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दर्द-निवारक: ऐस्पिरिन कैसे बनती है और कैसे जाँची जाती है

दवा के अणु क्रियात्मक समूहों (functional groups) से बनते हैं, जैसे -OH, -COOH, एस्टर और ऐमाइड। रेट्रोसिंथेसिस लक्ष्य अणु से पीछे की ओर सोचना है। ऐस्पिरिन सैलिसिलिक अम्ल के -OH पर ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से ऐसीटिल समूह लगाकर बनती है (योग फिर निष्कासन से एस्टर बनता है, अम्ल उत्प्रेरक के साथ)। शुद्धता गलनांक, फेरिक क्लोराइड परीक्षण और पतली परत क्रोमैटोग्राफी (TLC) से जाँची जाती है, जहाँ Rf = धब्बे की दूरी ÷ विलायक अग्र की दूरी।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह सैलिसिलिक अम्ल है। छह कार्बन के वलय पर OH (बैंगनी) और COOH (लाल) लगे हैं। यह विलो की छाल से मिलता है, पर पेट को नुकसान करता है।
  2. रसायनज्ञ पीछे की ओर सोचते हैं। ऐस्पिरिन (लक्ष्य) बनाने के लिए वे पूछते हैं: कौन-से दो सरल अणु जुड़कर यह देंगे? उत्तर: सैलिसिलिक अम्ल और ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड।
  3. अदला-बदली देखो। ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड अपना ऐसीटिल टुकड़ा वलय के OH को दे देता है। OH एस्टर बन जाता है और ऐसीटिक अम्ल अलग हो जाता है।
  4. दो समूहों की तुलना करो। ऐस्पिरिन में एस्टर (नारंगी) और अम्ल है। पैरासिटामोल में ऐमाइड (हरा) और OH है। एस्टर और ऐमाइड दोनों अम्ल-जैसे टुकड़े से बनते हैं।
  5. क्या उत्पाद शुद्ध है? TLC प्लेट पर कच्चे नमूने के दो धब्बे दिखते हैं, शुद्ध नमूने का एक। Rf बताता है धब्बा विलायक के मुकाबले कितना चला।
  6. अब तुम्हारी बारी। धब्बे और विलायक की दूरी बदलो और Rf = धब्बा ÷ विलायक बदलते देखो। शुद्ध ऐस्पिरिन लगभग 0.55 पर रहती है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सैलिसिलिक अम्ल ऐस्पिरिन में कैसे बदलता है?

उसका -OH ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से एक ऐसीटिल टुकड़ा लेकर एस्टर बन जाता है। 3D में टुकड़े को पार जाते देखो।

रसायनज्ञ पीछे की ओर योजना क्यों बनाते हैं?

लक्ष्य पता है, इसलिए पूछना आसान है कि कौन-से सरल अणु जुड़कर यह बनाएँगे। चरण 1 का तीर योजना दिखाता है।

अणु में -OH और -COOH कैसे पहचानूँ?

बैंगनी घेरा फ़ीनॉल -OH है, लाल घेरा -COOH है।

ऐमाइड एस्टर से कैसे अलग है?

ऐमाइड में नाइट्रोजन (-CONH-) है, एस्टर में ऑक्सीजन (-COO-)। हरे और नारंगी घेरों की तुलना करो।

कच्चे नमूने के दो धब्बे क्यों हैं?

उसमें ऐस्पिरिन और बची सैलिसिलिक अम्ल हैं। वे प्लेट से अलग-अलग चिपकते हैं, इसलिए अलग दूरी चलते हैं।

क्या Rf बदल सकता है?

हाँ, विलायक या प्लेट बदलने पर। दूरियाँ खिसकाकर देखो, पर एक जैसी स्थितियों में वह तय रहता है।

दवाओं के अणुओं में क्रियात्मक समूह

क्रियात्मक समूह (functional group) परमाणुओं का छोटा समूह है जो अणु का व्यवहार तय करता है। दवा इसलिए काम करती है कि उसके समूह शरीर में फिट होते और अभिक्रिया करते हैं। यहाँ चार ज़रूरी हैं:

सैलिसिलिक अम्ल में फ़ीनॉल -OH और -COOH है। ऐस्पिरिन (ऐसीटिलसैलिसिलिक अम्ल) में एस्टर और -COOH है। पैरासिटामोल में फ़ीनॉल -OH और ऐमाइड है। आइबुप्रोफ़ेन में -COOH है।

