'मैं बेवक़ूफ़ हूँ' = स्वयं; 'कभी नौकरी नहीं मिलेगी' = भविष्य। संतुलित विचार: 'एक टेस्ट मेरी क्षमता तय नहीं करता; बाक़ी में मैं पास हुई हूँ और सुधार के लिए मदद माँग सकती हूँ।'
आम गलतियाँ
- अवसाद को सिर्फ़ उदासी समझना। नैदानिक अवसाद कम से कम दो सप्ताह रहता है और रोज़ का जीवन प्रभावित करता है।
- कहना कि अवसादरोधी दवा एक दिन में असर करती है। SSRI में आमतौर पर 2 से 6 सप्ताह लगते हैं।
- कहना कि जीन अवसाद तय करते हैं। जीन जोखिम बढ़ाते हैं; माहौल और सोच भी मायने रखते हैं।
- उपचार मिलाना: दवा मस्तिष्क के रसायनों पर काम करती है; CBT विचारों और व्यवहार पर।