प्लेटो का प्रत्यय सिद्धांत
प्लेटो ने देखा कि आस-पास की चीज़ें हमेशा बदलती हैं: फूल मुरझाते हैं, लोग बूढ़े होते हैं। फिर भी हम 'वृत्त', 'न्याय' या 'सौंदर्य' जैसे पूर्ण, न बदलने वाले विचार सोच सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये विचार एक अलग लोक में सचमुच होते हैं। इन्हें प्रत्यय (Forms या Ideas) कहा।
- प्रत्यय शाश्वत (न जन्म, न मृत्यु) और पूर्ण हैं।
- दिखने वाली वस्तुएँ प्रत्यय की प्रतियाँ हैं। हर घोड़ा 'घोड़े के प्रत्यय' में हिस्सा लेता है।
- सबसे ऊँचा है शुभ का प्रत्यय (Form of the Good); वह बाकी सबको समझने लायक बनाता है, जैसे सूर्य चीज़ों को दिखने लायक बनाता है।
इसलिए प्लेटो के दो स्तर: मत का लोक (इंद्रियाँ, बदलता) और ज्ञान का लोक (बुद्धि, अपरिवर्तनशील)।
आत्मा, द्वैतवाद और पुनःस्मरण
प्लेटो के लिए व्यक्ति मुख्य रूप से आत्मा है; शरीर अस्थायी घर (या कारागार) जैसा है। आत्मा अमर है: जन्म से पहले थी और मृत्यु के बाद भी रहती है। एक तर्क: आत्मा सरल है और प्रत्ययों जैसी है, और जो सरल है वह टूट नहीं सकता।
आत्मा के तीन भाग: बुद्धि (सोचती है, सत्य से प्रेम), साहस/उत्साह (हिम्मत, क्रोध, सम्मान) और इच्छा/वासना (भोजन, धन, सुख)। न्यायी व्यक्ति में बुद्धि आगे चलती है, जैसे सारथी दो घोड़ों को चलाता है।
द्वैतवाद = मन/आत्मा और शरीर दो अलग तरह की चीज़ें हैं। भौतिकवाद = केवल पदार्थ है, मन बस शरीर का काम है (जैसे परमाणुवादी डेमोक्रिटस)। प्लेटो प्रसिद्ध द्वैतवादी हैं।
अनामनेसिस (पुनःस्मरण): सीखना याद करना है। प्लेटो के संवाद मेनो में सुकरात केवल प्रश्न पूछकर एक अनपढ़ लड़के से ज्यामिति का उत्तर निकलवाते हैं। यानी ज्ञान पहले से 'अंदर' था। अनुभव के बिना, केवल बुद्धि से मिला ज्ञान प्रागनुभविक (a priori) कहलाता है।
गुफा का रूपक
सोचिए, कुछ बंदी जन्म से गुफा में दीवार की ओर मुँह करके बँधे हैं। पीछे आग जल रही है; लोग उसके आगे चीज़ें लेकर चलते हैं, और बंदी केवल परछाइयाँ देखते हैं। वे परछाइयों को ही पूरी सच्चाई मानते हैं।
- एक बंदी छूटकर मुड़ता है: आग से आँखें दुखती हैं।
- उसे ऊपर बाहर धूप में लाया जाता है, धीरे-धीरे असली चीज़ें दिखती हैं।
- अंत में वह सूर्य देख पाता है।
- वह दूसरों को छुड़ाने लौटता है, पर वे उसका मज़ाक उड़ाते हैं, हमला भी कर सकते हैं।
अर्थ: गुफा = इंद्रियों का संसार; परछाइयाँ = मत; बाहर = प्रत्यय; सूर्य = शुभ का प्रत्यय; चढ़ाई = शिक्षा; लौटना = ज्ञानी का दूसरों को राह दिखाने का कर्तव्य (दार्शनिक शासक)।
प्लेटोनिक प्रेम: आज का अर्थ और मूल अर्थ
आज 'प्लेटोनिक प्रेम' का अर्थ है रोमांस बिना गहरी दोस्ती। प्लेटो के सिम्पोज़ियम में इसका अर्थ बड़ा है। प्रेम (एरोस) सौंदर्य की चाह है, और यह एक सीढ़ी चढ़ सकता है: एक सुंदर शरीर → सभी शरीरों का सौंदर्य → आत्मा और अच्छे चरित्र का सौंदर्य → नियमों और ज्ञान का सौंदर्य → स्वयं सौंदर्य, यानी प्रत्यय। प्रेम दर्शन का इंजन बन जाता है।
