दक्कनी शैली की उत्पत्ति
दक्कन दक्षिण-मध्य भारत का ऊँचा पठार है। बहमनी राज्य के टूटने के बाद वहाँ कई सल्तनतें बनीं, जिनमें अहमदनगर, बीजापुर और गोलकुंडा थीं। 1500 के दशक के अंत से इनके दरबारों में चित्रकार थे। 1700 के दशक में आसफ़जाही शासकों (निज़ामों) के समय हैदराबाद मुख्य केंद्र बना।
दक्कनी चित्रकला दक्षिण में मुग़ल चित्रकला के मज़बूत होने से थोड़ा पहले शुरू हुई और तीन जड़ों से अपनी शैली बनाई:
- फ़ारसी और तुर्की कला, अरब सागर के पार व्यापार और यात्रा से।
- स्थानीय दक्षिणी कला, जैसे विजयनगर के भित्ति-चित्र, पहनावा और गहने।
- मुग़ल विचार, 1600 के दशक में मुग़लों के दक्कन आने के बाद।
दक्कनी चित्रकला की मुख्य विशेषताएँ
- लंबी, पतली आकृतियाँ, ख़ासकर स्त्रियाँ, स्थानीय साड़ी और भारी गहनों में, छोटे सिर के साथ।
- गहरे रंग: गहरा बैंगनी, हरा, सफ़ेद और बहुत सोना।
- ऊँचा क्षितिज, अक्सर सुनहरा आकाश, जो सपनीला एहसास देता है।
- इस्लामी ढंग की इमारतें: गुंबद, मेहराब और मीनारें।
- हर जगह फूलों वाले पौधे और पेड़, फ़ारसी बाग़ों के विचार के पास।
- विषय: रागमाला, सुल्तानों के व्यक्ति-चित्र, दरबारी जीवन, पक्षियों या संगीत के साथ स्त्रियाँ, और गूढ़ विद्या व ज्योतिष (बीजापुर का विश्वकोश नुजूम-उल-उलूम, 1570)।
केंद्र और प्रसिद्ध चित्र
- अहमदनगर: कुछ सबसे पुराने चित्र, जैसे राजा की प्रशंसा वाली किताब तारीफ़-ए-हुसैन शाही, और झूले पर राजकुमार वाला राग हिंडोल।
- बीजापुर: इब्राहिम आदिल शाह द्वितीय (1580–1627) के समय शिखर, जो कवि और संगीतकार थे और जिन्होंने गीतों की किताब किताब-ए-नौरस लिखी। सपनीले, काव्यमय चित्र, जैसे रागिनी पट मंजरी और योगिनी चित्र।
- गोलकुंडा: हीरों और कपड़े के व्यापार से अमीर; सोने से भरे दरबारी दृश्य और क़ुतुबशाही सुल्तानों के व्यक्ति-चित्र। चाँद बीबी पोलो खेलते हुए (18वीं सदी) में बहादुर रानी और साथी घोड़ों पर पोलो खेल रही हैं।
- हैदराबाद: 1700 के दशक से निज़ामों के समय; ज़्यादा सुथरा, मुग़ल जैसा, फिर भी दक्कनी रंगों वाला। पक्षियों से खेलती राजकुमारी एक जाना-माना उदाहरण है।
करके देखिए
एक छोटे कार्ड का ऊपरी चौथाई हिस्सा सुनहरा (पीला) रंगिए, ऊँचे आकाश की तरह। एक लंबी, पतली आकृति (लगभग 7 सिर जितनी लंबी), दाईं ओर सफ़ेद गुंबद और नीचे छोटे फूलों की एक पंक्ति बनाइए। दक्कनी नुस्खा तैयार!
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: दक्कन = दक्षिण-मध्य भारत का ऊँचा पठार; सल्तनत = सुल्तान का राज्य
- विशेषताएँ: लंबी पतली आकृतियाँ + बैंगनी, हरा, सोना + ऊँचा सुनहरा क्षितिज + गुंबद + फूल
- जड़ें: फ़ारसी/तुर्की + स्थानीय दक्षिणी + बाद में मुग़ल
- केंद्र: अहमदनगर, बीजापुर, गोलकुंडा, हैदराबाद
हल किए गए उदाहरण
1. एक चित्र में छोटे सिर वाली बहुत लंबी स्त्री, पन्ने पर ऊँचा सुनहरा आकाश और सफ़ेद गुंबद वाला महल है। कौन-सी शैली?
दक्कनी: लंबी पतली आकृतियाँ, ऊँचा सुनहरा क्षितिज और इस्लामी ढंग के गुंबद इसकी पहचान हैं।
2. गोलकुंडा चित्रों में इतना सोना कैसे लगा पाता था?
इसके शासक हीरों की खानों और रंगे सूती कपड़े के व्यापार से अमीर हुए, इसलिए वे महँगी सामग्री का खर्च उठा सकते थे।
3. हैदराबाद की चित्रकला शुरुआती बीजापुर से कैसे अलग है?
हैदराबाद (1700 का दशक) ज़्यादा सुथरा और मुग़ल जैसा है; शुरुआती बीजापुर ज़्यादा सपनीला, फ़ारसी और काव्यमय है, सुनहरे आकाश के साथ।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि दक्कनी चित्रकला मुग़ल चित्रकला की नकल है। यह फ़ारसी, तुर्की और स्थानीय जड़ों से अपने आप शुरू हुई।
- गोलकुंडा या बीजापुर को राजस्थान में बताना। ये दक्षिण-मध्य भारत के दक्कन पठार पर हैं।
- हर लंबी आकृति को किशनगढ़ कहना। किशनगढ़ में लंबी धनुषाकार आँखें हैं; दक्कनी में छोटे सिर वाली लंबी आकृतियाँ, सुनहरा आकाश और गुंबद हैं।
- यह सोचना कि चाँद बीबी पोलो खेलते हुए 16वीं सदी का है। प्रसिद्ध चित्र 18वीं सदी का, गोलकुंडा शैली का है।