आज्ञापालन क्या है?
आज्ञापालन (obedience) का मतलब है अधिकार वाले व्यक्ति के कहने पर काम करना। अधिकार मतलब आदेश देने का हक़, जैसे शिक्षक, माता-पिता, पुलिस या मैनेजर।
यह अनुरूपता (conformity) से अलग है। अनुरूपता में हम बराबर वालों की नक़ल करते हैं, कोई आदेश नहीं देता। आज्ञापालन में ऊपर वाले का साफ़ आदेश होता है।
आज्ञापालन अक्सर अच्छा है: स्कूल, अस्पताल और सड़कें नियम मानने से सुरक्षित चलते हैं। ख़तरा तब है जब लोग किसी को नुक़सान पहुँचाने वाला आदेश भी मान लें।
मिलग्राम का आज्ञापालन अध्ययन
1960 के दशक में अमेरिका के मनोवैज्ञानिक स्टेनली मिलग्राम जानना चाहते थे कि क्या आम लोग सिर्फ़ कहने पर किसी को चोट पहुँचाएँगे।
- 40 पुरुषों ने भाग लिया। हर एक शिक्षक बना। एक अभिनेता शिक्षार्थी बना।
- हर ग़लत उत्तर पर शिक्षक अगला बटन दबाता: 15 V से 450 V तक। झटके नकली थे, पर शिक्षक उन्हें असली समझता था।
- रुकना चाहने पर स्लेटी कोट वाला प्रयोगकर्ता शांति से कहता: "कृपया जारी रखें", "आपके पास कोई और रास्ता नहीं है।"
परिणाम: 65% लोग 450 V तक गए। सभी कम से कम 300 V तक गए। कई लोग पसीने से भीगे, काँपे या घबराकर हँसे।
कमियाँ: इसमें तनाव और धोखा था, जो आज के नैतिक नियमों के विरुद्ध है। कुछ लोगों को शायद झटके नकली लगे। शुरू में सिर्फ़ अमेरिकी पुरुष लिए गए।
एजेंसी सिद्धांत: एजेंटिक अवस्था
मिलग्राम ने अपने परिणाम एजेंसी सिद्धांत (agency theory) से समझाए।
- स्वायत्त अवस्था (autonomous state): आप अपनी मर्ज़ी से काम करते हैं और ख़ुद को ज़िम्मेदार मानते हैं।
- एजेंटिक अवस्था (agentic state): आप किसी और के एजेंट बनकर काम करते हैं। ज़िम्मेदारी अधिकारी की लगती है।
- स्वायत्त से एजेंटिक में जाना एजेंटिक बदलाव (agentic shift) है। यह तब होता है जब हम सामने वाले को वैध अधिकारी मानते हैं।
- एजेंटिक अवस्था में भी नैतिक तनाव (moral strain) होता है। लोग अधिकारी को दोष देकर इसे कम करते हैं।
यह सिद्धांत बताता है कि सेना या कंपनी जैसी बड़ी व्यवस्थाओं में लोग "बस आदेश मान रहे थे" क्यों कहते हैं।
आज्ञापालन के परिस्थितिजन्य कारक
मिलग्राम ने एक बार में एक चीज़ बदली।
| बदलाव | पूरा आदेश माना |
|---|---|
| प्रसिद्ध विश्वविद्यालय की सामान्य लैब | 65% |
| पुराना दफ़्तर (स्थान) | लगभग 48% |
| शिक्षार्थी उसी कमरे में (निकटता) | 40% |
| शिक्षक को ख़ुद शिक्षार्थी का हाथ प्लेट पर दबाना पड़ा | 30% |
| आदेश फ़ोन पर | लगभग 21% |
| साधारण कपड़ों में "आम आदमी" ने आदेश दिया (वर्दी) | 20% |
यानी अधिकारी पास हो, वर्दी में हो और जगह प्रतिष्ठित हो तो आज्ञापालन बढ़ता है; पीड़ित पास हो तो घटता है।
स्वभावगत कारक: सत्तावादी व्यक्तित्व
