औसत लागत और पैमाने की बचत का अर्थ
औसत लागत (AC) = कुल लागत ÷ उत्पादन। यह एक इकाई की लागत है।
पैमाने की बचत वे लागत-लाभ हैं जो फर्म को दीर्घकाल में उत्पादन का पैमाना बढ़ाने पर मिलते हैं, जिससे दीर्घकालीन औसत लागत घटती है। उत्पादन बढ़ने पर कुल लागत आमतौर पर बढ़ती है; घटती है प्रति इकाई लागत।
पैमाना यानी पूरे काम का आकार: ज़्यादा फ़ैक्टरियाँ, बड़ी मशीनें, ज़्यादा श्रमिक। सब साधन बदल सकते हैं, इसलिए यह दीर्घकाल का विचार है।
आंतरिक बचत (Internal economies)
आंतरिक बचत एक ही फर्म के अंदर उसके बढ़ने पर होती है।
- क्रय (थोक ख़रीद): बड़े ऑर्डर पर आपूर्तिकर्ता छूट देते हैं।
- तकनीकी: बड़ी फर्म बड़ी, कुशल मशीनें और उत्पादन लाइनें लगा सकती है। दोगुना लंबा टैंकर दोगुने से कहीं ज़्यादा तेल ले जाता है। स्थिर लागत ज़्यादा इकाइयों पर बँटती है।
- वित्तीय: बैंक बड़ी फर्म को सुरक्षित मानकर कम ब्याज पर ऋण देते हैं; वह शेयर भी बेच सकती है।
- विपणन: एक टीवी विज्ञापन की लागत वही है, चाहे 1,000 बिकें या 10 लाख, तो प्रति इकाई ख़र्च घटता है।
- प्रबंधकीय: विशेषज्ञ प्रबंधक (वित्त, HR, विपणन) रखे जा सकते हैं।
- जोखिम-वहन: कई उत्पाद, कई बाज़ार में बेचने से जोखिम बँटता है।
बाहरी बचत (External economies)
बाहरी बचत पूरे उद्योग के, अक्सर एक इलाक़े में, बढ़ने से आती है। इससे उस उद्योग की हर फर्म की लागत घटती है, छोटी हो या बड़ी।
- स्थानीय कॉलेजों से कुशल श्रमिकों का भंडार।
- पास में विशेष आपूर्तिकर्ता और मरम्मत फर्में।
- बेहतर आधारभूत ढाँचा: सड़कें, बंदरगाह, बिजली, इंटरनेट।
- साझा ज्ञान और शोध।
उदाहरण: बेंगलुरु और सिलिकॉन वैली में सॉफ़्टवेयर, तिरुप्पुर में होज़री, चेन्नई के पास कार निर्माण, लंदन में वित्तीय फर्में।
ग्राफ़ पर आंतरिक बचत में फर्म LRAC वक्र के साथ आगे बढ़ती है; बाहरी बचत में पूरा LRAC वक्र नीचे खिसकता है।
बाहरी हानि भी हो सकती है: भीड़ बढ़ने पर जाम, ऊँचा किराया, मज़दूरी की होड़।
पैमाने की हानि और LRAC वक्र
पैमाने की हानि (अमितव्ययिता) तब होती है जब फर्म इतनी बड़ी हो जाए कि दीर्घकालीन औसत लागत बढ़ने लगे:
- संचार: संदेश कई परतों से गुज़रकर धीमे या उलझे हो जाते हैं।
- तालमेल और नियंत्रण: कई जगहें और विभाग सँभालना कठिन।
- प्रेरणा: कर्मचारी प्रबंधकों से दूर महसूस करते हैं।
दीर्घकालीन औसत लागत (LRAC) वक्र हर उत्पादन पर सबसे कम प्रति इकाई लागत दिखाता है जब सारे साधन बदल सकते हों। बचत से यह गिरता है, हानि से उठता है। इसे अक्सर U आकार में बनाते हैं, पर कई उद्योगों में यह L आकार (लंबा सपाट तल) होता है।
न्यूनतम कुशल पैमाना (MES): वह सबसे कम उत्पादन जहाँ LRAC न्यूनतम हो। अगर MES बाज़ार की तुलना में बड़ा है (जैसे विमान, रेलवे), तो कुछ ही फर्में टिक पाती हैं; इससे प्राकृतिक एकाधिकार और अल्पाधिकार समझ आते हैं।
करके देखें
3D फ़्री-प्ले में उत्पादन 1,000 से 12,000 तक खिसकाएँ। 1,000, 4,000, 8,000 और 12,000 पर प्रति इकाई लागत लिखें। सपाट तल कहाँ से शुरू होता है? घर पर: एक ही चावल या बिस्कुट के छोटे और फ़ैमिली पैक का प्रति 100 ग्राम दाम तुलना करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- औसत लागत (AC) = कुल लागत (TC) ÷ उत्पादन (Q)
- TC = AC × Q
- पैमाने की बचत: उत्पादन बढ़ने पर LRAC घटती है
- पैमाने की हानि: उत्पादन बढ़ने पर LRAC बढ़ती है
- MES = वह सबसे कम उत्पादन जहाँ LRAC न्यूनतम हो
- आंतरिक बचत → LRAC के साथ चलना; बाहरी बचत → LRAC नीचे खिसकता है
हल किए गए उदाहरण
1. 2,000 इकाइयों की कुल लागत $50,000 है। औसत लागत?
50,000 ÷ 2,000 = $25 प्रति इकाई।
2. फर्म 1,000 इकाइयों ($8,000) से बढ़कर 5,000 इकाइयाँ ($20,000) बनाती है। क्या बचत हुई?
पहले AC = $8; बाद में $4। AC घटी, हाँ।
3. एक विज्ञापन $40,000 का है। 10,000 और 1,00,000 बिक्री पर प्रति इकाई विज्ञापन लागत?
$4 और $0.40। यह विपणन बचत है।
4. उत्पादन 6,000 → TC $30,000; 9,000 → TC $54,000। क्या हो रहा है?
AC $5 से $6। AC बढ़ी, यानी पैमाने की हानि।
5. LRAC: 1,000 पर $9, 3,000 पर $6, 5,000 पर $5, 7,000 पर $5, 9,000 पर $6। MES?
न्यूनतम LRAC $5, पहली बार 5,000 पर। MES = 5,000।
6. इलेक्ट्रॉनिक्स फर्मों के समूह के पास नया विश्वविद्यालय इंजीनियर तैयार करता है। फर्मों के लागत वक्र पर असर?
यह बाहरी बचत है: सब फर्मों के LRAC वक्र नीचे खिसकते हैं।
आम गलतियाँ
- कहना कि कुल लागत घटती है। कुल लागत आमतौर पर बढ़ती है; प्रति इकाई लागत घटती है।
- आंतरिक और बाहरी को मिलाना: आंतरिक = एक फर्म बढ़ी; बाहरी = उद्योग या इलाक़ा बढ़ा।
- अल्पकाल के लिए पैमाने की बचत लगाना। यह दीर्घकाल का विचार है जब सब साधन बदलते हैं।
- मानना कि बड़ा हमेशा सस्ता है। एक बिंदु के बाद हानि से इकाई लागत बढ़ती है।