तीन सभ्यताएँ और तीन एकेश्वरवादी धर्म
लगभग 800 ईस्वी में भूमध्य सागर को तीन दुनियाएँ छूती थीं। लैटिन ईसाई जगत यानी पश्चिमी यूरोप: उसके चर्च के प्रमुख रोम के पोप थे और पढ़ाई की भाषा लैटिन थी। बीज़ान्टिन साम्राज्य पुराने रोमन साम्राज्य का पूर्वी आधा हिस्सा था: राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल और भाषा यूनानी। इस्लामी दुनिया दक्षिण और पूर्वी किनारों पर फैली थी, स्पेन और उत्तरी अफ़्रीका से मिस्र और सीरिया तक।
ये दुनियाएँ तीन एकेश्वरवादी धर्मों (एक ईश्वर में विश्वास) को मानती थीं: यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम। तीनों इब्राहीम को मानते हैं और तीनों के पवित्र स्थान येरुशलम में हैं। यहूदी समुदाय तीनों दुनियाओं के नगरों में रहते थे, और बहुत-से व्यापारी और अनुवादक थे।
ईसाई जगत और इस्लाम: मेल-जोल और टकराव
मेल-जोल का मतलब सिर्फ़ युद्ध नहीं था। व्यापारी ख़रीदते-बेचते थे। तीर्थयात्री सफ़र करते थे। सिसिली, स्पेन और इटली में विद्वानों ने चिकित्सा, गणित और खगोल की अरबी किताबों का लैटिन में अनुवाद किया। हमारे "अरबी अंक" (0 से 9) इसी रास्ते यूरोप पहुँचे।
पर टकराव भी था। मुस्लिम सेनाएँ और ईसाई राज्य स्पेन, सिसिली और पवित्र भूमि के लिए लड़े। समुद्री लुटेरे दोनों तरफ़ के तटों पर हमले करते थे। कभी-कभी शासक धर्म की सीमा पार करके मित्र भी बने। इसलिए सच यह है: आदान-प्रदान और संघर्ष एक साथ।
रोम और बीज़ान्टिन
पश्चिमी रोमन साम्राज्य 400 के दशक में टूट गया। पूर्वी आधा हिस्सा और एक हज़ार साल बीज़ान्टिन साम्राज्य के रूप में चला। उसकी राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल ईसाई जगत का सबसे बड़ा और अमीर शहर थी। पश्चिम में नए राज्य बने; 800 में पोप ने फ़्रैंक राजा शार्लमेन को सम्राट का ताज पहनाया, जो कॉन्स्टेंटिनोपल को अच्छा नहीं लगा।
दोनों चर्च भाषा, अधिकार और कुछ शिक्षाओं पर भी अलग होते गए। 1054 में उनके प्रमुखों ने एक-दूसरे को चर्च से बाहर कर दिया। इसे पूर्व-पश्चिम विभाजन (ग्रेट स्किज़्म) कहते हैं। इसके बाद "कैथोलिक" (पश्चिम) और "ऑर्थोडॉक्स" (पूर्व) अलग रास्तों पर चले। और जानने के लिए बीज़ान्टिन साम्राज्य और धर्मयुद्ध के पाठ देखो।
बर्नार्ड ऑफ़ क्लेरवो और दूसरा धर्मयुद्ध
पहले धर्मयुद्ध (1096-99) के बाद यूरोपीय सरदारों ने लेवांत तट पर छोटे राज्य बना लिए। 1144 में मुस्लिम सेनाओं ने एदेसा नगर वापस ले लिया। पोप ने प्रसिद्ध साधु और वक्ता बर्नार्ड ऑफ़ क्लेरवो से यूरोप को जगाने को कहा। 1146 के उनके भाषणों से राजा और आम लोग दूसरे धर्मयुद्ध (1147-49) में शामिल हुए।
फ़्रांस के राजा लुई सप्तम और जर्मनी के राजा कॉनराड तृतीय की सेनाएँ पूर्व की ओर चलीं, पर रास्ते में कमज़ोर हो गईं। 1148 में वे दमिश्क़ नहीं ले पाए और लौट गए। बर्नार्ड को दोष मिला और उन्हें गहरा धक्का लगा। यह धर्मयुद्ध दिखाता है कि मध्य युग के युद्धों में धर्म, राजनीति और ज़मीन मिले हुए थे।
वेनिस: समुद्री व्यापार की शक्ति
