बुज़ुर्गों की जाँच (आकलन)
जाँच का मतलब है मदद से पहले जानना कि व्यक्ति को क्या चाहिए। सिर्फ़ बीमारी नहीं, पूरे इंसान को देखें।
- शरीर: नब्ज़, रक्तचाप, वज़न, दर्द, त्वचा, दाँत, आँख और कान।
- मन: याददाश्त, मूड और सोचने की साफ़ी।
- रोज़ के काम: क्या खाना, नहाना, कपड़े पहनना, शौच और चलना अकेले कर पाते हैं?
- घर और लोग: सीढ़ियाँ, रोशनी, परिवार, पैसा, कौन मदद करता है।
पूछें, देखें और सुनें। जो मिले लिख लें। जाँच दोबारा करें क्योंकि बुज़ुर्गों में बदलाव जल्दी आते हैं।
बातचीत (संवाद)
कई बुज़ुर्ग कम सुनते हैं, कम देखते हैं या धीरे सोचते हैं। अच्छी बातचीत से देखभाल आसान होती है।
- सामने, अच्छी रोशनी में खड़े हों और मुस्कुराएँ। अपना नाम बताएँ।
- धीरे और साफ़ बोलें। चिल्लाएँ नहीं। छोटे वाक्य रखें।
- पहले श्रवण-यंत्र और चश्मा जाँचें।
- जवाब का इंतज़ार करें। जल्दबाज़ी न करें, बच्चे की तरह बात न करें।
- नाम या सम्मान से बुलाएँ (अंकल, श्रीमती राव)।
जो बोल नहीं सकते, उनके लिए इशारे, चित्र, लिखने का बोर्ड और स्पर्श इस्तेमाल करें।
भोजन और पोषण
उम्र के साथ स्वाद, गंध और प्यास कम होती है और दाँत गिरते हैं। बुज़ुर्ग बहुत कम खा सकते हैं।
- नरम, स्वादिष्ट खाना छोटे-छोटे बार में दें, प्रोटीन, फल और सब्ज़ी के साथ।
- प्यास न लगे तब भी बार-बार पानी दें।
- सीधा बिठाकर खिलाएँ। गले में अटकने से बचाने के लिए खाने के बाद 30 मिनट बैठाए रखें।
- नकली दाँत जाँचें। हर महीने वज़न लें। वज़न घटना चेतावनी है।
शौच (उत्सर्जन)
कई बुज़ुर्गों को कब्ज़ या पेशाब रिसने की समस्या होती है। इससे आत्म-सम्मान को ठेस लगती है, इसलिए एकांत रखें और दयालु रहें।
- शौच का समय तय करें, जैसे खाने के बाद।
- रेशा (सब्ज़ी, फल, साबुत अनाज), पानी और चलना दें।
- शौचालय तक छोटा, रोशन और साफ़ रास्ता रखें, ऊँची सीट और हैंडरेल के साथ।
- पैड या कमोड ज़रूरत पर ही। त्वचा साफ़ और सूखी रखें।
सफ़ाई
साफ़ त्वचा, मुँह और कपड़े संक्रमण और बिस्तर के घाव रोकते हैं और मन भी अच्छा करते हैं।
- सूखी त्वचा फटती है, इसलिए गुनगुना (गर्म नहीं) पानी, हल्का साबुन और मॉइश्चराइज़र।
- दिन में दो बार दाँत या नकली दाँत साफ़ करें। नाखून काटें। पैर देखें।
- जो खुद धो सकें, धोने दें। बाकी में मदद करें।
- त्वचा की सिलवटें अच्छे से सुखाएँ। बिस्तर पर पड़े व्यक्ति की करवट हर 2 घंटे में बदलें।
चलना-फिरना
उम्र के साथ मांसपेशियाँ और हड्डियाँ कमज़ोर होती हैं और गिरने से कूल्हा टूट सकता है। चलना-फिरना मांसपेशियों, जोड़ों और दिल को मज़बूत रखता है।
- ढीली चटाई और तार हटाएँ। रोशनी और हैंडरेल लगाएँ। फिसलन-रहित चप्पल दें।
- ज़रूरत हो तो सही ऊँचाई की छड़ी या वॉकर दें।
- रोज़ थोड़ा चलाएँ, डगमगाएँ तो साथ में कोई रहे।
- धीरे उठाएँ, ताकि चक्कर न आए।
