चयन क्यों ज़रूरी है
अधिकारी कर वसूलते, व्यवस्था रखते और क़ानून लागू करते हैं। अयोग्य या बेईमान हों तो राज्य को नुक़सान होता है। इसलिए शासकों ने दो सवाल पूछे: कैसे चुनें और कैसे चलाएँ (पुरस्कार, जाँच, हटाना)।
चीन में सिफ़ारिश और परीक्षाएँ
हान काल में अधिकारी मुख्यतः सिफ़ारिश से चुने जाते थे: स्थानीय अधिकारी माता-पिता के भक्त और ईमानदार माने जाने वाले लोगों के नाम देते थे। बाद में वेई-जिन की नौ-श्रेणी व्यवस्था कुल की हैसियत पर झुकी, इसलिए शक्तिशाली परिवारों ने पद रखे।
सुई और तांग शासकों ने शाही परीक्षा (केजू) शुरू की। उम्मीदवार शास्त्रों और नीति पर परीक्षा लिखते थे। बाद के वंशों ने कई स्तर बनाए: ज़िला, प्रांत, राजधानी और महल। साधारण घर के प्रतिभाशाली लोगों के लिए रास्ता खुला, हालाँकि पढ़ाई में समय और धन लगता था। यह व्यवस्था 1905 तक चली।
पश्चिमी सिविल सेवा
1800 के दशक के अमेरिका में लूट-प्रणाली में जीतने वाला दल अपने समर्थकों को पद दे देता था, इसलिए हर चुनाव के बाद कर्मचारी बदलते थे। सुधारक चाहते थे कि कोई भी दल राज करे, कर्मचारी जनता की सेवा करें।
ब्रिटेन ने नॉर्थकोट-ट्रेवेलियन रिपोर्ट (1854) के बाद खुली परीक्षाएँ अपनाईं। अमेरिका ने पेंडलटन अधिनियम (1883) पारित किया। यह योग्यता-प्रणाली है: पद परीक्षा और क्षमता से मिलते हैं, और अधिकारी राजनीतिक रूप से तटस्थ रहकर सरकारें बदलने पर भी अपने पद पर रहते हैं।
आधुनिक चीन
आधुनिक चीन खुली परीक्षा से सिविल सेवक भर्ती करता है और सिविल सेवक क़ानून (2005 में पारित, 2006 में लागू, 2018 में संशोधित) के तहत उनका प्रबंधन करता है। चक्र: परीक्षा, परखकाल, वार्षिक मूल्यांकन, प्रशिक्षण, पदोन्नति, तबादला या सेवा-समाप्ति। नियम पुरस्कार, अनुशासन और हितों के टकराव से बचने (जैसे कुछ पदों पर गृह-क्षेत्र में न रखना) को भी देखते हैं।
करके देखें
चरण 6 में हर तरीक़ा दबाइए और नीले-लाल अंक लिखिए। किस तरीक़े में नीला ज़्यादा और लाल कम है? घर पर: अपने स्कूल में कक्षा-नायक चुनने के तीन तरीक़े लिखिए। कौन-सा सबसे उचित है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सिफ़ारिश = सिफ़ारिशकर्ता अपने जानकारों को चुनता है
- शाही परीक्षा मार्ग: ज़िला, प्रांत, राजधानी, महल (1905 में समाप्त)
- लूट-प्रणाली: पद जीतने वाले दल के साथ
- योग्यता-प्रणाली: पद परीक्षा व क्षमता से, कर्मचारी तटस्थ
हल किए गए उदाहरण
1. हान सिफ़ारिश पद्धति की एक कमज़ोरी बताइए।
चयन सिफ़ारिशकर्ता करता था, इसलिए मित्रों और शक्तिशाली परिवारों का पक्ष हो सकता था।
2. तीन-स्तरीय परीक्षा में पहले स्तर पर 1000 बैठते हैं, 10 प्रतिशत पास होते हैं, फिर उनमें से 10 प्रतिशत अगले में पास होते हैं। दूसरे स्तर में कितने पास हुए?
पहला स्तर: 1000 का 10 प्रतिशत = 100। दूसरा: 100 का 10 प्रतिशत = 10।
3. सुधारकों को लूट-प्रणाली क्यों नापसंद थी?
हर चुनाव में कर्मचारी बदलते और निष्ठा पर चुने जाते थे, क्षमता पर नहीं, इसलिए सेवा अस्थिर थी।
4. आधुनिक चीन में सिविल सेवक प्रबंधन के चरण सूचीबद्ध कीजिए।
खुली परीक्षा, परखकाल, वार्षिक मूल्यांकन, प्रशिक्षण, पदोन्नति (या तबादला या सेवा-समाप्ति)।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि शाही परीक्षाएँ हर व्यक्ति के लिए खुली थीं। पढ़ाई में समय-धन लगता था, इसलिए कई ग़रीब परिवार फिर भी नहीं आ पाते थे।
- लूट-प्रणाली और योग्यता-प्रणाली को मिलाना। लूट = दल की निष्ठा; योग्यता = परीक्षा।
- यह सोचना कि परीक्षा पहले पश्चिम में शुरू हुई। सुई-तांग चीन ने सदियों पहले शुरू की।
- यह भूलना कि चयन के बाद प्रबंधन आता है: मूल्यांकन, प्रशिक्षण, पदोन्नति, अनुशासन।