सरल रेट्रोसिंथेसिस

रेट्रोसिंथेसिस का मतलब है संश्लेषण की योजना पीछे की ओर बनाना। लक्ष्य अणु से शुरू करो, वह बंध ढूँढो जो आसानी से बन सकता है, और उसे कागज़ पर तोड़ो ताकि पता चले कौन-से सरल अणु चाहिए। इसे लक्ष्य से शुरुआती पदार्थों की ओर खुले तीर से दिखाते हैं।

ऐस्पिरिन: एस्टर बंध वह है जो हम बना सकते हैं। उसे कागज़ पर तोड़ो तो सैलिसिलिक अम्ल का -OH वाला टुकड़ा और ऐसीटिल टुकड़ा मिलता है। ऐसीटिल का सुरक्षित, सस्ता स्रोत ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड है। पैरासिटामोल: ऐमाइड बंध तोड़ो तो 4-ऐमीनोफ़ीनॉल और ऐसीटिल स्रोत मिलता है।

एस्टर और ऐमाइड बनने की क्रियाविधि

दोनों अभिक्रियाएँ नाभिकस्नेही ऐसिल प्रतिस्थापन हैं। क्रियाविधि के दो भाग हैं: योग फिर निष्कासन।

  1. ऐसीटिल समूह का कार्बोनिल कार्बन (C=O) थोड़ा धनात्मक होता है। -OH की ऑक्सीजन (या -NH2 की नाइट्रोजन) के पास एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है और वह इस कार्बन पर हमला करती है। यह नाभिकस्नेही है।
  2. C=O बंध खुल जाता है और थोड़ी देर के लिए चतुष्फलकीय मध्यवर्ती बनता है।
  3. C=O बंध फिर बन जाता है और छोड़ने वाला समूह (यहाँ ऐनहाइड्राइड से ऐसीटेट) निकल जाता है। एक प्रोटॉन खिसकता है। उत्पाद एस्टर (-OH से) या ऐमाइड (-NH2 से) है, और ऐसीटिक अम्ल उप-उत्पाद है।

प्रबल अम्ल (फ़ॉस्फ़ोरिक या सल्फ़्यूरिक) की कुछ बूँदें उत्प्रेरक का काम करती हैं: वे कार्बोनिल कार्बन को और धनात्मक बना देती हैं, इसलिए हमला तेज़ होता है। ऐमीन ऐल्कोहॉल से बेहतर नाभिकस्नेही है, इसलिए ऐमाइड बनाना आसान है।

ऐस्पिरिन निकालना और बनाना

शुरुआत: विलो वृक्ष (Salix) की छाल में सैलिसिन होता है, जिसे शरीर सैलिसिलिक अम्ल में बदल देता है। लोग सदियों तक इसे दर्द में लेते रहे, पर यह पेट में जलन करता है। रसायनज्ञों ने -OH को एस्टर बना दिया, और हल्की ऐस्पिरिन मिली।

प्रयोगशाला संश्लेषण (स्कूल स्तर):

  1. सूखे फ़्लास्क में 2.0 g सैलिसिलिक अम्ल लो। 4 mL ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड और सांद्र फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल की 4-5 बूँदें डालो (फ़्यूम कप-बोर्ड में, चश्मा और दस्ताने पहनकर)।
  2. लगभग 70 °C के जल-ऊष्मक में 10-15 मिनट हल्का गरम करो।
  3. अतिरिक्त ऐनहाइड्राइड नष्ट करने के लिए सावधानी से ठंडा पानी डालो, फिर बर्फ़ में ठंडा करो ताकि क्रिस्टल बनें।
  4. क्रिस्टलों को चूषण से छानो, ठंडे पानी से धोओ और सुखाओ।
  5. और शुद्ध करने के लिए ऐथेनॉल-पानी के मिश्रण से पुनःक्रिस्टलन करो।

उपज। मोलर द्रव्यमान: सैलिसिलिक अम्ल 138 g/mol, ऐस्पिरिन 180 g/mol, अनुपात 1:1। 2.0 g से: 2.0 / 138.1 = 0.0145 mol, इसलिए सैद्धांतिक द्रव्यमान 0.0145 x 180.2 = 2.61 g। प्रतिशत उपज = वास्तविक / सैद्धांतिक x 100।

शुद्धता जाँच: गलनांक, क्रोमैटोग्राफी और Rf

गलनांक। शुद्ध ऐस्पिरिन लगभग 135 °C पर तेज़ी से पिघलती है। अशुद्ध नमूना कम ताप पर और एक परास में पिघलता है। आयरन(III) क्लोराइड परीक्षण। बची हुई सैलिसिलिक अम्ल (फ़ीनॉल) बैंगनी हो जाती है; शुद्ध ऐस्पिरिन पीली-भूरी रहती है।