नींद
बुज़ुर्ग हल्की नींद सोते हैं और ज़्यादा बार जागते हैं। नींद खराब हो तो दिन थकाऊ होता है, गिरने और उदासी का खतरा बढ़ता है।
- सोने और उठने का समय तय रखें।
- शांत, अँधेरा, ठंडा कमरा। शाम को कम चाय-कॉफ़ी।
- दिन में धूप में बैठें या टहलें। दोपहर में लंबी झपकी न लें।
- दर्द या रात के शौच का इलाज करें। डॉक्टर के बिना नींद की गोली न दें।
गतिविधि और जीवन का उद्देश्य
जो खुद को काम का समझता है, वह तन-मन से ज़्यादा स्वस्थ रहता है। अकेलापन सचमुच खतरा है।
- शौक बनाए रखने में मदद करें: पूजा, बागवानी, संगीत, कहानियाँ, ताश, शिल्प।
- परिवार में छोटे काम दें। दोस्तों और पड़ोसियों से मिलवाएँ।
- समूह गतिविधियाँ और सामुदायिक क्लब इस्तेमाल करें। उनकी इच्छा और धर्म का सम्मान करें।
खुद करके देखिए
घर पर: आँखें आधी बंद करके कमरे में चलिए। कहाँ ठोकर लगेगी? तीन चीज़ें हटाने या ठीक करने के लिए खोजिए। 3D में हर ब्लॉक दबाइए और दोस्त को बताइए कि नर्स क्या करती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: आकलन = शरीर, मन, घर और रोज़ के कामों के तथ्य जुटाना
- मुख्य शब्द: ADL (दैनिक जीवन की गतिविधियाँ) = खाना, नहाना, कपड़े, शौच, चलना
- गिरने से बचाव = साफ़ फ़र्श + रोशनी + हैंडरेल + फिसलन-रहित चप्पल + सहारा
- बिस्तर के घाव से बचाव = हर 2 घंटे करवट + साफ़ सूखी त्वचा
- सम्मान का नियम = जो खुद कर सकें करने दें; ज़रूरत पर ही मदद
हल किए गए उदाहरण
1. श्रीमती राव (78) बस कुछ कौर खाती हैं और एक महीने में 3 किलो वज़न घटा। नर्स क्या करे?
दाँत या नकली दाँत, मुँह के छाले, स्वाद और मूड जाँचे। छोटे, नरम, स्वादिष्ट खाने बार-बार दे, प्रोटीन और पानी के साथ। हर महीने वज़न ले और डॉक्टर को वज़न घटने के बारे में बताए।
2. श्री खान (82) रात को उठते हैं और शौचालय जाते समय लगभग गिर जाते हैं। तीन बदलाव बताइए।
1) रास्ते में रात की बत्ती लगाएँ। 2) चटाई और तार हटाएँ और हैंडरेल लगाएँ। 3) सोने से पहले शौच कराएँ और पास में कमोड रखें। चप्पल भी फिसलन-रहित हों।
3. अकेली रहने वाली एक महिला कहती है कि वह बेकार महसूस करती है और ठीक से सो नहीं पाती। गतिविधि और नींद में एक-एक बदलाव सोचिए।
गतिविधि: सुबह की पूजा या संगीत समूह में जुड़ना, या बच्चों को अपना हुनर सिखाना। नींद: सोने का समय तय करना, दिन में धूप में टहलना, शाम 4 बजे के बाद चाय नहीं। दो हफ़्ते बाद दोबारा जाँचें।
आम गलतियाँ
- बुज़ुर्ग के लिए सब कुछ खुद कर देना। इससे उनकी आज़ादी और ताकत छिन जाती है।
- चिल्लाना या बच्चे की तरह बात करना। धीरे, साफ़ और सम्मान से बोलना बेहतर है।
- पानी तभी देना जब माँगें। बुज़ुर्गों को प्यास कम लगती है, इसलिए बार-बार दें।
- खराब नींद या उदासी को "बस बुढ़ापा" कह देना। ये जाँचने और इलाज की बातें हैं।