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रूस में सार्वजनिक जीवन और सामाजिक आंदोलन (1870-1890 के दशक)

1800 के उत्तरार्ध में पढ़े-लिखे रूसी, जिन्हें बुद्धिजीवी वर्ग कहते हैं, जनता की मदद को अपना फ़र्ज़ मानते थे। लोकलुभावन (नरोदनिक) आशा करते थे कि किसान बदलाव की अगुवाई करेंगे; उनका 1874 का "जनता के बीच जाना" असफल रहा। कुछ ने आतंक का रास्ता लिया और 1881 में सिकंदर द्वितीय को मार दिया, और राज्य ने कड़ी कार्रवाई की। उसके बाद प्लेखानोव जैसे मार्क्सवादियों ने कहा कि संख्या में बढ़ते कारख़ाना-मज़दूर बदलाव की ताक़त बनेंगे। मज़दूरों की हड़तालें बढ़ीं और 1898 में सामाजिक-जनवादी पार्टी का पहला सम्मेलन हुआ।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1860 के दशक के सुधारों के बाद ज़्यादा रूसी स्कूल गए और पत्रिकाएँ पढ़ने लगे। यह पढ़ा-लिखा समूह, बुद्धिजीवी वर्ग, मानता था कि उसे ग़रीब ग्रामीणों की मदद करनी चाहिए।
  2. 1874 में हज़ारों युवा "जनता के बीच गए": वे शहरों से गाँवों तक पैदल गए, पढ़ाने और विचार बाँटने। किसानों ने उन पर भरोसा नहीं किया और पुलिस ने बहुतों को गिरफ़्तार किया।
  3. "भूमि और स्वतंत्रता" समूह 1879 में टूट गया। "काला बँटवारा" शांत शिक्षा पर टिका रहा। "जनता की इच्छा" ने ज़ार के ख़िलाफ़ आतंक चुना। दो रास्ते, दो रंग।
  4. 1881 में "जनता की इच्छा" ने सिकंदर द्वितीय को मार दिया। नतीजा उनकी उम्मीद का उलटा था: सख़्त ज़ार, बहुत गिरफ़्तारियाँ और कमज़ोर लोकलुभावन आंदोलन।
  5. एक नया विचार आया: मार्क्सवाद। प्लेखानोव (1883) ने कहा कि कारख़ाना-मज़दूर बदलाव की अगुवाई करेंगे। हड़तालें बढ़ीं (1885), संघर्ष-संघ बना (1895) और पार्टी का पहला सम्मेलन हुआ (1898)।
  6. खुला खेल: कोई समूह चुनो। नीला स्तंभ: किसानों पर उसका भरोसा। हरा स्तंभ: मज़दूरों पर भरोसा। लोकलुभावनों का नीला स्तंभ ऊँचा है। मार्क्सवादियों का हरा।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

पढ़े-लिखे लोग गाँव वालों की परवाह क्यों करते थे?

उन्हें अनुचित लगा कि वे पढ़ें और किसान ग़रीब रहें, इसलिए मदद को फ़र्ज़ माना।

किसानों ने छात्रों का स्वागत क्यों नहीं किया?

छात्र अजनबी थे और उनके विचार अनजाने थे, जबकि किसान ज़ार और चर्च का सम्मान करते थे। तीर और गिरफ़्तारियाँ देखो।

क्या सारा लोकलुभावनवाद हिंसक था?

नहीं। काला बँटवारा शांत था। सिर्फ़ जनता की इच्छा ने आतंक चुना।

क्या 1881 की हत्या ने ज़ार की नीति को बेहतर बनाया?

नहीं। इससे सिकंदर तृतीय के अधीन कड़ी कार्रवाई हुई।

मार्क्सवादी मज़दूरों से ज़्यादा आशावान क्यों थे?

मज़दूर कारख़ानों में साथ रहते थे, जल्दी हड़ताल संगठित कर सकते थे और संख्या में बढ़ रहे थे।

कौन किस पर भरोसा करता था?

नीला स्तंभ ऊँचा = किसानों पर भरोसा; हरा ऊँचा = मज़दूरों पर भरोसा। सभी छह समूह मिलाओ।

सार्वजनिक जीवन और बुद्धिजीवी वर्ग

बुद्धिजीवी वर्ग का मतलब रूसी समाज का पढ़ा-लिखा मध्य समूह: शिक्षक, लेखक, डॉक्टर, छात्र, वकील। बहुत से लोग इस बात से अपराध-बोध महसूस करते थे कि वे पढ़े-लिखे हैं और किसान ग़रीब हैं, और "जनता" की सेवा को अपना फ़र्ज़ मानते थे।

सार्वजनिक जीवन और तरीक़ों से भी बढ़ा। स्थानीय परिषदों (ज़ेम्स्त्वो) ने स्कूल और दवाख़ाने बनाए, अख़बारों और मोटी पत्रिकाओं ने विचार फैलाए, और बहुत लोग चर्चा-मंडलियों में जुड़े। पर राज्य राजनीतिक पार्टियों या आज़ाद प्रेस की इजाज़त नहीं देता था, इसलिए विचार अक्सर चुपचाप चले।

