अनुरूपता क्या है और लोग ऐसा क्यों करते हैं?
अनुरूपता तब है जब व्यक्ति असली या कल्पित समूह दबाव के कारण अपना व्यवहार या राय समूह जैसी कर लेता है। कोई उसे आदेश नहीं देता; आदेश मानना आज्ञापालन (obedience) होगा।
अनुरूपता के दो कारण
- मानकीय सामाजिक प्रभाव (normative): हम पसंद किए जाना चाहते हैं और अलग नहीं दिखना चाहते, इसलिए सबके सामने हाँ में हाँ मिलाते हैं, भले मन में असहमत हों।
- सूचनात्मक सामाजिक प्रभाव (informational): हमें पक्का नहीं पता और लगता है समूह ज़्यादा जानता है, इसलिए नक़ल करते हैं और सच में राय बदल सकते हैं।
गहरी या ऊपरी अनुरूपता
अनुपालन (compliance): बाहर से साथ देना, अंदर से असहमत रहना। आंतरीकरण (internalisation): समूह की राय सच में अपना लेना, जो समूह के न होने पर भी बनी रहती है।
ऐश का रेखा प्रयोग
उद्देश्य
सॉलोमन ऐश (1951) देखना चाहते थे कि क्या लोग सही जवाब साफ़ दिखने पर भी समूह के जवाब के साथ जाएँगे।
विधि
करीब 50 अमेरिकी कॉलेज छात्र (पुरुष) 7–9 लोगों के समूह में बैठे, जो चुपके से सहयोगी (confederates) थे — शोधकर्ता के लिए काम करने वाले अभिनेता। सबने एक मानक रेखा और तीन तुलना रेखाएँ देखकर ज़ोर से बताया कि कौन-सी मेल खाती है। असली व्यक्ति आख़िरी या आख़िरी से पहले बोलता था। कुल 18 बार; 12 'मुख्य' बार सहयोगियों ने एक ही ग़लत जवाब दिया। एक नियंत्रण समूह ने यही काम अकेले किया।
परिणाम
- अकेले में ग़लती 1% से भी कम।
- समूह में मुख्य जवाबों में से करीब 37% ग़लत थे, समूह जैसे।
- करीब 75% लोग कम से कम एक बार झुके; करीब 25% कभी नहीं झुके।
बाद में कई लोगों ने कहा कि उन्हें पता था जवाब ग़लत है, पर वे अलग नहीं दिखना चाहते थे (मानकीय प्रभाव)। कुछ को अपनी आँखों पर ही शक होने लगा (सूचनात्मक प्रभाव)।
मूल्यांकन
- ताक़त: नियंत्रित प्रयोगशाला प्रयोग, इसलिए दोहराया जा सकता है और कारण-परिणाम साफ़ है।
- कमज़ोरी: रेखाएँ मिलाना बनावटी काम है; असली फ़ैसले ज़्यादा मायने रखते हैं।
- कमज़ोरी: सिर्फ़ 1950 के दशक के अमेरिकी पुरुष छात्र, इसलिए नतीजे औरतों, दूसरी संस्कृतियों या आज पर शायद लागू न हों (बाद के कुछ अध्ययनों में कम अनुरूपता मिली)।
- नैतिकता: प्रतिभागियों को धोखा दिया गया और कुछ तनाव में आए।
स्थिति से जुड़े कारक (situational)
स्थितिजन्य कारक माहौल की बातें हैं, व्यक्ति की नहीं।
- समूह का आकार: 1 सहयोगी पर झुकाव बहुत कम (करीब 3%), 2 पर करीब 13%, 3 पर करीब 32%। 3–4 के बाद लोग बढ़ाने से ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा।
- सर्वसम्मति / एक साथी: अगर सिर्फ़ एक और व्यक्ति सही जवाब देता, तो झुकाव करीब 5% रह गया। समूह की एकता टूटने से हिम्मत मिलती है।
- गुमनामी: जब प्रतिभागी जवाब चुपचाप लिख सकता था, झुकाव बहुत घटा, क्योंकि किसी को उसकी असहमति नहीं दिखती।
