संविधानों में मार्गदर्शक सिद्धांत क्यों होते हैं
संविधान सबसे ऊँचा कानून है। वह सिद्धांत भी बताता है: बुनियादी विचार जिनका हर दूसरा कानून पालन करे। जब कोई देश युद्ध या तानाशाही से गुज़रता है, तो वह अपने सिद्धांत बहुत साफ़ लिखता है ताकि वही ग़लती दोबारा न हो।
जापान का संविधान 3 नवंबर 1946 को घोषित हुआ और 3 मई 1947 से लागू हुआ। उसने 1889 के मेइजी संविधान की जगह ली। इसके तीन मार्गदर्शक सिद्धांत हैं: मौलिक मानव अधिकारों का सम्मान, जन-संप्रभुता और शांतिवाद।
मौलिक मानव अधिकारों का सम्मान
मौलिक मानव अधिकार वे अधिकार हैं जो हर इंसान को सिर्फ़ इंसान होने के कारण मिलते हैं। संविधान कहता है कि सरकार को इनका सम्मान करना होगा, और साधारण कानून से इन्हें छीना नहीं जा सकता।
- आज़ादी के अधिकार: बोलने, मानने, घूमने और पेशा चुनने की आज़ादी।
- समानता: कानून के सामने सब बराबर; लिंग, जन्म, धर्म या पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव नहीं।
- सामाजिक अधिकार: स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन का न्यूनतम स्तर, शिक्षा और उचित काम।
- भाग लेने और न्याय पाने के अधिकार: वोट देना और अदालत जाना।
अधिकारों के साथ कर्तव्य भी हैं, जैसे कर देना, बच्चों को स्कूल भेजना और दूसरों के अधिकार न छीनना।
जन-संप्रभुता
संप्रभुता का अर्थ है देश कैसे चले, इसका अंतिम फ़ैसला करने की ताक़त। जन-संप्रभुता में यह ताक़त जनता के पास होती है। मेइजी संविधान में संप्रभुता सम्राट के पास थी। 1947 के संविधान में सम्राट सिर्फ़ राज्य और जनता की एकता का प्रतीक है और सरकार पर उसकी कोई शक्ति नहीं।
जनता अपनी ताक़त चुनाव से इस्तेमाल करती है: वह संसद (डाइट) में प्रतिनिधि चुनती है, जो कानून बनाती और प्रधानमंत्री को चुनती है। संविधान बदलने के लिए दोनों सदनों के दो-तिहाई के बाद जनता जनमत संग्रह (referendum) में भी वोट देती है। भारत का संविधान प्रस्तावना में यही कहता है: "हम, भारत के लोग"।
शांतिवाद
शांतिवाद का अर्थ है शांति के लिए प्रतिबद्धता और झगड़े युद्ध के बिना सुलझाना। अनुच्छेद 9 में जापानी जनता देशों के बीच विवाद सुलझाने के तरीके के रूप में युद्ध को "हमेशा के लिए त्यागती" है, और देश पुराने अर्थ में युद्ध की शक्ति नहीं रखता। द्वितीय विश्व युद्ध की भारी हानि के बाद यह इसलिए चुना गया कि जापान फिर न लड़े।
व्यवहार में जापान के पास आत्मरक्षा बल (Self-Defense Forces) हैं, और लोग आज भी बहस करते हैं कि अनुच्छेद 9 को कैसे पढ़ा जाए। जापान संयुक्त राष्ट्र, सहायता और बातचीत से भी शांति के लिए काम करता है। कोस्टा रिका जैसे कुछ देशों में सेना है ही नहीं। शांतिवाद ऐसा सिद्धांत है जिसे हर विद्यार्थी को जानना चाहिए और अलग-अलग विचारों का सम्मान करते हुए उस पर चर्चा करनी चाहिए।
करके देखिए: खंभों का खेल
3D में: चरण 5 पर जाइए और एक-एक करके हर खंभा निकालिए। कैप्शन पढ़िए कि क्या बिगड़ेगा। फिर सारे खंभे वापस लगाइए।
घर या कक्षा में: कक्षा का "मिनी-संविधान" बनाइए जिसमें तीन नियम हों: एक सबके अधिकार का, एक वोट से मिलकर फ़ैसला करने का, और एक झगड़ा बातचीत से सुलझाने का। क्या तीनों ज़रूरी हैं? अगर सिर्फ़ एक रख सकते तो कौन-सा रखते, और बाकी दो के बिना डर क्यों लगता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन सिद्धांत: मौलिक मानव अधिकार + जन-संप्रभुता + शांतिवाद
- संप्रभुता = अंतिम फ़ैसले की ताक़त; जन-संप्रभुता = वह ताक़त जनता के पास
- जनता अपनी ताक़त वोट से इस्तेमाल करती है (चुनाव और जनमत संग्रह)
- अनुच्छेद 9 = अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के तरीके के रूप में युद्ध का त्याग
- अधिकारों के साथ कर्तव्य होते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. मेइजी संविधान में संप्रभुता किसके पास थी और 1947 के संविधान में किसके पास है?
मेइजी संविधान (1889) में सम्राट के पास थी। 1947 के संविधान में जनता के पास है और सम्राट राज्य का प्रतीक है।
2. एक शहर अख़बार पर रोक लगाता है क्योंकि वह महापौर की आलोचना करता है। कौन-सा सिद्धांत टूटा?
मौलिक मानव अधिकारों का सम्मान, क्योंकि बोलने और प्रेस की आज़ादी आज़ादी का अधिकार है।
3. जनता अपनी संप्रभुता असल में कैसे इस्तेमाल करती है?
चुनाव में वोट देकर संसद के प्रतिनिधि चुनती है, और संविधान बदलने की मंज़ूरी के लिए जनमत संग्रह में वोट देती है।
4. संविधान बदलने के लिए 300 सदस्यों के सदन में दो-तिहाई की सहमति चाहिए। कितने वोट चाहिए?
300 का दो-तिहाई = 300 × 2 ÷ 3 = 200 वोट। इसके बाद जनता को भी जनमत संग्रह में वोट देना होगा।
5. एक जनमत संग्रह में 80 मतदाता भाग लेते हैं। साधारण बहुमत के लिए कितने "हाँ" वोट चाहिए?
80 का आधे से ज़्यादा यानी 40 से ज़्यादा, इसलिए कम से कम 41 वोट।
6. 1945 के बाद जापान ने शांतिवाद का सिद्धांत क्यों लिखा?
द्वितीय विश्व युद्ध में देश को बहुत हानि हुई थी। जनता गारंटी चाहती थी कि सरकार उन्हें फिर युद्ध में न ले जाए, इसलिए अनुच्छेद 9 में युद्ध का त्याग किया गया।
आम गलतियाँ
- संप्रभुता और सरकार को मिलाना। सरकार जनता के लिए काम करती है; जनता ताक़त का अंतिम स्रोत है।
- यह सोचना कि शांतिवाद का मतलब रक्षा पर कोई बहस नहीं। अनुच्छेद 9 पर काफ़ी चर्चा है, और जापान के पास आत्मरक्षा बल हैं।
- अधिकारों की कोई सीमा नहीं कहना। अधिकारों के साथ कर्तव्य हैं और वे दूसरों के अधिकार नहीं छीन सकते।
- यह मानना कि आज सम्राट राज करता है। 1947 के संविधान में वह प्रतीक है और सिर्फ़ संविधान से तय कर्तव्य निभाता है।