सूक्ष्मजीवों के रूप और प्रकार (Microbial forms and types)
जीवाणु छोटी एककोशिकीय रचनाएँ हैं (लगभग 1 से 5 माइक्रोमीटर) जिनमें सच्चा केंद्रक नहीं होता। आकार: कोकाई (गोल), बेसिलाई (छड़), स्पाइरिला (सर्पिल)। भोजन में उदाहरण: लैक्टोबैसिलस (दही), एसिटोबैक्टर (सिरका), साल्मोनेला (विषाक्तता)।
ख़मीर एककोशिकीय कवक हैं, गोल या अंडाकार, 5 से 10 माइक्रोमीटर। ये मुकुलन (budding) से बढ़ते हैं। सैकरोमाइसीज़ ब्रेड और शराब में काम आता है।
फफूँदी लंबे धागों वाले कवक हैं, जिन्हें कवकतंतु (hyphae) कहते हैं; कवकतंतुओं की चटाई कवकजाल (mycelium) है। ये बीजाणुओं (spores) से फैलती हैं। उदाहरण: राइज़ोपस (ब्रेड की फफूँदी), ऐस्पर्जिलस (सोया सॉस का कोजी, पर कुछ फफूँदी विष बनाती हैं), पेनिसिलियम (पनीर की परत)।
सूक्ष्मजीवों का पोषण और शरीर-क्रिया (Nutrition and physiology)
सूक्ष्मजीव भोजन निगल नहीं सकते। वे बाहर एंज़ाइम छोड़ते हैं, फिर कोशिका-भित्ति और झिल्ली से छोटे अणु सोखते हैं। उन्हें चाहिए:
- कार्बन स्रोत: शर्करा, स्टार्च, वसा।
- नाइट्रोजन स्रोत: प्रोटीन, अमीनो अम्ल, अमोनियम।
- थोड़े खनिज और विटामिन।
- पानी (जल सक्रियता से नापते हैं; बहुत सूखा या नमकीन भोजन देर तक टिकता है)।
स्थितियाँ: तापमान (मीसोफ़ाइल को 20 से 45 °C पसंद है, ज़्यादातर खाद्य सूक्ष्मजीव), pH (जीवाणु को उदासीन के पास पसंद, ख़मीर और फफूँदी अम्ल सह लेते हैं), और ऑक्सीजन: वायुजीवी को चाहिए, अवायुजीवी उसे इस्तेमाल नहीं कर सकते, और विकल्पी जीव (जैसे ख़मीर) हवा के साथ या बिना, दोनों में बढ़ते हैं।
सूक्ष्मजीवों की वृद्धि और आनुवंशिकी (Growth and genetics)
वृद्धि का मतलब कोशिकाएँ बड़ी होना नहीं, कोशिकाएँ ज़्यादा होना है। जीवाणु द्विविभाजन (binary fission) से बँटते हैं: 1 → 2 → 4 → 8। संख्या दुगुनी होने का समय पीढ़ी-काल (generation time) है। n पीढ़ियों के बाद संख्या = शुरू की संख्या × 2n।
वृद्धि वक्र के चार चरण हैं: विलंब (lag) (तैयारी), लॉग (तेज़ दुगुनी), स्थिर (भोजन कम, संख्या स्थिर) और मृत्यु (कोशिकाएँ मरती हैं)।
आनुवंशिकी। सूक्ष्मजीव का DNA (जीन) उसके एंज़ाइम और गुण तय करता है। DNA की प्रतिलिपि बनते समय कभी-कभी छोटी गलतियाँ होती हैं, जिन्हें उत्परिवर्तन (mutation) कहते हैं। जीवाणु संयुग्मन, रूपांतरण या पारगमन से जीन आपस में बदल भी सकते हैं। खाद्य वैज्ञानिक उत्परिवर्तन और चयन से बेहतर सूक्ष्मजीव पाते हैं (जैसे ऐसा ख़मीर जो ब्रेड में ज़्यादा गैस बनाए)।
सूक्ष्मजीवी एंज़ाइम और उनके प्रकार (Enzymes and types)
एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो अभिक्रियाओं को तेज़ करते हैं। हर एंज़ाइम एक ही तरह के अणु (अपने क्रियाधार, substrate) पर फिट होता है, जैसे ताले में चाबी। सूक्ष्मजीव बहुत एंज़ाइम बनाते हैं और उद्योग उनका उपयोग करता है।
- एमाइलेज़: स्टार्च → शर्कराएँ (ब्रेड, शराब बनाना, सिरप)।
- प्रोटिएज़: प्रोटीन → अमीनो अम्ल और पेप्टाइड (पनीर, सोया सॉस, माँस मुलायम करना)।