अरस्तू: पदार्थ, रूप, संभाव्यता और वास्तविकता
अरस्तू ने 20 साल प्लेटो से पढ़ा पर असहमत हुए। उन्होंने कहा रूप किसी दूसरे लोक में नहीं, असली वस्तुओं के अंदर हैं। हर अलग वस्तु (यह घोड़ा, यह पेड़) एक द्रव्य (substance) है।
- हाइलोमॉर्फ़िज़्म (यूनानी हाइले = पदार्थ, मॉर्फ़े = रूप): हर वस्तु = पदार्थ (किससे बनी) + रूप (जो उसे इस तरह की वस्तु बनाता है)। काँसे की मूर्ति = काँसा + आकार।
- संभाव्यता और वास्तविकता: परिवर्तन यानी कोई चीज़ वह बनना जो वह बन सकती थी। बीज संभावित बलूत है; पेड़ उसकी वास्तविक अवस्था।
- चार कारण: भौतिक (किससे बना), आकारिक (रूप/योजना), निमित्त (किसने बनाया), अंतिम (उद्देश्य)।
आत्मा और शरीर: आत्मा जीवित शरीर का रूप है, जैसे काटने की शक्ति कुल्हाड़ी का 'रूप' है। पौधों में पोषण वाली आत्मा, पशुओं में संवेदन भी, मनुष्य में बुद्धि भी। इसलिए शरीर और आत्मा एक इकाई हैं।
ज्ञान: सारा ज्ञान इंद्रियों से शुरू होता है; फिर बुद्धि कई उदाहरणों में सामान्य रूप पहचानती है। मनुष्य बुद्धिमान प्राणी और सामाजिक (राजनीतिक) प्राणी है, जो सद्गुण से सुख (यूडेमोनिया) पाता है।
करके देखिए
हाथ से पाँच 'त्रिभुज' बनाइए। क्या कोई पूर्ण है? पूर्ण त्रिभुज कैसा होता है, यह आपको कैसे पता? प्लेटो का और अरस्तू का उत्तर लिखिए। फिर एक बीज (चावल, राजमा) लेकर उसका पदार्थ, रूप और संभाव्यता लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रत्यय (प्लेटो): पूर्ण, शाश्वत नमूना; वस्तुएँ प्रतियाँ हैं
- द्वैतवाद: आत्मा ≠ शरीर; भौतिकवाद: केवल पदार्थ
- अनामनेसिस: सीखना = पुनःस्मरण
- हाइलोमॉर्फ़िज़्म (अरस्तू): वस्तु = पदार्थ + रूप
- परिवर्तन = संभाव्यता → वास्तविकता
- चार कारण: भौतिक, आकारिक, निमित्त, अंतिम
हल किए गए उदाहरण
1. प्लेटो क्यों मानते हैं कि वृत्त का प्रत्यय बनाए गए वृत्त से ज़्यादा वास्तविक है?
बनाए गए वृत्त अपूर्ण हैं और मिट जाते हैं; प्रत्यय पूर्ण है और नहीं बदलता, और हम हर वृत्त को उसी से परखते हैं।
2. गुफा, परछाइयाँ, सूर्य, चढ़ाई का अर्थ बताइए।
गुफा = इंद्रियों का संसार; परछाइयाँ = मत; सूर्य = शुभ का प्रत्यय; चढ़ाई = शिक्षा।
3. मिट्टी के घड़े पर चार कारण लगाइए।
भौतिक: मिट्टी। आकारिक: घड़े का आकार। निमित्त: कुम्हार। अंतिम: पानी रखना।
आम गलतियाँ
- प्लेटो के 'प्रत्यय' को हमारे मन के विचार समझना। प्लेटो के लिए वे किसी मन से बाहर अपने-आप होते हैं।
- कहना कि अरस्तू ने रूप को नकारा। उन्होंने रूप रखा, पर वस्तुओं के अंदर।
- 'प्लेटोनिक प्रेम' को केवल आज के अर्थ में लेना और सौंदर्य की सीढ़ी भूल जाना।
- आत्मा के भाग गड़बड़ाना: साहस/उत्साह का अर्थ हिम्मत और सम्मान है, 'भूत' नहीं।