देखभाल प्रक्रिया क्या है?
देखभाल प्रक्रिया (केयर प्रोसेस) काम करने का एक क्रमवार तरीक़ा है। इससे देखभालकर्ता एक व्यक्ति के हिसाब से देखभाल करता है, सबके लिए एक जैसी दिनचर्या नहीं।
चरण गोल घूमते हैं, इसलिए इसे चक्र कहते हैं: जानकारी जुटाना, आकलन, जीवन-समस्या और लक्ष्य, योजना, करना, मूल्यांकन, फिर सीखी बातों के साथ दोबारा शुरू।
क्यों उपयोगी है? अंदाज़े नहीं लगते। व्यक्ति केंद्र में रहता है। पूरी टीम एक ही योजना देखती है।
जानकारी जुटाना और आकलन
जानकारी जुटाना यानी व्यक्ति के बारे में तथ्य खोजना। शरीर (चलना, खाना, सोना), मन (मूड, याददाश्त), घर (सीढ़ियाँ, बाथरूम), आस-पास के लोग (परिवार, पड़ोसी) और सबसे ज़रूरी, व्यक्ति क्या चाहता और पसंद करता है।
तथ्य कहाँ से मिलते हैं? देखने से, व्यक्ति से बात करने से, परिवार से, रिकॉर्ड से और टीम के दूसरे सदस्यों से।
आकलन यानी तथ्यों का मतलब निकालना। तीन सवाल पूछिए: व्यक्ति क्या कर सकता है? क्या कठिन है और क्यों? व्यक्ति क्या आशा रखता है? सिर्फ़ लक्षण नहीं, कारण खोजिए। "खाना नहीं खाता" का कारण दाँत का दर्द, उदासी या ऊँची मेज़ हो सकती है।
जीवन-समस्या और लक्ष्य निर्धारण
जीवन-समस्या (जीवन की ज़रूरत या देखभाल की ज़रूरत) रोज़ के जीवन की वह बात है जो कठिन है और जिसमें सहारा चाहिए, जैसे "समय पर शौचालय नहीं पहुँच पाता" या "दोपहर में अकेलापन लगता है"।
लक्ष्य बताता है कि बेहतर कैसा दिखेगा। अच्छा लक्ष्य:
- व्यक्ति का अपना: जो वह चाहता है।
- साफ़: पता चले कि हुआ या नहीं।
- संभव: बहुत बड़ा नहीं।
- समय के साथ: "एक महीने में"।
दीर्घकालिक लक्ष्य बड़ी आशा है (जैसे "फिर मंदिर तक चलना")। अल्पकालिक लक्ष्य उस तक पहुँचने के छोटे क़दम हैं (जैसे "अगले हफ़्ते वॉकर से 10 क़दम चलना")।
देखभाल योजना बनाना
देखभाल योजना लिखित वादा है कि क्या किया जाएगा। यह बताती है: क्या करेंगे? कौन करेगा? कैसे? कब और कितनी बार? क्या सावधानी रखनी है (सुरक्षा)?
सुझाव: सरल शब्दों में लिखिए, व्यक्ति का अपना हिस्सा लिखिए ("देवी जी स्टूल पर ख़ुद बैठती हैं"), व्यक्ति की ताक़त का उपयोग कीजिए, योजना व्यक्ति, परिवार और टीम को बताइए और व्यक्ति की सहमति लीजिए।
योजना को लागू करना और मूल्यांकन
लागू करना यानी योजना जैसी लिखी है वैसे ही, सुरक्षित और सम्मान के साथ करना और छोटा रिकॉर्ड लिखना कि क्या हुआ और व्यक्ति ने कैसा महसूस किया।
मूल्यांकन यानी जाँचना कि लक्ष्य पास आया या नहीं। शुरुआत से तुलना कीजिए। व्यक्ति से पूछिए कैसा लग रहा है। फिर तय कीजिए: लक्ष्य पूरा (नया लक्ष्य रखिए), ठीक चल रहा है (जारी रखिए), या काम नहीं कर रहा (कारण पूछिए और योजना बदलिए)। फिर चक्र दोबारा शुरू होता है।
करके देखिए: साधारण समस्या पर देखभाल प्रक्रिया
परिवार के किसी सदस्य या मित्र को चुनिए जिसे कोई एक काम कठिन लगता है (जैसे सीढ़ी चढ़ना)। तीन सवाल पूछिए, समय के साथ एक लक्ष्य लिखिए और तीन पंक्ति की योजना बनाइए। एक हफ़्ते बाद जाँचिए और लिखिए कि क्या बदलेंगे। हमेशा अनुमति लीजिए और जो जानें उसे निजी रखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- देखभाल प्रक्रिया = जानकारी + आकलन + लक्ष्य + योजना + करना + मूल्यांकन, फिर दोहराना
- अच्छा लक्ष्य = व्यक्ति की इच्छा + साफ़ + संभव + समय के साथ
- देखभाल योजना = क्या + कौन + कैसे + कब + सुरक्षा
- मूल्यांकन = शुरुआत से तुलना, फिर जारी रखना, बदलना या पूरा करना
हल किए गए उदाहरण
1. एक आदमी दोपहर का खाना नहीं खाता। एक तथ्य और एक संभावित कारण बताइए।
तथ्य: वह कुछ ही चम्मच खाता है और जबड़ा सहलाता है। संभावित कारण: दाँत का दर्द। योजना बनाने से पहले आकलन कारण खोजता है।
2. इसे लक्ष्य बनाइए: "दादी अकेली हैं।"
जीवन-समस्या: दोपहर में अकेलापन। लक्ष्य: "एक महीने में दादी हफ़्ते में कम से कम तीन दोपहर किसी सहेली या पड़ोसी से बातें करें।"
3. "अगले हफ़्ते तक वॉकर से 10 क़दम चलना" के लिए योजना की एक पंक्ति लिखिए।
क्या: वॉकर से चलने का अभ्यास। कौन: देखभालकर्ता पास में। कैसे: वे वॉकर पकड़ें, देखभालकर्ता कमज़ोर तरफ़ चले। कब: रोज़ नाश्ते के बाद। सुरक्षा: जूते पहने हों, फ़र्श साफ़ हो।
4. दो हफ़्ते बाद व्यक्ति आसानी से 10 क़दम चलता है। अब क्या?
मूल्यांकन: अल्पकालिक लक्ष्य पूरा हुआ। नया लक्ष्य रखिए (जैसे 30 क़दम) और योजना बदलिए। चक्र चलता रहता है।
आम गलतियाँ
- जानकारी जुटाने से पहले योजना लिख देना।
- लक्ष्य व्यक्ति की इच्छा के बजाय देखभालकर्ता की सुविधा से रखना।
- "ठीक हो जाना" जैसे लक्ष्य जिनका न साफ़ संकेत है न समय।
- मूल्यांकन कभी न करना, इसलिए योजना बेकार होने पर भी वही रहती है।