शोगुन से पहले: दरबार और योद्धा
सदियों तक जापान पर क्योटो दरबार में सम्राट और कुलीन शासन करते थे। प्रांतों में स्थानीय ज़मींदार अपनी ज़मीन बचाने के लिए योद्धा (समुराई) बने। दो बड़े योद्धा परिवार, ताइरा और मिनामोतो, ताक़तवर हुए। पहले ताइरा जीते और दरबार के ज़रिए शासन किया। फिर जेनपेई युद्ध (1180-1185) में मिनामोतो ने उन्हें हरा दिया।
योरितोमो और कामाकुरा शोगुनशाही
मिनामोतो नो योरितोमो क्योटो में नहीं रुका। उसने दरबार से दूर कामाकुरा में अड्डा बनाया और योद्धाओं, क़ानून और प्रांतों की रक्षा के दफ़्तर बनाए। 1185 में उसे शुगो (सैन्य गवर्नर) और जितो (जागीर प्रबंधक) नियुक्त करने का अधिकार मिला। 1192 में सम्राट ने उसे शोगुन (महान सेनापति) की उपाधि दी। शोगुन की सरकार बाकुफू (तंबू सरकार) कहलाती है।
रिश्ता सरल था। शोगुन योद्धाओं को ज़मीन देता या उनकी ज़मीन पक्की करता (गो-ओन, "कृपा")। बदले में वे उसकी सेना में सेवा करते और कामाकुरा की रक्षा करते (होको, "सेवा")। इस रिश्ते वाले योद्धा गोकेनिन (सम्मानित सेवक) हैं। ज़मीन के बदले वफ़ादारी सामंतवाद का एक रूप है।
होजो रीजेंट और 1232 का क़ानून
1199 में योरितोमो की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी के परिवार होजो ने शिक्कन (रीजेंट) बनकर असली सत्ता सँभाली। 1221 में सेवानिवृत्त सम्राट गो-तोबा ने सत्ता वापस लेनी चाही और जोक्यू युद्ध हार गया। इसके बाद कामाकुरा का क्योटो पर भी नियंत्रण हो गया। 1232 में होजो ने गोसेइबाई शिकिमोकू नाम की छोटी लिखित क़ानून संहिता जारी की। उसमें लिखा था कि ज़मीन किसकी है और झगड़े कैसे निपटें। लिखित नियम सभी योद्धाओं के लिए एक जैसे और निष्पक्ष थे।
मंगोल साम्राज्य का उदय
1206 में चंगेज़ ख़ान ने मंगोलियाई मैदान की घुमंतू जनजातियों को एक किया। मंगोल तेज़ घुड़सवार और तीरंदाज़ थे। उन्होंने पूर्वी एशिया से पूर्वी यूरोप तक ज़मीन जीती, इतिहास का सबसे बड़ा ज़मीनी साम्राज्य। सड़कें और व्यापार सुरक्षित हुए, इसलिए लोग, सामान और विचार यूरेशिया भर में चले ("मंगोल शांति")। उसके पोते कुबलाई ख़ान ने चीन पर शासन किया, राजधानी दादू (बीजिंग) बनाई और 1271 में अपने वंश का नाम युआन रखा। वह चाहता था कि जापान उसे कर दे। कामाकुरा सरकार ने मना कर दिया।
1274 और 1281 के आक्रमण
1274 में लगभग 30,000 मंगोल और कोरियाई सैनिक क्यूशू में हाकाता के पास उतरे। वे समूह में लड़े और बारूद के गोले व ज़हरीले तीर चलाए, जिससे आमने-सामने के द्वंद्व के आदी जापानी योद्धा चौंक गए। कड़ी लड़ाई और तूफ़ान से वे लौट गए। जापान ने हाकाता तट पर लंबी पत्थर की दीवार बनाई। 1281 में बहुत बड़ा बेड़ा आया (दो सेनाओं में लगभग 1,40,000 आदमी)। योद्धाओं ने हफ़्तों दीवार थामी और एक भारी तूफ़ान ने कई जहाज़ तोड़ दिए। बाद में लोगों ने इसे कामिकाज़े, यानी "दिव्य हवा" कहा।
