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दृश्य माध्यम: फ़ोटो, वीडियो और डिजिटल चित्र

दृश्य माध्यम (visual media) वे तरीक़े हैं जिनसे हम आँख से देखे जाने वाले चित्र बनाते और दिखाते हैं: फ़ोटोग्राफ़ी (रोशनी से बना ठहरा चित्र), वीडियो और एनिमेशन (बहुत से फ़्रेम तेज़ी से दिखाने पर चलती-सी तस्वीर) और डिजिटल माध्यम (कंप्यूटर पर पिक्सल से बने चित्र)। सब में आप चुनते हैं कि क्या दिखाना है, कैसे फ़्रेम करना है और रोशनी व रंग कैसे रखने हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कैमरा लाल गेंद से टकराकर आई रोशनी को पकड़ता है। वह उसे एक सपाट चित्र, यानी फ़ोटो, के रूप में रख लेता है। फ़ोटो एक पल है जो ठहर जाता है।
  2. फ़्रेमिंग यानी तय करना कि फ़ोटो के अंदर क्या आए। पास जाइए: गेंद बड़ी हो जाती है और बारीकी दिखती है। पीछे जाइए: गेंद छोटी दिखती है और आसपास की जगह दिखती है।
  3. रोशनी फ़ोटो का रूप बदल देती है। बहुत कम रोशनी में फ़ोटो काली पड़ती है, बहुत ज़्यादा में सफ़ेद। रोशनी घटाइए-बढ़ाइए और साफ़ चित्र खोजिए।
  4. वीडियो बहुत सारी फ़ोटो को बहुत तेज़ी से दिखाना है। फ़्रेम नंबर बदलिए और देखिए कि हर फ़्रेम में गेंद थोड़ी खिसकती है। तेज़ फ़्रेम चिकनी चाल जैसे लगते हैं।
  5. डिजिटल चित्र छोटे रंगीन चौकोनों की जाली है, जिन्हें पिक्सल कहते हैं। कम पिक्सल में चित्र चौकोर-चौकोर दिखता है, ज़्यादा में चिकना। पिक्सल बदलकर देखिए।
  6. खुला खेल: कितना पास हैं और कितनी रोशनी है, दोनों बदलिए। मनपसंद फ़ोटो बनाइए, फिर घर पर फ़ोन से आज़माइए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या फ़ोटो असली चीज़ जैसी ही होती है?

नहीं। फ़ोटो एक पल की सपाट तस्वीर है, एक जगह से और एक रोशनी में ली हुई। फ़ोटोग्राफ़र ने चुना कि क्या दिखाना है और क्या छोड़ना है।

पास जाने पर चीज़ बड़ी क्यों दिखती है?

जितना पास जाते हैं, वह फ़ोटो का उतना ज़्यादा हिस्सा घेरती है। स्लाइडर चलाइए और फ़ोटो में लाल गेंद को बढ़ते देखिए।

मेरी फ़ोटो काली या सफ़ेद क्यों आई?

कैमरे ने बहुत कम या बहुत ज़्यादा रोशनी इकट्ठा की। रोशनी बदलकर देखिए, फ़ोटो पहले काली और फिर सफ़ेद होती है।

ठहरे हुए चित्र चलते हुए कैसे दिखते हैं?

हर फ़्रेम में थोड़ा-सा बदलाव होता है और फ़्रेम इतनी तेज़ी से आते हैं कि दिमाग़ उन्हें जोड़कर चाल बना देता है। फ़्रेम नंबर बदलिए, गेंद हर बार थोड़ी खिसकती है।

छोटा चित्र बड़ा करने पर चौकोर-चौकोर क्यों दिखता है?

उसमें पिक्सल कम होते हैं, इसलिए हर पिक्सल बड़ा चौकोर बन जाता है। ज़्यादा पिक्सल वाला चित्र चिकना रहता है।

वीडियो और एनिमेशन में क्या अंतर है?

दोनों में फ़्रेम तेज़ी से दिखते हैं। वीडियो के फ़्रेम आम तौर पर कैमरे से रिकॉर्ड होते हैं। एनिमेशन में कलाकार हर फ़्रेम चित्र बनाकर, पुतले से या कंप्यूटर पर तैयार करता है।

दृश्य माध्यम क्या है?

