संवाद (communication)
संवाद का मतलब है जानकारी ऐसे बाँटना कि दोनों समझें। अच्छी नर्स:
- मरीज़ से आसान शब्दों में बात करती है, कठिन चिकित्सा शब्दों से बचती है;
- खुले सवाल पूछती है ("नींद कैसी आई?") और फिर इंतज़ार करती है;
- आँख और कान से सुनती है; हाव-भाव, आवाज़ और चुप्पी भी बोलते हैं;
- मरीज़ की भाषा बोलती है, ज़रूरत हो तो दुभाषिया लेती है;
- जाँचने के लिए दोहराती है ("तो यह गोली दिन में दो बार लेनी है, ठीक?");
- साफ़ लिखती है और अगली पाली को सारी ज़रूरी बातें बताती है।
संक्रमण से बचाव
कीटाणु ज़्यादातर हाथों से एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचते हैं। सबसे ज़रूरी कदम है हाथों की सफ़ाई (hand hygiene): साबुन-पानी से लगभग 20 सेकंड धोओ (हथेली, पीछे, उँगलियों के बीच, अँगूठे, पोर, कलाई), या अल्कोहल जेल सूखने तक मलो। मरीज़ को छूने से पहले, साफ़ काम से पहले, शरीर के द्रव छूने के बाद, मरीज़ और उसके आसपास छूने के बाद ऐसा करो।
अन्य कदम: ज़रूरत पर दस्ताने, मास्क या एप्रन; उपकरण साफ़ रखना और एक बार वाले को दोबारा न लेना; सुइयाँ छेद-रोधी डिब्बे में डालना; आसपास साफ़ रखना; बीमार हों तो घर पर रहना। इन्हें मानक सावधानियाँ (standard precautions) कहते हैं: हम हर मरीज़ के खून और द्रव को संभावित संक्रामक मानते हैं।
सुरक्षा प्रबंधन
सुरक्षा का मतलब है नुकसान रोकना। आम जाँचें:
- मरीज़ की पहचान: देखभाल से पहले नाम-पट्टी देखो और नाम पूछो।
- गिरने से बचाव: ज़रूरत हो तो रेलिंग ऊपर, फ़र्श सूखा, बिस्तर नीचा, घंटी पहुँच में, अच्छी रोशनी।
- दवा की सुरक्षा: पाँच सही (व्यक्ति, दवा, मात्रा, समय, तरीका)।
- सही तरह उठाना-हिलाना: घुटने मोड़ो और मदद या साधन लो, ताकि मरीज़ और नर्स की पीठ सुरक्षित रहे।
- गलतियाँ और बाल-बाल बचे मामले बताओ और उनसे सीखो, छिपाओ मत।
शारीरिक जाँच (physical assessment)
शारीरिक जाँच का मतलब है इंद्रियों और सरल औज़ारों से शरीर जाँचना: देखो, सुनो, छुओ, नापो। आराम की हालत में स्वस्थ बड़े के चार जीवन-संकेत (vital signs):
- तापमान: लगभग 36.1 से 37.2 °C।
- नब्ज़: लगभग 60 से 100 धड़कन प्रति मिनट।
- साँस की दर: लगभग 12 से 20 साँस प्रति मिनट।
- रक्तचाप: लगभग 120/80 mmHg।
त्वचा का रंग, दर्द, चौकसी और सूजन भी देखो। संख्याएँ लिखो: एक रीडिंग से ज़्यादा ज़रूरी समय के साथ रुझान है।
नर्सिंग प्रक्रिया
नर्सिंग प्रक्रिया देखभाल की योजना के लिए पाँच कदमों का चक्र है:
- जाँच (assess): जानकारी इकट्ठी करो (बात करो, देखो, नापो, रिकॉर्ड पढ़ो)।
- समस्या पहचान (diagnose): देखभाल की समस्या का नाम दो, जैसे "दर्द" या "गिरने का ख़तरा"।
- योजना (plan): साफ़ लक्ष्य रखो ("आज रात तक दर्द 3 से कम") और काम चुनो।
- करना (implement): काम करो और लिखो।
- मूल्यांकन (evaluate): क्या लक्ष्य पूरा हुआ? नहीं तो फिर जाँचो और योजना बदलो।
यह चक्र है, सीधी रेखा नहीं: मूल्यांकन के बाद नर्स फिर जाँच पर लौटती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. आराम में मरीज़ की नब्ज़ 110 प्रति मिनट है। क्या यह सामान्य है?
नहीं। बड़े की आराम की सामान्य नब्ज़ 60 से 100 है, इसलिए 110 तेज़ है। नर्स फिर नापती है, मरीज़ को देखती है और बताती है।
2. "दर्द अब 10 में से 2 है, लक्ष्य पूरा हुआ" यह नर्सिंग प्रक्रिया का कौन-सा कदम है?
मूल्यांकन, क्योंकि वह नतीजे को लक्ष्य से मिलाती है।
3. नर्स 5 सेकंड ही हाथ धोती है। उसे क्या करना चाहिए?
लगभग 20 सेकंड धोना चाहिए और हाथ के हर हिस्से को मलना चाहिए, क्योंकि कम धोने से बहुत कीटाणु रह जाते हैं।
आम गलतियाँ
- जल्दी-जल्दी हाथ धोना। साबुन से 20 सेकंड रखो।
- दो मरीज़ों पर वही दस्ताने पहनना। मरीज़ों के बीच दस्ताने बदलो और हाथ साफ़ करो।
- नर्सिंग प्रक्रिया को सीधी रेखा समझना। यह वापस जाँच पर लौटती है।
- मरीज़ से कठिन चिकित्सा शब्द बोलना। आसान शब्द बोलो और समझ जाँचो।