- काम की कठिनाई: रेखाएँ ज़्यादा मिलती-जुलती (कठिन) करने पर झुकाव बढ़ा, क्योंकि लोग कम पक्के थे और दूसरों की ओर देखते थे।
व्यक्ति से जुड़े कारक (dispositional)
स्वभावगत कारक व्यक्ति की अपनी बातें हैं।
- व्यक्तित्व — नियंत्रण का स्थान (locus of control): आंतरिक नियंत्रण वाले मानते हैं कि उनके साथ जो होता है वह उनके हाथ में है; वे कम झुकते हैं। बाह्य नियंत्रण वाले मानते हैं कि क़िस्मत या दूसरे उनका जीवन चलाते हैं; वे ज़्यादा झुकते हैं।
- आत्मविश्वास और आत्मसम्मान: जो ख़ुद पर भरोसा रखते हैं, वे कम झुकते हैं।
- विशेषज्ञता: विषय का जानकार अपने जवाब पर ज़्यादा पक्का होता है और कम झुकता है, ख़ासकर जहाँ वरना सूचनात्मक प्रभाव काम करता।
ज़्यादातर मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि व्यवहार स्थिति और व्यक्ति दोनों के मेल से बनता है।
खुद करो: किसी दोस्त से आसान सवाल पूछिए, जैसे दो पेंसिलों में कौन लंबी है — पहले दो दोस्त (जिन्हें पता है) ग़लत जवाब दें। फिर तुरंत सच बताइए और प्रयोग समझाइए। देखिए उसे कैसा लगा। किसी को कभी शर्मिंदा या परेशान न करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अनुरूपता: समूह दबाव से अपना व्यवहार या राय समूह जैसी करना।
- मानकीय सामाजिक प्रभाव: स्वीकार और पसंद किए जाने के लिए अनुरूपता।
- सूचनात्मक सामाजिक प्रभाव: यह मानकर अनुरूपता कि दूसरे सही हैं।
- सहयोगी (confederate): शोधकर्ता का अभिनेता जो प्रतिभागी होने का नाटक करता है।
- स्थितिजन्य कारक: माहौल की बात (समूह का आकार, साथी, गुमनामी, कठिनाई)।
- स्वभावगत कारक: व्यक्ति की बात (नियंत्रण का स्थान, आत्मविश्वास, विशेषज्ञता)।
हल किए गए उदाहरण
1. रिया कक्षा में नई है। सब कहते हैं एक गाना शानदार है, तो वह भी कह देती है, जबकि उसे पसंद नहीं। यह कौन-सा प्रभाव है?
मानकीय सामाजिक प्रभाव। वह घुलना-मिलना और पसंद किया जाना चाहती है; उसकी अपनी राय नहीं बदली (अनुपालन)।
2. ऐश के प्रयोग में एक सहयोगी के सही जवाब देने पर अनुरूपता क्यों गिरी?
समूह अब एकमत नहीं था। साथी ने दबाव तोड़ा और सहारा दिया, इसलिए प्रतिभागी को सही जवाब देना सुरक्षित लगा।
3. रेखाएँ ज़्यादा मिलती-जुलती करने पर अनुरूपता क्यों बढ़ी?
कठिन काम में लोग कम पक्के होते हैं। अनिश्चित होने पर वे सही जवाब के लिए दूसरों पर ज़्यादा निर्भर होते हैं, तो सूचनात्मक प्रभाव बढ़ता है।
आम गलतियाँ
- अनुरूपता और आज्ञापालन को एक समझना। अनुरूपता बराबर वालों का दबाव है; आज्ञापालन अधिकारी का आदेश मानना।
- यह सोचना कि बड़ा समूह हमेशा ज़्यादा अनुरूपता लाता है। 3–4 लोगों के बाद ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता।
- यह कहना कि ऐश के प्रयोग में सब झुके। करीब एक-चौथाई कभी नहीं झुके।
- स्थिति और व्यक्ति के कारकों को 'या तो–या' मानना। दोनों साथ असर डालते हैं।