संरचना: परमाणु कैसे सजे होते हैं
परमाणु इलेक्ट्रॉन साझा करके या देकर जुड़ते हैं। अणु में हर परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन युग्मों (आबंध और एकाकी युग्म) को एक-दूसरे से जितना दूर हो सके रखता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन युग्म एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं। इसी सरल विचार (VSEPR) से आकार मिलता है।
आम आकार
- रैखिक: CO2 (180 अंश)।
- मुड़ा हुआ: H2O (लगभग 104.5 अंश), क्योंकि दो एकाकी युग्म आबंधों को पास दबाते हैं।
- पिरामिडी: NH3 (लगभग 107 अंश), एक एकाकी युग्म।
- चतुष्फलकीय: CH4 (109.5 अंश), चार आबंध, कोई एकाकी युग्म नहीं।
बड़ी संरचनाएँ भी यही नियम मानती हैं: हीरा कार्बन परमाणुओं का एक विशाल जाल है, नमक का क्रिस्टल आयनों की दोहराती जाली है।
गुण: आकार और आवेश क्या तय करते हैं
कुछ परमाणु साझा इलेक्ट्रॉनों को ज़्यादा ज़ोर से खींचते हैं; इस खिंचाव को विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं। अगर अणु के अंदर खिंचाव कटते नहीं, तो एक सिरा थोड़ा ऋणात्मक और दूसरा थोड़ा धनात्मक होता है। अणु ध्रुवीय है। अगर खिंचाव कट जाएँ, जैसे सीधे CO2 या चतुष्फलकीय CH4 में, तो अणु अध्रुवीय है।
इससे क्या बदलता है
- ध्रुवीय अणु एक-दूसरे को ज़्यादा खींचते हैं, इसलिए पानी 100 °C पर उबलता है और मीथेन लगभग −162 °C पर।
- "समान समान को घोलता है": नमक और चीनी पानी में घुलते हैं; तेल नहीं घुलता।
- विशाल जालक (हीरा, सिलिका) बहुत कठोर होते हैं और बहुत ऊँचे ताप पर पिघलते हैं; धातुएँ इसलिए चालक हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र घूमते हैं।
ऊर्जा: सक्रियण ऊर्जा, ऊष्मा और उत्प्रेरक
अभिक्रिया शुरू करने के लिए पुराने आबंध पहले ढीले करने पड़ते हैं। इसके लिए एक न्यूनतम धक्का चाहिए, जिसे सक्रियण ऊर्जा (Ea) कहते हैं। सोचो एक गेंद को लुढ़कने से पहले पहाड़ी चढ़नी है।
अभिक्रिया की ऊष्मा
अगर उत्पाद की ऊर्जा अभिकारक से कम है तो ऊष्मा निकलती है (ऊष्माक्षेपी, ΔH ऋणात्मक)। अगर ज़्यादा है तो ऊष्मा सोखी जाती है (ऊष्माशोषी, ΔH धनात्मक)। ΔH पर पहाड़ी की ऊँचाई का असर नहीं पड़ता।
उत्प्रेरक
उत्प्रेरक अभिक्रिया को आसान रास्ता देता है, जिसमें पहाड़ी नीची होती है। अभिक्रिया तेज़ हो जाती है, पर शुरू और अंत की ऊर्जा, यानी ΔH, नहीं बदलती। उत्प्रेरक खर्च नहीं होता।
साम्य: जब अभिक्रिया रुकी-सी लगे
कई अभिक्रियाएँ उत्क्रमणीय होती हैं: A ⇄ B। शुरू में केवल आगे की अभिक्रिया चलती है। जैसे B बढ़ता है, पीछे की अभिक्रिया तेज़ होती है। साम्य पर दोनों दरें बराबर हो जाती हैं, इसलिए A और B की मात्रा स्थिर रहती है। कुछ रुका नहीं; दोनों अभिक्रियाएँ चलती रहती हैं (यह गतिक साम्य है)।
साम्य स्थिरांक
A ⇄ B के लिए K = [B] / [A]। बड़ा K यानी ज़्यादातर उत्पाद; छोटा K यानी ज़्यादातर अभिकारक। K केवल ताप बदलने से बदलता है।
ले शातेलिए का विचार
साम्य पर तंत्र को छेड़ो (A और डालो, दाब या ताप बदलो) तो तंत्र उस छेड़छाड़ को घटाने की ओर खिसकता है। उत्प्रेरक साम्य को नहीं खिसकाता; बस जल्दी पहुँचाता है।
करके देखो: कंघी से ध्रुवीयता देखो
सूखे बालों पर प्लास्टिक की कंघी रगड़ो। नल खोलकर पानी की पतली धार गिराओ। कंघी धार के पास लाओ: पानी कंघी की ओर मुड़ता है, क्योंकि जल के अणु ध्रुवीय हैं। अब यही खाने के तेल की पतली धार से करो: वह लगभग नहीं हिलती। 3D में बारी-बारी से जल और कार्बन डाइऑक्साइड चुनो और नीचे लिखा पढ़ो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आबंध कोण: CO2 180, NH3 लगभग 107, H2O लगभग 104.5, CH4 109.5 (अंश)
- ऊष्माक्षेपी: उत्पाद नीचे, dH < 0
- ऊष्माशोषी: उत्पाद ऊपर, dH > 0
- A <-> B के लिए: K = [B] / [A]
- साम्य पर: आगे की दर = पीछे की दर
हल किए गए उदाहरण
1. कार्बन डाइऑक्साइड अध्रुवीय क्यों है, जबकि हर C=O आबंध ध्रुवीय है?
CO2 सीधा है। दोनों आबंधों के खिंचाव बराबर और उलटी दिशा में हैं, इसलिए कट जाते हैं। अणु में कोई धनात्मक या ऋणात्मक सिरा नहीं बचता।
2. A <-> B के साम्य पर [A] = 0.2 mol/L और [B] = 0.6 mol/L है। K निकालो।
K = [B] / [A] = 0.6 / 0.2 = 3। उत्पाद का पलड़ा भारी है।
3. उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा 80 kJ से घटाकर 50 kJ कर देता है। अभिकारक उत्पाद से 20 kJ ऊपर हैं। dH और नई आगे की बाधा क्या है?
dH = उत्पाद - अभिकारक = -20 kJ (ऊष्माक्षेपी), उत्प्रेरक इसे नहीं बदलता। नई बाधा 50 kJ है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि उत्प्रेरक साम्य पर उत्पाद की मात्रा बदलता है। वह केवल साम्य तक पहुँचने की रफ़्तार बदलता है।
- यह कहना कि साम्य पर अभिक्रिया रुक जाती है। आगे और पीछे की अभिक्रियाएँ बराबर दर से चलती रहती हैं।
- यह सोचना कि ध्रुवीय आबंध हमेशा ध्रुवीय अणु बनाते हैं। आकार खिंचाव काट सकता है (CO2)।
- सक्रियण ऊर्जा और dH को मिलाना। एक पहाड़ी की ऊँचाई है, दूसरा शुरू और अंत का अंतर।