दृश्य माध्यम (visual media) वे तरीक़े हैं जिनसे हम आँखों से देखे जाने वाले चित्र बनाते और दूसरों तक पहुँचाते हैं। माध्यम का मतलब है ज़रिया। काग़ज़ पर बना चित्र भी चित्र है, पर कला की कक्षा में दृश्य माध्यम कहने पर आम तौर पर फ़ोटोग्राफ़ी, वीडियो और एनिमेशन और कंप्यूटर, फ़ोन या टैबलेट पर बना डिजिटल माध्यम समझा जाता है।

पेंसिल से बनाने से यह अलग है, क्योंकि यहाँ मशीन मदद करती है। पर ज़रूरी फ़ैसले कलाकार ही लेता है: क्या दिखाना है, कहाँ खड़ा होना है, कौन-से रंग और कौन-सा एहसास देना है।

फ़ोटोग्राफ़ी: रोशनी से चित्र बनाना

फ़ोटोग्राफ़ी शब्द पुराने शब्दों से बना है जिनका मतलब है रोशनी से लिखना। कैमरे में एक छोटा छेद होता है, लेंस। असली चीज़ से आई रोशनी लेंस से अंदर जाती है और चित्र के रूप में रख ली जाती है।

फ़्रेमिंग और संयोजन

फ़्रेमिंग का मतलब है तय करना कि फ़ोटो के अंदर क्या रहेगा और क्या बाहर छूटेगा। क्लोज़-अप बारीकी दिखाता है, जैसे चेहरा या फूल। वाइड शॉट आसपास की जगह दिखाता है। बहुत से फ़ोटोग्राफ़र तिहाई का नियम भी अपनाते हैं: फ़ोटो को 3 × 3 खानों में बँटा सोचिए और मुख्य चीज़ को हमेशा बीच में न रखकर किसी रेखा के पास रखिए।

रोशनी

फ़ोटोग्राफ़ी पूरी तरह रोशनी का खेल है। बादल वाले दिन की रोशनी नरम होती है। तेज़ धूप में परछाइयाँ गहरी बनती हैं। एक्सपोज़र (exposure) यानी कैमरा कितनी रोशनी इकट्ठा करता है। कम रोशनी से फ़ोटो काली, ज़्यादा से सफ़ेद-सी फीकी बनती है। बग़ल से आई रोशनी बनावट (texture) दिखाती है; पीछे से आई रोशनी में चमकीले आसमान के सामने काली आकृति बनती है, जिसे सिल्हूट (silhouette) कहते हैं।

वीडियो और एनिमेशन: चलते चित्र

वीडियो फ़ोटो की एक लंबी कतार है, जिसकी हर फ़ोटो को फ़्रेम कहते हैं। इन्हें एक के बाद एक बहुत तेज़ी से दिखाया जाता है। आँख और दिमाग़ इन्हें जोड़ लेते हैं, इसलिए चलती हुई तस्वीर दिखती है। एक सेकंड में जितने फ़्रेम दिखते हैं, वह फ़्रेम दर (frame rate) है, जिसे fps (frames per second) लिखते हैं। फ़िल्में अक्सर 24 fps पर चलती हैं और बहुत-से फ़ोन वीडियो 30 या 60 fps पर। 24 fps पर एक मिनट की फ़िल्म में 24 × 60 = 1440 फ़्रेम होते हैं।

एनिमेशन में भी फ़्रेम होते हैं, पर कलाकार उन्हें एक-एक करके बनाता है: चित्र बनाकर, मिट्टी के पुतले से या कंप्यूटर पर। सबसे आसान एनिमेशन फ़्लिपबुक है: हर पन्ने पर छोटा-सा बदलाव बनाइए और अँगूठे से पन्ने पलटिए।

वीडियो बनाने वाला शॉट (क्लोज़-अप, वाइड शॉट), शॉट का क्रम और आवाज़ की योजना बनाता है। शॉट चुनकर और जोड़कर कहानी कही जाती है, इसे संपादन (editing) कहते हैं।

