घोल तैयार करना
घोल ऐसा मिश्रण है जो हर जगह एक जैसा दिखता है। विलेय (जैसे नमक) विलायक (जैसे पानी) में घुलता है।
दी हुई सांद्रता का घोल बनाने के चरण:
- ज़रूरी विलेय का द्रव्यमान निकालो।
- वज़न-नाव में रखकर तराज़ू पर तोलो।
- कीप से मापन फ्लास्क में डालो।
- थोड़ा पानी डालो और घुलने तक घुमाओ।
- पानी की सतह (मेनिस्कस) का निचला किनारा निशान को छूने तक पानी डालो। डाट लगाओ और फ्लास्क को कुछ बार उलटो ताकि घोल मिल जाए।
सांद्रता बताती है कि घोल के किसी आयतन में कितना विलेय है।
द्रव्यमान सांद्रता = विलेय का द्रव्यमान (g) ÷ घोल का आयतन (L)। उदाहरण: 5 g नमक को 100 mL (0.100 L) बनाया तो 5 ÷ 0.100 = 50 g/L। यह 100 mL में 5 g, यानी 5 % (m/V) के बराबर है।
तनुकरण: गाढ़े घोल से हल्का घोल बनाने के लिए C1 × V1 = C2 × V2 लगाओ।
- हमेशा चश्मा पहनो। गाढ़ा अम्ल पानी में डालो, पानी अम्ल में कभी नहीं।
- हर बोतल पर नाम, सांद्रता, तारीख और अपना नाम लिखो।
छानना (फ़िल्ट्रेशन)
छानना अघुलनशील ठोस को द्रव से अलग करता है। छन्ना कागज़ को शंकु की तरह मोड़कर कीप में लगाओ। कागज़ गीला करो ताकि काँच से चिपक जाए। काँच की छड़ के सहारे मिश्रण धीरे-धीरे डालो। द्रव कागज़ के सूक्ष्म छेदों से निकल जाता है; ठोस टुकड़े बड़े होने से रुक जाते हैं।
- अवशेष: जो कागज़ पर रुकता है।
- छनित: जो द्रव नीचे निकलता है।
कागज़ का किनारा कीप के किनारे से नीचे रखो और कीप की नोक बीकर की दीवार से लगाओ, ताकि छींटे न उड़ें। छन्ना घुला हुआ विलेय नहीं रोक सकता: नमक का पानी कागज़ से निकल जाता है। उसके लिए वाष्पीकरण या आसवन चाहिए।
सूक्ष्मदर्शी की स्लाइड तैयार करना
सूक्ष्मदर्शी में नमूना इतना पतला चाहिए कि रोशनी उसमें से निकल सके। गीली स्लाइड (वेट माउंट) के चरण:
- साफ़ काँच की स्लाइड मेज़ पर रखो।
- बीच में पानी (या रंजक) की छोटी बूँद डालो।
- चिमटी से बहुत पतला नमूना (जैसे प्याज़ की झिल्ली) बूँद में रखकर फैला दो।
- कवर-स्लिप का एक किनारा बूँद से छुआओ। सुई के सहारे धीरे और तिरछा उतारो। इससे हवा निकल जाती है और बुलबुले नहीं बनते।
- ब्लॉटिंग पेपर से फालतू द्रव सोख लो।
रंजक (प्याज़ के लिए आयोडीन, गाल की कोशिकाओं के लिए मेथिलीन ब्लू) कोशिका के भाग रंग देता है, तो केन्द्रक दिखता है। पहले सबसे कम आवर्धन पर फ़ोकस करो, फिर बढ़ाओ। सूक्ष्मदर्शी दोनों हाथों से उठाओ।
कोशिकाएँ और ऊतकों के प्रकार
कोशिका जीवन की मूल इकाई है। ऊतक एक जैसी कोशिकाओं का समूह है जो मिलकर एक काम करता है। पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है, इसलिए वे साफ़ ईंटों जैसी दिखती हैं। जंतु कोशिकाओं में भित्ति नहीं होती।
| जंतु ऊतक | कैसा दिखता है | काम |
|---|---|---|
| उपकला | कोशिकाएँ चादर में पास-पास | ढकना और अस्तर (त्वचा, आँत) |
| पेशी | धारीदार लंबे तंतु | सिकुड़कर गति करना |
| तंत्रिका | शाखाओं वाला कोशिका-काय और लंबा तंतु | संकेत ले जाना |
| संयोजी | आधात्री में फैली कोशिकाएँ (खून, हड्डी, वसा) | सहारा, जोड़ना, ढोना |