पतली परत क्रोमैटोग्राफी (TLC)। सिलिका प्लेट पर पेंसिल की रेखा पर नमूनों के छोटे धब्बे लगाओ। प्लेट को थोड़े विलायक में खड़ा करो। विलायक ऊपर चढ़ता है और हर पदार्थ को अलग दूरी तक ले जाता है, क्योंकि कुछ पदार्थ सिलिका से ज़्यादा चिपकते हैं। जब विलायक ऊपर के पास पहुँचे तो विलायक अग्र पर निशान लगाओ।

Rf = धब्बे द्वारा तय दूरी / विलायक अग्र द्वारा तय दूरी। यह हमेशा 0 और 1 के बीच होता है और इसकी कोई इकाई नहीं। एक जैसी स्थितियों में एक ही पदार्थ का Rf एक ही आता है, इसलिए नमूने के धब्बे की तुलना ज्ञात संदर्भ से कर सकते हैं। एक धब्बा शुद्धता का संकेत है; दो या ज़्यादा धब्बे मिश्रण दिखाते हैं।

खुद करके देखो

घर पर सुरक्षित तरीका: कॉफ़ी फ़िल्टर की पट्टी पर पेंसिल की रेखा खींचो, उस पर काली स्केच-पेन की स्याही की बूँद लगाओ, पट्टी को 1 सेमी पानी में खड़ा करो और रंगों को अलग होते देखो। एक रंग की और पानी के अग्र की दूरी नापो, फिर भाग देकर उसका Rf निकालो। 3D में स्लाइडर चलाकर देखो Rf कैसे बदलता है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक धब्बा 3.3 cm चला और विलायक अग्र 6.0 cm। Rf निकालो।

Rf = 3.3 / 6.0 = 0.55।

2. ऐस्पिरिन में कौन-से क्रियात्मक समूह हैं?

बेंज़ीन वलय, एस्टर (-OCOCH3) और कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH)।

3. 2.0 g सैलिसिलिक अम्ल (M = 138 g/mol) से, अनुपात 1:1 हो तो, कितने मोल ऐस्पिरिन बनेगी?

सैलिसिलिक अम्ल के मोल = 2.0 / 138 = 0.0145 mol, इसलिए 100% उपज पर 0.0145 mol ऐस्पिरिन।

4. 2.0 g सैलिसिलिक अम्ल से ऐस्पिरिन (M = 180 g/mol) का सैद्धांतिक द्रव्यमान निकालो।

0.0145 mol x 180 g/mol = 2.61 g।

5. एक विद्यार्थी को सैद्धांतिक 2.61 g के बदले 1.8 g ऐस्पिरिन मिली। प्रतिशत उपज निकालो।

1.8 / 2.61 x 100 = 69%।

6. कच्ची ऐस्पिरिन की TLC प्लेट पर Rf 0.55 और 0.30 पर धब्बे हैं। शुद्ध संदर्भ का एक धब्बा 0.55 पर है। इससे क्या पता चलता है?

0.55 वाला धब्बा ऐस्पिरिन से मेल खाता है। 0.30 वाला धब्बा दूसरा पदार्थ है (शायद बची सैलिसिलिक अम्ल), इसलिए कच्चा नमूना अशुद्ध है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. ऐस्पिरिन में -COOH के अलावा कौन-सा समूह है?
2. रेट्रोसिंथेसिस का मतलब:
3. Rf होता है:
4. सैलिसिलिक अम्ल को ऐसीटिल समूह कौन-सा अभिकर्मक देता है?
5. उत्पाद की TLC प्लेट पर दो धब्बे दिखाते हैं कि वह:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैलिसिलिक अम्ल से ऐस्पिरिन कैसे बनती है?

सैलिसिलिक अम्ल को ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड और थोड़े अम्ल उत्प्रेरक के साथ गरम करते हैं। -OH समूह एस्टर बन जाता है (ऐसीटिल जुड़ता है) और ऐसीटिक अम्ल बनता है।

Rf मान क्या है?

क्रोमैटोग्राफी प्लेट पर धब्बे द्वारा तय दूरी को विलायक अग्र द्वारा तय दूरी से भाग देने पर Rf मिलता है। यह 0 और 1 के बीच होता है।

एस्टर और ऐमाइड में क्या अंतर है?

एस्टर अम्ल और ऐल्कोहॉल (-OH) से बनता है; ऐमाइड अम्ल और ऐमीन (-NH2) से। ऐमाइड ज़्यादा स्थिर होते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

जर्मनीJahrgangsstufe 11Pharmacy

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