विधि (कानून) और विधिशास्त्र की प्रकृति और अर्थ
कानून नियमों का समूह है जिसे राज्य बनाता या मान्यता देता है, जो व्यवहार का मार्गदर्शन करता है और जिसके पीछे लागू करने की शक्ति (अदालत, पुलिस, जुर्माना) है। यह सामान्य (सबके लिए), बाध्यकारी और प्रवर्तनीय है।
विधिशास्त्र (Jurisprudence) लैटिन juris prudentia से बना है, अर्थ "कानून का ज्ञान"। यह कानून का सिद्धांत और दर्शन है। यह पूछता है: किसी नियम को कानून क्या बनाता है? कानून का नैतिकता, न्याय और समाज से क्या संबंध है? हमें उसे क्यों मानना चाहिए?
कानून का इतिहास
- प्राचीन संहिताएँ: लगभग 1750 ई.पू. मेसोपोटामिया के एक राजा ने पत्थर के स्तंभ पर कानून खुदवाए (हम्मुराबी की संहिता), तय दंडों के साथ।
- भारत: धर्मशास्त्र (जैसे मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति) और बाद में अर्थशास्त्र ने कर्तव्य, अपराध, अनुबंध और अदालतें बताईं। रिवाज (आचार) एक मुख्य स्रोत था।
- रोम: बारह पट्टिकाएँ (लगभग 450 ई.पू.) और बाद में जस्टिनियन की संहिता ने यूरोप के दीवानी कानून को आकार दिया।
- इंग्लैंड: मैग्ना कार्टा (1215) ने राजा को सीमित किया; जजों के फ़ैसलों से कॉमन लॉ बढ़ा।
- आधुनिक युग: लिखित संविधान, संहिताएँ और अंतरराष्ट्रीय कानून (1700 के बाद), और 1945 के बाद मानवाधिकार।
विधि के संप्रदाय
प्राकृतिक विधि संप्रदाय
सही-गलत का एक ऊँचा, सार्वभौमिक मानक है (प्रकृति, तर्क या ईश्वर से)। मानव कानून तभी मान्य है जब वह इससे मेल खाए। विचारक: अरस्तू, सिसरो, थॉमस एक्विनास, जॉन लॉक। मानवाधिकार के विचार कुछ हद तक यहीं से आए।
प्रत्यक्षवादी (विश्लेषणात्मक) संप्रदाय
कानून वह है जो उचित सत्ता बनाती है, नैतिक हो या नहीं। जॉन ऑस्टिन: कानून संप्रभु का आदेश है जिसके पीछे शास्ति (दंड) है। एच. एल. ए. हार्ट: कानून प्राथमिक नियमों (कर्तव्य) और द्वितीयक नियमों (नियम कैसे बनें और बदलें) की व्यवस्था है। हैंस केल्सन: मानदंडों का पिरामिड जो एक मूल मानदंड (ग्रुंडनॉर्म) पर टिका है।
ऐतिहासिक संप्रदाय
फ़्रेडरिक कार्ल फ़ॉन सैविनी: कानून फ़ोक्सगाइस्ट से, यानी लोगों की आत्मा और रिवाजों से बढ़ता है; वह खोजा जाता है, बनाया नहीं जाता। हेनरी मेन: समाज "स्थिति से अनुबंध की ओर" बढ़ते हैं।
समाजशास्त्रीय संप्रदाय
कानून को समाज में, काम करते हुए पढ़ना चाहिए। रोस्को पाउंड: कानून सामाजिक अभियांत्रिकी है, जो व्यक्तिगत, सार्वजनिक और सामाजिक हितों में संतुलन करता है। यूजेन एर्लिख: "जीवित कानून" समाज के अपने नियमों में है।
यथार्थवादी संप्रदाय
कानून वही है जो अदालतें वास्तव में करती हैं। ओलिवर वेंडेल होम्स: कानून इस बात का अनुमान है कि जज क्या फ़ैसला करेंगे।
कानून के कार्य और उद्देश्य
- व्यवस्था और शांति: साफ़ नियम टकराव रोकते हैं।
- विवाद सुलझाना: अदालतों से शांतिपूर्ण ढंग से।
- अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा, ख़ासकर कमज़ोर लोगों की।
- न्याय देना: उचित व्यवहार और उपचार।
- शक्ति को सीमित करना: सरकार भी कानून के अधीन है (विधि का शासन)।
- सामाजिक बदलाव: छुआछूत, बाल विवाह या भेदभाव के विरुद्ध कानून समाज बदलते हैं।
अलग संप्रदाय अलग उद्देश्यों पर ज़ोर देते हैं: प्राकृतिक विधि न्याय पर, प्रत्यक्षवाद निश्चितता पर, समाजशास्त्रीय संप्रदाय सामाजिक कल्याण पर।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विधिशास्त्र = कानून का अध्ययन/दर्शन (juris prudentia)
- प्राकृतिक विधि: कानून को सही-गलत से मेल खाना चाहिए
- प्रत्यक्षवाद (ऑस्टिन): कानून = संप्रभु का आदेश + शास्ति
- ऐतिहासिक (सैविनी): कानून फ़ोक्सगाइस्ट (रिवाज) से बढ़ता है
- समाजशास्त्रीय (पाउंड): कानून = सामाजिक अभियांत्रिकी
- यथार्थवाद (होम्स): कानून = अदालतें जो करें
हल किए गए उदाहरण
1. एक नागरिक कहता है, "दासता की अनुमति देने वाला कानून कभी असली कानून था ही नहीं।" कौन-सा संप्रदाय?
प्राकृतिक विधि: जो कानून न्याय के बहुत विरुद्ध हो, वह सच्चा कानून नहीं।
2. एक जज कहता है, "मुझे यह अधिनियम पसंद न हो, पर संसद ने इसे सही ढंग से पास किया, इसलिए लागू करना होगा।" कौन-सा संप्रदाय?
प्रत्यक्षवादी: कानून अपने स्रोत के कारण मान्य है, नैतिकता के कारण नहीं।
3. सरकार मज़दूरों और मालिकों के हितों में संतुलन के लिए न्यूनतम वेतन कानून बनाती है। कौन-सा संप्रदाय सबसे अच्छा समझाता है?
समाजशास्त्रीय संप्रदाय (पाउंड): हितों में संतुलन करती सामाजिक अभियांत्रिकी।
आम गलतियाँ
- विधिशास्त्र को कोई एक कानून समझना। यह सामान्य रूप से कानून का अध्ययन है।
- यह कहना कि प्रत्यक्षवादी अनैतिक कानून चाहते हैं। वे बस कहते हैं कि कानूनी मान्यता और नैतिकता अलग प्रश्न हैं।
- ऐतिहासिक (रिवाज से बढ़ता) और समाजशास्त्रीय (हितों में संतुलन) संप्रदायों को मिलाना।
- यह मानना कि केवल एक संप्रदाय "सही" है। हर एक कानून का एक पहलू समझाता है।