राष्ट्रीय विकास रणनीति क्या है?
राष्ट्रीय विकास रणनीति सरकार की लंबी अवधि की योजना है, जिसका मक़सद पूरे देश के जीवन को बेहतर बनाना है। वह तीन बातें बताती है: हम क्या चाहते हैं (लक्ष्य), कैसे करेंगे (साधन) और कैसे जानेंगे कि सफल हुई (जाँच)।
पैसा, ज़मीन और हुनरमंद लोग सीमित हैं, इसलिए देश सब कुछ एक साथ नहीं कर सकता। रणनीति तय करती है कि पहले क्या आए।
लक्ष्य: देश क्या चाहते हैं
- तेज़ वृद्धि: ज़्यादा उत्पादन और प्रति व्यक्ति ज़्यादा आय।
- इलाकों में न्याय: गरीब और दूर के इलाकों को आगे लाना, ताकि अमीर-गरीब जगहों का अंतर घटे।
- गरीबी हटाना: सबको बेहतर भोजन, स्वास्थ्य, घर और पढ़ाई।
- टिकाऊपन: हवा, पानी, मिट्टी और जलवायु को बिगाड़े बिना बढ़ना, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
- मज़बूती और सुरक्षा: भरोसेमंद ऊर्जा, भोजन और तकनीक, जो दूसरों पर बहुत निर्भर न हों।
साधन: देश कैसे काम करते हैं
- योजना: कई सालों की लिखित योजना, जैसे पंचवर्षीय योजना।
- सड़क, रेल, बंदरगाह और बिजली की लाइनें जो दूर के इलाकों को बाज़ार से जोड़ती हैं। गरीब इलाकों को अक्सर सबसे ज़्यादा फ़ायदा मिलता है।
- स्कूल, हुनर और स्वास्थ्य जो लोगों को ज़्यादा उत्पादक बनाते हैं।
- उद्योग नीति: विशेष क्षेत्र, कर में राहत या सस्ती ज़मीन देकर कारख़ाने और नई तकनीक बुलाना।
- हरित ऊर्जा और प्रकृति की देखभाल: सोलर, पवन, पेड़ लगाना, साफ़ शहर।
3D में चार सिक्कों के स्लाइडर यही साधन हैं। हर साधन अलग इलाकों की अलग तरह मदद करता है, इसीलिए अकेले एक साधन से मिश्रण बेहतर होता है।
अलग-अलग देशों के उदाहरण
चीन
- पश्चिमी विकास (लगभग 2000 से): भीतरी पश्चिम में सड़कें, रेलें, बिजली और स्कूल, ताकि वह तट के बराबर आ सके।
- ग्रामीण पुनर्जीवन (2017 से): बेहतर खेती, गाँव की सड़कें, सेवाएँ और स्थानीय रोज़गार, ताकि गाँव शहरों से बहुत पीछे न रहें।
- पारिस्थितिक और कम-कार्बन लक्ष्य: ज़्यादा स्वच्छ ऊर्जा और जंगल; देश का लक्ष्य है कि कार्बन डाइऑक्साइड 2030 से पहले चरम पर पहुँचे और 2060 तक तटस्थ हो।
- बेल्ट एंड रोड (2013 से): विदेशों में व्यापार के रास्ते, जैसे बंदरगाह, रेलें और सड़कें बनाना।
भारत
- पंचवर्षीय योजनाएँ (1951 से): पहले इस्पात, बाँध और खेती, फिर व्यापक लक्ष्य; बाद में योजना संस्था बदलकर नीति आयोग बनी।
- मेक इन इंडिया (2014) कारख़ाने बढ़ाने के लिए, डिजिटल इंडिया (2015) ऑनलाइन सेवाओं के लिए और राष्ट्रीय सौर मिशन (2010) स्वच्छ बिजली के लिए।
दक्षिण कोरिया
- 1960 के दशक से सरकार ने निर्यात-आधारित उद्योग को दिशा दी: इस्पात, जहाज़, फिर इलेक्ट्रॉनिक्स, साथ में मज़बूत पढ़ाई। 1970 के दशक में गाँवों को सुधारने का आंदोलन भी चला।
अलग देश अलग साधन चुनते हैं, क्योंकि उनकी ज़मीन, लोग और इतिहास अलग हैं।
समझौते और नतीजों की जाँच
हर चुनाव की कीमत होती है। कारख़ाने आय बढ़ाते हैं पर धुआँ भी। बड़ी सड़कें एक इलाके की मदद करती हैं पर जंगल काट सकती हैं। इसलिए योजनाकार सूचकों (इंडिकेटर) का उपयोग करते हैं, यानी वे संख्याएँ जो प्रगति नापती हैं: प्रति व्यक्ति आय, इलाकों का अंतर, स्कूल और स्वास्थ्य के आँकड़े, हवा की गुणवत्ता और कार्बन उत्सर्जन।