कोशिकाएँ बहुत छोटी हैं: सामान्य कोशिका 10 से 100 माइक्रोमीटर (µm) चौड़ी होती है। 1 mm = 1000 µm। इसीलिए सूक्ष्मदर्शी चाहिए। कुल आवर्धन = नेत्रिका की शक्ति × अभिदृश्यक की शक्ति (जैसे 10 × 40 = 400)।
अनुसंधान की विधियों की तुलना
वैज्ञानिक सवाल के हिसाब से विधि चुनते हैं।
| विधि | क्या करते हैं | ताकत | सीमा |
|---|---|---|---|
| अवलोकन | बिना कुछ बदले देखते और लिखते हैं | प्राकृतिक, नए सवालों के लिए अच्छा | कारण सिद्ध नहीं कर सकता |
| प्रयोग | एक चर बदलते हैं, बाकी वही रखते हैं | कारण और प्रभाव दिखा सकता है | हालात बनावटी होते हैं |
| सर्वेक्षण | कई लोगों या जगहों से पूछते हैं | बड़े समूह का रुझान दिखाता है | उत्तर गलत या पक्षपाती हो सकते हैं |
| मॉडल / सिमुलेशन | चित्र, समीकरण या कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं | सुरक्षित, तेज़, सस्ता | मान्यताओं जितना ही सही |
उदाहरण: नमक से बर्फ़ जल्दी पिघलती है या नहीं, यह प्रयोग से देखो। बगीचे में कौन-सी चिड़िया आती है, यह अवलोकन से। कितने विद्यार्थी पुस्तकालय इस्तेमाल करते हैं, यह सर्वेक्षण से।
घर पर करके देखो: नमक, रेत और छन्नी
- एक गिलास पानी में 1 चम्मच रेत और 1 चम्मच नमक मिलाकर हिलाओ।
- मिश्रण को कॉफ़ी फ़िल्टर या साफ़ कपड़े से दूसरे गिलास में छानो। पीछे क्या रुका? अवशेष कौन-सा है?
- देखो: छनित साफ़ है, पर क्या नमक गायब हो गया? नहीं, वह घुला हुआ है और छन्ने से निकल गया।
- पहले सोचो, फिर जाँचो: छनित से नमक वापस कैसे पाओगे? (बड़ों की मदद से पानी को हल्का गर्म करके सुखा दो।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सांद्रता (g/L) = विलेय का द्रव्यमान (g) ÷ घोल का आयतन (L)
- % (m/V) = विलेय का द्रव्यमान (g) ÷ आयतन (mL) × 100
- तनुकरण: C1 × V1 = C2 × V2
- छनित = जो द्रव निकल जाता है; अवशेष = जो ठोस रुकता है
- कुल आवर्धन = नेत्रिका × अभिदृश्यक
- 1 mm = 1000 µm
हल किए गए उदाहरण
1. 12 g चीनी पानी में घोलकर घोल को 400 mL बनाया। सांद्रता g/L में निकालो।
400 mL = 0.4 L। सांद्रता = 12 ÷ 0.4 = 30 g/L।
2. 250 mL, 20 g/L सोडियम क्लोराइड घोल के लिए कितना नमक चाहिए?
250 mL = 0.25 L। द्रव्यमान = 20 × 0.25 = 5 g।
3. 100 g/L का गाढ़ा घोल है। उससे 10 g/L का 200 mL घोल कैसे बनाओगे?
C1V1 = C2V2: 100 × V1 = 10 × 200, इसलिए V1 = 20 mL। गाढ़े घोल का 20 mL लेकर पानी डालकर 200 mL बनाओ।
4. चॉक के चूरे और पानी के मिश्रण को छाना गया। अवशेष और छनित बताओ।
चॉक का चूरा अवशेष है (कागज़ पर रुका)। छनित साफ़ पानी है।
5. नेत्रिका 10× और अभिदृश्यक 40× है। कुल आवर्धन? दृश्य में कोशिका 2 mm चौड़ी दिखती है, तो असल चौड़ाई µm में कितनी है?
कुल = 10 × 40 = 400×। असल चौड़ाई = 2 mm ÷ 400 = 0.005 mm = 5 µm।
आम गलतियाँ
- बीकर में निशान तक पानी भरना। बीकर सटीक नहीं होता; मापन फ्लास्क लो।
- g/L निकालते समय mL को L में बदलना भूल जाना।
- सोचना कि छन्ना घुला नमक या चीनी रोक लेगा। वह सिर्फ़ अघुलनशील ठोस रोकता है।
- कवर-स्लिप को सीधा गिरा देना, जिससे हवा के बुलबुले फँस जाते हैं।
- पहले ही उच्च आवर्धन वाला अभिदृश्यक लगाना। हमेशा सबसे कम से शुरू करो।