सूमो क्या है?
सूमो जापान का बहुत पुराना खेल है, जो आभार और प्रार्थना के अनुष्ठानों से निकला। मुक़ाबला छोटा होता है, अक्सर कुछ ही सेकंड का। पहलवान मोटा पट्टा माव्हाशी बाँधते हैं। मुक़ाबला दोह्यो में होता है, जो मिट्टी और रेत का ऊँचा रिंग है, जिसके किनारे पुआल की गोल मेंड़ है। इसकी चौड़ाई करीब 4.55 मी है। दो रेखाएँ (शिकिरी-सेन) बताती हैं कि पहलवान कहाँ से शुरू करेंगे।
जीत कैसे मिलती है: प्रतिद्वंद्वी को रिंग से बाहर धकेलो या फेंको, या उसके पैरों के तलवों के सिवा शरीर का कोई भी अंग ज़मीन से छुआ दो। स्कूल के सूमो में नरम मैट होता है और निक्कर या अभ्यास की पट्टी पहनते हैं।
बुनियादी चालें (शिको, सुरिआशी)
शिको (टाँग उठाकर पटकना)
- पैर चौड़े और घुटने मुड़े रखकर खड़े हो, हाथ घुटनों पर।
- वज़न एक टाँग पर डालो।
- दूसरी टाँग बगल में जितनी ऊँची हो सके उठाओ और संतुलन रखो।
- उसे ज़ोर से पटककर नीचे लाओ।
- दूसरी ओर दोहराओ।
शिको से संतुलन, टाँगों की ताक़त और कूल्हों का लचीलापन बढ़ता है।
सुरिआशी (सरकता क़दम)
कूल्हे नीचे और घुटने मुड़े रखो। पैरों के तलवे ज़मीन के पास रखकर उन्हें सरकाओ। पैर कभी एक-दूसरे को पार नहीं करते। सुरिआशी से संतुलन बिगड़े बिना तेज़ चल सकते हैं।
दूसरा अभ्यास
- माताव्हारी: टाँगें चौड़ी करके बैठना और आगे झुककर खिंचाव करना।
- तेप्पो: लकड़ी के खंभे को खुले हाथों से धकेलना।
धक्का और पकड़ (Pushing and grappling)
पहली टक्कर (ताचिआई)
दोनों पहलवान झुकी हालत से साथ उठते हैं और कंधे-छाती से टकराते हैं। मज़बूत और नीची टक्कर आधा मुक़ाबला तय कर देती है।
धक्का (ओशी)
- ओशिदाशी: हाथ छाती पर रखकर प्रतिद्वंद्वी को बाहर धकेलना। टाँगों का ज़ोर लगाओ और कोहनियाँ अंदर रखो।
- त्सुकिदाशी: खुले हाथों के तेज़ धक्कों से बाहर निकालना।
पकड़ (योरी)
- योरिकिरी: पट्टा पकड़कर पास रहकर प्रतिद्वंद्वी को चलाकर बाहर करना।
- उवाते-नागे: पट्टा पकड़कर प्रतिद्वंद्वी की बाँह के ऊपर से फेंक।
सुरक्षा नियम: मुक्का नहीं, बंद मुट्ठी से चेहरे पर वार नहीं, बाल नहीं खींचना, गला नहीं दबाना और आँखों या गले पर हमला नहीं।
सम्मान और रस्में
सूमो शिष्टाचार से भरा है। पहलवान झुकते हैं, ताली बजाते हैं और रिंग को "साफ़" करने के लिए चुटकी भर नमक डालते हैं। मुक़ाबला झुककर ख़त्म होता है। झुकना खेल का हिस्सा है, सजावट नहीं।
करके देखो
3D में धक्का वाले चरण में स्लाइडर धीरे-धीरे चलाओ और पीछे वाले पहलवान के कूल्हे देखो। फिर घर पर खाली फ़र्श पर किसी बड़े के पास शिको करो: पैर चौड़े, हाथ घुटनों पर, एक टाँग बगल में आराम की ऊँचाई तक उठाओ और ज़ोर से रखो। दोनों ओर 5-5 बार। संतुलन टिक रहा है? दीवार पर एक बिंदु पर नज़र टिकाकर देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- दोह्यो = गोल रिंग, चौड़ाई करीब 4.55 मी (त्रिज्या करीब 2.275 मी)
- जीत = प्रतिद्वंद्वी रिंग से बाहर या तलवों के सिवा कुछ ज़मीन से छुआ
- शिको = टाँग उठाना और पटकना; सुरिआशी = नीचा सरकता क़दम
- ताचिआई = पहली टक्कर; ओशी = धक्का; योरी = पट्टा-पकड़; नागे = फेंक
- माव्हाशी = पट्टा; दोह्यो = रिंग; शिकिरी-सेन = शुरुआती रेखा
हल किए गए उदाहरण
1. दोह्यो की चौड़ाई करीब 4.55 मी है। इसकी त्रिज्या कितनी है?
त्रिज्या = व्यास / 2 = 4.55 / 2 = 2.275 मी।
2. एक पहलवान की एड़ी पुआल की मेंड़ के बाहर ज़मीन छू लेती है। क्या होगा?
पहलवान रिंग से बाहर हो गया, इसलिए प्रतिद्वंद्वी जीत गया।
3. एक पहलवान हर टाँग से 10 शिको करता है। कुल कितने?
10 + 10 = 20 शिको।
4. धक्का देने वाले को कूल्हे नीचे क्यों रखने चाहिए?
नीचा शरीर ज़्यादा स्थिर होता है और टाँगें पूरे ज़ोर से धकेल सकती हैं। ऊँचा खड़ा पहलवान आसानी से संतुलन खो देता है।
आम गलतियाँ
- सीधे खड़े होकर सिर्फ़ हाथों से धकेलना। टाँगों से धकेलो और कूल्हे नीचे रखो।
- सरकते समय पैर ऊँचे उठाना। सुरिआशी में पैर ज़मीन के पास रहते हैं।
- चलते समय पैर पार करना। इससे संतुलन बिगड़ता है।
- आँखों, गले या बालों पर हमला करना। ये चालें मना हैं।