कामाकुरा का पतन क्यों हुआ
युद्ध महँगे थे। गोकेनिन अपने हथियार, जहाज़ और आदमी ख़ुद जुटाते थे। पर यह बचाव था, इसलिए इनाम में देने को शत्रु की ज़मीन नहीं थी। कई गोकेनिन ग़रीब हो गए और साहूकारों को ज़मीन बेची या गिरवी रखी। होजो के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा बढ़ा, जो सत्ता अपने परिवार में रखते थे। 1333 में सम्राट गो-दाइगो ने आशिकागा ताकाउजी और अन्य की मदद से कामाकुरा शोगुनशाही ख़त्म कर दी। आगे मुरोमाची शोगुनशाही आई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शोगुन = प्रधान सेनापति; बाकुफू = शोगुन की सरकार
- ज़मीन के बदले वफ़ादारी: गो-ओन (शोगुन से ज़मीन) + होको (गोकेनिन की सेवा)
- शिक्कन = होजो रीजेंट जो शोगुन की ओर से शासन करता था
- मुख्य तिथियाँ: 1185 शुगो-जितो; 1192 योरितोमो शोगुन; 1221 जोक्यू युद्ध; 1232 क़ानून; 1274, 1281 मंगोल हमले; 1333 पतन
- युआन = चीन का मंगोल वंश, 1271 में कुबलाई ख़ान ने स्थापित किया
हल किए गए उदाहरण
1. समझाओ कि गोकेनिन और शोगुन एक-दूसरे पर कैसे निर्भर थे।
शोगुन ज़मीन देता या पक्की करता (गो-ओन)। गोकेनिन उसकी सेना में सेवा करते और कामाकुरा की रक्षा करते (होको)। ज़मीन के बिना गोकेनिन के पास सेवा का कारण नहीं था; गोकेनिन के बिना शोगुन के पास सेना नहीं थी।
2. विशाल बेड़े के बावजूद मंगोलों के लिए जापान जीतना कठिन क्यों था?
उन्हें समुद्र पार करना था। जापान ने हाकाता में पत्थर की दीवार बनाई, योद्धाओं ने तट बचाया और 1281 में तूफ़ान ने जहाज़ तोड़ दिए। उनकी ताक़त ज़मीनी घुड़सवार सेना थी, जो जहाज़ों से अच्छी तरह काम नहीं कर सकती थी।
3. मंगोल आक्रमणों के बाद कामाकुरा शोगुनशाही कमज़ोर क्यों हुई?
गोकेनिन ने रक्षा पर पैसा ख़र्च किया पर इनाम में नई ज़मीन नहीं मिली। वे ग़रीब हुए, साहूकारों से उधार लिया और होजो से नाराज़ हुए। वफ़ादारी घटी और 1333 में विद्रोही सम्राट गो-दाइगो से जुड़ गए।
4. 1185 से 1333 तक गिनें तो कामाकुरा शोगुनशाही कितने वर्ष चली?
1333 - 1185 = 148 वर्ष।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि शोगुन ने सम्राट की जगह ले ली। सम्राट क्योटो में ही रहा; असली ताक़त शोगुन के पास थी।
- होजो को "शोगुन" कहना। वे रीजेंट (शिक्कन) थे जो शोगुन के पीछे से शासन करते थे।
- कहना कि केवल तूफ़ान ने मंगोलों को हराया। बहादुर रक्षक और तट की दीवार भी ज़रूरी थे।
- सोचना कि मंगोलों ने जापान में ज़मीन जीती। वे दोनों बार असफल रहे, इसलिए जीत से इनाम की ज़मीन नहीं मिली।