राजतंत्र से गणराज्य तक
शुरू में रोम पर राजा राज करते थे। लगभग 509 ईसा पूर्व रोमवासियों ने आख़िरी राजा टार्क्विन को निकाल दिया। उन्होंने तय किया कि सत्ता फिर कभी एक आदमी के हाथ में जीवन भर नहीं रहेगी। नई व्यवस्था का नाम था res publica, यानी "जनता का काम"।
दो बड़े नियम थे: साझेदारी (हर बड़ा पद कम से कम दो लोगों में बँटा) और एक साल का कार्यकाल।
सरकार के तीन हिस्से
मजिस्ट्रेट (अधिकारी)
दो कॉन्सल एक साल तक सेना और सरकार चलाते थे। हर एक दूसरे को रोक सकता था। बहुत बड़े संकट में सीनेट एक डिक्टेटर (तानाशाह) चुनवा सकती थी, जिसके पास ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने पूरी शक्ति रहती थी।
सीनेट
लगभग 300 (बाद में 600) लोग, ज़्यादातर पूर्व अधिकारी, जो जीवन भर सदस्य रहते। सीनेट ख़ुद क़ानून नहीं बनाती थी, पर उसकी सलाह बहुत भारी पड़ती थी। धन, विदेश नीति और प्रांत उसी के हाथ में थे।
सभाएँ
वयस्क पुरुष नागरिक सभाओं में अधिकारी चुनते, क़ानूनों पर और युद्ध-शांति पर वोट देते। वोट समूहों में गिने जाते थे और अमीर समूह पहले वोट करते थे, इसलिए अमीरों का वज़न ज़्यादा था।
प्लेबियन के ट्रिब्यून
दस ट्रिब्यून सिर्फ़ प्लेबियन चुनते थे। ट्रिब्यून "वीटो" बोलकर किसी प्लेबियन को नुक़सान पहुँचाने वाला काम रोक सकता था। ट्रिब्यून को चोट पहुँचाना देवताओं के ख़िलाफ़ अपराध था।
रोमन समाज: पैट्रिशियन, प्लेबियन और अन्य
पैट्रिशियन पुराने अमीर परिवार थे। बाकी नागरिक, जैसे किसान, व्यापारी, कारीगर, प्लेबियन कहलाते थे। शुरू में बड़े पद सिर्फ़ पैट्रिशियन को मिलते थे।
वर्गों के संघर्ष (लगभग 494–287 ईसा पूर्व) में प्लेबियन कई बार शहर छोड़कर चले गए; न काम, न लड़ाई। वे जीते: ट्रिब्यून मिले, बारह पट्टिकाओं (Twelve Tables, लगभग 450 ईसा पूर्व) में लिखित क़ानून मिले, 367 ईसा पूर्व में कॉन्सल बनने का हक़ मिला और 287 ईसा पूर्व में उनकी सभा के क़ानून सब पर लागू होने लगे।
महिलाएँ नागरिक थीं पर वोट नहीं दे सकती थीं; विदेशी और दास लोगों के कोई राजनीतिक अधिकार नहीं थे। अमीर संरक्षक (patron) गरीब आश्रितों (client) की मदद करते और बदले में वोट व समर्थन पाते।
पदों की सीढ़ी (कर्सस ऑनोरम)
महत्वाकांक्षी रोमन तय क्रम में पद पाता था, हर पद की न्यूनतम उम्र थी:
- क्वेस्टर – पैसे का हिसाब।
- ईडाइल – सड़कें, बाज़ार और खेल (यह सीढ़ी ज़रूरी नहीं थी)।
- प्रेटर – न्यायाधीश, सेना भी ले जा सकता था।
- कॉन्सल – सबसे ऊँचा पद।
पूर्व कॉन्सल सेंसर बन सकते थे, जो नागरिकों की गिनती करते और सीनेटरों का आचरण जाँचते। रोमवासी mos maiorum यानी "पूर्वजों की रीति" का सम्मान करते थे। सिनसिनाटस जैसे नायक, जो संकट में रोम को बचाकर वापस खेत जोतने चले गए, आदर्श माने जाते थे।
गणराज्य क्यों गिरा (उत्तर गणराज्य)
युद्धों (जैसे कार्थेज के साथ, 264–146 ईसा पूर्व) से ज़मीन, दास और धन आया। अमीरों ने दासों से चलने वाले बड़े खेत ख़रीदे; बहुत से छोटे किसानों की ज़मीन छिन गई।
- ग्रैकस भाई (133 और 123 ईसा पूर्व), जो ट्रिब्यून थे, गरीब नागरिकों को ज़मीन देना चाहते थे। दोनों मारे गए और राजनीति में हिंसा आम हो गई।
- मेरियस ने बिना ज़मीन वालों को सेना में लिया। अब सैनिक वेतन और ज़मीन के लिए अपने सेनापति पर निर्भर थे।