वेनिस एड्रियाटिक सागर के ऊपरी सिरे पर झील (लैगून) के द्वीपों पर बसा था। वहाँ खेती की ज़मीन कम थी, इसलिए लोग समुद्र पर जिए: जहाज़ बनाना, चलाना, व्यापार करना। उसका बड़ा जहाज़-घाट "आर्सेनल" बहुत तेज़ी से जहाज़ बना लेता था।
वेनिस बीज़ान्टिन, मिस्र और सीरिया के इस्लामी बंदरगाहों और यूरोप के नगरों से व्यापार करता था। वह लकड़ी, नमक और धातु बेचता और मसाले, रेशम और कपास ख़रीदता। शासन व्यापारी परिवारों और डोज़ (चुने हुए नेता) के हाथ में था। 1204 में वेनिस के नेताओं ने चौथे धर्मयुद्ध को कॉन्स्टेंटिनोपल की ओर मोड़ने में मदद की, जिससे उसे और व्यापारिक अधिकार और द्वीप मिले। वेनिस दिखाता है कि कोई शक्ति सिर्फ़ जीत से नहीं, व्यापार से भी बढ़ सकती है।
करके देखो
3D में: आख़िरी चरण में पहले अंदाज़ा लगाओ: स्लाइडर "युद्ध" पर हो तो कितने व्यापारी जहाज़ होंगे? फिर स्लाइडर चलाकर जाँचो। देखो "शांति" पर एक भी लाल तीर नहीं है।
घर पर: दो कॉलम का चार्ट बनाओ: "आदान-प्रदान" और "संघर्ष"। इन्हें सही कॉलम में लिखो: मसालों का व्यापार, दूसरा धर्मयुद्ध, किताबों का अनुवाद, समुद्री लूट, वेनिस का जहाज़-घाट, तीर्थयात्रा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भूमध्य जगत = लैटिन ईसाई जगत + बीज़ान्टिन साम्राज्य + इस्लामी दुनिया
- तीन एकेश्वरवादी धर्म: यहूदी, ईसाई, इस्लाम
- 1054 = पूर्व-पश्चिम विभाजन (रोम और कॉन्स्टेंटिनोपल अलग)
- 1147-49 = दूसरा धर्मयुद्ध (बर्नार्ड ऑफ़ क्लेरवो ने प्रचार किया)
- वेनिस = झील का नगर + जहाज़-घाट (आर्सेनल) + हर किनारे से व्यापार
हल किए गए उदाहरण
1. मध्यकालीन भूमध्य सागर के चारों ओर की तीन सभ्यताओं के नाम लिखो।
लैटिन ईसाई जगत (पश्चिमी यूरोप), बीज़ान्टिन साम्राज्य (पूर्व, राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल) और इस्लामी दुनिया (दक्षिण और पूर्वी किनारे)।
2. आदान-प्रदान के दो और संघर्ष के दो उदाहरण दो।
आदान-प्रदान: मसाले और रेशम का व्यापार; अरबी विज्ञान की किताबों का लैटिन में अनुवाद। संघर्ष: दूसरा धर्मयुद्ध; तटों पर समुद्री लूट।
3. खेती की कम ज़मीन होने पर भी वेनिस अमीर कैसे बना?
वह समुद्र पर जिया। आर्सेनल में तेज़ी से बहुत जहाज़ बने, बीज़ान्टिन, मिस्र और यूरोप से व्यापार हुआ, और हर सौदे में उसे हिस्सा मिला।
4. पूर्व-पश्चिम विभाजन (1054) और दूसरे धर्मयुद्ध (1147) के बीच कितने साल हैं?
1147 - 1054 = 93 साल।
5. "ईसाई जगत बनाम इस्लाम" कहना बहुत सरल क्यों है?
क्योंकि उनके बीच व्यापार, यात्रा और ज्ञान का लेन-देन भी था। शासक कभी धर्म पार करके मित्र बने, और ईसाई भी ईसाइयों से लड़े, जैसे 1204 में।
आम गलतियाँ
- पूरे दौर को एक लंबा युद्ध समझना। टकराव के बीच भी व्यापार और ज्ञान चलता रहा।
- रोम और कॉन्स्टेंटिनोपल को मिला देना। रोम = पोप = लैटिन पश्चिम। कॉन्स्टेंटिनोपल = सम्राट = यूनानी पूर्व (बीज़ान्टिन)।
- यह कहना कि बर्नार्ड ने सेना का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रचार किया; सेनाएँ राजाओं ने चलाईं।
- सोचना कि यहूदी, ईसाई और मुसलमान अलग-अलग इलाक़ों में रहते थे। तीनों के छोटे समुदाय कई नगरों में साथ रहते थे।