डिजिटल माध्यम: पिक्सल से बने चित्र

डिजिटल चित्र छोटे-छोटे चौकोनों की जाली है, जिन्हें पिक्सल कहते हैं। हर पिक्सल का एक रंग होता है। थोड़ा दूर खड़े होने पर चौकोर आपस में मिल जाते हैं और चिकना चित्र दिखता है। जो चित्र 1000 पिक्सल चौड़ा और 800 पिक्सल ऊँचा है, उसमें 1000 × 800 = 8,00,000 पिक्सल होते हैं। ज़्यादा पिक्सल से बारीकी ज़्यादा मिलती है, पर फ़ाइल भी बड़ी होती है।

डिजिटल औज़ारों से कलाकार टैबलेट पर चित्र बना सकता है, फ़ोटो सुधार सकता है, वीडियो काट-जोड़ सकता है, एनिमेशन या पोस्टर बना सकता है। ग़लती वापस ली जा सकती है और कई रूप आज़माए जा सकते हैं। फिर भी बुनियादी बातें वही रहती हैं: अच्छी फ़्रेमिंग, रोशनी, रंग और साफ़ विचार। किसी दूसरे की फ़ोटो इस्तेमाल करने से पहले उससे पूछिए, और जिसे पसंद न हो उसकी तस्वीर कभी साझा मत कीजिए।

करके देखें: तीन फ़ोटो की कहानी

घर की कोई छोटी चीज़ चुनिए, जैसे कप या पौधा। तीन फ़ोटो लीजिए: एक वाइड, एक मीडियम और एक क्लोज़-अप। इन्हें क्रम में रखिए, तो छोटी-सी कहानी बन गई: यह कहाँ है, यह क्या है, पास से कैसा दिखता है। फिर एक सेट छाँव में और एक धूप में लीजिए। कौन-सा बेहतर लगा? क्यों?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक फ़िल्म 24 फ़्रेम प्रति सेकंड पर चलती है। 10 सेकंड में कितने फ़्रेम होंगे?

फ़्रेम = fps × सेकंड = 24 × 10 = 240 फ़्रेम।

2. एक डिजिटल चित्र 6 पिक्सल चौड़ा और 4 पिक्सल ऊँचा है। उसमें कितने पिक्सल हैं?

पिक्सल = चौड़ाई × ऊँचाई = 6 × 4 = 24 पिक्सल।

3. आप एक लड़की की मुस्कान और उसके पीछे का पूरा बाज़ार दोनों दिखाना चाहते हैं। कौन-से शॉट चाहिए?

मुस्कान के लिए क्लोज़-अप और बाज़ार के लिए वाइड शॉट। दोनों लीजिए, या एक मीडियम शॉट जिसमें वह और पीछे का कुछ बाज़ार दिखे।

4. खिड़की के सामने खड़े दोस्त की फ़ोटो में चेहरा बहुत काला आया है। क्या बदलें?

रोशनी उसके पीछे है (सिल्हूट बन गया)। आप जगह बदलिए ताकि रोशनी चेहरे पर पड़े, या उसे खिड़की की ओर मुड़ने को कहिए, या सामने से लैंप जलाइए।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. वीडियो किससे बनता है?
2. फ़ोटो के अंदर क्या आए, यह चुनना क्या कहलाता है?
3. डिजिटल चित्र का नन्हा रंगीन चौकोर क्या है?
4. बहुत ज़्यादा चमकीली, फीकी-सी फ़ोटो में क्या ज़्यादा है?
5. डिजिटल चित्र में ज़्यादा बारीकी किससे मिलती है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दृश्य माध्यम के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?

फ़ोटोग्राफ़ी, वीडियो, एनिमेशन और डिजिटल माध्यम, जैसे डिजिटल चित्र, सुधारी हुई फ़ोटो, पोस्टर और वेबसाइट।

फ़ोटो और वीडियो में क्या अंतर है?

फ़ोटो एक ठहरा चित्र है। वीडियो बहुत से चित्रों (फ़्रेम) की कतार है जो एक के बाद एक दिखते हैं, इसलिए चीज़ें चलती हुई लगती हैं।

क्या शुरू करने के लिए महँगा कैमरा चाहिए?

नहीं। फ़ोन काफ़ी है। कैमरे से ज़्यादा ज़रूरी हैं अच्छी फ़्रेमिंग, अच्छी रोशनी और साफ़ विचार।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

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