लोकलुभावनवाद (नरोदनिक)

लोकलुभावनवाद (नरोद, "जनता" से) यह विश्वास था कि रूस कठिन कारख़ाना-युग को छोड़कर गाँव-समुदाय से न्यायपूर्ण समाज बना सकता है। लोकलुभावन किसानों के लिए ज़मीन और ज़ार का अकेला राज ख़त्म चाहते थे।

मार्क्सवाद का आगमन

मार्क्सवाद जर्मन विचारक कार्ल मार्क्स का विचार है। यह कहता है कि औद्योगिक समाजों में कारख़ाना-मज़दूर (सर्वहारा) समाज बदलने की ताक़त बनेंगे, क्योंकि वे संख्या में ज़्यादा हैं, कारख़ाने से संगठित हैं और उनके पास खोने को कम है।

1880-90 के दशक में रूसी कारख़ाने बढ़े तो मार्क्सवादी विचार जँचने लगे। मुख्य कदम:

लोकलुभावन बनाम मार्क्सवादी

लोकलुभावनमार्क्सवादी
मुख्य भरोसाकिसानकारख़ाना-मज़दूर
रास्तागाँव-समुदाय, बिना कारख़ाना-युगकारख़ाना-युग, मज़दूर की अगुवाई
तरीक़ाशिक्षा; कुछ ने आतंकअध्ययन-मंडली, हड़ताल, पार्टी
समय1870-18811883 से

उदारवादी तीसरा समूह थे। वे शांतिपूर्ण तरीक़ों से संविधान और चुनी हुई परिषदें चाहते थे, और बहुत से ज़ेम्स्त्वो के ज़रिये काम करते थे।

यह क्यों ज़रूरी है, और कर के देखो

इन आंदोलनों ने 1905 और 1917 की क्रांतियों की ज़मीन तैयार की। 1880-90 के दशक की अध्ययन-मंडलियों में सीखे विचार अगली सदी की पार्टियाँ बन गए।

  1. 3D में: आख़िरी चरण में छह समूहों को मज़दूर-स्तंभ के छोटे से बड़े क्रम में लगाओ।
  2. बहस: एक दोस्त लोकलुभावन, एक मार्क्सवादी बने। हर एक के पास 1 मिनट है बताने को कि समाज कौन बदलेगा।
  3. समय-रेखा: 1874, 1876, 1879, 1881, 1883, 1895, 1898 बनाओ और हर एक के लिए एक चित्र।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. "जनता के बीच जाना" (1874) असफल क्यों हुआ?

चरण 1: शहरी युवा गाँव के जीवन को ठीक से नहीं जानते थे। चरण 2: किसान अजनबियों पर भरोसा नहीं करते थे और उनके विचार नहीं अपनाए। चरण 3: पुलिस ने बहुतों को गिरफ़्तार किया। इसलिए आंदोलन किसानों को साथ नहीं ला सका।

2. लोकलुभावन और मार्क्सवादियों में मुख्य अंतर क्या है?

चरण 1: लोकलुभावन किसानों और गाँव-समुदाय पर भरोसा करते थे। चरण 2: मार्क्सवादी औद्योगिक शहरों के कारख़ाना-मज़दूरों पर। चरण 3: यानी पहले ने देहात की ओर देखा, दूसरे ने कारख़ाने की ओर।

3. पहला सामाजिक-जनवादी सम्मेलन (1898) प्लेखानोव के समूह (1883) के कितने साल बाद आया?

1898 - 1883 = 15 साल।

4. सिकंदर द्वितीय की हत्या लोकलुभावनों के लिए बुरी क्यों साबित हुई?

चरण 1: नया ज़ार ज़्यादा सख़्त था। चरण 2: पुलिस ने जनता की इच्छा को तोड़ा और बहुतों को गिरफ़्तार किया। चरण 3: ज़्यादातर लोग आतंक के साथ नहीं थे। इसलिए लोकलुभावनवाद कमज़ोर हुआ।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. "जनता के बीच जाना" हुआ:
2. किस समूह ने आतंक चुना और सिकंदर द्वितीय को मारा?
3. 1883 में "श्रम-मुक्ति" समूह किसने बनाया?
4. मार्क्सवादियों का भरोसा था:
5. पहला सामाजिक-जनवादी सम्मेलन हुआ:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1870-1890 के दशक में रूस के सामाजिक आंदोलन कौन-से थे?

लोकलुभावनवाद (1870-1881), जनता की इच्छा सहित, और मार्क्सवाद (1883 से), जो 1898 के पार्टी सम्मेलन तक पहुँचा।

बुद्धिजीवी वर्ग (इंटेलिजेंसिया) का क्या मतलब है?

समाज का पढ़ा-लिखा समूह जो जनता की मदद को फ़र्ज़ मानता और विचार साझा करता था।

क्या यह कक्षा 9 के इतिहास में है?

हाँ, 1880-90 के दशक के रूसी इतिहास पाठ्यक्रम में: सार्वजनिक जीवन और सामाजिक आंदोलन।

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