संसाधन-क्षय वाला शहर क्या है?
कुछ शहर किसी एक प्राकृतिक संसाधन के कारण बसते हैं: कोयला, लौह अयस्क, तेल या लकड़ी। खान या कुआँ रोज़गार देता है, लोग आते हैं, फिर दुकानें, स्कूल और सड़कें बनती हैं। इन्हें संसाधन-आधारित शहर कहते हैं।
खनिज और ईंधन अनवीकरणीय हैं: एक बार निकल गए तो ख़त्म। जब अच्छा, आसान अयस्क चुक जाता है तो शहर संसाधन-क्षय (resource-depleted) वाला बन जाता है, यानी उसका मुख्य संसाधन ख़त्म हो रहा है या लगभग ख़त्म है।
समस्या के कारण
ऐसे शहर मुश्किल में क्यों पड़ते हैं?
- संसाधन चुक जाता है: भंडार पतले, गहरे और महँगे हो जाते हैं।
- एकतरफ़ा अर्थव्यवस्था: लगभग सारे रोज़गार खान और उसके माल पर चलने वाले कारखानों पर टिके।
- माँग या दाम गिरना: स्वच्छ ईंधन, नई सामग्री या सस्ता आयात।
- पुरानी तकनीक और पुराने कारखाने जो मुक़ाबला नहीं कर पाते।
- बिगड़ा पर्यावरण: गड्ढे, कचरे के ढेर, गंदा पानी, धँसती ज़मीन, भूमिगत आग। इससे नई कंपनियाँ डरती हैं।
परिणाम: बेरोज़गारी, पलायन, घटती आय, ख़ाली मकान और शहर के पास सुधार के लिए कम पैसा।
रूपांतरण के रास्ते
शहर को कमाने का तरीक़ा बदलना पड़ता है। मुख्य रास्ते:
- ज़मीन और पानी सुधारें: गड्ढे भरें, पेड़ लगाएँ, नदियाँ साफ़ करें। पुराने गड्ढे झील या पार्क बन सकते हैं।
- विकल्प उद्योग बढ़ाएँ: पुराने हुनर और स्थलों का नया उपयोग, जैसे मशीनें, कचरे से रसायन, स्वच्छ ऊर्जा।
- सेवाएँ बढ़ाएँ: पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सॉफ़्टवेयर, माल-ढुलाई।
- कामगारों को प्रशिक्षण दें ताकि पुराने खनिक नए काम कर सकें, और छोटे उद्यमों की मदद करें।
- बेहतर संपर्क: सड़क, रेल, इंटरनेट से नई कंपनियाँ आती हैं।
- जल्दी योजना बनाएँ: सबसे अच्छा समय तब है जब खान अभी कमा रही हो; कुछ आय भविष्य के लिए बचाएँ।
असली उदाहरण
रूर, जर्मनी: कभी कोयला-इस्पात का केंद्र। खानें बंद होने पर पुरानी भट्टियाँ और खान-घर संग्रहालय, पार्क और संगीत-भवन बने; विश्वविद्यालय और शोध केंद्र आए। पिट्सबर्ग, अमेरिका: इस्पात छोड़कर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और तकनीक बढ़ाई। फ़ुशुन, चीन: कोयला शहर जिसने खान-गड्ढे की ज़मीन सुधारी और नए उद्योग जोड़े। झरिया, भारत: कोयला क्षेत्र जहाँ आग और धँसती ज़मीन के कारण परिवारों को सुरक्षित बसाना और नई आजीविका देना ज़रूरी है।
कोई दो शहर एक जैसे नहीं। हर शहर को अपनी ताक़त पर चलना होता है।
करके देखें: आप महापौर हैं
3D के चरण 6 में दोनों स्लाइडर चलाइए। "ज़मीन सुधार" और "नया उद्योग व प्रशिक्षण" बढ़ाइए। हरे रोज़गार-ब्लॉक गिनिए। फिर सिर्फ़ एक स्लाइडर चलाइए। शहर को दोनों क्यों चाहिए?
घर पर: अपने आसपास का कोई शहर सोचिए जो एक ही चीज़ पर टिका है (मिल, खान, पर्यटन स्थल)। उसके लिए तीन और काम लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संसाधन-आधारित शहर: एक प्राकृतिक संसाधन के आसपास बसा शहर
- संसाधन-क्षय: संसाधन ख़त्म हो रहा है
- रास्ता: सुधार + प्रशिक्षण + पुनर्निर्माण
- विकल्प उद्योग: पुराने मुख्य उद्योग की जगह लेने वाला नया उद्योग
- अनवीकरणीय: एक बार ख़त्म तो वापस नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. 60 साल बाद कोयला खान पर बसा शहर मुश्किल में क्यों पड़ता है?
कोयला अनवीकरणीय है। बरसों खुदाई के बाद आसान कोयला चुक जाता है, बाक़ी गहरा और महँगा होता है, इसलिए खान की कमाई घटकर बंद हो जाती है। शहर में दूसरे उद्योग कम थे, इसलिए रोज़गार गिरते हैं।
2. खान बंद होने के तीन प्रभाव लिखिए।
रोज़गार जाते हैं, इसलिए आय घटती है। लोग बाहर जाते हैं, इसलिए दुकानों, स्कूलों और बसों के ग्राहक घटते हैं। गड्ढे, कचरे के ढेर और प्रदूषित ज़मीन बचते हैं जो नई कंपनियों को डराते हैं।
3. कोयला खानें बंद होने के बाद रूर क्षेत्र कैसे बदला?
उसने ज़मीन और नदियाँ सुधारीं, पुराने कोयला-इस्पात स्थलों को संग्रहालय, पार्क और आयोजन-स्थलों में बदला, और विश्वविद्यालय, शोध केंद्र, सेवाएँ तथा नए उद्योग लाया। अब वह कई तरह से कमाता है।
4. एक शहर के दो रास्ते हैं: क) खान की सड़क और बड़ी करना, ख) खनिकों को प्रशिक्षण देकर पर्यटन व खाद्य-प्रसंस्करण समूह बनाना। कौन बेहतर है?
ख। क अब भी उसी चुकते संसाधन पर टिका है। ख से आय के कई नए स्रोत बनते हैं और खनिकों को नए हुनर मिलते हैं, इसलिए खान ख़त्म होने पर भी शहर चलता है।
5. खान के खाली होने से पहले ही बदलाव क्यों शुरू करना चाहिए?
जब खान कमा रही होती है तब शहर के पास पैसा, कामगार और समय होते हैं। बंद होने के बाद पैसा और युवा चले जाते हैं, तब बदलाव बहुत कठिन हो जाता है। जल्दी योजना से ख़र्च और रोज़गार दोनों बचते हैं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि समस्या सिर्फ़ रोज़गार जाने की है। बिगड़ी ज़मीन और पानी भी नए विकास को रोकते हैं।
- सोचना कि क्षय वाला शहर छोड़ देना चाहिए। कई शहर फिर फले-फूले हैं।
- हर शहर पर एक ही उदाहरण थोप देना। हर शहर को अपनी ताक़त और हुनर पर चलना होता है।
- भूल जाना कि कोयला, अयस्क जैसे संसाधन अनवीकरणीय हैं। यही जड़ कारण है।