स्वभावगत (dispositional) कारक व्यक्ति के अंदर होता है, जैसे व्यक्तित्व। थियोडोर अडोर्नो ने सत्तावादी व्यक्तित्व (authoritarian personality) बताया।
- अधिकार और ताक़तवर नेताओं का बहुत सम्मान।
- "नीचे" या अलग माने गए लोगों को तुच्छ समझना।
- दुनिया को सिर्फ़ काला-सफ़ेद देखना, पक्के नियम।
अडोर्नो के अनुसार इसका कारण बहुत सख़्त बचपन है। बच्चा माता-पिता पर ग़ुस्सा नहीं दिखा पाता, तो बाद में वह ग़ुस्सा "कमज़ोर" समूहों पर निकलता है। इसे F-स्केल प्रश्नावली से मापा गया।
सीमाएँ: F-स्केल के प्रश्न एक ही दिशा में लिखे थे, जिससे पक्षपात हुआ; पूरे देश का एक जैसा व्यक्तित्व नहीं हो सकता, इसलिए सामूहिक आज्ञापालन यह नहीं समझा पाता। ज़्यादातर मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि परिस्थिति और व्यक्ति दोनों मिलकर असर डालते हैं।
करके देखिए
3D के फ़्री प्ले में अध्ययन का हर रूप दबाइए। दबाने से पहले प्रतिशत का अनुमान लगाइए। किस बदलाव से सबसे ज़्यादा गिरावट आई? फिर अपने स्कूल का कोई नियम सोचिए: वह नियम के कारण माना जाता है या देने वाले के कारण?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आज्ञापालन = अधिकारी के आदेश का पालन
- अनुरूपता = बराबर वालों की नक़ल (कोई आदेश नहीं)
- मिलग्राम: 65% ने 450 V तक; 100% ने 300 V तक
- स्वायत्त अवस्था → एजेंटिक बदलाव → एजेंटिक अवस्था
- परिस्थितिजन्य: स्थान, वर्दी, निकटता · स्वभावगत: सत्तावादी व्यक्तित्व (F-स्केल)
हल किए गए उदाहरण
1. दोस्त घर जा रहे हैं, पर प्रधानाचार्य के कहने पर एक छात्र रुक जाता है। यह आज्ञापालन है या अनुरूपता?
आज्ञापालन। अधिकार वाले व्यक्ति (प्रधानाचार्य) का सीधा आदेश है। दोस्तों की नक़ल करना अनुरूपता होती।
2. एजेंसी सिद्धांत से समझाइए कि सैनिक ग़लत लगने वाला आदेश भी क्यों मानता है।
अफ़सर वैध अधिकारी है, इसलिए सैनिक एजेंटिक बदलाव करता है। वह ख़ुद को अफ़सर का एजेंट मानता है और ज़िम्मेदारी अफ़सर की समझता है। उसे नैतिक तनाव होता है, पर दोष अफ़सर पर डालकर वह इसे कम करता है।
3. मिलग्राम के अध्ययन में "आम आदमी" के आदेश देने पर आज्ञापालन 65% से 20% क्यों गिरा?
लैब कोट एक वर्दी थी जो पद और वैधता दिखाती थी। उसके बिना आदेश देने वाला असली अधिकारी नहीं लगा, इसलिए कम लोगों ने एजेंटिक बदलाव किया।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि शिक्षार्थी को सच में झटके लगे। झटके नकली थे; शिक्षार्थी अभिनेता था।
- आज्ञापालन और अनुरूपता को मिला देना। आज्ञापालन में ऊपर वाले का आदेश ज़रूरी है।
- यह मानना कि सिर्फ़ 'बुरे' लोग आदेश मानते हैं। मिलग्राम के अध्ययन में ज़्यादातर आम लोग माने।
- यह कहना कि एजेंटिक अवस्था में कुछ महसूस नहीं होता। नैतिक तनाव होता है, पर दोष अधिकारी पर डाला जाता है।