अमेरिकी लोकतंत्र के मूल विचार
संविधान बनाने वालों ने कुछ बड़े विचारों पर काम किया:
- प्राकृतिक अधिकार: हर इंसान जन्म से जीवन और स्वतंत्रता जैसे अधिकार लेकर आता है।
- जनता की संप्रभुता (popular sovereignty): शक्ति जनता से आती है। संविधान "We the People" (हम लोग) से शुरू होता है।
- सामाजिक अनुबंध: लोग सरकार को इसलिए मानते हैं ताकि वह उनके अधिकार बचाए।
- सीमित सरकार: सरकार केवल वही कर सकती है जिसकी क़ानून अनुमति दे।
- गणतंत्र: लोग प्रतिनिधि चुनते हैं जो फ़ैसले लेते हैं।
लोकतंत्र के तीन रूप
- सहभागी (participatory): बहुत लोग सीधे भाग लेते हैं, जैसे टाउन मीटिंग या जनमत संग्रह।
- बहुलवादी (pluralist): अलग-अलग समूह (यूनियन, व्यापारी, संस्थाएँ) नीति पर असर डालने की होड़ करते हैं।
- अभिजन (elite): एक छोटे, पढ़े-लिखे या धनी समूह का ज़्यादा असर।
अमेरिकी व्यवस्था में तीनों मिले हैं। असली सवाल संतुलन का है: सरकार इतनी मज़बूत हो कि व्यवस्था चले, पर इतनी नहीं कि अधिकार छीन ले।
आर्टिकल्स ऑफ़ कॉन्फ़ेडरेशन से संविधान तक
पहली योजना, आर्टिकल्स ऑफ़ कॉन्फ़ेडरेशन (1781 से), 13 राज्यों की "दोस्ती की लीग" थी। राष्ट्रीय कांग्रेस बहुत कमज़ोर थी:
- वह टैक्स नहीं ले सकती थी, इसलिए क़र्ज़ और सेना का ख़र्च नहीं चुका पाती थी।
- राज्यों के बीच व्यापार पर उसका नियंत्रण नहीं था।
- न राष्ट्रपति था, न राष्ट्रीय अदालत।
- बदलाव के लिए सभी 13 राज्यों की सहमति ज़रूरी थी।
शेज़ विद्रोह (1786–87) में क़र्ज़ में डूबे किसानों ने हथियार उठाए। इससे कमज़ोरी साफ़ दिखी। 1787 में फ़िलाडेल्फ़िया में प्रतिनिधियों ने नई योजना लिखी।
मुख्य समझौते
- महान (कनेक्टिकट) समझौता: दो सदन। प्रतिनिधि सभा में सीटें जनसंख्या से; सीनेट में हर राज्य के 2 सदस्य।
- तीन-पाँचवाँ समझौता: ग़ुलाम बनाए गए लोगों को सीट और टैक्स के लिए 3/5 गिना गया। यह ग़ुलामी को बचाने वाला सौदा था, जिसे बाद में हटाया गया।
- इलेक्टोरल कॉलेज: हर राज्य के चुने हुए निर्वाचक राष्ट्रपति चुनते हैं।
अमेरिकी सरकार के सिद्धांत
शक्तियों का पृथक्करण
- विधायिका (कांग्रेस, अनुच्छेद I): प्रतिनिधि सभा + सीनेट क़ानून बनाते हैं, टैक्स तय करते हैं, युद्ध घोषित करते हैं।
- कार्यपालिका (राष्ट्रपति, अनुच्छेद II): क़ानून लागू करता है, सेना का प्रमुख है, संधियाँ करता है।
- न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतें, अनुच्छेद III): मुक़दमे तय करती है और क़ानून का अर्थ बताती है।
नियंत्रण और संतुलन
- राष्ट्रपति बिल पर वीटो कर सकता है; कांग्रेस दोनों सदनों में 2/3 वोट से उसे पलट सकती है।
- सीनेट जजों की नियुक्ति मंज़ूर करती है और संधियों को 2/3 से स्वीकार करती है।
- कांग्रेस अधिकारियों पर महाभियोग चलाकर हटा सकती है।
- अदालतें न्यायिक समीक्षा (मार्बरी बनाम मैडिसन, 1803) से संविधान-विरोधी क़ानून रद्द करती हैं।
संविधान, क़ानून और संधियाँ
संविधान सर्वोच्च क़ानून है (अनुच्छेद VI)। कांग्रेस के क़ानून और संधियाँ इसके अनुसार होनी चाहिए। इसे संशोधन से बदला जाता है (अनुच्छेद V): कांग्रेस के दोनों सदनों के 2/3 प्रस्ताव करें, 3/4 राज्य स्वीकार करें। अब तक 27 संशोधन हुए हैं।
संघवाद: राष्ट्रीय और राज्य सरकारें
संघवाद का अर्थ है शक्ति का राष्ट्रीय (संघीय) सरकार और राज्य सरकारों में बँटवारा।
- सौंपी गई (गिनाई गई) शक्तियाँ: राष्ट्रीय सरकार के लिए लिखी हुई: मुद्रा बनाना, युद्ध घोषित करना, राज्यों के बीच व्यापार।
- आरक्षित शक्तियाँ (10वाँ संशोधन): जो राष्ट्र को नहीं दी गईं, वे राज्यों के पास: स्कूल, स्थानीय पुलिस, ड्राइविंग लाइसेंस, चुनाव करवाना।
- समवर्ती शक्तियाँ: दोनों इस्तेमाल करते हैं: टैक्स, क़र्ज़ लेना, अदालतें बनाना, सड़कें बनाना।