अगर कोई संख्या उल्टी दिशा में जाए, तो योजना बदलती है। इसीलिए रणनीतियाँ हर कुछ साल में नई की जाती हैं। अच्छी रणनीतियाँ इलाकों के लोगों से भी पूछती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि उन्हें क्या चाहिए।
खुद करके देखो
3D में सारे 10 सिक्के सिर्फ़ सड़क पर लगाओ। अंतर और प्रदूषण का क्या होता है? अब सिर्फ़ उद्योग पर लगाओ। फिर ऐसा मिश्रण खोजो जिसमें अंतर 5 या उससे कम और प्रदूषण 1.5 या उससे कम हो। घर पर: अपने पास की एक बड़ी परियोजना (नई सड़क, सोलर प्लांट, स्कूल) चुनो और लिखो कि किसे फ़ायदा है, कौन पैसा देता है और क्या गड़बड़ हो सकती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रणनीति = लक्ष्य + साधन + जाँच
- इलाकों का अंतर = सबसे ऊँची आय − सबसे नीची आय
- सीमित बजट: एक साधन पर ज़्यादा सिक्के यानी बाकी पर कम
- संतुलित योजना = छोटा क्षेत्रीय अंतर + कम प्रदूषण + बढ़ती औसत आय
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में भीतरी इलाके की आय तट की आय की आधी है। दो साधन बताओ जो वह इस्तेमाल कर सकता है और हर एक क्यों मदद करता है।
सड़कें और रेलें भीतरी इलाके को बंदरगाहों और बाज़ारों से जोड़ती हैं, इसलिए उसके खेत और कारख़ाने ज़्यादा बेच सकते हैं। स्कूल और हुनर प्रशिक्षण वहाँ के लोगों की कमाई की ताक़त बढ़ाते हैं। दोनों भीतरी इलाके को तट से ज़्यादा ऊपर उठाते हैं, इसलिए अंतर घटता है।
2. एक योजना सारा पैसा कारख़ानों में लगाती है। आय बढ़ती है, पर हवा गंदी होती है और खेत घटते हैं। योजना कैसे बदलनी चाहिए?
कुछ पैसा साफ़ विकल्पों में लगाओ: हरित ऊर्जा, पेड़ लगाना और कारख़ाने के धुएँ के नियम। कुछ पैसा स्कूलों और गाँव की सड़कों को भी दो, ताकि फ़ायदा फैले और केवल कारख़ानों पर निर्भर न रहे। फिर कुछ साल बाद प्रदूषण और आय की संख्याएँ दोबारा जाँचो।
3. सरकार का लक्ष्य है कि गाँव शहरों से पीछे न रहें। जाँच के लिए दो सूचक चुनो और बताओ कि कैसा नतीजा सफलता दिखाएगा।
सूचक 1: शहरों की तुलना में गाँवों की औसत आय। सूचक 2: गाँवों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और हर मौसम की सड़क की पहुँच। सफलता तब है जब गाँव की आय शहर की आय के और पास आए और ज़्यादा गाँवों में ये सेवाएँ पहले से अधिक हों।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि विकास का मतलब सिर्फ़ ऊँची आय है। योजनाएँ इलाकों में न्याय, स्वास्थ्य, पढ़ाई और साफ़ पर्यावरण भी देखती हैं।
- यह सोचना कि एक साधन सब ठीक कर देगा। सड़कें पहुँच देती हैं, पर हुनर और काम के बिना इलाका फिर भी गरीब रह सकता है। मिश्रण बेहतर है।
- यह सोचना कि रणनीति हमेशा के लिए पक्की होती है। देश सूचक जाँचते हैं और नतीजे खराब हों तो योजना बदलते हैं।
- एक देश की योजना को हू-ब-हू दूसरे देश में लगा देना। ज़मीन, लोग, जलवायु और इतिहास अलग हैं, इसलिए हर देश को अपनी योजना चाहिए।