घटती आबादी और सामाजिक कल्याण
कई देशों में लोग ज़्यादा जीते हैं और परिवारों में बच्चे कम होते हैं। आबादी बूढ़ी होती है, और कुछ देशों में घटती भी है। 65 साल और उससे ऊपर के लोगों का हिस्सा बढ़ता है, इसलिए हर कमाने वाले पर ज़्यादा बुज़ुर्गों का सहारा आ जाता है। इस अनुपात को वृद्ध निर्भरता अनुपात कहते हैं। 10 कमाने वाले और 5 बुज़ुर्ग हों तो अनुपात है हर बुज़ुर्ग पर 2 कमाने वाले।
इससे सामाजिक कल्याण (ज़रूरतमंदों के लिए पूरे समाज की व्यवस्था) बदलता है। पेंशन, स्वास्थ्य सेवा और दीर्घकालीन देखभाल ज़्यादा चाहिए, जबकि कर और अंशदान देने वाले कम हैं। समाज इसका जवाब देता है: काम की उम्र बढ़ाकर, बुज़ुर्गों को स्वस्थ और सक्रिय रखकर, परिवारों की मदद करके और समुदाय में देखभाल बनाकर।
बुज़ुर्ग कल्याण के क़ानून और व्यवस्था
कल्याण व्यवस्था क़ानूनों, पैसे और सेवाओं का समूह है। यह चार खंभों पर टिकी है:
- पेंशन: काम ख़त्म होने के बाद नियमित आमदनी। यह अंशदान से, करों से या दोनों से दी जा सकती है।
- स्वास्थ्य बीमा: इलाज का खर्च उठाता है ताकि बीमारी परिवार को बर्बाद न करे।
- दीर्घकालीन देखभाल: नहाने, खाने, चलने-फिरने और रोज़ के दूसरे कामों में मदद। कुछ देशों में इसके लिए अलग देखभाल बीमा है। कुछ में खर्च करों से चलता है या परिवार पर ज़्यादा निर्भरता है।
- अधिकारों के क़ानून: बुज़ुर्गों के साथ सम्मान से व्यवहार हो, उपेक्षा और दुर्व्यवहार न हो, और वे अपने फ़ैसले ख़ुद ले सकें। क़ानून वयस्क बच्चों को माता-पिता का भरण-पोषण करने का दायित्व भी दे सकते हैं, दुर्व्यवहार से बचा सकते हैं, और कल्याण कार्यालय व देखभाल के मानक तय कर सकते हैं।
उदाहरण: जापान में दीर्घकालीन देखभाल बीमा 2000 में शुरू हुआ, और भारत में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण का राष्ट्रीय क़ानून (2007) तथा कई पेंशन योजनाएँ हैं। हर देश में ब्योरे अलग हैं; विचार वही है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा और कल्याण सेवाएँ
तीन तरह की सेवाएँ साथ काम करती हैं।
- स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों को स्वस्थ रखती हैं: जाँच, टीके, कसरत समूह, खान-पान की सलाह, मन और याददाश्त की देखभाल।
- चिकित्सा सेवाएँ बीमारी का इलाज करती हैं: परिवार का डॉक्टर, अस्पताल, गिरने या लकवे के बाद पुनर्वास, जीवन के अंत में सहारा देने वाली देखभाल।
- कल्याण सेवाएँ रोज़ के जीवन में मदद करती हैं: घरेलू सहायता, भोजन, दिन-केंद्र, कुछ दिन ठहरना, देखभाल गृह, और वॉकर व बाथरूम की रेलिंग जैसे साधन।
सेवाएँ ज़रूरत के स्तर के हिसाब से दी जाती हैं। देखभाल प्रबंधक (या सामाजिक कार्यकर्ता) आता है, सुनता है और बुज़ुर्ग व परिवार के साथ योजना बनाता है। जहाँ हो सके, देखभाल समुदाय में, घर के पास होती है, ताकि व्यक्ति के दोस्त और दिनचर्या बनी रहें। इसे समुदाय-आधारित एकीकृत देखभाल कहते हैं।
करके देखो: अपने मोहल्ले का नक्शा बनाओ
अपनी गली का नक्शा बनाओ। उसमें क्लिनिक, दवाई की दुकान, पार्क, सामुदायिक भवन और 70 साल से ऊपर का एक पड़ोसी दिखाओ। सोचो: अगर यह पड़ोसी ज़्यादा दूर न चल पाएँ तो उन्हें खाना, दवाई और साथ कैसे मिलेगा? 3D के घेरे की कौन सी सेवाएँ आपके पास नहीं हैं?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वृद्ध निर्भरता अनुपात = कमाने वाले / बुज़ुर्ग (हर बुज़ुर्ग पर कमाने वाले)
- चार खंभे: पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, दीर्घकालीन देखभाल, अधिकारों के क़ानून
- तीन तरह की सेवाएँ: स्वास्थ्य, चिकित्सा, कल्याण
- सही मदद, सही जगह, सही समय
हल किए गए उदाहरण
1. एक कस्बे में 9 000 कामकाजी वयस्क और 65 साल से ऊपर के 3 000 लोग हैं। हर बुज़ुर्ग पर कितने कमाने वाले हैं?
9 000 / 3 000 = हर बुज़ुर्ग पर 3 कमाने वाले।
2. 30 साल बाद उसी कस्बे में 8 000 कमाने वाले और 4 000 बुज़ुर्ग हैं। क्या हर कमाने वाले का बोझ बढ़ा या घटा?
अनुपात = 8 000 / 4 000 = 2। पहले 3 था, इसलिए हर कमाने वाले पर अब ज़्यादा बुज़ुर्गों का सहारा है (बोझ बढ़ा)।
3. श्रीमती राव खाना बना और चल सकती हैं, पर सामान नहीं उठा पातीं और दवाई भूल जाती हैं। कौन सा सेवा स्तर ठीक है?
स्तर 1: घरेलू सहायक जो सामान लाए और दवाई याद दिलाए, साथ में डॉक्टर की नियमित जाँच। उन्हें देखभाल गृह नहीं चाहिए।
4. श्री ख़ान अकेले नहा-कपड़े नहीं पहन पाते और रात में गिर जाते हैं। कौन सा स्तर और क्यों?
स्तर 3: देखभाल गृह (या चौबीसों घंटे की घरेलू देखभाल) जिसमें दिन-रात नर्सिंग हो, क्योंकि उन्हें हर समय मदद चाहिए।
5. एक पेंशन योजना 4 000 बुज़ुर्गों को हर महीने 3 000 रुपये देती है। साल भर का खर्च क्या है?
3 000 x 4 000 = 1 20 00 000 रुपये प्रति माह (1.2 करोड़)। x 12 = 14 40 00 000 रुपये = 14.4 करोड़ रुपये प्रति वर्ष।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि कल्याण सिर्फ़ पैसा है। सेवाएँ, अधिकार और समुदाय की देखभाल पेंशन जितने ही ज़रूरी हैं।
- सबको देखभाल गृह भेज देना। लक्ष्य है सबसे हल्की सेवा जो काम करे, घर के पास।
- स्वास्थ्य, चिकित्सा और कल्याण सेवाओं को मिला देना। स्वास्थ्य स्वस्थ रखता है, चिकित्सा इलाज करती है, कल्याण रोज़ के काम में मदद करता है।
- यह भूल जाना कि हर बुज़ुर्ग पर कमाने वाले कम होने का मतलब है हर कमाने वाले पर भारी बोझ।