संतुलन को कैसे पढ़ा जाता है
आवश्यक और उचित धारा कांग्रेस को अपनी लिखी शक्तियाँ चलाने के लिए ज़रूरी क़ानून बनाने देती है (निहित शक्तियाँ)। वाणिज्य धारा राज्यों के बीच व्यापार पर नियंत्रण देती है। अदालतों ने इन्हें कभी बढ़ाया, कभी रोका। मैककलॉक बनाम मैरीलैंड (1819) ने राष्ट्रीय बैंक को सही माना और कहा कि राज्य उस पर टैक्स नहीं लगा सकते। अमेरिका बनाम लोपेज़ (1995) में कहा गया कि स्कूल के पास बंदूक "व्यापार" नहीं है, इसलिए कांग्रेस सीमा से बाहर गई।
व्यवहार में संघवाद
राष्ट्रीय सरकार पैसे से राज्यों को दिशा देती है: श्रेणीगत अनुदान (ख़ास काम के लिए, नियमों के साथ), ब्लॉक अनुदान (बड़े क्षेत्र के लिए, ज़्यादा छूट) और अनिवार्य निर्देश (mandates) जिन्हें राज्यों को मानना पड़ता है।
अनुसमर्थन और बिल ऑफ़ राइट्स
13 में से 9 राज्यों का अनुसमर्थन (ratification) चाहिए था। दो पक्ष थे:
- फ़ेडरलिस्ट (मैडिसन, हैमिल्टन, जे) मज़बूत राष्ट्रीय सरकार चाहते थे। उनके लेख फ़ेडरलिस्ट पेपर्स कहलाते हैं। फ़ेडरलिस्ट 10 कहता है कि बड़ा गणराज्य गुटबाज़ी को क़ाबू करता है; 51 नियंत्रण और संतुलन समझाता है।
- एंटी-फ़ेडरलिस्ट दूर बैठी ताक़तवर सरकार से डरते थे और अधिकारों की सूची माँगते थे। ब्रूटस 1 उनका प्रसिद्ध लेख है।
संविधान 1788 में स्वीकार हुआ और 1789 से लागू हुआ। वादे के अनुसार 1791 में पहले 10 संशोधन, यानी बिल ऑफ़ राइट्स, जोड़े गए। उदाहरण: पहला (बोलने, धर्म, प्रेस, सभा की आज़ादी), चौथा (बेवजह तलाशी नहीं), पाँचवाँ (ख़ुद के ख़िलाफ़ गवाही के लिए मजबूर नहीं, उचित प्रक्रिया), छठा (जल्दी और निष्पक्ष सुनवाई), आठवाँ (क्रूर सज़ा नहीं), दसवाँ (आरक्षित शक्तियाँ)।
करके देखो: 3D फ़्री-प्ले में नौ शक्तियों के लिए पहले अंदाज़ा लगाओ कि वह राष्ट्रीय है, राज्य की या साझा। 9 में से अपना स्कोर लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शक्तियों का पृथक्करण: विधायिका बनाती है, कार्यपालिका लागू करती है, न्यायपालिका व्याख्या करती है
- वीटो पलटना = प्रतिनिधि सभा के 2/3 + सीनेट के 2/3
- संशोधन = कांग्रेस के 2/3 का प्रस्ताव + 3/4 राज्यों की स्वीकृति (50 में से 38)
- 1787–88 का अनुसमर्थन = 13 में से 9 राज्य
- सौंपी गई (राष्ट्रीय) + आरक्षित (राज्य) + समवर्ती (साझा) शक्तियाँ
- बिल ऑफ़ राइट्स = पहले 10 संशोधन (1791)
हल किए गए उदाहरण
1. राष्ट्रपति ने एक बिल पर वीटो किया। प्रतिनिधि सभा में 435 में से 300 और सीनेट में 100 में से 70 वोट वीटो पलटने के लिए पड़े। क्या बिल क़ानून बनेगा?
435 का 2/3 = 290, और 300 ≥ 290। 100 का 2/3 ≈ 66.7, यानी 67 वोट चाहिए, और 70 ≥ 67। दोनों सदनों में सीमा पार हुई, इसलिए वीटो पलट गया और बिल क़ानून बनेगा।
2. आज 50 राज्य हैं। नए संशोधन के लिए कितने राज्यों की स्वीकृति चाहिए?
50 का 3/4 = 37.5। आधा राज्य नहीं होता, इसलिए 38 राज्य।
3. एक राज्य अपने नोट छापना चाहता है। क्या यह सही है?
नहीं। मुद्रा बनाना राष्ट्रीय (सौंपी गई) शक्ति है। राज्य अपनी मुद्रा नहीं बना सकते।
4. एंटी-फ़ेडरलिस्ट हार गए, फिर भी उनका महत्व क्यों है?
उनकी माँग से 1791 में बिल ऑफ़ राइट्स आया, और राज्यों की शक्ति का उनका विचार 10वें संशोधन में बचा।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि संविधान अमेरिका की पहली शासन योजना थी। पहले आर्टिकल्स ऑफ़ कॉन्फ़ेडरेशन (1781) थे।
- संघवाद (राष्ट्र बनाम राज्य) को शक्तियों के पृथक्करण (तीन शाखाएँ) से मिला देना।
- सोचना कि बिल ऑफ़ राइट्स 1787 के मूल पाठ में था। यह 1791 में संशोधन बनकर जुड़ा।
- कहना कि सुप्रीम कोर्ट कोई भी क़ानून बना सकता है। अदालत क़ानून की व्याख्या करती है और ग़लत क़ानून रद्द करती है; क़ानून कांग्रेस बनाती है।