1980 से पहले: एक दल का शासन और रोज़ की कमी
दूसरे विश्व युद्ध के बाद पोलैंड पर एक ही पार्टी, पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी, का शासन था और सोवियत संघ का गहरा असर था। कारखाने और दुकानें सरकार चलाती थी। जून 1976 में सरकार ने खाने की चीज़ों के दाम बढ़ाए तो रादोम और उर्सुस जैसे शहरों में मज़दूरों ने विरोध किया। कई को सज़ा मिली: किसी की नौकरी गई, किसी को गिरफ़्तार किया गया।
सितंबर 1976 में लेखकों, वैज्ञानिकों और दूसरे लोगों ने KOR (मज़दूर रक्षा समिति) बनाई, जो सज़ा पाए मज़दूरों के परिवारों को पैसे और कानूनी मदद देती थी। यह पहला संकेत था कि मज़दूर और विचारक साथ काम कर सकते हैं।
चर्च और पोप जॉन पॉल द्वितीय की भूमिका
ज़्यादातर पोलिश लोग कैथोलिक थे और चर्च ही वह बड़ा संगठन था जिसे सरकार नहीं चलाती थी। चर्च वह जगह थे जहाँ लोग मिल सकते, बात कर सकते और अपनी संस्कृति बचा सकते थे। अक्तूबर 1978 में क्राकोव के आर्कबिशप कारोल वोयतिला पोप जॉन पॉल द्वितीय बने। जून 1979 में वे पोलैंड आए और लाखों लोग उन्हें सुनने जमा हुए। लोगों ने देखा कि वे कितने हैं, और उन्हें लगा कि वे अकेले नहीं। उन्होंने मानव गरिमा और अधिकारों की बात की और हिंसा की बात किए बिना लोगों को हिम्मत दी।
अगस्त 1980: हड़तालें
जुलाई 1980 में फिर दाम बढ़े तो कई जगह हड़तालें हुईं। 14 अगस्त को ग्दान्स्क के लेनिन शिपयार्ड में मज़दूरों ने काम रोक दिया, क्योंकि लोकप्रिय क्रेन ऑपरेटर अन्ना वालेंतिनोविच को निकाल दिया गया था। बिजली मिस्त्री लेख वालेसा हड़ताल के नेता बने। दूसरे कार्यस्थल जुड़े और उन्होंने अंतर-कारखाना हड़ताल समिति बनाई ताकि सब एक आवाज़ में बोलें। हड़तालें शांतिपूर्ण थीं: मज़दूर शिपयार्ड और कार्यस्थलों के अंदर ही रहे और दुनिया देखती रही।
ग्दान्स्क समझौता और 21 माँगें
हड़तालियों ने 21 माँगें लिखीं। पहली और सबसे ज़रूरी थी पार्टी के नियंत्रण से बाहर स्वतंत्र ट्रेड यूनियन बनाने का और हड़ताल करने का अधिकार। बाकी माँगें वेतन बढ़ाने, सेंसरशिप घटाने, राजनीतिक कैदियों की रिहाई और खाने की बेहतर आपूर्ति की थीं। 31 अगस्त 1980 को सरकार ग्दान्स्क समझौते में मान गई। सोवियत गुट में यह पहली बार था जब किसी साम्यवादी सरकार ने स्वतंत्र यूनियन मानी।
सॉलिडैरिटी का बढ़ना
नई यूनियन का नाम सॉलिडैरिटी (पोलिश में "सॉलिदार्नोश्च") रखा गया। नवंबर 1980 में उसका पंजीकरण हुआ। कारखानों, खेतों, दफ़्तरों और विश्वविद्यालयों के लोग उसमें जुड़े। 1981 के अंत तक उसके लगभग 1 करोड़ सदस्य थे, जो आबादी के चौथाई से ज़्यादा है। उसने सिर्फ़ वेतन नहीं, निष्पक्ष नियम, मीडिया में सच और नागरिकों की भागीदारी माँगी। उसका तरीका शांतिपूर्ण था: हड़ताल, बातचीत और जनता का समर्थन। सरकार और उसके साथियों को उसकी ताकत से डर लगा, और इससे दिसंबर 1981 में मार्शल लॉ लगा, जिसके बारे में अगले पाठ में पढ़ें।
करके देखें: कारण और असर की कड़ी बनाएँ
छह पर्चियाँ लें: दाम बढ़ना, KOR, पोप की यात्रा, ग्दान्स्क हड़ताल, ग्दान्स्क समझौता, सॉलिडैरिटी। उन्हें समय के क्रम में रखें और हर जोड़ी के बीच तीर खींचें। हर तीर पर एक शब्द लिखें: क्योंकि, हिम्मत दी, इससे हुआ, खत्म हुई। 3D में स्लाइडर अगस्त 1980 पर ले जाकर अपना क्रम जाँचें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जून 1976: दाम बढ़े, विरोध; सितंबर 1976: KOR बनी
- अक्तूबर 1978: पोप जॉन पॉल द्वितीय; जून 1979: पोलैंड की पहली यात्रा
- 14 अगस्त 1980: ग्दान्स्क शिपयार्ड में हड़ताल (नेता: लेख वालेसा)
- 31 अगस्त 1980: ग्दान्स्क समझौता, 21 माँगें, स्वतंत्र ट्रेड यूनियन का अधिकार
- नवंबर 1980: सॉलिडैरिटी पंजीकृत; 1981 के अंत तक लगभग 1 करोड़ सदस्य
- कारण → असर: कमी → विरोध → हिम्मत → हड़ताल → समझौता → विशाल यूनियन
हल किए गए उदाहरण
1. क्रम में लगाएँ: ग्दान्स्क समझौता, पोप की पोलैंड यात्रा, KOR का बनना, सॉलिडैरिटी का पंजीकरण।
KOR का बनना (1976), पोप की यात्रा (1979), ग्दान्स्क समझौता (31 अगस्त 1980), सॉलिडैरिटी का पंजीकरण (नवंबर 1980)।
2. स्वतंत्र ट्रेड यूनियन की माँग इतनी ज़रूरी क्यों थी?
तब तक सारी यूनियनें पार्टी के नियंत्रण में थीं। स्वतंत्र यूनियन मज़दूरों की बात बिना डर के रख सकती थी, इसलिए वह पार्टी के नियंत्रण में पहली दरार थी।
3. 1981 में पोलैंड की आबादी लगभग 3.5 करोड़ थी। 1 करोड़ सदस्य कितने प्रतिशत हुए?
10 ÷ 35 × 100 ≈ 29 प्रतिशत, यानी हर दस में लगभग तीन लोग।
4. पोप की 1979 की यात्रा के दो महत्व बताएँ।
उसने लाखों लोगों को दिखाया कि वे बहुत हैं और अकेले नहीं, और हिंसा की बात किए बिना गरिमा और अधिकारों की बात करके नैतिक हिम्मत दी।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सॉलिडैरिटी 1989 में शुरू हुई। वह अगस्त 1980 में शुरू हुई; 1989 गोलमेज़ वार्ता और स्वतंत्र चुनाव का साल है।
- यह सोचना कि हड़तालें हिंसक थीं। वे कार्यस्थलों के अंदर शांतिपूर्ण धरना-हड़तालें थीं।
- KOR और सॉलिडैरिटी को मिला देना। KOR (1976) मददगारों का छोटा समूह था; सॉलिडैरिटी (1980) विशाल यूनियन थी।
- यह कहना कि पोप ने हड़ताल का नेतृत्व किया। उन्होंने नैतिक सहारा और हिम्मत दी; हड़ताल के नेता लेख वालेसा जैसे मज़दूर थे।