- सुल्ला ने 88 ईसा पूर्व अपनी सेना रोम पर चढ़ा दी और डिक्टेटर बना।
- जूलियस सीज़र 49 ईसा पूर्व सेना के साथ रूबिकॉन नदी पार कर गया, गृहयुद्ध जीता और आजीवन डिक्टेटर बना। 44 ईसा पूर्व उसकी हत्या हुई।
- ऑक्टेवियन ने विरोधियों को हराया और 27 ईसा पूर्व ऑगस्टस नाम लिया। सीनेट और पद बने रहे, पर असली सत्ता एक आदमी के पास थी: साम्राज्य शुरू हो गया।
विरासत और आज से जुड़ाव
रोमन गणराज्य से आए आज के विचार: सीनेट, तय कार्यकाल, शक्तियों का बँटवारा और संतुलन, वीटो, लिखित क़ानून और यह विचार कि क़ानून से ऊपर कोई नहीं। अमेरिका और कई देशों के संविधान बनाने वालों ने रोम को पढ़ा था। उसका पतन एक चेतावनी भी है: जब सेना, पैसा और हिंसा नियमों से बड़े हो जाएँ, तो गणराज्य मर सकता है।
करके देखें: रोमन सरकार बनाइए
तीन काग़ज़ के कप लें और लिखें: कॉन्सल, सीनेट, सभाएँ। पर्चियों पर लिखें: "सेना चलाना", "धन पर सलाह", "अधिकारी चुनना", "क़ानून पर वोट", "वीटो"। हर पर्ची सही कप में डालें (वीटो ट्रिब्यून का)। फिर दो कप हटाकर सब एक में डाल दें: ऑगस्टस के समय यही हुआ। 3D के छठे चरण से मिलान करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- गणराज्य: 509–27 ईसा पूर्व
- कॉन्सल: एक साथ 2, कार्यकाल 1 साल, एक-दूसरे पर वीटो
- सीनेट: लगभग 300 आजीवन सदस्य; सलाह, धन और विदेश नीति
- सभाएँ: नागरिक अधिकारी चुनते और क़ानून पास करते
- प्लेबियन का ट्रिब्यून: आम लोगों का रक्षक, वीटो का अधिकार
- पदों की सीढ़ी: क्वेस्टर → (ईडाइल) → प्रेटर → कॉन्सल
- डिक्टेटर: संकट का शासक, अधिकतम 6 महीने
हल किए गए उदाहरण
1. एक कॉन्सल युद्ध शुरू करना चाहता है, दूसरा इसे ग़लत मानता है। क्या होगा?
दोनों की शक्ति बराबर थी, इसलिए दूसरा कॉन्सल "वीटो" कहकर योजना रोक सकता था। कोई अकेले दूसरे के ख़िलाफ़ काम नहीं कर सकता था।
2. प्लेबियन क़ानूनों को बारह पट्टिकाओं में लिखवाना क्यों चाहते थे?
पहले क़ानून सिर्फ़ पैट्रिशियन पुजारी और न्यायाधीश जानते थे और उन्हें तोड़-मरोड़ सकते थे। सबके सामने लिखे क़ानून से हर कोई नियम जानता था और न्यायाधीश को उनका पालन करना पड़ता था।
3. मेरियस के सेना सुधार ने गणराज्य को कैसे कमज़ोर किया?
मेरियस ने बिना ज़मीन वाले स्वयंसेवक लिए। सेवा के बाद वेतन और ज़मीन उन्हें सेनापति से मिलती थी। इसलिए सैनिक सीनेट की नहीं, सेनापति की बात मानते थे। सुल्ला और सीज़र ने ऐसी ही सेनाओं के साथ रोम पर चढ़ाई की।
4. 27 ईसा पूर्व में भी सीनेट की बैठकें होती थीं। फिर भी हम क्यों कहते हैं कि गणराज्य ख़त्म हो गया?
सेना, धन और अधिकारियों का चुनाव ऑगस्टस के हाथ में था। पुरानी संस्थाएँ दिखावे के लिए रहीं, पर फ़ैसले एक आदमी जीवन भर करता था। यही एक व्यक्ति का शासन है, जिसे गणराज्य ने कभी न होने देने का वादा किया था।
आम गलतियाँ
- गणराज्य को आज जैसा लोकतंत्र मानना: महिलाएँ, दास और विदेशी वोट नहीं दे सकते थे और अमीरों के वोट का वज़न ज़्यादा था।
- सीनेट और सभाओं को मिला देना: क़ानून और चुनाव सभाएँ करती थीं; सीनेट मुख्य रूप से सलाह देती और धन संभालती थी।
- जूलियस सीज़र को पहला सम्राट मानना: वह डिक्टेटर था; पहला सम्राट ऑगस्टस (27 ईसा पूर्व) था।
- ट्रिब्यून को सेना का अफ़सर समझना: प्लेबियन के ट्रिब्यून आम नागरिकों के चुने हुए रक्षक थे।