Japan 中学3年 Mathematics
अध्याय: 4
1. Numbers and expressions
Square roots · Polynomials: expansion and factorisation · Quadratic equations
- अपरिमेय संख्याएँ: √2, √3, वर्गमूल सर्पिल और वास्तविक संख्याएँ – अपरिमेय संख्या को p/q के रूप में नहीं लिख सकते। इसका दशमलव न कभी खत्म होता है, न दोहराता है, जैसे √2 = 1.41421356… या π। फिर भी √2 को संख्या रेखा पर ठीक-ठीक दिखा सकते हैं: यह 1 भुजा वाले वर्ग का विकर्ण है। √2 और √3 अपरिमेय हैं, यह हम मानकर सिद्ध करते हैं कि वे सरलतम भिन्न हैं और फिर विरोधाभास पाते हैं। वर्गमूल सर्पिल एक-एक समकोण त्रिभुज जोड़कर √2, √3, √4, √5 … बनाता है। परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाते हैं; हर आवर्ती दशमलव को वापस p/q में बदल सकते हैं।
- बीजीय सर्वसमिकाओं की खोज – सर्वसमिका (identity) ऐसा समीकरण है जो अक्षरों के हर मान के लिए सही हो। चित्र से इन्हें साबित करते हैं: भुजा (a + b) का वर्ग a², ab, ab और b² में बँटता है, इसलिए (a + b)² = a² + 2ab + b². ऐसे ही (a − b)², a² − b² = (a + b)(a − b), (x + a)(x + b), (a + b + c)² और (a + b)³ मिलते हैं। उल्टा पढ़ें तो ये गुणनखंड, तेज़ गणना और परिमेय व्यंजक सरल करने में मदद करती हैं।
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
2. Geometry
Similarity · Inscribed and central angles · Pythagorean theorem
- समरूप त्रिभुज – दो आकृतियाँ समरूप होती हैं जब उनका आकार (shape) एक जैसा हो, भले नाप अलग हो। दो त्रिभुज समरूप हैं अगर उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ एक ही अनुपात में हों। आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा बाकी दो भुजाओं को एक ही अनुपात में बाँटती है; इसका विलोम भी सही है। समरूपता AA, SSS या SAS से सिद्ध होती है।
- वृत्त: जीवाएँ और कोण – जीवा वृत्त के दो बिंदुओं को मिलाती है। लंबी जीवा केंद्र पर बड़ा कोण बनाती है, और बराबर जीवाएँ बराबर कोण। केंद्र से जीवा पर डाला लंब उसे आधा करता है, और बराबर जीवाएँ केंद्र से बराबर दूरी पर होती हैं। कोई चाप केंद्र पर जो कोण बनाता है, वह वृत्त के बाकी हिस्से के किसी भी बिंदु पर बने कोण का दोगुना होता है, इसलिए अर्धवृत्त का कोण 90° है। चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का जोड़ 180° होता है।
- पाइथागोरस प्रमेय – किसी भी समकोण त्रिभुज में सबसे लंबी भुजा (कर्ण) का वर्ग बाकी दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: a² + b² = c²।
3. Functions
Function y = ax²
- द्विघात फलन और उनके ग्राफ़ – द्विघात फलन (quadratic function) y = ax² + bx + c है, जहाँ a ≠ 0। इसका ग्राफ़ U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं। a > 0 हो तो वक्र ऊपर खुलता है और उसका एक सबसे निचला बिंदु होता है; a < 0 हो तो नीचे खुलता है और सबसे ऊँचा बिंदु होता है। यह मोड़ बिंदु शीर्ष (vertex) है, x = −b/2a पर। शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k में शीर्ष (h, k) है।
4. Using data
Sampling surveys
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।