- लाइपेज़: वसा → वसीय अम्ल (पनीर का स्वाद)।
- पेक्टिनेज़: पेक्टिन तोड़ता है, इसलिए रस साफ़ होता है।
- लैक्टेज़: दूध की शर्करा (लैक्टोज़) → ग्लूकोज़ + गैलेक्टोज़ (लैक्टोज़-रहित दूध)।
- इनवर्टेज़: सुक्रोज़ → ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़।
एंज़ाइम उचित तापमान और pH पर सबसे अच्छा काम करते हैं और बहुत गरम करने पर रुक जाते हैं (विकृत होना)।
सूक्ष्मजीवी उपापचय (Microbial metabolism)
उपापचय कोशिका में होने वाले सारे रासायनिक बदलाव हैं। अपचय भोजन तोड़कर ऊर्जा (ATP) छोड़ता है; उपचय उस ऊर्जा से नए कोशिका-भाग बनाता है।
- वायवीय श्वसन (हवा के साथ): ग्लूकोज़ + O₂ → CO₂ + H₂O + बहुत ऊर्जा।
- एल्कोहॉलिक किण्वन (ख़मीर, बिना हवा): ग्लूकोज़ → एथेनॉल + CO₂ + थोड़ी ऊर्जा। CO₂ से ब्रेड फूलती और बीयर में झाग आता है।
- लैक्टिक अम्ल किण्वन (लैक्टोबैसिलस): ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल + थोड़ी ऊर्जा। अम्ल दूध को दही बनाकर जमाता और सुरक्षित रखता है।
- एसिटिक अम्ल किण्वन: एथेनॉल + O₂ → एसिटिक अम्ल (सिरका)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n दुगुनी के बाद संख्या = शुरू × 2ⁿ, n = समय ÷ पीढ़ी-काल
- वायवीय: ग्लूकोज़ + O₂ → CO₂ + H₂O + ऊर्जा (बहुत)
- एल्कोहॉलिक: ग्लूकोज़ → एथेनॉल + CO₂ + ऊर्जा (थोड़ी)
- लैक्टिक: ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा (थोड़ी)
- मुख्य शब्द: कवकतंतु, कवकजाल, बीजाणु, मुकुलन, द्विविभाजन, पीढ़ी-काल, उत्परिवर्तन, एंज़ाइम, क्रियाधार
हल किए गए उदाहरण
1. जीवाणु हर 30 मिनट में दुगुने होते हैं। 1 कोशिका से शुरू करें तो 3 घंटे बाद कितने होंगे?
3 घंटे = 6 पीढ़ियाँ। 2⁶ = 64 कोशिकाएँ।
2. ख़मीर के कल्चर में 500 कोशिकाएँ हैं और वह हर 1.5 घंटे में दुगुना होता है। 6 घंटे बाद कितनी कोशिकाएँ होंगी?
6 ÷ 1.5 = 4 बार दुगुना। 500 × 2⁴ = 500 × 16 = 8,000 कोशिकाएँ।
3. लैक्टोज़-रहित दूध बनाने के लिए कौन-सा एंज़ाइम काम आता है और क्या होता है?
लैक्टेज़ (ख़मीर या कवक से) लैक्टोज़ को ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ में तोड़ता है, इसलिए जिन्हें लैक्टोज़ नहीं पचता वे भी यह दूध पी सकते हैं।
4. आटा फूलता है, पर बहुत हवा वाले ख़मीर-पानी के घोल से शराब की गंध कम क्यों आती है?
खूब हवा हो तो ख़मीर श्वसन करता है: CO₂ और पानी बनाता है और ज़्यादा कोशिकाएँ बनाता है। हवा बिना वह किण्वन करके अल्कोहल बनाता है। आटे के भीतर हवा कम है, इसलिए वहाँ किण्वन होता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि वृद्धि का मतलब हर कोशिका का बड़ा होना है। सूक्ष्मजीवों में इसका मतलब कोशिकाएँ ज़्यादा होना है।
- दोनों किण्वन मिला देना: ख़मीर अल्कोहल + CO₂ बनाता है; लैक्टोबैसिलस लैक्टिक अम्ल।
- यह भूल जाना कि हर पीढ़ी में संख्या दुगुनी होती है, हर बार बराबर जुड़ती नहीं।
- सारी फफूँदी को हानिकारक कहना। कुछ पनीर और सोया सॉस बनाती हैं; कुछ विष बनाती हैं।