France Première Mathematics within Scientific Education
अध्याय: 4
1. Automatic skills
Numeric and algebraic calculation · Functions and graphs · Statistics · Probability
- मानसिक गणित: तेज़ और सही गणना – मानसिक गणित यानी रोज़ की गणनाएँ दिमाग़ में या बहुत कम पंक्तियों में जल्दी और सही करना। दो संख्याओं की तुलना अंतर से या अनुपात से करो। प्रतिशत बदलाव को गुणक बनाओ: +20% यानी × 1.2, −20% यानी × 0.8। लगातार बदलावों के गुणक आपस में गुणा होते हैं, इसलिए +20% फिर −20% का नतीजा × 0.96 है, × 1 नहीं। +p% को पलटने के लिए गुणक का व्युत्क्रम लो। 10 की घात, इकाई बदलना, (a + b)² = a² + 2ab + b², (a + b)(a − b) = a² − b², सूत्र में एक अक्षर को अकेला करना और यह नियम याद रखो कि गुणनफल तभी शून्य होता है जब कोई गुणनखंड शून्य हो।
- फलन: इनपुट, नियम, आउटपुट – फलन (function) ऐसा नियम है जो हर इनपुट के लिए ठीक एक आउटपुट देता है। इसे f(x) लिखते हैं। f(a) को a का प्रतिबिंब (image) कहते हैं; जो इनपुट कोई दिया हुआ आउटपुट दे, वह पूर्व-प्रतिबिंब (preimage) है। फलन को शब्दों, सारणी, सूत्र या ग्राफ़ से दिखा सकते हैं। ग्राफ़ ऊपर जा सकता है (वर्धमान), नीचे जा सकता है (ह्रासमान), और उसका सबसे ऊँचा (अधिकतम) या सबसे नीचा (न्यूनतम) बिंदु हो सकता है।
- सांख्यिकी: वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, माध्यक और बहुलक – जब आँकड़े वर्गों में बँटे हों (जैसे अंक 20–30), तो हर एक मान नहीं दिखता। माध्य के लिए हर वर्ग का बीच का मान लेते हैं, माध्यक के लिए चलता जोड़ (संचयी बारंबारता), और बहुलक के लिए सबसे ऊँचा खंभा। तीनों अलग तरीके से आँकड़ों का 'केंद्र' बताते हैं।
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
2. Analysing numerical information
Proportions, percentages, changes, statistical indicators
- प्रतिशत – प्रतिशत का अर्थ है "100 में से", इसलिए x% = x/100। किसी राशि का x% निकालने के लिए उसे x/100 से गुणा करें। प्रतिशत परिवर्तन = (परिवर्तन ÷ मूल) × 100। r% बढ़ाने के लिए (1 + r/100) से, r% घटाने के लिए (1 − r/100) से गुणा करें। क्रमागत परिवर्तनों में गुणकों को गुणा करते हैं। उल्टे प्रतिशत में नए मान को गुणक से भाग देते हैं।
3. Random phenomena
Repeated random trials and simulation
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
4. Modelling change with functions
Linear change: affine functions · Quadratic models · Exponential change
- रैखिक फलन (Linear Functions) – रैखिक फलन में x के हर 1 बढ़ने पर y में हमेशा एक बराबर मात्रा जुड़ती है। इसका नियम y = mx + c है (कहीं f(x) = mx + b भी लिखते हैं)। m ढाल है: ऊपर ÷ आगे, यानी x में 1 बढ़ने पर y का बदलाव। c, y-अंतःखंड है: x = 0 पर y का मान। इसका ग्राफ़ हमेशा सीधी रेखा होता है।
- द्विघात समीकरण – जिस समीकरण में x की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, जहाँ a ≠ 0। इसके ज़्यादा से ज़्यादा दो मूल होते हैं। मूल निकालने के दो तरीक़े: गुणनखंड (मध्य पद को तोड़कर) या सूत्र x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। विविक्तकर D = b² − 4ac बताता है: D > 0 तो दो अलग वास्तविक मूल, D = 0 तो दो बराबर मूल, D < 0 तो कोई वास्तविक मूल नहीं।
- घातांकी फलन (Exponential Functions) – घातांकी फलन का रूप y = a·bˣ है, जहाँ a ≠ 0 शुरुआती मान है और b > 0, b ≠ 1 वृद्धि-गुणक (आधार) है। b > 1 हो तो बढ़ता है, 0 < b < 1 हो तो घटता (क्षय) है। x में 1 बढ़ने पर y को b से गुणा किया जाता है (स्थिर अनुपात), जबकि रैखिक फलन में हर बार एक ही संख्या जुड़ती है। y = bˣ का ग्राफ (0, 1) से गुज़रता है, प्रांत सभी वास्तविक संख्याएँ, परिसर y > 0, और x-अक्ष अनंतस्पर्शी है। सामान्य रूप y = a·b^(k(x − d)) + c इसे खींचता, पलटता और खिसकाता है।